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उत्तराखंड NEET-UG काउंसलिंग 2026: सरकारी MBBS सीट के लिए कितने अंक सुरक्षित? जानिए 11 अहम सवालों के जवाब

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नवीन समाचार, देहरादून, 18 जुलाई 2026 (Uttarakhand NEET-UG Counseling 2026,)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (National Eligibility cum Entrance Test-Undergraduate-NEET UG) 2026 का परिणाम घोषित होने के बाद अब हजारों अभ्यर्थियों की नजर मेडिकल काउंसलिंग (Medical Counselling) पर टिकी है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज (Government Medical College) में एमबीबीएस (MBBS) की सीट के लिए कितने अंक सुरक्षित माने जा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रत्येक वर्ष कटऑफ में बदलाव होता है, इसलिए केवल पिछले वर्ष के आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी रैंक के अनुसार अधिक से अधिक विकल्प भरना सबसे बेहतर रणनीति होगी।

Uttarakhand NEET-UG Counseling 2026, उत्तराखंड NEET UG काउंसलिंग 2026: पंजीकरण, शुल्कउत्तराखंड में इस वर्ष पांच सरकारी और तीन निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल 1,275 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं। इनमें 625 सरकारी तथा 650 निजी सीटें शामिल हैं।

काउंसलिंग के बाद कैसे मिलेगा प्रवेश?

नीट-यूजी परिणाम के बाद अगला चरण मेडिकल काउंसलिंग का होता है। इसमें अभ्यर्थी अपनी रैंक के अनुसार कॉलेज और पाठ्यक्रम की प्राथमिकताएं भरते हैं। इसी प्रक्रिया के आधार पर सीटों का आवंटन किया जाता है।

सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए कितने अंक हो सकते हैं सुरक्षित?

पिछले वर्ष के राज्य कोटा के रुझानों के अनुसार 500 से अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मजबूत दावेदारी रही थी। हालांकि इस वर्ष अभ्यर्थियों की संख्या, मेरिट और चॉइस फिलिंग के आधार पर कटऑफ में परिवर्तन संभव है।

सबसे अधिक कटऑफ किन कॉलेजों की रही?

पिछले वर्ष दून मेडिकल कॉलेज (Doon Medical College), देहरादून तथा सरकारी मेडिकल कॉलेज (Government Medical College), हल्द्वानी सबसे अधिक पसंद किए गए। सामान्य वर्ग में इन कॉलेजों की सीटें लगभग 530 अंकों तक आवंटित हुई थीं, जबकि छात्राओं के लिए अंतिम कटऑफ लगभग 531 अंक रही।

अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों की स्थिति

हरिद्वार, श्रीनगर और अल्मोड़ा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सामान्य वर्ग की सीटें पिछले वर्ष लगभग 508 से 514 अंकों के बीच आवंटित हुई थीं।

आरक्षण वर्गों की संभावित स्थिति

पिछले वर्ष के रुझानों के अनुसार अधिकांश सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ओबीसी (OBC) और ईडब्ल्यूएस (EWS) वर्ग की सीटें लगभग 500 से 527 अंकों के बीच बंद हुई थीं। वहीं अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की कटऑफ सामान्य वर्ग की तुलना में कम रही, लेकिन कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें 400 से अधिक अंक पर आवंटित हुई थीं।

कम अंक आने पर भी विकल्प खुले

विशेषज्ञों के अनुसार यदि सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल पाता है तो निजी मेडिकल कॉलेज भी विकल्प हो सकते हैं। पिछले वर्ष सामान्य वर्ग में निजी कॉलेजों में लगभग 220 से 430 अंकों के बीच भी एमबीबीएस सीटें आवंटित हुई थीं।

राज्य और अखिल भारतीय कोटा

सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 85 प्रतिशत सीटें राज्य कोटा तथा 15 प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय कोटा (All India Quota) के माध्यम से भरी जाती हैं।

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बीडीएस की भी उपलब्ध हैं 200 सीटें

प्रदेश के दो निजी दंत चिकित्सा महाविद्यालयों (Dental Colleges) में इस वर्ष 200 बीडीएस (BDS) सीटें उपलब्ध हैं, जो कम रैंक वाले अभ्यर्थियों के लिए एक अन्य विकल्प हो सकती हैं।

उत्तराखंड का प्रदर्शन बेहतर

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (National Testing Agency-NTA) द्वारा घोषित परिणामों के अनुसार इस वर्ष उत्तराखंड का प्रदर्शन पिछले वर्ष की तुलना में 1.18 प्रतिशत बेहतर रहा और राज्य का कुल सफलता प्रतिशत 56.3 प्रतिशत पहुंच गया। आदि जैन (Aadi Jain) ने उत्तराखंड में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है।सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम क्वालीफाइंग कटऑफ भी पिछले वर्ष के 144 अंक से बढ़कर 213 अंक हो गई है। वहीं पिछले वर्ष सामान्य वर्ग में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की अंतिम क्लोजिंग रैंक लगभग 43,804 रही थी।

विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि अभ्यर्थियों को केवल पिछले वर्ष की कटऑफ देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। अपनी वास्तविक नीट रैंक के अनुसार अधिक से अधिक मेडिकल कॉलेजों की चॉइस भरनी चाहिए, क्योंकि प्रत्येक वर्ष रैंक, सीटों की उपलब्धता और अभ्यर्थियों की पसंद के कारण कटऑफ में परिवर्तन होता है।

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