नवीन समाचार, नैनीताल, 28 मई 2026 (Ban on Eid Namaj at DSA Ground Lifted)। उत्तराखंड (Uttarakhand) उच्च न्यायालय (High Court) ने बकरीद (Bakrid) के अवसर पर नैनीताल (Nainital) के डीएसए अथवा फ्लैट्स मैदान में सामूहिक नमाज की अनुमति से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए अंजुमन ए इस्लामिया (Anjuman-e-Islamia) की याचिका पर सुनवाई के बाद मैदान में नमाज अदा करने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित (Justice Pankaj Purohit) की एकलपीठ ने आदेश देते हुए पुलिस और जिला प्रशासन को नमाज के दौरान शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सुबह 9 से 10 बजे के बीच नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई जाए और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाएं।
यह आदेश ऐसे समय आया है जब बीते दो दिनों से डीएसए मैदान में नमाज की अनुमति को लेकर प्रशासन, पुलिस, डीएसए प्रबंधन और मुस्लिम समुदाय के बीच असमंजस एवं विवाद की स्थिति बनी हुई थी।
प्रशासन ने सार्वजनिक स्थलों पर नमाज से किया था इंकार
मामले की शुरुआत तब हुई जब जिला प्रशासन ने निर्देश जारी करते हुए कहा था कि ईद-उल-अजहा (Eid-ul-Adha) के अवसर पर डीएसए खेल मैदान में सार्वजनिक रूप से नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने मुस्लिम समुदाय से मस्जिदों, घरों और निजी प्रतिष्ठानों में ही नमाज पढ़ने की अपील की थी।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल (Lalit Mohan Rayal) ने सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों की अनुमति न देने की बात कही थी। प्रशासन का तर्क था कि मैदान में खेल गतिविधियां संचालित हैं तथा सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक आयोजनों से कानून-व्यवस्था और प्रबंधन संबंधी चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
अनुमति और निरस्तीकरण से बना भ्रम

ईद की तैयारियों को लेकर मल्लीताल कोतवाली में आयोजित शांति समिति की बैठक में अंजुमन ए इस्लामिया के पदाधिकारियों ने हर वर्ष की भांति डीएसए मैदान में सामूहिक नमाज की अनुमति देने की मांग रखी थी।
इसके बाद डीएसए महासचिव मनोज जोशी (Manoj Joshi) की ओर से प्रारंभ में मैदान उपलब्ध कराने संबंधी पत्र जारी किया गया। लेकिन बाद में दूसरा आदेश जारी कर अनुमति निरस्त कर दी गई और अंतिम निर्णय जिला प्रशासन पर छोड़ दिया गया।
इस घटनाक्रम के बाद पूरे दिन शहर में असमंजस की स्थिति बनी रही। मुस्लिम समाज की ओर से इसे लंबे समय से चली आ रही परंपरा से जोड़कर देखा गया, जबकि प्रशासन सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों को सीमित रखने के अपने निर्णय पर कायम रहा।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
प्रशासनिक निर्णय के खिलाफ अंजुमन ए इस्लामिया ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। याचिका में कहा गया कि दशकों से डीएसए मैदान में ईद की नमाज अदा की जाती रही है और इससे पूर्व कभी कानून-व्यवस्था अथवा यातायात की गंभीर समस्या उत्पन्न नहीं हुई। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि एकाएक अनुमति निरस्त किए जाने से हजारों नमाजियों के सामने व्यवस्था संबंधी कठिनाई खड़ी हो गई है।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने डीएसए/फ्लैट्स मैदान में नमाज की अनुमति प्रदान कर दी। साथ ही प्रशासन और पुलिस को सुरक्षा एवं शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
धार्मिक परंपरा और प्रशासनिक नियंत्रण के बीच संतुलन का मामला
यह पूरा घटनाक्रम नैनीताल में धार्मिक परंपराओं, सार्वजनिक स्थलों के उपयोग और प्रशासनिक नियंत्रण के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को भी सामने लाता है। स्थानीय व्यापार मंडल और मुस्लिम समाज के कई प्रतिनिधियों ने पहले भी कहा था कि दशकों से मैदान में ईद की नमाज, नंदा देवी महोत्सव, दशहरा और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था, खेल गतिविधियों और सार्वजनिक उपयोग को प्राथमिकता देने की बात करता रहा है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद डीएसए मैदान में निर्धारित समय पर बकरीद की नमाज अदा किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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