नवीन समाचार, नैनीताल, 30 मई 2026 (Namaz Controversy at Flats Resurfaces)। नैनीताल (Nainital) के ऐतिहासिक फ्लैट्स मैदान (Flats Ground) में ईद-उल-जुहा की नमाज की अनुमति को लेकर उपजा विवाद नमाज होने के बाद भी शुक्रवार को भी एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रहा। एक ओर भाजपा कार्यकर्ता हरीश राणा ने नैनीताल जिमखाना एवं जिला क्रीड़ा संघ (NTG-DSA) और नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड (Uttarakhand) सरकार ने इस मामले में उच्च न्यायालय में दायर अपनी विशेष अपील वापस ले ली है, जिसके बाद अदालत ने उसे खारिज कर दिया।
भाजपा नेता ने जिमखाना और पालिका के फैसलों पर उठाए प्रश्न
नैनीताल में आयोजित पत्रकार वार्ता में पहले से ही नगर की अव्यवस्थाओं पर मुखर रहने वाले भाजपा कार्यकर्ता हरीश राणा ने कहा कि राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण और विवादित गतिविधियों को लेकर स्पष्ट नीति अपना चुके हैं। इसके बावजूद नैनीताल जिमखाना एवं जिला क्रीड़ा संघ द्वारा फ्लैट्स मैदान में नमाज की अनुमति दिये जाने से अनावश्यक विवाद उत्पन्न हुआ।
नैनीताल जिमखाना एवं जिला क्रीड़ा संघ के पदाधिकारियों के फैसलों से हुई सरकार की किरकिरी और सीएम की छवि हुई प्रभावित
राणा ने कहा कि राज्य सरकार और मुख्यमंत्री की ओर से सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण और विवादित गतिविधियों को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे इसके बावजूद नैनीताल जिमखाना संस्था ने फलैट्स मैदान में नमाज की अनुमति दे दी हालांकि बाद में यह अनुमति रद्द कर दी गई लेकिन मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया और वही अनुमति सरकार के खिलाफ एक बड़ा आधार बन गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि नैनीताल जिमखाना एवं जिला क्रीड़ा संघ के पदाधिकारियों के फैसलों के कारण सरकार को सार्वजनिक रूप से किरकिरी का सामना करना पड़ा। इससे सरकार को सार्वजनिक रूप से आलोचना का सामना करना पड़ा। राणा ने आरोप लगाया कि संबंधित पदाधिकारियों के निर्णयों से सरकार और मुख्यमंत्री की छवि प्रभावित हुई है।
फ्लैट्स मैदान और पवेलियन भवन की जांच की मांग
हरीश राणा ने कहा कि फ्लैट्स मैदान शहर की ऐतिहासिक सार्वजनिक संपत्ति है और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार का निर्णय लेने से पहले शासन और प्रशासन की स्पष्ट अनुमति ली जानी चाहिए थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन भवनों और परिसंपत्तियों के स्वामित्व तथा लीज संबंधी विवाद लंबित हैं, वहां सरकारी धन से कार्य कराए जा रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि फ्लैट्स मैदान और पवेलियन भवन से जुड़े मामलों की उच्चस्तरीय जांच करायी जाए। साथ ही जिमखाना संस्था और नगर पालिका परिषद के वित्तीय अभिलेख सार्वजनिक किये जाने चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सड़क चौड़ीकरण के बाद विकसित स्थानों पर पार्किंग संचालन से आर्थिक लाभ लेने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है, जबकि खिलाड़ियों और सार्वजनिक सुविधाओं की अनदेखी हो रही है।
सरकार ने हाईकोर्ट से वापस ली विशेष अपील
इधर इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम भी सामने आया है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील को सरकार के अनुरोध पर खारिज कर दिया।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई। मामला “उत्तराखंड राज्य एवं अन्य बनाम अंजुमन इस्लामिया नैनीताल एवं अन्य” से संबंधित था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित स्थायी अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि सरकार इस विशेष अपील को आगे नहीं बढ़ाना चाहती और उसे वापस ले रही है। इसके बाद न्यायालय ने अपील को “नॉट प्रेस्ड” मानते हुए खारिज कर दिया।
एकलपीठ का आदेश प्रभावी रहेगा
विशेष अपील वापस लिये जाने के बाद फ्लैट्स मैदान में नमाज की अनुमति संबंधी एकलपीठ का पूर्व आदेश प्रभावी बना रहेगा। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकरण से जुड़े सभी लंबित आवेदन स्वतः निस्तारित माने जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि ईद-उल-जुहा की नमाज को लेकर पहले अनुमति, फिर अनुमति निरस्तीकरण और उसके बाद न्यायालयी हस्तक्षेप के कारण यह मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना रहा। अब सरकार द्वारा विशेष अपील वापस लेने के बाद इस विवाद का कानूनी अध्याय फिलहाल समाप्त होता दिखाई दे रहा है, हालांकि इसके राजनीतिक प्रभावों को लेकर चर्चाएं जारी हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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