नवीन समाचार, नैनीताल, 21 अगस्त 2026 (Nainital-Villages-Man-Wild Conflict)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल जनपद में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने इस वर्ष सर्वाधिक प्रभावित 109 गांवों को चिह्नित किया है। इन गांवों में गुणवत्तापूर्ण चैनलिंग फेंसिंग (Channeling Fencing) और पर्याप्त संख्या में सोलर लाइट (Solar Lights) लगाने का कार्य प्राथमिकता से कराया जा रहा है। इसके लिए जिला योजना के साथ खनन न्यास (Mining Trust) से 2.5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है, ताकि चिह्नित गांवों में शत-प्रतिशत सुरक्षा व्यवस्था पूरी की जा सके।
जिला प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल (Lalit Mohan Rayal) ने बताया कि पिछले वर्ष मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में जनपद में कई लोगों की जान गई और कई लोग घायल हुए। इसके साथ ही वन्यजीवों के कारण कृषि और बागवानी की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। नैनीताल जनपद कृषि और बागवानी के लिए महत्वपूर्ण होने के कारण किसानों की फसल तथा लोगों की जान-माल की सुरक्षा को प्रशासन ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
पिछले 5 से 10 वर्षों के आंकड़ों के आधार पर तय किए गए संवेदनशील गांव
जिलाधिकारी के अनुसार मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या वाले क्षेत्रों की पहचान के लिए वन विभाग (Forest Department), कृषि विभाग (Agriculture Department) और उद्यान विभाग (Horticulture Department) की संयुक्त टीम ने पिछले 5 से 10 वर्षों के दौरान हुई संघर्ष की घटनाओं का अध्ययन किया। इस अध्ययन के आधार पर रेड जोन (Red Zone) चिह्नित किए गए हैं।
इन क्षेत्रों में विशेष रूप से उन गांवों को प्राथमिकता दी गई है, जहां सघन खेती होती है और वन्यजीवों के हमले लगातार सामने आए हैं। इसी प्रक्रिया के आधार पर इस वर्ष संघर्ष से सर्वाधिक प्रभावित 109 गांवों का चयन किया गया है। प्रशासन का प्रयास है कि इन गांवों में लोगों और उनकी आजीविका को वन्यजीवों से होने वाले खतरे को कम करने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा उपाय किए जाएं।
फेंसिंग और सोलर लाइट के साथ जरूरत वाले स्थानों पर पिंजरे
चिह्नित 109 गांवों में गुणवत्तापूर्ण चैनलिंग फेंसिंग का कार्य युद्धस्तर पर कराया जा रहा है। इसके साथ ही पर्याप्त संख्या में सोलर लाइट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन का मानना है कि संवेदनशील गांवों में ऐसे उपायों से वन्यजीवों की आवाजाही और उनके कारण पैदा होने वाले जोखिम को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि जहां भी गांवों में वन्यजीवों के कारण जान-माल का खतरा है, वहां पिंजरे लगाने, सोलर लाइट लगाने और फेंसिंग करने के कार्य प्राथमिकता से किए जाएंगे। इसका उद्देश्य केवल तत्काल सुरक्षा देना नहीं, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आजीविका और लोगों के जीवन की सुरक्षा को मजबूत करना है।
खनन न्यास से मिले 2.5 करोड़ रुपये, शत-प्रतिशत कार्य पूरा करने का लक्ष्य
जिलाधिकारी ने बताया कि जिला योजना के अंतर्गत फेंसिंग और सोलर लाइट से संबंधित कार्यों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके अतिरिक्त खनन न्यास से 2.5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है। इस धनराशि का उपयोग चिह्नित गांवों में फेंसिंग और प्रकाश व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।
प्रशासन का लक्ष्य है कि सभी चिह्नित गांवों में शत-प्रतिशत फेंसिंग और सोलर लाइट का कार्य पूरा किया जा सके। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में काम को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां पिछले वर्षों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं अधिक हुई हैं और खेती तथा बागवानी को भी लगातार नुकसान पहुंचा है।
किसानों की फसल और लोगों की सुरक्षा पर प्रशासन का जोर
नैनीताल जनपद में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की आजीविका कृषि और बागवानी से जुड़ी है। ऐसे में वन्यजीवों से फसलों को होने वाला नुकसान केवल खेतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव ग्रामीण परिवारों की आय और आजीविका पर पड़ता है। वहीं आबादी वाले क्षेत्रों में वन्यजीवों की मौजूदगी लोगों के लिए सुरक्षा का प्रश्न भी बन जाती है।
जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री (Chief Minister) का भी कृषि और बागवानी को संरक्षण देने पर विशेष फोकस है। इसी के अनुरूप प्रशासन का उद्देश्य ऐसे गांवों में सुरक्षा के उपलब्ध उपायों को मजबूत करना है, जहां मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष का खतरा अधिक है।
109 संवेदनशील गांवों की पहचान, 2.5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि, चैनलिंग फेंसिंग, सोलर लाइट और आवश्यकता वाले स्थानों पर पिंजरे लगाने की योजना से प्रशासन ने मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था पर जोर दिया है। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि चिह्नित गांवों में ये सुरक्षा कार्य कितनी तेजी से और कितनी प्रभावी गुणवत्ता के साथ पूरे होते हैं और इससे ग्रामीणों तथा किसानों को जमीन पर कितना लाभ मिलता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
