नवीन समाचार, देहरादून, 9 जून 2026 (Precautions-Directions for the SIR)। उत्तराखंड में मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत मतदाताओं का सत्यापन किया जा रहा है और बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित कर रहे हैं। निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया के दौरान गलत जानकारी देने, तथ्य छिपाने अथवा दो स्थानों से मतदाता होने की स्थिति में गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
दो जगह मतदाता होने पर बरतें विशेष सावधानी
निर्वाचन आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति एक से अधिक स्थानों पर मतदाता के रूप में दर्ज न रहे। ऐसे अनेक लोग हैं जो अपने पैतृक गांव या शहर से बाहर नौकरी अथवा अन्य कारणों से रह रहे हैं और अनजाने में दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में दर्ज हो चुके हैं।
निर्वाचन नियमों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का नाम दो स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज है और उसने दोनों स्थानों से एसआईआर का फॉर्म भर दिया है, तो यह अपराध की श्रेणी में आ सकता है। एसआईआर फॉर्म भरते समय मतदाता को यह घोषणा करनी होती है कि वह केवल एक स्थान का मतदाता है।
एक वर्ष तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार यदि एसआईआर के दौरान दी गई जानकारी गलत पाई जाती है अथवा तथ्यों को छिपाया गया है, तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act, 1950) की धारा 31 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इस प्रावधान के अंतर्गत एक वर्ष तक की कारावास, जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं।
दो जगह नाम होने पर क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग मतदाता सूचियों में दर्ज है, तो उसे तुरंत अपने बीएलओ से संपर्क कर फॉर्म-7 भरना चाहिए। यह फॉर्म मतदाता सूची से नाम हटाने अथवा विलोपित कराने के लिए उपयोग किया जाता है।
फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाता स्वयं अथवा अपने किसी निकट संबंधी का नाम मतदाता सूची से हटाने का अनुरोध कर सकता है। इसमें नाम, ईपीआईसी (EPIC) नंबर तथा मोबाइल नंबर सहित आवश्यक विवरण देने होते हैं।
इन कारणों से हटाया जा सकता है नाम
फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाता सूची से नाम हटाने के प्रमुख कारणों में—
- मतदाता की मृत्यु
- स्थायी रूप से अन्य स्थान पर स्थानांतरण
- किसी अन्य स्थान पर पहले से मतदाता के रूप में पंजीकरण
- भारतीय नागरिक न होना
- आयु संबंधी पात्रता पूरी न होना
शामिल हैं।
एसआईआर में इन विसंगतियों पर मिलेगी नोटिस
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार इस बार मतदाता सूची के वर्तमान विवरण का वर्ष 2003 की मूल मतदाता सूची और पूर्ववर्ती एसआईआर रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है। यदि किसी प्रकार का अंतर पाया जाता है तो संबंधित मतदाता को निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) की ओर से नोटिस भेजा जाएगा।
नोटिस मिलने पर मतदाता को स्वयं दस्तावेज प्रस्तुत कर यह साबित करना होगा कि दोनों अभिलेख उसी व्यक्ति से संबंधित हैं।
इन गलतियों पर विशेष नजर
निर्वाचन विभाग ने कुछ प्रमुख विसंगतियों को चिन्हित किया है, जिन पर विशेष जांच होगी—
- वर्ष 2003 और वर्तमान मतदाता सूची में नाम अथवा उपनाम की स्पेलिंग में अंतर।
- पुराने नाम में नया शब्द जुड़ जाना, जैसे पहले “शिव जोशी” और अब “शिव शंकर जोशी” होना।
- एक ही व्यक्ति के नाम से अत्यधिक संख्या में मतदाताओं का संबद्ध होना।
- मतदाता और उसके पिता की आयु में 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक का अंतर।
- दादा और पोते की आयु में 40 वर्ष से कम का अंतर।
- दो भाई-बहनों की आयु में नौ माह से कम का अंतर।
नोटिस का जवाब नहीं दिया तो कट सकता है वोट
निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि नोटिस मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति समय पर जवाब नहीं देता अथवा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करता, तो उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि बीएलओ को इन त्रुटियों को स्वयं सुधारने का अधिकार नहीं दिया गया है। मतदाता को स्वयं संबंधित एसडीएम कार्यालय पहुंचकर आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।
पहले दिन वितरित हुए ढाई लाख से अधिक गणना प्रपत्र
एसआईआर अभियान के पहले दिन शाम चार बजे तक राज्यभर में 2,55,269 गणना प्रपत्र वितरित किए गए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, सचिव निर्वाचन दिलीप जावलकर तथा अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने भी गणना प्रपत्र भरकर बीएलओ को सौंपे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी मतदाताओं से बीएलओ को सहयोग करने तथा गणना प्रपत्र के साथ नवीन पासपोर्ट आकार का फोटो उपलब्ध कराने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आठ जून से सात जुलाई तक चलने वाले घर-घर सत्यापन अभियान के दौरान मतदाताओं से किसी प्रकार का दस्तावेज जमा नहीं कराया जाएगा।
आशा कार्यकर्ताओं ने अतिरिक्त जिम्मेदारी लेने से किया इनकार
इस बीच देहरादून में आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने एसआईआर और राशन कार्ड सत्यापन कार्य करने से असमर्थता जताई है। आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता यूनियन की अध्यक्ष शिवा दूबे ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं पर पहले से डेंगू सर्वे, पोलियो अभियान और स्वास्थ्य विभाग की अन्य जिम्मेदारियों का दबाव है। ऐसे में अतिरिक्त कार्य करना संभव नहीं है।
तकनीकी चुनौतियों से भी जूझ रहे बीएलओ
राज्य के कई क्षेत्रों में बीएलओ को तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। हरिद्वार में मतदाता संख्या और डेटा विसंगतियों के बीच अंतर की समस्या सामने आई है, जबकि पौड़ी जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी ऑनलाइन कार्यों की गति को प्रभावित कर रही है। इसके अतिरिक्त कई मतदाताओं के पास आवश्यक फोटो या अद्यतन जानकारी उपलब्ध न होने से भी कार्य प्रभावित हो रहा है।
मतदाताओं से सहयोग की अपील
निर्वाचन विभाग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे एसआईआर अभियान को गंभीरता से लें, गणना प्रपत्र सही जानकारी के साथ भरें तथा किसी भी प्रकार की गलत जानकारी, तथ्य छिपाने या दोहरे पंजीकरण से बचें। विभाग का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही न केवल मताधिकार को प्रभावित कर सकती है, बल्कि कानूनी कार्रवाई का कारण भी बन सकती है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
