नवीन समाचार, हल्द्वानी, 22 जुलाई 2026 (Mother 2 Sons Died in Water Tank)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल जनपद स्थित हल्द्वानी (Haldwani) के गौलापार क्षेत्र के मानपुर (Manpur) गांव में मंगलवार शाम एक हृदयविदारक दुर्घटना में मां और उसके दो बेटों की मृत्यु हो गई। निर्माणाधीन पानी के टैंक में उतरने के दौरान दम घुटने से तीनों अचेत हो गए। उन्हें तत्काल सुशीला तिवारी चिकित्सालय (Sushila Tiwari Hospital) पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम तथा तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
बेटों को बचाने के प्रयास में मां भी बनी हादसे का शिकार
जानकारी के अनुसार मानपुर गांव निवासी धर्मेंद्र सिंह बिष्ट (38) निर्माणाधीन पानी के टैंक में शटरिंग हटाने के लिए उतरे थे। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर उनके छोटे भाई खुशाल सिंह उन्हें देखने टैंक में गए, लेकिन वह भी बाहर नहीं लौटे।
दोनों बेटों के अंदर फंसे होने की आशंका पर उनकी 65 वर्षीय मां सरस्वती देवी बिना अपनी जान की परवाह किए उन्हें बचाने के लिए टैंक में उतर गईं। कुछ ही देर बाद वह भी अचेत हो गईं। तीनों को बाहर निकालकर चिकित्सालय ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
जहरीली गैस की आशंका, जांच जारी
ग्रामीणों के अनुसार टैंक लगभग 10 फुट लंबा, 10 फुट चौड़ा और 10 से 11 फुट गहरा है। उसके भीतर पानी और कीचड़ जमा था तथा निकास का केवल एक ही रास्ता था। टैंक के समीप गोबर गैस संयंत्र भी स्थित है, जिससे गैस रिसाव की आशंका जताई जा रही है। हालांकि प्रशासन ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।
पुलिस का कहना है कि मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विशेषज्ञों की जांच के बाद ही चल सकेगा।
12 वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में हो चुकी थी पिता की मृत्यु
परिवार पहले भी एक बड़ी त्रासदी झेल चुका है। लगभग 12 वर्ष पूर्व धर्मेंद्र और खुशाल के पिता भीम सिंह की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद सरस्वती देवी ने संघर्ष कर परिवार का पालन-पोषण किया।
धर्मेंद्र प्लंबर का कार्य करते थे और खेती में भी हाथ बंटाते थे, जबकि खुशाल सितारगंज स्थित एक निजी औद्योगिक इकाई में इलेक्ट्रिशियन के रूप में कार्यरत थे।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
धर्मेंद्र अपने पीछे पत्नी तथा एक पुत्र और एक पुत्री छोड़ गए हैं। खुशाल की शादी लगभग तीन वर्ष पूर्व हुई थी। उनका एक छोटा पुत्र है, जबकि उनकी पत्नी गर्भवती हैं। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मृत्यु से पूरे गांव में शोक का माहौल है।
ग्रामीणों ने की जांच और सहायता की मांग
ग्राम प्रधान उमा रैक्वाल और सामाजिक कार्यकर्ता नीरज रैक्वाल सहित ग्रामीणों ने घटना की निष्पक्ष जांच कराने तथा पीड़ित परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। देर रात तक बड़ी संख्या में ग्रामीण सुशीला तिवारी चिकित्सालय में मौजूद रहे।
बंद टैंक या कुएं में उतरते समय बरतें सावधानी
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक बंद रहे टैंक, कुएं, सीवर, सेप्टिक टैंक अथवा अन्य संकुचित स्थानों में ऑक्सीजन की कमी या जहरीली गैसें जमा हो सकती हैं। ऐसे स्थानों में बिना सुरक्षा उपकरण और गैस परीक्षण के प्रवेश करना जानलेवा हो सकता है। किसी व्यक्ति के फंसने की स्थिति में बिना तैयारी स्वयं अंदर उतरने के बजाय तत्काल अग्निशमन सेवा, आपदा प्रबंधन अथवा पुलिस की सहायता लेनी चाहिए।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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