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श्री बदरीनाथ मंदिर समिति के निलंबित कर्मी, ऋषिकेश-भानियावाला राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना व भाई के परिवार पर एसिड हमले के मामले में हाई कोर्ट से अपडेट

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श्री बदरीनाथ मंदिर समिति के निलंबित कर्मी की याचिका पर उच्च न्यायालय ने मांगा पक्ष, 16 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जुलाई 2026 (Nainital High Court News 10 July 2026)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम (Shri Badrinath Dham) में श्रद्धालुओं की थाली भेंट की गणना के दौरान कथित वित्तीय अनियमितता के आरोप में निलंबित श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (Shri Badrinath-Kedarnath Temple Committee) के कर्मचारी प्रमोद नौटियाल (Pramod Nautiyal) ने अपने निलंबन आदेश और उनके विरुद्ध दर्ज आपराधिक अभियोग को उच्च न्यायालय (High Court) में चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने मामले में मंदिर समिति से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। प्रकरण की अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 को होगी।

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Nainital High Court News 10 July 2026 बदरीनाथ धाम मामले में सख्ती, प्रमोद नौटियाल पर दर्ज हुआ मुकदमाप्राप्त जानकारी के अनुसार न्यायमूर्ति आलोक मेहरा (Justice Alok Mehra) की एकलपीठ ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति से अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

प्रारंभिक जांच में धनराशि उठाने का आरोप

मंदिर समिति के अनुसार 20 जून 2026 को सूचना मिली थी कि श्री बदरीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की थाली भेंट की गणना के दौरान वित्तीय अनियमितता हुई है। इसके बाद समिति के अध्यक्ष के निर्देश पर विभागीय जांच समिति गठित की गयी। समिति की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि कर्मचारी प्रमोद नौटियाल ने प्रातः लगभग 9 से 9:30 बजे के बीच थाली भेंट गणना स्थल से कथित रूप से अवैध रूप से धनराशि उठायी। इसके आधार पर मंदिर समिति ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने दर्ज किया अभियोग

मंदिर समिति के निर्देशों के क्रम में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के प्रभारी मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान (Yudhveer Pushpwan) ने श्री बदरीनाथ कोतवाली (Badrinath Police Station) में लिखित शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया। अब निलंबित कर्मचारी ने निलंबन आदेश तथा दर्ज अभियोग दोनों को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।


ऋषिकेश-भानियावाला राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना मामले में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को राहत, अवमानना याचिका खारिज

उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court) ने ऋषिकेश (Rishikesh)-भानियावाला (Bhaniyawala) चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना से जुड़े प्रकरण में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India-NHAI) के परियोजना निदेशक के विरुद्ध दायर अवमानना याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने किसी भी न्यायिक आदेश का उल्लंघन नहीं किया है और वर्तमान में परियोजना पर कोई अंतरिम रोक प्रभावी नहीं है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित (Justice Pankaj Purohit) की एकलपीठ ने की। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई पूर्व न्यायिक आदेशों का उल्लंघन है। न्यायालय ने यह तर्क स्वीकार नहीं किया।

पूर्व आदेशों का उल्लेख

न्यायालय ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि 9 जनवरी 2026 को संबंधित जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए स्पष्ट किया जा चुका है कि हाथी गलियारे (Elephant Corridor) से संबंधित विवाद का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) पहले ही कर चुका है। इसके बाद 18 मार्च 2026 को दायर स्पष्टीकरण याचिका पर भी न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि पेड़ों की कटाई पर लगायी गयी अंतरिम रोक आगे नहीं बढ़ायी गयी थी। इसलिए परियोजना पर कोई प्रभावी न्यायिक प्रतिबंध नहीं था।

4,639 पेड़ चिह्नित, 754 का प्रत्यारोपण

प्राधिकरण ने न्यायालय को बताया कि परियोजना के मार्ग में कुल 4,639 पेड़ चिह्नित हैं। इनमें से 754 पेड़ों को काटने के बजाय वैज्ञानिक पद्धति से अन्य स्थानों पर प्रत्यारोपित किया जाएगा। वन्यजीव संरक्षण के लिए हाथी अंडरपास, प्राकृतिक हरित अवरोध तथा विशेष चेतावनी संकेतक भी स्थापित किए जाएंगे।

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राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुसार इन उपायों की योजना वन विभाग (Forest Department), डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया (WWF India) तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) के विशेषज्ञों के सहयोग से तैयार की गयी है तथा सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां प्राप्त की जा चुकी हैं। यद्यपि कुछ पर्यावरणीय संगठन परियोजना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं, किन्तु उच्च न्यायालय द्वारा अवमानना याचिका खारिज किए जाने के बाद इस परियोजना से संबंधित अंतिम प्रमुख न्यायिक बाधा भी समाप्त हो गयी है।

भाई के परिवार पर एसिड हमला करने वाले दोषी की उम्रकैद बरकरार, हाईकोर्ट ने खारिज की अपील

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अल्मोड़ा निवासी रघुनाथ सिंह द्वारा अपने भाई के परिवार पर एसिड फेंकने के मामले में परीक्षण न्यायालय द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल रहा है तथा पीड़िता की मृत्यु एसिड हमले में आई गंभीर चोटों का प्रत्यक्ष परिणाम थी।

न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि एसिड हमले में गंभीर रूप से झुलसी जया देवी की उपचार के दौरान सेप्टिसीमिया से हुई मृत्यु एसिड से लगी चोटों के कारण ही हुई थी। ट्रायल कोर्ट ने रघुनाथ सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 326ए (एसिड हमला) और 504 (जानबूझकर अपमान) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास सहित अन्य सजाएं सुनाई थीं, जिन्हें उच्च न्यायालय ने भी यथावत रखा है।

मामला 10 सितंबर 2018 का है, जब अल्मोड़ा जनपद के राजस्व पुलिस क्षेत्र में पारिवारिक विवाद के दौरान रघुनाथ सिंह का अपने भाई शेर सिंह से विवाद हो गया था। आरोप है कि विवाद के बाद वह घर से एसिड से भरा कंटेनर और मग लेकर आया तथा अपने भाई के परिवार पर एसिड उड़ेल दिया। इस हमले में परिवार के कई सदस्य गंभीर रूप से झुलस गए थे।

गंभीर रूप से घायल जया देवी और नीमा देवी को उपचार के लिए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा गया, जहां 20 नवंबर 2018 को जया देवी की मृत्यु हो गई। इसके बाद निचली अदालत ने आरोपी को हत्या और एसिड हमले का दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई थी, जिसे अब उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है।

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