नवीन समाचार, बागेश्वर, 4 अगस्त 2026 (Leopard Kills Mother of 4 Children)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के बागेश्वर (Bageshwar) जनपद से राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। कांडा (Kanda) तहसील के बाझीरौठ-खड़खेत (Bazhirouth-Khadkhet) गांव में 48 वर्षीय महिला की गुलदार (Leopard) के हमले में मृत्यु हो गई। महिला गांव की पारंपरिक ‘बारी व्यवस्था’ के तहत 19 परिवारों के लगभग 50 मवेशियों को चराने जंगल गई थीं।
तेज वर्षा और घने कोहरे के बीच झाड़ियों में घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक उन पर हमला कर दिया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का वातावरण है और ग्रामीणों ने वन विभाग से हमलावर गुलदार को शीघ्र पकड़ने तथा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
पुलिस और वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार कांडा तहसील के बाझीरौठ-खड़खेत गांव निवासी कमला देवी (Kamla Devi) पत्नी पूरन राम (Pooran Ram) मंगलवार दोपहर लगभग तीन बजे गांव की बारी व्यवस्था के अनुसार जंगल में मवेशी चराने गई थीं। पर्वतीय क्षेत्रों में प्रचलित इस व्यवस्था के अंतर्गत गांव के परिवार बारी-बारी से पूरे गांव के मवेशियों की देखभाल करते हैं। मंगलवार को कमला देवी की बारी थी और वह 19 परिवारों के लगभग 50 से अधिक मवेशियों को लेकर जंगल पहुंची थीं। उनके साथ उनके पति पूरन राम और पड़ोसी पंकज राम (Pankaj Ram) भी मौजूद थे।
तेज बारिश और घने कोहरे का फायदा उठाकर किया हमला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के समय जंगल में तेज वर्षा हो रही थी और चारों ओर घना कोहरा छाया हुआ था, जिससे दृश्यता बहुत कम थी। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे गुलदार ने अचानक कमला देवी पर हमला कर दिया। खराब मौसम के कारण किसी को उसके आने का आभास तक नहीं हुआ। महिला की चीख सुनकर उनके पति और पड़ोसी मौके की ओर दौड़े। लोगों को आता देख गुलदार महिला को छोड़कर झाड़ियों की ओर भाग गया और घने कोहरे का लाभ उठाकर जंगल में ओझल हो गया।
हमले में कमला देवी के गाल, सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं। अत्यधिक रक्तस्राव और गहरे घावों के कारण उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई।
पुलिस और वन विभाग ने शुरू की जांच
घटना की सूचना क्षेत्र पंचायत सदस्य भगवान भंडारी (Bhagwan Bhandari) और ग्राम प्रधान प्रकाश राम (Prakash Ram) ने पुलिस को दी। सूचना मिलते ही कांडा थाना प्रभारी बलवंत कंबोज (Balwant Kamboj) पुलिस दल तथा वन विभाग के अधिकारियों के साथ घटनास्थल पहुंचे। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
थाना प्रभारी बलवंत कंबोज ने बताया कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह मामला गुलदार के हमले का प्रतीत होता है। हालांकि मृत्यु के कारणों की आधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही की जाएगी।
वन विभाग ने गश्त बढ़ाई, ग्रामीणों ने उठाई सुरक्षा की मांग
प्रभागीय वनाधिकारी (Divisional Forest Officer-DFO) आदित्य रत्न (Aditya Ratna) ने बताया कि घटना के बाद तत्काल आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यह खुला वन क्षेत्र है, जहां सामान्य परिस्थितियों में जंगली जानवरों द्वारा इस प्रकार के हमले कम होते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद बाझीरौठ-खड़खेत गांव में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की सक्रियता बनी हुई है। उन्होंने वन विभाग से प्रभावित क्षेत्र में नियमित गश्त, कैमरा ट्रैप (Camera Trap) लगाने, निगरानी बढ़ाने तथा हमलावर गुलदार को शीघ्र पकड़ने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
चार बच्चों का परिवार छोड़ गईं कमला देवी
कमला देवी अपने पीछे पति और चार बच्चों का परिवार छोड़ गई हैं। उनका बड़ा पुत्र बबलू कुमार (Bablu Kumar) विवाहित है और बाहर कार्य करता है। परिवार की दो बेटियों का विवाह हो चुका है, जबकि 23 वर्षीय छोटा पुत्र पुष्पेश कुमार (Pushpesh Kumar) अविवाहित है। घटना के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष की लगातार बढ़ती घटनाओं ने पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल से लगे गांवों में नियमित निगरानी, शीघ्र चेतावनी तंत्र और वन्यजीवों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
