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पूर्व मुख्य सचिव के बेटे पर फर्जी आईपीएस बनकर 19.60 लाख की ठगी का आरोप, देहरादून पुलिस ने किया गिरफ्तार

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नवीन समाचार, देहरादून, 16 जुलाई 2026 (Former Chief Secretarys Son Arrested)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) में एक अत्यंत चर्चित प्रकरण सामने आया है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव (Former Chief Secretary) एस. रामास्वामी (S. Ramaswamy) के 35 वर्षीय पुत्र आर. यशोवर्धन (R. Yashovardhan) को देहरादून पुलिस (Dehradun Police) ने स्वयं को भारतीय पुलिस सेवा (Indian Police Service-IPS), अनुसंधान एवं विश्लेषण विंग (Research and Analysis Wing-RAW), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (Central Reserve Police Force-CRPF), राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (National Investigation Agency-NIA) तथा भारतीय सेना (Indian Army) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों से लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार दो मामलों में उस पर कुल 19.60 लाख रुपये की ठगी का आरोप है, जबकि अब उसके अन्य संभावित मामलों की भी जांच की जा रही है।

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Dehradun Police Arrest Yashovardhan Ramaswamy for IPS Impersonation Fraudदेहरादून पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर गठित राजपुर थाना (Rajpur Police Station) की विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के आधार पर गुरुवार को मसूरी रोड (Mussoorie Road) स्थित सीएसआई तिराहा (CSI Tiraha) से आरोपित को गिरफ्तार किया। उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita-BNS) की धाराओं 318(4), 336(3), 338 तथा 340(2) के अंतर्गत दो अभियोग दर्ज हैं।

यूपीएससी में असफलता के बाद बनाई फर्जी पहचान

Former Chief Secretarys Son Arrested खुद को IPS बताकर लेडी साइंटिस्ट से ठगी, MBBS छात्र से ₹15 लाख हड़पे - दैनिक  भास्कर | Dainik Bhaskarपुलिस पूछताछ में आरोपित ने बताया कि उसके पिता राज्य के वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी रहे हैं। बचपन से अधिकारियों का प्रभाव देखकर उसने भी आईपीएस अधिकारी बनने का सपना देखा और कई वर्षों तक संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission-UPSC) की तैयारी की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद उसने फर्जी पहचान पत्र, विजिटिंग कार्ड, वर्दियां और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के प्रतीक चिह्न तैयार कर स्वयं को वरिष्ठ अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करना शुरू कर दिया। पुलिस के अनुसार वह प्रभावशाली व्यक्तित्व और सरकारी संपर्कों का दावा कर लोगों का विश्वास जीतता था तथा नौकरी, सरकारी कार्य, टेंडर और स्टार्टअप सहायता दिलाने के नाम पर धनराशि प्राप्त करता था।

एमबीबीएस छात्र और महिला वैज्ञानिक से लाखों रुपये लेने का आरोप

पुलिस के अनुसार पहला मामला 8 जुलाई 2026 का है, जिसमें डाकरा बाजार (Dakra Bazar) निवासी एमबीबीएस (MBBS) छात्र अंशुल उपाध्याय (Anshul Upadhyay) ने शिकायत दर्ज कराई कि आरोपित ने होटल जिंजर (Hotel Ginger) में बुलाकर उनकी दिवंगत माता के नाम पर कंपनी पंजीकरण और स्टार्टअप फंडिंग दिलाने का आश्वासन दिया तथा 15 लाख रुपये ले लिए।

दूसरे मामले में कैनाल रोड (Canal Road) स्थित छात्रावास में रहने वाली महिला वैज्ञानिक एवं शोधार्थी (Research Scholar) डॉ. अनुषा (Dr. Anusha) ने शिकायत की कि आरोपित ने स्वयं को आईपीएस अधिकारी बताते हुए रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) में डेटा साइंस सलाहकार (Data Science Consultant) के पद पर नियुक्ति दिलाने का झांसा देकर 4.60 लाख रुपये प्राप्त किए।

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फर्जी पहचान पत्र, वर्दियां और वायरलेस सेट बरामद

पुलिस ने आरोपित के कब्जे से 5 फर्जी पहचान पत्र, 8 फर्जी विजिटिंग कार्ड, पुलिस एवं सेना से संबंधित 25 प्रतीक चिह्न, सेना एवं अर्द्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) की 3 जोड़ी वर्दियां, 3 फर्जी रैंक रिबन, एक वायरलेस सेट तथा एक लैपटॉप बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि इन सामग्रियों का उपयोग कर आरोपित स्वयं को वरिष्ठ अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करता था।

पुराने मामलों और संभावित पीड़ितों की भी जांच

पुलिस के अनुसार आरोपित ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह वर्दी और फर्जी पहचान के माध्यम से लोगों का विश्वास अर्जित करता था। अब यह जांच की जा रही है कि उसने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और क्या इस पूरे प्रकरण में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है। पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड तथा अन्य संभावित शिकायतों का भी परीक्षण कर रही है।

पूर्व में पूर्व विधायक के पुत्र से हुए विवाद से भी आया था चर्चा में

उल्लेखनीय है कि आरोपित पूर्व में भी एक चर्चित मारपीट प्रकरण में पीड़ित के रूप में चर्चा में रहा था, जिसमें पूर्व विधायक प्रणव सिंह चैंपियन (Pranav Singh Champion) के पुत्र दिव्य प्रताप सिंह (Divya Pratap Singh) सहित अन्य लोगों के विरुद्ध अभियोग दर्ज हुआ था। हालांकि वर्तमान प्रकरण का उस घटना से प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं किया गया है और पुलिस इस मामले की विवेचना स्वतंत्र रूप से कर रही है। तब नवंबर 2025 में यशोवर्धन का देहरादून के राजपुर रोड पर ओवरटेक को लेकर भाजपा के पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के पुत्र दिव्य प्रताप सिंह से विवाद हो गया था।

आरोप था कि दिव्य प्रताप सिंह और उनके सरकारी गनर ने यशोवर्धन की कार रुकवाकर उनके तथा उनके चालक के साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में राजपुर थाने में हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में दिव्य प्रताप सिंह का शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था तथा घटना में प्रयुक्त वाहन भी सीज किया गया था। अब उसी प्रकरण के दूसरे पक्ष रहे आर. यशोवर्धन स्वयं फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर 19.60 लाख रुपये की कथित ठगी के आरोप में देहरादून पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए हैं।

पुलिस ने आरोपित को न्यायालय में प्रस्तुत कर विधिक प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। मामले की विवेचना जारी है तथा अंतिम निष्कर्ष न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और विधिक प्रक्रिया के आधार पर निर्धारित होगा। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

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