नवीन समाचार, हल्द्वानी, 20 अगस्त 2026 (Haldwani-Dacoity As Police Officers)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) जनपद के हल्द्वानी (Haldwani) में बुधवार रात खुद को पुलिस की विशेष अभियान समूह (Special Operations Group-SOG) की टीम बताकर हथियारबंद बदमाशों ने एक कार्यालय में धावा बोलकर लगभग आठ लाख रुपये की धनराशि, सोने की चेन, अंगूठियां और 12 मोबाइल लूट लिये। बरेली रोड (Bareilly Road) के गोरापड़ाव (Gorapadao) क्षेत्र में हुई घटना के समय कार्यालय में कुछ कारोबारी और संपत्ति कारोबारी मौजूद थे। पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर चार अलग-अलग टीमें गठित कर दी हैं और सीसीटीवी फुटेज तथा निगरानी के माध्यम से उनकी तलाश की जा रही है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार गोरापड़ाव क्षेत्र में पुरानी कारों की बिक्री से संबंधित एक कार्यालय कुछ माह पहले शुरू हुआ था। बुधवार रात लगभग साढ़े सात बजे स्कॉर्पियो (Scorpio) और एक सफेद कार से आठ से 10 हथियारबंद लोग वहां पहुंचे। कुछ विवरणों में इनकी संख्या 10 से 12 बतायी गयी है। बदमाश कार्यालय में घुसे और वहां मौजूद लोगों पर हथियार तानकर खुद को पुलिस की विशेष अभियान समूह की टीम बताया। अचानक हुई कार्रवाई से वहां मौजूद लोगों ने इसे पुलिस की कार्रवाई समझकर तत्काल विरोध नहीं किया।
पुलिस टीम बताकर बनाया दबाव, फिर लूट लिये रुपये और गहने
बदमाशों ने कार्यालय में मौजूद लोगों को हथियारों के बल पर अपने नियंत्रण में लिया। इसके बाद वहां रखी धनराशि अपने कब्जे में ले ली और लोगों की जेबों की भी तलाशी ली। इनके हाथों से सोने की अंगूठियां और दो सोने की चेन भी उतरवा ली गयीं। बदमाश जाते समय वहां मौजूद लोगों के 12 मोबाइल फोन भी साथ ले गये। मोबाइल फोन ले जाने की आशंका यह है कि इससे पीड़ितों को तत्काल पुलिस को सूचना देने से रोका जा सके।
घटना के बाद बदमाश दोनों वाहनों से बरेली रोड की ओर फरार हो गये। पीड़ितों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लूटी गयी धनराशि लगभग आठ लाख रुपये बतायी गयी है। पुलिस अब वास्तविक धनराशि और अन्य लूटे गये सामान का विवरण भी दर्ज कर रही है।
कार्यालय में जुआ खेलने के दौरान हुई घटना
पुलिस के अनुसार घटना के समय कार्यालय में लगभग 10 लोग मौजूद थे और वहां ताश के माध्यम से जुआ खेला जा रहा था। बदमाशों ने इसी दौरान अचानक प्रवेश किया और हथियारों के बल पर सभी को घेर लिया। सूत्रों के अनुसार लूट का शिकार हुए लोगों में कारोबारी और संपत्ति कारोबारी भी शामिल हैं, जो गोरापड़ाव और हल्द्वानी क्षेत्र के रहने वाले हैं तथा अक्सर इस कार्यालय में एकत्र होते थे।
यह तथ्य भी जांच का हिस्सा है कि बदमाशों को कार्यालय में मौजूद लोगों और वहां रखी धनराशि की जानकारी कैसे मिली। पुलिस इस पहलू सहित घटना में किसी परिचित व्यक्ति की भूमिका की भी जांच कर सकती है।
सीसीटीवी फुटेज से वाहन का सुराग मिलने की बात
घटना की सूचना मिलते ही एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल (Manoj Kumar Katyal), क्षेत्राधिकारी (Circle Officer-CO) और कोतवाल मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पीड़ितों से जानकारी जुटायी। इसके बाद आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गयी।
पुलिस के अनुसार गोरापड़ाव से बरेली रोड और आसपास के मार्गों पर लगे कैमरों की फुटेज महत्वपूर्ण हो सकती है। प्रारंभिक जांच में एक कैमरे से बदमाशों के वाहन से संबंधित जानकारी मिलने की बात सामने आयी है। पुलिस इस सुराग के आधार पर वाहनों की पहचान और उनके आने-जाने के मार्ग की जानकारी जुटा रही है।
चार पुलिस टीमें तलाश में जुटीं
एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल ने बताया कि आरोपितों की तलाश के लिए चार अलग-अलग पुलिस टीमें गठित की गयी हैं। सर्विलांस (Surveillance) टीम भी क्षेत्र में सक्रिय है और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। पुलिस ने आसपास के थानों को भी सतर्क किया है ताकि संदिग्ध वाहनों और लोगों की जानकारी साझा की जा सके।
पुलिस के सामने अब बदमाशों की पहचान के साथ यह पता लगाने की चुनौती है कि उन्होंने खुद को एसओजी की टीम बताकर कार्यालय में प्रवेश करने की योजना कैसे बनायी। घटना में प्रयुक्त वाहनों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से पुलिस आरोपितों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
जुए के स्थान पर हथियारबंद लूट ने बढ़ाये कई प्रश्न
घटना में कार्यालय के भीतर जुआ खेले जाने की जानकारी भी सामने आयी है। यह पहलू पुलिस की जांच में अलग से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि लूट की घटना के आरोपितों की पहचान और उनकी भूमिका अभी पुलिस जांच का विषय है। किसी व्यक्ति को केवल घटनास्थल पर मौजूद होने के आधार पर आरोपित नहीं माना जा सकता।
घटना ने हल्द्वानी में कार्यालयों और निजी स्थानों पर नकदी लेकर बैठने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी प्रश्न खड़े किये हैं। साथ ही खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को भ्रमित करने की घटना यह बताती है कि किसी भी संदिग्ध पुलिस कार्रवाई की स्थिति में पहचान और वैधानिक प्रक्रिया की पुष्टि करना महत्वपूर्ण है।
पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि वारदात में शामिल लोगों की वास्तविक संख्या कितनी थी, उन्हें कार्यालय में मौजूद लोगों और धनराशि की जानकारी कैसे मिली, क्या घटना से पहले रेकी की गयी थी और क्या इसमें किसी परिचित व्यक्ति की भूमिका रही। फिलहाल पुलिस चार टीमों के माध्यम से आरोपितों की तलाश कर रही है और सीसीटीवी तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ायी जा रही है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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