प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमनाम व आदर्श ‘नरेंद्र’ की उत्तराखंड से स्वामी और राजर्षि विवेकानंद बनने की कहानी

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 12 जनवरी 2022। देश के विचारवान युवाओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी आदि अनेकानेक लोगों के आदर्श स्वामी विवेकानंद ने आज के ही दिन यानी 11 सितंबर 1893 को शिकागो (अमेरिका) में आयोजित धर्म संसद में अपने संबोधन- ‘मेरे अमेरिका वासी भाइयोे और … Read more

मुख्यमंत्री ने किया प्रदेश के 26 वन गांवों को बिजली, पानी, सड़क के साथ ही ग्राम प्रधानों को मुहर भी देने का दावा

-जिम कार्बेट पार्क में अब 50-50 महिला नेचर गाइड व जिप्सी चालकें भी होंगी -10 हजार स्थानीय युवा कौशल विकास कर प्राप्त करेंगे स्वरोजगार नवीन समाचार, रामनगर, 21 मार्च 2021। प्रदेश के मुख्यमंत्री तीरथसिंह रावत ने रविवार को विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर नैनीताल जनपद के रामनगर में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस … Read more

चिंताजनक: हिमालय की छटा इस वर्ष मनमोहक नहीं

नवीन समाचार, नैनीताल, 08 दिसम्बर 2020। नगर के हिमालय दर्शन प्वाइंट सहित किलबरी रोड एवं नैना पीक चोटी, स्नो व्यू व टिफिन टॉप आदि से गढ़वाल मंडल की पोरबंदी, केदारनाथ, कर्छकुंड से लेकर चौखंभा, नीलकंठ, कामेत, गौरी पर्वत, हाथी पर्वत, नंदाघुंटी, त्रिशूल, मैकतोली (त्रिशूल ईस्ट), प्रख्यात पिंडारी व सुंदरढूंगा ग्लेशियर, नंदा देवी, नंदाकोट, राजरम्भा, लास्पाधूरा, … Read more

नैनीताल को आज मिलीं सर्वधर्म की दुवाएं, पर क्या आपको पता है नैनीताल आये पहले अंग्रेज बताये जाने वाले बैरन ने कॉपी किया था 16 वर्ष पहले आये ट्रेल का आलेख

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 नवम्बर 2020। माना जाता है कि नगर में बसासत शुरू करने वाले पहले अंग्रेज पीटर बैरन 18 नवंबर 1841 को पहली बार नैनीताल आए थे। इसलिए इस दिन को कुछ लोग नगर के जन्म दिन के रूप में मनाते हैं। जबकि अन्य का मानना है कि आज के दिन से नगर … Read more

हनुमानगढ़ी में पर्यटन के लिए मौजूद है एक अनछुवा आयाम

-हिरन प्रजाति के वन्य जीवों से गुलजार है यह क्षेत्र, बन सकते हैं पर्यटन का नया जरिया
नवीन समाचार, नैनीताल, 06 सितंबर 2020। जैव विविधता से परिपूर्ण सरोवरनगरी का हनुमानगढ़ी क्षेत्र इन दिनों हिरन प्रजाति के वन्य जीवों से गुलजार है। इस मौसम में यहां हिरन प्रजाति के घुरड़ों के कई सारे झुंड कई बार नैनीताल-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी आसानी से नजर आ जाते हैं। खुले में वन्य जीवों को इस तरह सड़क के पास खुले में घूमते देखना आम लोगों के लिए भी अनूठा व रोमांचक अनुभव होता है। सामान्यतया मानवों से दूर भागने वाले ये वन्य जीव हालिया समय से यहां लगातार वाहनों एवं लोगों के गुजरने से भी अधिक डरते नहीं हैं और अपनी जगह पर बने रहकर लोगों को फोटो खींचने का मौका भी देते हैं।
उल्लेखनीय है कि हनुमानगढ़ी क्षेत्र सूर्यास्त तथा सर्दियों में खूबसूरत ‘विंटर लाइन’ के प्राकृतिक दृश्यों के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। साथ ही यहां बाबा नीब करौरी द्वारा स्थापित, कई नई-पुरानी फिल्मों में दिख चुका हनुमानगढ़ी मंदिर, स्वामी लीला शाह का आश्रम जहां कभी विवादित धर्म गुरु आशाराम भी रहा था, तथा चेचक व छोटी-बड़ी माता आदि त्वचा संबंधी रोगों के निदान के लिए जाना जाने वाला माता शीतला देवी का मंदिर भी स्थित है, और इन्हें देखने के लिए प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में सैलानी व श्रद्धालु आते हैं। गत वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई प्रह्लाद मोदी व मोदी जी की धर्मपत्नी जशोदा बेन भी आए थे। गौरतलब है कि वन विभाग ने इस क्षेत्र में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पहाड़ी घर व छतरियों युक्त पार्क बनाए हैं, तथा हनुमानगढ़ी मोड़ पर भी इन दिनों पार्क बनाए जा रहे हैं। ऐसे में यहां घुरड़ों की मौजूदगी इस क्षेत्र के पर्यटन महत्व को एक नया आयाम दे सकती है।

यह भी पढ़ें : झील के साथ ही खूबसूरत झरने भी बन सकते हैं नैनीताल की पहचान

नवीन जोशी, नैनीताल। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी सरोवरनगरी नैनीताल की वैश्विक पहचान केवल नगर के भीतर के नैनी सरोवर व अन्य आकर्षणों की वजह से नहीं, इसके बाहरी क्षेत्रों की खूबसूरती के समग्र से भी है। और यह खूबसूरती भी सैलानियों को सर्वाधिक आकर्षित करने वाले ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के दौरान की ही नहीं, वरन वर्ष भर और कमोबेस हर मौसम में अलग-अलग रूपों में कुदरत द्वारा उदारता से बरती जाने वाली नेमतों की वजह से भी है। मौजूदा वर्षा काल की ही बात करें तो इस मौसम में जहां पहाड़ की कमजोर प्रकृति की वजह से होने वाले खतरों की वजह से कम संख्या में सैलानी यहां आने का रुख कर पाते हैं, परंतु यही समय है जब यहां प्रकृति सुंदरी को उसकी वास्तविक सुंदरता को मानो नहा-धो कर साफ-स्वच्छ हुई स्थिति में देखा जा सकता है।

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ब्रेकिंग: इतिहास में पहली बार जुलाई माह में 10.9 फिट स्तर होने के बाद आज नैनी झील से छोड़ दिया गया पानी

-इससे पहले 29 जुलाई 2011 को झील का जल स्तर 8.7 फीट पहुंचने पर गेट खोले गए थे-2018 के बाद से नहीं खोले गए हैं नैनी झील के गेट नवीन समाचार, नैनीताल, 28 जुलाई 2020। जी हां, इतिहास में पहली बार जुलाई माह में 10.9 फिट स्तर होने के बाद आज ठीक सुबह साढ़े नौ … Read more

कोरोना पर सबसे बड़ी खबर: नैनीताल के सबसे बड़े मनुमहारानी होटल में ‘ले ऑफ’, 80 कर्मचारियों को मिलेगा सिर्फ आधा वेतन

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 जुलाई 2020। कोराना की महामारी का कानूनी तौर पर सबसे पहला शिकार पर्यटननगरी सरोवरनगरी का सबसे बड़ा होटल मनुमहारानी हुआ है। पिछले तीन माह से भी अधिक समय से बंद होने के बावजूद अपने कर्मचारियों को पूरा वेतन दे रहे होटल प्रबंधन ने होटल में कानूनी तौर पर ‘ले-ऑफ’ (छंटनी) घोषित … Read more

बिग ब्रेकिंग: गैरसेंण उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनी, अधिसूचना जारी, पर देहरादून की राजधानी क्या ? अस्थायी या शीतकालीन ?

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नवीन समाचार, देहरादून, 08 जून 2020। उत्तराखंड आंदोलन के दौर से ही राजधानी के रूप में प्रचारित गैरसेंण आखिर राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी बन गई है। उत्तराखण्ड की त्रिवेन्द्र सरकार द्वारा चमोली जिले के चमोली भराड़ीसैंण (गैरसैंण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा को आज आखिरकार मुहर लगा दी। राज्यपाल बेबी रानी मौर्या ने त्रिवेन्द्र सरकार के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इसके बाद प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है। इस के साथ अब उत्तराखण्ड की दो राजधानी हो गई हैं। जिनमें ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण होगी, जबकि देहरादून में पहले से अस्थायी राजधानी के रूप में कार्य हो रहे हैं। आगे देखने वाली बात होगी कि क्या अब तक अस्थायी होने के बावजूद राजधानी के रूप में प्रयुक्त देहरादून के लिये क्या शब्द प्रयोग होगा। इसे शीतकालीन राजधानी के रूप में अधिसूचित किया जाता है अथवा स्थायी राजधानी के रूप में।

यह भी पढ़ें : ‘नवीन समाचार’ की खबर पर लगी मुहर : भाजपा सरकार ने गैरसेंण पर की बड़ी घोषणा

नवीन समाचार, गैरसेंण, 4 मार्च 2020। उत्तराखंड बजट सत्र के दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक बड़ी घोषणा करते हुए गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया है। बताया गया है कि गैरसेंण व देहरादून 6-6 माह के लिए उत्तराखंड की राजधानी होंगे। इसके साथ ही भाजपा सरकार ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का अपना चुनावी संकल्प भी पूरा कर दिया है। इसे भाजपा सरकार का एतिहासिक फैसला माना जा रहा है। हालांकि गैरसेंण को उत्तराखंड की पूर्ण-स्थायी राजधानी की मांग करने वाले लोगों को सरकार का यह फैसला इस मुद्दे को हल्का करने वाला भी लग सकता है। उल्लेखनीय है कि आपके प्रिय एवं भरोसेमंद समाचार पोर्टल ‘नवीन समाचार’ ने गत 23 फरवरी को ही सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने की संभावना जता दी थी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधानसभा में बुधवार को बजट पेश करने के बाद गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का ऐलान किया। उस वक्त सदन में कुछ क्षणों के लिए सभी सदस्य हतप्रभ रह गए और सन्नाटा छा गया लेकिन सत्तापक्ष और विपक्षी दल खुशी से झूम उठे और अपनी मेज थप-थपाकर इस ऐलान का स्वागत किया। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चन्द अग्रवाल ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर ख़ुशी का इजहार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक तरह से उत्तराखंड के आंदोलन और गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने को लेकर आंदोलन करने वाले सभी तमाम शहीदों को तोहफा है। गैरसैंण राजधानी शहीदों को समर्पित है। गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा आंदोलनकारियों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि इस घोषणा से राज्य निर्माण की अवधारणा पूरी हो गई है।
बाद में त्रिवेंद्र रावत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इसके लिए क्या जरूरी इंस्फाट्रक्चर चाहिए, उसका सरकार अध्ययन कराएगी और उसी के अधीन काम होगा। साथ ही प्रशासनिक और शासन स्तर पर सभी तथ्यों पर सरकार विचार करेगी। उन्होंने कहा की यहां पर भराणी सैंण बहुत अधिक ऊंचाई पर है। इस वजह से यहां पानी की समस्या रहती है। इसके लिए एक झील बनाई जाएगी जिससे बारिश के पानी का संग्रह किया जा सके। ताकि पानी की दिक्कत का समाना न करना पड़े। इस बावत लोकनिर्माण विभाग के अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं। राजधानी बनाए जाने के बाद क्या गैरसैंण को अब जिला घोषित किया जाएगा? यह पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हम पहले सभी पक्षों का अध्ययन करेंगे और जो भी बेहतर होगा, सरकार उस पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि जब हमने इसे राजधानी घोषित कर दिया है तो जिला बनाये जाने का मुद्दा अपने आप ख़त्म हो गया है। 
उल्लेखनीय है कि कर्णप्रयाग के विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने हाल ही में मुख्यमंत्री से मिलनकर भराड़ीसैंण में होने वाले सत्र के दौरान गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने की मांग की थी। उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड राजधानी के तौर पर गैरसैंण का नाम सबसे पहले 60 के दशक में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने आगे किया था। उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के समय भी गैरसैंण को ही राज्य की प्रस्तावित राजधनी माना गया। वर्ष 1989 में उक्रांद के संस्थापक डीडी पंत और विपिन त्रिपाठी ने गैरसैंण को उत्तराखंड की प्रस्तावित राजधानी के रूप में माना था और उक्रांद ने 1992 में गैरसैंण को उत्तराखण्ड की औपचारिक राजधानी घोषित भी कर दिया था। राज्य आंदोलन के दौरान गैरसेंण उत्तराखंड की राजधानी के रूप में ही आंदोलन विषय के केंद्र में रहा।

यह भी पढ़ें : गैरसैंण पर इतिहास रच सकते हैं त्रिवेंद्र, राज्य आंदोलनकारियों पर भी हो सकता है बड़ा ऐलान…

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 फरवरी 2020। जी हां, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत पर्वतीय जनभावनाओं की राजधानी गैरसैंण पर इतिहास रच सकते हैं। वे गैरसैंण में आगामी 3 मार्च से आयोजित होने जा रहे विधानसभा सत्र में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर सकते हैं। चमोली जिले, जहां गैरसैण स्थित है, के सत्ताधारी विधायक महेंद्र भट्ट के दावे ने इन चर्चाओं को ताकत मिली है। कहा जा रहा है उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के हवाले से यह बात कही है। ऐसी स्थिति में त्रिवेंद्र इतिहास रचने के करीब खडे़ हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री रावत राज्य आंदोलनकारियों को समान पेंशन व पेंशन को बढ़ाकर 5 हजार रुपये करने तथा उन्हें आरक्षण बहाल करने की भी घोषणा कर सकते हैं। राज्य आंदोलनकारियों से ऐसा वादा कर चुके हैं।gairsain
इस मसले को मौजूदा स्थितियोें में सै़द्धांतिक और व्यवहारिक नजरियेे से देखें तो दो बातें निकलकर आती हैं। सैद्धांतिक बात गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने के पक्ष में है, लेकिन देहरादून में जिस तरह से पिछले 20 साल से अस्थायी तौर पर ही सही राजधानी का संचालन हुआ है, उसमें अब गैरसैंण के स्थायी राजधानी बनने की कितनी संभावनाएं हैं, यह व्यवहारिक यक्ष प्रश्न है। राज्य आंदोलनकारियों के बीच में से ही एक वर्ग मानता है कि मौजूदा स्थिति में गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी बन जाए, तो यह उस क्षेत्र के विकास के लिहाज से बड़ी बात होगी। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने 2017 केे विधानसभा चुनाव में अपने घोषणापत्र में ग्रीष्मकालीन राजधानी का वादा किया था। कांग्रेस का कहना है कि अगर ग्रीष्मकालीन राजधानी का एलान होगा तो सरकार से पूछा जाएगा कि स्थायी राजधानी क्यों नहीं। हालांकि उन्हें यह पूछने का हक नहीं, क्योंकि यही सवाल उनसे भी पूछा जाएगा। वहीं भाजपा के पास कहने के लिए एक बड़ा जवाब है। वह कह सकती है कि उसके चुनाव घोषणापत्र पर भरोसा करके ही उसे प्रचंड बहुमत मिला है। वह कह सकती है कि यदि ग्रीष्मकालीन राजधानी के वादे पर जनता असहमत होती तो कर्णप्रयाग विधानसभा सीट, जिसके अंतर्गत गैरसैंण क्षेत्र आता है, वहां पर भाजपा के सुरेंद्र सिंह नेगी कभी जीतकर नहीं आते।Gairsain
अब बात त्रिवेंद्र सिंह रावत की। यदि उनकी सरकार ग्रीष्मकालीन राजधानी का एलान कर देती है, तो यह इतिहास रचने जैसा होगा। गैरसैंण में भव्य विधानभवन तैयार हो चुका है। वहां सत्र आयोजित होने लगे हैं। इससे पहले 2016 में हरीश रावत सरकार के पास यह मौका था। मगर वह गैरसैंण राजधानी के मसले पर चूक गई। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को अब इसका मलाल भी है। अब पूरे उत्तराखंड की निगाहें 3 मार्च से गैरसैंण में शुरू हो रहे विधानसभा सत्र पर टिकी हैं। क्या इसी दौरान एलान होगा या फिर अपनी सरकार के बचे हुए दो साल के कार्यकाल के दरमियान किसी और तारीख को मुख्यमंत्री इसके लिए चुनेंगे। इस पर शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक का सिर्फ इतना कहना है कि सरकार जनभावनाओं से वाकिफ है और गैरसैंण के विकास के लिए जो बेहतर होगा, वह निर्णय लिया जाएगा।

यह भी पढ़ें : अजय भट्ट ने गैरसेंण व उत्तराखंड की राजधानी को लेकर भाजपा सरकार की मंशा पर किया ‘बड़ा’ खुलासा

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 जून 2018। केंद्र एवं राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने गैरसेंण-चंद्रनगर के बारे में उत्तराखंड की राजधानी के बाबत भाजपा सरकार की मंशा पर बड़ा खुलासा किया है। नैनीताल क्लब के राज्य अतिथि गृह में पत्रकारों से बात करते हुए भट्ट ने कहा कि भाजपा सरकार साफ तौर पर पहले गैरसेंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने जा रही है। इसके लिए भी अभी वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वहां विधानभवन तैयार हो गया है, परंतु यहां आयोजित होने वाले विधानसभा सत्र के लिए ही तैनात होने वाले कर्मचारियों के लिए आवास नहीं हैं। कर्मचारियों को ग्रामीणों के घरों में शरण लेनी पड़ती है। साथ ही पानी की भारी समस्या है। बीते सत्र में तैनात 1000 पुलिस के जवान पानी के लिए परेशान रहे, जबकि कई को गाड़ियों में सोना पड़ा। पानी व आवास जैसी इन मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने के बाद सरकार ‘जनभावनाओं के अनुरूप’, जिस स्वरूप में जनता चाहेगी, वैसे गैरसेंण को राजधानी बनाने पर निर्णय लेगी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस इस बारे में जो कुछ भी कहती है, सदन के बाहर कहती है। सदन के भीतर कांग्रेस ने अब तक गैरसेंण पर अपना रुख साफ नहीं किया है।

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नैनीताल-कुमाऊं में फिल्माई गई फिल्मों और गानों का पूरा लेखा-जोखा

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मधुमती (1958)-दिलीप कुमार, वैजयन्ती माला और जॉनी वॉकर। प्रमुख गीत-जुल्मी संग आँख लड़ी, चढ़ गयो पापी बिछुआ, दिल तड़प तड़प के, घड़ी घड़ी मोरा दिल धड़के, जंगल में मोर नाचा, सुहाना सफ़र, आजा  रे परदेशी । गुमराह(1963)- सुनील दत्त, माला सिन्हा। प्रमुख गीत-इन हवाओं में, इन फ़िज़ाओं में तुझको मेरा प्यार पुकारे। कौन अपना-कौन पराया (पूर्व नाम वांटेड) (1963)-वहीदा रहमान, अशोक कुमार, विजय कुमार … Read more

नैनीताल में ‘नेचुरल एसी’ बना कौतूहल का केंद्र, उमड़ रहे सैलानी

-बारापत्थर चौराहे पर सैलानी आकर लेने लगे हैं इसका अनुभव नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मई 2019। सरोवरनगरी में एक पहाड़ी चट्टान पर करीब पांच वर्ष पूर्व प्रकाश में आया ‘नेचुरल एसी’ सैलानियों के साथ ही नगरवासियों के बीच भी आकर्षण और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। अब बड़ी संख्या में सैलानी और स्थानीय लोग … Read more

‘भारत के स्विटजरलेंड’ में गांधी जी ने लिखी थी ‘अनासक्ति योग’

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, कौसानी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एक अलग दृष्टि के महामानव थे। यही कारण है कि उन्होंने अपनी आग उगलती बंदूकों और जुल्मो-सितम के लिए पहचाने जाने वाले अंग्रेजों को, जिनके राज में तब कभी सूर्य अस्त न होता था, एक अलग तरह के अहिंसा के अस्त्र का प्रयोग कर असंभव … Read more

महेश खान: यानी प्रकृति और जैव विविधता की खान

पहली नजर में दो हिंदू-मुस्लिम नामों का सम्मिश्रण लगने वाले महेश खान के नाम में ‘खान’ कोई जाति या धर्म सूचक शब्द नहीं है, लेकिन ‘खान’ शब्द को दूसरे अर्थों में प्रयोग करें तो यह स्थान प्रकृति के लिए भी प्रयोग किए जाने वाले महेश यानी शिव की धरती कहे जाने वाले कुमाऊं में वानस्पतिक … Read more

प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ सदृश रामायण-महाभारतकालीन द्रोणगिरि वैष्णवी शक्तिपीठ दूनागिरि

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 9 अक्टूबर 2021। हिमालय की गोद में बसे आध्यात्मिक महिमा से मंडित और नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दूनागिरि शक्तिपीठ का अपार महात्म्य है। आइए आज हम आपको इस शक्तिपीठ के दर्शनों को लिए चलते हैं। दूनागिरि पहुंचने के लिए अल्मोड़ा से 65 किमी, रानीखेत से 38 किमी … Read more

पक्षी-तितली प्रेमियों का सर्वश्रेष्ठ गंतव्य है पवलगढ़ रिजर्व

उत्तराखंड का नैनीताल जनपद में रामनगर वन प्रभाग स्थित पवलगढ़ रिजर्व पक्षी प्रेमियों के लिए बेहतरीन गंतव्य है। दिल्ली से सड़क और रेल मार्ग से करीब 260 किमी तथा नजदीकी हवाई अड्डे पंतनगर से करीब 87 किमी दूर रामनगर के जिम कार्बेट नेशनल पार्क से कोसी नदी के दूसरी-पूर्वी छोर से सटा 5824 हैक्टेयर में फैला प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधिता से लबरेज पवलगढ रिजर्व, पक्षियों को देखने यानी बर्ड वाचिंग के शौकीनों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त स्थान है। यहां अब तक करीब 365 प्रजातियों के पक्षी देखे और पहचाने जा चुके हैं। साथ ही यहां मिलती करीब 83 तरह की तितलियां और 100 प्रकार के मॉथ यानी तितलियों की ही दूसरी प्रजातियां भी मिलती हैं।

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सच्चा न्याय दिलाने वाली माता कोटगाड़ी : जहां कालिया नाग को भी मिला था अभयदान

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