नवीन समाचार, देहरादून, 1 फरवरी 2026 (Uttarakhand on Union Budget)। संसद में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के द्वारा रविवार को प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 को लेकर उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। प्रदेश सरकार ने केंद्र के समक्ष उत्तराखंड की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों, पारिस्थितिक संवेदनशीलता और राज्य द्वारा राष्ट्र को प्रदान की जा रही महत्वपूर्ण इको-सिस्टम सेवाओं (Eco-System Services) को ध्यान में रखते हुए कई मांगें रखी थीं, लेकिन केंद्रीय बजट में मुख्य रूप से पर्यटन, विशेषकर ट्रेकिंग और मेडिकल टूरिज्म से जुड़े प्रावधान ही सामने आए हैं।
इससे एक ओर पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं अवस्थापना विकास, आपदा प्रबंधन, कृषि और छोटे उद्योगों को लेकर अपेक्षाएं पूरी न होने की चर्चा भी तेज है।
बजट में उत्तराखंड के लिए क्या प्रमुख घोषणाएं हुईं
संसद में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने अपना लगातार रिकॉर्ड नौवां केंद्रीय बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे पर्वतीय राज्यों में पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ पहाड़ी रास्ते यानी इकोलॉजिकल सस्टेनेबल माउंटेन ट्रेल्स (Ecologically Sustainable Mountain Trails) विकसित किए जाएंगे। उत्तराखंड के संदर्भ में यह घोषणा ट्रेकिंग, हाइकिंग और साहसिक पर्यटन को संगठित और पर्यावरण अनुकूल स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि मेडिकल टूरिज्म (Medical Tourism) को बढ़ावा देने के लिए देश में पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब (Regional Medical Hubs) स्थापित किए जाएंगे, जिनमें निजी क्षेत्र की सहभागिता होगी। इन हब्स में हेल्थकेयर कॉम्प्लेक्स, आयुष केंद्र (AYUSH Centres), डायग्नोस्टिक, पोस्ट-केयर और पुनर्वास केंद्र शामिल होंगे। इससे स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने की संभावना है। उत्तराखंड में पहले से प्रस्तावित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (All India Institute of Ayurveda) को देखते हुए राज्य को इस योजना से लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और सरकार का दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने केंद्रीय बजट को विकसित भारत–2047 (Viksit Bharat 2047) के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया सर्वस्पर्शी बजट बताया। उनके अनुसार पर्वतीय राज्यों में ट्रेकिंग ट्रेल्स के विकास की घोषणा दूरदर्शी पहल है, जिससे स्थानीय आजीविका सुदृढ़ होगी, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे। राज्य सरकार का मानना है कि केंद्र की योजनाओं में उत्तराखंड को लगातार शामिल किया जा रहा है और आगे भी इससे अपेक्षित लाभ मिलेंगे।
ट्रेकिंग और हाइकिंग से जुड़ी संभावनाएं और चुनौतियां
उत्तराखंड को देश का प्रमुख ट्रेकिंग हब माना जाता है। इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन (Indian Mountaineering Foundation) के अनुसार उत्तराखंड में ट्रेकिंग से जुड़ा कारोबार लगभग 100 करोड़ रुपये का है। यहां 50 से अधिक विश्व स्तरीय ट्रेकिंग रूट मौजूद हैं और छोटे-बड़े ट्रेक मिलाकर इनकी संख्या सैकड़ों में है। फूलों की घाटी (Valley of Flowers), हर की दून (Har Ki Dun), रूपकुंड (Roopkund), केदारताल (Kedartal), पिंडारी ग्लेशियर (Pindari Glacier) और मुनस्यारी क्षेत्र जैसे रूट देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
हालांकि, इसके बावजूद प्रदेश में ट्रेकिंग के लिए अब तक कोई स्पष्ट नियमावली नहीं है। बीते पांच वर्षों में हिमालयी राज्यों में ट्रेकिंग के दौरान कई लोगों की मृत्यु हुई है और उत्तराखंड सरकार के पास सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में इकोलॉजिकल सस्टेनेबल माउंटेन ट्रेल की अवधारणा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के संतुलन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
किसानों और अन्य वर्गों की उम्मीदें
केंद्रीय बजट से उत्तराखंड के किसानों को भी बड़ी उम्मीदें थीं। किसानों का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उनकी शत प्रतिशत फसलों की खरीद की गारंटी और जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम अपेक्षित थे। नैनीताल जिले के मल्ला निगलाट गांव (Malla Nigalat Village) निवासी किसान नीरज मेहरा बताते हैं कि जंगली जानवरों के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है, जिससे पलायन बढ़ा है।
विपक्ष की आलोचना
केंद्रीय बजट पर कांग्रेस (Indian National Congress) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल (Ganesh Godiyal) ने बजट को दिशाहीन और विकास विरोधी बताया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) ने कहा कि यह बजट विकसित भारत का नक्शा खींचते हुए ग्रामीण भारत, कृषि, लघु उद्योग और असंगठित क्षेत्र को भूल गया है। उनके अनुसार हिमालयी राज्यों के लिए ग्रीन बोनस (Green Bonus), कार्बन क्रेडिट (Carbon Credit) और आपदा प्रबंधन से जुड़े ठोस प्रावधानों की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हुई।
वहीं नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य (Leader of Opposition Yashpal Arya) ने कहा कि बजट 2026 देश की कई आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का एक भी समाधान नहीं देता है। कहा कि यह बजट कोई समाधान नहीं देता, यहाँ तक कि पॉलिसी की कमी को छिपाने के लिए इसमें नारे भी नहीं हैं।
आगे क्या बदलेगा
कुल मिलाकर केंद्रीय बजट 2026–27 में उत्तराखंड के लिए ट्रेकिंग, हाइकिंग और मेडिकल टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में संभावनाओं के नए द्वार खुले हैं, लेकिन कृषि, आपदा संवेदनशीलता, अवस्थापना विकास और रोजगार सृजन को लेकर राज्य की अपेक्षाएं अभी अधूरी दिखाई देती हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बजट घोषणाओं का क्रियान्वयन जमीन पर किस स्तर तक हो पाता है और इससे पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन, बेरोजगारी और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर क्या वास्तविक प्रभाव पड़ता है।
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