नवीन समाचार, उत्तरकाशी, 10 जुलाई 2026 (Nainitals Babital Pandey Missing Case)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के उत्तरकाशी (Uttarkashi) जनपद स्थित दयारा बुग्याल (Dayara Bugyal) से 29 मई को रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुई नैनीताल (Nainital) की 24 वर्षीय एमबीए (MBA) छात्रा बबीता पांडे (Babita Pandey) का 40 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिल सका है। पुलिस (Police) ने अब खोज का दायरा बढ़ाते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), ऋषिकेश (Rishikesh) सहित अन्य बड़े चिकित्सालयों में भी जांच करने का निर्णय लिया है।
दूसरी ओर इस घटना को लेकर सामाजिक माध्यमों (Social Media) पर टिहरी (Tehri) के प्रसिद्ध खैंट पर्वत (Khait Parvat) और ‘परियों के देश’ की लोककथाओं से जोड़कर अनेक तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं, हालांकि अब तक जांच एजेंसियों को ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला है जो इन चर्चाओं की पुष्टि करता हो।
29 मई की रात गोई बेस कैंप से रहस्यमय ढंग से लापता हुई थीं बबीता
प्राप्त जानकारी के अनुसार नैनीताल जनपद के चिल्किया (Chilkiya) गांव निवासी बबीता पांडे अपने दो मित्रों हरमनपाल सिंह (Harmanpal Singh) और हरमनप्रीत सिंह (Harmanpreet Singh) के साथ उत्तरकाशी भ्रमण पर गयी थीं। तीनों ने हर्षिल (Harsil), गंगोत्री (Gangotri) सहित अन्य पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया और 28 मई को रैथल (Raithal) गांव में रात्रि विश्राम किया। रैथल गांव के सीसीटीवी (CCTV) चित्रों में बबीता अपने दोनों साथियों के साथ अंतिम बार दिखाई दी थीं।
29 मई को तीनों ने रैथल से दयारा बुग्याल की ट्रेकिंग प्रारंभ की और रात्रि में गोई बेस कैंप (Gui Base Camp) पहुंचे। यहीं से मध्यरात्रि के आसपास बबीता रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गयीं। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
परिजनों ने जतायी अपहरण की आशंका, दर्ज हुआ अभियोग
प्रारंभिक खोजबीन में सफलता नहीं मिलने पर परिजनों ने बबीता के अपहरण की आशंका व्यक्त की। इसके आधार पर बबीता के साथ गये दोनों युवकों के विरुद्ध अपहरण का अभियोग भी दर्ज किया गया। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है, किंतु अब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है।
पुलिस ने जंगल, झील, गुफाओं और भालुओं के संभावित ठिकानों तक की छानबीन की
बबीता की तलाश के लिए उत्तराखंड पुलिस, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), विशेष अभियान दल (SOG), वन विभाग, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) तथा सेना ने संयुक्त खोज एवं बचाव अभियान चलाया।
लगातार दस दिनों से अधिक समय तक गोई बेस कैंप और आसपास के घने जंगलों की व्यापक तलाशी ली गयी। ड्रोन कैमरों से पूरे क्षेत्र की निगरानी की गयी तथा हेलीकॉप्टर से लगभग 35 मिनट तक हवाई खोज अभियान चलाया गया।
गोई झील (Gui Lake) में गोताखोरों ने खोज की। बाद में झील का पानी पंपों की सहायता से काफी हद तक निकालकर भी जांच की गयी। वन्यजीवों की गतिविधियों को देखते हुए भालुओं के संभावित ठिकानों और काली गुफाओं तक की तलाशी ली गयी। इसके अतिरिक्त अनेक स्थानों पर बबीता के चित्र वाले पर्चे भी वितरित किये गये, किंतु कोई सफलता नहीं मिली।
अब एम्स ऋषिकेश सहित बड़े चिकित्सालयों में भी होगी जांच
पुलिस की टीमें ऋषिकेश, देहरादून और हरिद्वार सहित मैदानी क्षेत्रों में भी खोज कर चुकी हैं, लेकिन कोई महत्वपूर्ण जानकारी नहीं मिली। अब पुलिस ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), ऋषिकेश, दून मेडिकल कॉलेज (Doon Medical College) तथा अन्य बड़े चिकित्सालयों में पिछले लगभग डेढ़ माह के दौरान आये अज्ञात रोगियों और अज्ञात शवों के अभिलेखों का मिलान करने का निर्णय लिया है, ताकि किसी संभावित सुराग तक पहुंचा जा सके।
ट्रेकिंग अनुमति को लेकर भी सामने आयी अनियमितता
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पर्यटन विभाग (Tourism Department) के आधिकारिक पोर्टल पर बबीता अथवा उनके साथियों के नाम का वैध डिजिटल ट्रेकिंग परमिट उपलब्ध नहीं था। बताया गया कि संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी ने कथित रूप से पुराने भौतिक परमिट पर नये नाम चिपकाकर उसका उपयोग किया था। जांच में क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन करने पर पुराने ट्रेकर्स का विवरण सामने आया। इस पहलू की भी जांच की जा रही है।
क्या है खैंट पर्वत और ‘परियों के देश’ की लोककथा?
बबीता के रहस्यमय ढंग से लापता होने के बाद सामाजिक माध्यमों पर टिहरी जनपद के प्रसिद्ध खैंट पर्वत को लेकर अनेक चर्चाएं चल रही हैं। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि खैंट पर्वत टिहरी गढ़वाल (Tehri Garhwal) में स्थित है, जबकि बबीता उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल क्षेत्र से लापता हुई थीं। दोनों स्थानों के बीच लगभग 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी है। इसलिए इन दोनों घटनाओं का कोई प्रत्यक्ष भौगोलिक संबंध नहीं है।
खैंट पर्वत समुद्र तल से लगभग 10,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। स्थानीय लोकमान्यताओं में इसे ‘परियों का देश’ अथवा ‘आंछरियों का देश’ कहा जाता है। यहां के लोगों का विश्वास है कि नौ आंछरियां इस क्षेत्र की रक्षा करती हैं।
लोककथा के अनुसार प्राचीन काल में आशा रावत नामक व्यक्ति की नौ अत्यंत सुंदर पुत्रियां थीं। एक दिन उन्होंने दूर पर्वत पर दिव्य प्रकाश देखा और उसे देखने वहां पहुंच गयीं। इसके बाद वे कभी वापस नहीं लौटीं। स्थानीय मान्यता है कि वे परियां बन गयीं और आज भी नौ अलग-अलग पर्वत शिखरों पर निवास कर क्षेत्र की रक्षा करती हैं।
गढ़वाल क्षेत्र में जीतू बगड़वाल की कथा भी अत्यंत प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि वह अपनी मधुर बांसुरी बजा रहा था। उसकी धुन से आकर्षित होकर परियां आयीं और उसे अपने साथ परिलोक ले गयीं। यह कथा भी स्थानीय लोकसाहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
खैंट पर्वत से जुड़ी हैं अनेक लोकमान्यताएं
स्थानीय लोगों के अनुसार खैंट पर्वत पर तेज शोर करना, ऊंची आवाज में गीत बजाना, चमकीले वस्त्र पहनना अथवा इत्र लगाकर जाना उचित नहीं माना जाता। ऐसी भी मान्यता है कि वहां प्राकृतिक रूप से उगने वाले फूल, लहसुन, अखरोट अथवा अन्य वस्तुएं वहां से बाहर नहीं लानी चाहिए। पर्वत पर स्थित खेटखाल मंदिर (Khetkhal Temple) में प्रतिवर्ष जून माह में मेला भी आयोजित होता है और आसपास के ग्रामीण आंछरियों की पूजा-अर्चना करते हैं। ये सभी स्थानीय लोकविश्वास और सांस्कृतिक परंपराएं हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक अथवा आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
अफवाहों से बचने की अपील
पुलिस ने अब तक की जांच में खैंट पर्वत, परियों की लोककथाओं अथवा किसी अलौकिक घटना से संबंधित कोई तथ्य नहीं पाया है। जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही खोज अभियान आगे बढ़ा रही हैं। फिलहाल बबीता पांडे की तलाश जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि चिकित्सालयों, अन्य जनपदों तथा उपलब्ध अभिलेखों की जांच से कोई महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
