नवीन समाचार, देहरादून, 24 जुलाई 2026 (Police Constable Seen at Jantar Mantar)। उत्तराखंड (Uttarakhand) से जुड़ा एक मामला दिल्ली (New Delhi) के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) तक पहुंच गया है। छात्र आंदोलन के दौरान उत्तराखंड पुलिस (Uttarakhand Police) की वर्दी में मंच से भाषण देने वाले कांस्टेबल शेर सिंह (Sher Singh) का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि वह घटना से पहले ही निलंबित किया जा चुका था।
कुमाऊं परिक्षेत्र (Kumaon Range) की पुलिस महानिरीक्षक (Inspector General-IG) निवेदिता कुकरेती (Nivedita Kukreti) ने बताया कि शेर सिंह 20 जुलाई 2026 से निलंबित था और उसके विरुद्ध विभागीय बर्खास्तगी की कार्रवाई भी पहले से लंबित है। उन्होंने यह भी बताया कि वह एक संगठित भूमि कब्जा प्रकरण में आरोपित रह चुका है और इस मामले में जेल भी जा चुका है।
पुलिस के अनुसार शेर सिंह 28 जून 2026 से पिथौरागढ़ (Pithoragarh) में अपनी तैनाती से बिना अनुमति के अनुपस्थित था। उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि में कोई जवाब नहीं मिलने पर 20 जुलाई को उसके निलंबन की कार्रवाई की गई। ऐसे में जंतर-मंतर पर मंच से नौकरी छोड़ने की घोषणा से पहले ही वह विभागीय कार्रवाई का सामना कर रहा था।
छात्र आंदोलन के मंच से भर्ती परीक्षाओं पर उठाए सवाल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र आंदोलन के दौरान शेर सिंह ने मंच से भर्ती परीक्षाओं और व्यवस्था पर सवाल उठाए। अपने संबोधन में उसने कहा कि उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न हैं और युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है। इसी दौरान उसने राज्य की भर्ती व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “हमारे उत्तराखंड में परचून की दुकान पर पेपर मिलते हैं, परचून की दुकान पर पटवारी मिलते हैं।”
भाषण के दौरान उसने भगत सिंह का उल्लेख करते हुए युवाओं से संघर्ष का आह्वान भी किया और कहा कि यदि अधिकारों की लड़ाई लड़ना बगावत है तो वह स्वयं को बागी मानता है। अपने संबोधन के अंत में उसने मंच से उत्तराखंड पुलिस की नौकरी से इस्तीफा देने की घोषणा भी की।
पुलिस ने कहा- इस्तीफा नहीं, पहले से था निलंबित
वीडियो सामने आने के बाद कुमाऊं परिक्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक निवेदिता कुकरेती ने विस्तृत बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि शेर सिंह 28 जून से बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित था। पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police-SP) पिथौरागढ़ द्वारा जारी नोटिस का भी उसने कोई उत्तर नहीं दिया। इसके बाद 20 जुलाई 2026 को उसे निलंबित कर दिया गया।
आईजी ने कहा कि जंतर-मंतर पर दिया गया उसका बयान विभाग की दृष्टि में गंभीर है। वायरल वीडियो और उसमें दिए गए वक्तव्यों के संबंध में आवश्यक वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
भूमि कब्जा प्रकरण में भी रह चुका है आरोपी
आईजी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि शेर सिंह का आपराधिक इतिहास भी रहा है। उनके अनुसार वह प्रवीण वाल्मीकि (Praveen Valmiki) गिरोह से जुड़े एक संगठित भूमि कब्जा प्रकरण में आरोपी रहा है। हरिद्वार (Haridwar) के गंगनहर थाना (Gangnahar Police Station) में दर्ज प्राथमिकी संख्या 415/2025 की जांच उत्तराखंड विशेष कार्य बल (Special Task Force-STF) ने की थी।
एसटीएफ के अनुसार इस गिरोह पर लोगों को भयभीत कर करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि एवं पार्किंग ठेकों पर अवैध कब्जा करने, फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) और कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से संपत्तियों की खरीद-बिक्री करने जैसे आरोप हैं। जांच के दौरान हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी और भूमि कब्जे जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए थे।
पुलिस के अनुसार इसी प्रकरण में 15 सितंबर 2025 को शेर सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था। बाद में उसे जमानत मिल गई, लेकिन विभागीय स्तर पर उसके विरुद्ध बर्खास्तगी की प्रक्रिया जारी रही।
निलंबन के बाद भी वर्दी पहनकर मंच पर पहुंचा
पुलिस के अनुसार शेर सिंह के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई जारी रहने के बावजूद वह छात्र आंदोलन में उत्तराखंड पुलिस की वर्दी पहनकर मंच पर पहुंचा और सार्वजनिक रूप से संबोधन दिया। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लेते हुए उसके विरुद्ध अतिरिक्त विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।
जांच और कार्रवाई पर रहेगी नजर
फिलहाल पुलिस विभाग वायरल वीडियो, उसमें दिए गए वक्तव्यों तथा वर्दी के उपयोग से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहा है। विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं छात्र आंदोलन के दौरान दिए गए उसके बयानों को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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छात्र आंदोलन के मंच से भर्ती परीक्षाओं पर उठाए सवाल

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