अंकिता भंडारी हत्याकांड की सुनवाई अब 18 अगस्त को, पुलकित आर्य समेत तीनों आरोपितों की जमानत पर होगी सुनवाई
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अगस्त 2026 (Nainital High Court News 10 Aug 2026)। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में मुख्य अभियुक्त पुलकित आर्य और उसके दो साथियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। उच्च न्यायालय (High Court) पुलकित आर्य और दो अन्य आरोपितों की जमानत याचिकाओं पर अब आगामी 18 अगस्त को सुनवाई करेगा।
मुख्य अभियुक्त पुलकित आर्य (Pulkit Arya), सौरभ भास्कर (Saurabh Bhaskar) और अंकित गुप्ता (Ankit Gupta) के जमानत प्रार्थना पत्र पर सोमवार को न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी (Justice Ravindra Maithani) और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह (Justice Siddharth Sah) की खंडपीठ में सुनवाई हुई। अभियुक्तों की ओर से कहा गया कि वे निर्दोष हैं और अभियोजन पक्ष की ओर से उन्हें जबरन फंसाया गया है।
अभियुक्तों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि मामले में उनके खिलाफ प्रस्तुत तथ्य और साक्ष्य उनके पक्ष में हैं। जिन व्हाट्सऐप संदेशों के आधार पर मामले की पूरी कहानी तैयार की गई है, वे सत्यापित नहीं हैं और साजिशन तैयार किए गए हैं। तीनों अभियुक्तों की ओर से अपने बचाव में कुछ अन्य तथ्यों को भी अदालत के समक्ष रखा गया तथा बहस की गई।अब 18 अगस्त को अभियोजन पक्ष और शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा।
हाईकोर्ट ने राज्य अधीनस्थ चयन आयोग और सरकार को चार सप्ताह की मोहलत दी
नैनीताल। उच्च न्यायालय ने 14 जून 2026 को संपन्न लेखपाल, पटवारी और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में राज्य अधीनस्थ चयन आयोग (State Subordinate Service Selection Commission) की ओर से पूछे गए कई प्रश्नों के दो-दो उत्तर होने के मामले में दायर कई अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई की।
मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित (Justice Pankaj Purohit) की एकल पीठ ने राज्य अधीनस्थ चयन आयोग और राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद की तिथि के लिए निर्धारित की गई है।
अधिकारी की दोषसिद्धि बरकरार, पर नया जुर्माना या सजा नहीं
नैनीताल। उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी (Uttarakhand Rural Road Development Agency) के मुख्य अभियंता संजय कुमार पाठक (Sanjay Kumar Pathak) को अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने के लिए दोषी ठहराया, लेकिन बाद में आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किए जाने के बाद उन्हें कोई नई सजा नहीं दी।
यह कानूनी विवाद याचिकाकर्ता मेसर्स राम कृष्णा जयरा (M/s Ram Krishna Jayra) और यूआरआरडीए के अधिकारियों के बीच एक निविदा प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ था। उच्च न्यायालय ने 26 फरवरी 2026 को पारित अपने पिछले फैसले में प्रतिवादियों को निर्देश दिया था कि वे याचिकाकर्ता फर्म की तकनीकी रूप से सफल बोली को वित्तीय चरण में शामिल करें और नियमानुसार आगे की कार्रवाई करें।
निर्धारित समय सीमा में आदेश का पालन न होने पर याचिकाकर्ता ने अदालत में अवमानना याचिका दाखिल की। इसके जवाब में प्रतिवादी की ओर से दलील दी गई कि अन्य सफल बोलीदाताओं ने अपनी बोली की वैधता अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया था, जिस वजह से वित्तीय बोली की प्रक्रिया रोक दी गई थी।
अदालत ने 15 जुलाई 2026 के अपने आदेश में प्रतिवादी की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया और इसे एक बहाना तथा स्वयं निर्मित स्थिति करार दिया। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल (Justice Rakesh Thapliyal) ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रतिवादी की मंशा उच्च न्यायालय के आदेश को दरकिनार करने की थी। इसके लिए उन्हें दोषी ठहराया गया और 10 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का अंतिम अवसर दिया गया।
अदालत के इस कड़े रुख के बाद प्रतिवादी अधिकारी की ओर से अनुपालन हलफनामा दायर किया गया। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी के अधिवक्ता ने 30 जुलाई 2026 को जारी स्वीकृति पत्र भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया, जिससे यह साबित हुआ कि अब अदालत के निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन कर लिया गया है।
मामले की अंतिम सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने माना कि सिविल अवमानना (Civil Contempt) का प्राथमिक उद्देश्य न्यायिक आदेशों का क्रियान्वयन कराना होता है, न कि बिना सोचे-समझे किसी को दंडित करना। अदालत ने अधिकारी के खिलाफ दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए कोई नया जुर्माना या सजा नहीं सुनाई, लेकिन भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी देते हुए आदेश की एक प्रति मुख्य सचिव को अधिकारी के सेवा अभिलेख में रखने के लिए भेज दी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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