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नवीन समाचार, देहरादून, 15 अक्टूबर 2024 (Supreme Courts Big Decision on UPNL Employees)। उत्तराखंड में उपनल यानी उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम के माध्यम से सरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर वर्ष 2018 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के नियमितीकरण से जुड़े आदेश के विरुद्ध दायर की गई राज्य सरकार की याचिका को आज सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। ऐसे में उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण की संभावना बन गई है, लेकिन सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का विधिक परीक्षण कराने की तैयारी में है।
2018 में नैनीताल उच्च न्यायालय ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के पक्ष में निर्णय सुनाया था (Supreme Courts Big Decision on UPNL Employees)
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में उपनल एजेंसी के माध्यम से राज्य सरकार के एक विभाग में कार्यरत कुंदन सिंह की चिट्ठी का नैनीताल उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया था और इसे याचिका में तब्दील कर ‘कुंदन सिंह बनाम राज्य सरकार’ प्रकरण के रूप में सुनवाई करते हुए उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के पक्ष में निर्णय सुनाया था। नैनीताल हाईकोर्ट ने उस समय सरकार को एक साल के भीतर उपनल कर्मचारियों को नियमित करने की योजना तैयार करने और 6 महीने के भीतर समान कार्य के लिए समान वेतन देने के निर्देश दिए थे।

राज्य सरकार ने इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी
राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए 2018 में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद कुंदन सिंह सहित कई उपनल कर्मचारी संगठनों ने भी सर्वोच्च न्यायालय में अपनी याचिकाएं दायर कीं। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़ते हुए मामले की सुनवाई की और आज 15 अक्टूबर को अपना निर्णय सुनाया।
उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कवि ने जानकारी दी कि सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है, और अब सरकार को इस पर कोई ठोस निर्णय लेना है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अब वर्षों से सरकारी विभागों में कार्यरत उपनल कर्मचारियों को न्याय दिलाने का एक बड़ा अवसर है। राज्य में हजारों उपनल कर्मचारी हैं, जिन्हें इस आदेश के बाद नियमितीकरण का लाभ मिल सकता है।
विधिक परीक्षण करायेगी राज्य सरकार
हाल ही में धामी सरकार ने 2024 की नियमितीकरण योजना लाने के संकेत दिए थे, हालांकि अप्रैल में कर्मचारियों ने इस बात पर असंतोष व्यक्त किया था कि इस योजना में केवल संविदा कर्मचारियों को ही शामिल किया जा रहा है और उपनल कर्मचारियों की उपेक्षा हो रही है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद सरकार ने कहा है कि पूरे मामले का विधिक परीक्षण कराया जाएगा और जो राज्य के हित में होगा, उस पर कार्यवाही की जाएगी। (Supreme Courts Big Decision on UPNL Employees)
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‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार’ एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।













