काशीपुर के पृथ्वीराज चौहान नर्सिंग कॉलेज को उच्च न्यायालय से राहत, प्रमाणपत्र रद्द करने के आदेश पर रोक
नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अक्टूबर 2026 (Nainital Latest News 29 August 2026)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) ने ऊधमसिंह नगर जनपद के काशीपुर स्थित सम्राट पृथ्वीराज चौहान कॉलेज ऑफ नर्सिंग (Samrat Prithviraj Chauhan College of Nursing) को राहत देते हुए राज्य सरकार के छह अगस्त 2026 के उस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसके तहत कॉलेज का अनिवार्यता प्रमाणपत्र (Essentiality Certificate) निरस्त किया गया था।
न्यायालय ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग गठित किया है। इस मामले का प्रभाव कॉलेज में सामान्य नर्सिंग एवं प्रसूति प्रशिक्षण (GNM) और विज्ञान स्नातक नर्सिंग (BSc Nursing) की पढ़ाई कर रहे लगभग 90 विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित (Justice Pankaj Purohit) की एकलपीठ में सुनवाई के दौरान कॉलेज की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि शिकायत के आधार पर प्रमाणपत्र रद्द करने से पहले की गयी जांच रिपोर्ट कॉलेज के पक्ष में थी। इसके बावजूद प्रमाणपत्र निरस्त करने का आदेश मनमाने ढंग से पारित किया गया। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि आदेश जारी करने से पहले कॉलेज का पक्ष सुना गया था।
कॉलेज के निरीक्षण के लिए तीन सदस्यीय आयोग गठित
न्यायालय ने विवाद के तथ्यों की जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग गठित किया है। इसमें चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव विनय शंकर पांडे (Vinay Shankar Pandey), उप महाधिवक्ता बीएन मोलाखी (B.N. Molakhi) और अधिवक्ता आरसी टमटा (R.C. Tamta) शामिल हैं।
आयोग छह नवंबर 2026 को कॉलेज का निरीक्षण कर 25 नवंबर 2026 तक न्यायालय में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। तब तक राज्य सरकार के छह अगस्त के विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक रहेगी। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई भी 25 नवंबर के लिए निर्धारित की है।
फरसाली के जनता इंटर कॉलेज में शिक्षक भर्ती के लंबित आवेदनों पर एक माह में निर्णय लेने के निर्देश
बागेश्वर जनपद के फरसाली स्थित जनता इंटर कॉलेज (Janta Inter College, Farsali) में सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करने की अनुमति संबंधी लंबित आवेदनों पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को एक माह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिये हैं। न्यायालय ने प्रबंध समिति की याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि दोनों आवेदनों पर विधि के अनुसार निर्णय लिया जाए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने रिट याचिका संख्या 3309/2026 में यह आदेश दिया। सहायता प्राप्त जनता इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापक एलटी श्रेणी विज्ञान का पद 27 जनवरी 2026 और गणित का पद 26 मई 2026 को रिक्त हुआ था।
प्रबंध समिति ने विज्ञान के पद पर भर्ती का विज्ञापन जारी करने की अनुमति के लिए 20 फरवरी 2026 और गणित के पद के लिए 27 जून 2026 को मुख्य शिक्षा अधिकारी बागेश्वर के कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किये थे। समिति की ओर से कहा गया कि आवेदन लंबे समय से लंबित रहने के कारण शिक्षकों की कमी बनी हुई है और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
न्यायालय ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किये जाने की तिथि से एक माह के भीतर दोनों आवेदनों पर निर्णय लिया जाए। राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता देवेंद्र सिंह बोरा और अधिवक्ता प्रतिनिधि हरगोविंद पंत उपस्थित रहे।
दो पटाखा कारोबारियों को राहत, पुलिस द्वारा जब्त पटाखे तत्काल लौटाने के आदेश
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने दीपावली के लिए पटाखों का कारोबार करने वाले दो व्यापारियों को राहत देते हुए पुलिस द्वारा जब्त पटाखे तत्काल लौटाने के आदेश दिये हैं। न्यायमूर्ति आलोक महरा (Justice Alok Mahra) की एकलपीठ ने निचली अदालतों के आदेश निरस्त करते हुए कहा कि जब्त पटाखों को अनिश्चितकाल तक पुलिस अभिरक्षा में रखना उचित नहीं है, विशेषकर तब जब वे मौसमी कारोबार से जुड़े हों।
प्राप्त जानकारी के अनुसार याचिकाकर्ता विकास यादव और एक अन्य व्यापारी ने दीपावली के अवसर पर बिक्री के लिए पटाखे खरीदे थे। काशीपुर पुलिस ने 16 अक्टूबर 2025 को उनके गोदाम से पटाखे जब्त कर लिये थे। व्यापारियों का कहना था कि उन्हें 18 से 20 अक्टूबर 2025 तक पटाखे बेचने की अनुमति मिली थी और पुलिस ने अनुमति की अवधि प्रारंभ होने से दो दिन पहले ही माल जब्त कर लिया।
व्यापारियों ने जब्त पटाखे वापस लेने के लिए काशीपुर के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आवेदन किया था, लेकिन 18 अक्टूबर 2025 को आवेदन खारिज कर दिया गया। इसके बाद सत्र न्यायालय में दायर पुनरीक्षण याचिका भी 17 सितंबर 2026 को खारिज हो गयी।
उच्च न्यायालय ने पाया कि जब्त पटाखों की सूची, विवरण और संख्या का अभिलेख पुलिस के पास उपलब्ध है। ऐसे में केवल जब्ती के आधार पर पटाखों को अनिश्चितकाल तक पुलिस के पास रखना आवश्यक नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पटाखों के भंडारण, कब्जे और बिक्री से जुड़े सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य है। इसी आधार पर निचली अदालतों के आदेश निरस्त करते हुए पटाखे तत्काल लौटाने का निर्देश दिया गया।
सरकारी चिकित्सालयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और सुविधाओं की कमी पर स्वास्थ्य सचिव को चार माह की मोहलत
उत्तराखंड के सरकारी चिकित्सालयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से संबंधित जनहित याचिका का उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने निस्तारण कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी (Manoj Kumar Tiwari) और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Subhash Upadhyay) की खंडपीठ ने स्वास्थ्य सचिव को याचिकाकर्ता के लंबित प्रत्यावेदन पर चार माह के भीतर निर्णय लेकर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार हरिद्वार स्थित नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट (National Public Service Trust) ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि प्रदेश के सरकारी चिकित्सालयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पद स्वीकृत होने के बावजूद चिकित्सकों की तैनाती नहीं है। चिकित्सालयों में मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण भी मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
याचिका में वर्ष 2025-26 के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि छोटी-बड़ी बीमारियों से पीड़ित लगभग 52 हजार मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए संदर्भित किया गया। याचिका में डीडीहाट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को टॉर्च की रोशनी में देखने की स्थिति का भी उल्लेख किया गया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने न्यायालय को बताया कि चिकित्सालयों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किये जा रहे हैं। चिकित्सकों के रिक्त पदों को साक्षात्कार के माध्यम से भरने की प्रक्रिया चल रही है और मार्च तक चिकित्सकों की कमी दूर करने का लक्ष्य रखा गया है।
खंडपीठ ने स्वास्थ्य सचिव को याचिकाकर्ता के लंबित प्रत्यावेदन पर चार माह के भीतर निर्णय लेकर चिकित्सालयों की कमियां दूर करने के लिए उचित कदम उठाने के निर्देश दिये।
नैनीताल जनपद में पांच आरोपित छह माह के लिए जिला बदर
नैनीताल जनपद में कानून-व्यवस्था बनाये रखने और आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण के उद्देश्य से जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने पांच आरोपितों को छह माह के लिए जिला बदर करने के आदेश जारी किये हैं। संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध जुआ, मादक पदार्थ, शस्त्र और आबकारी कानूनों सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत होने की जानकारी दी गयी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला बदर किये गये व्यक्तियों में वसीम खान पुत्र रईस अहमद, निवासी बंबाघेर, रामनगर शामिल हैं। पुलिस अभिलेखों के अनुसार उनके विरुद्ध जुआ अधिनियम के छह, भारतीय दंड संहिता एवं भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत पांच तथा गैंगस्टर अधिनियम सहित दर्जनभर से अधिक अभियोग दर्ज बताये गये हैं।
इसी प्रकार रामनगर के चोरपानी स्थित शिवनगर कॉलोनी निवासी अनुज पुत्र रमेश चंद्र के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता के तीन और शस्त्र अधिनियम का एक अभियोग दर्ज है। बनभूलपुरा क्षेत्र निवासी फरहान उर्फ बीड़ी पुत्र मोबीन के विरुद्ध स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) के अंतर्गत अभियोग दर्ज हैं।
गौलापार के नवाड़खेड़ा निवासी रोहित आर्य पुत्र प्रेम राम के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता का एक और आबकारी अधिनियम के तीन अभियोग दर्ज हैं। वहीं कठघरिया के धचनी नंबर-1 निवासी अमर जोशी पुत्र भैरव दत्त जोशी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता के तीन अभियोग दर्ज हैं।
जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने संबंधित मामलों की विधिक प्रक्रिया के तहत सुनवाई के बाद पांचों को छह माह तक जनपद की सीमा से बाहर रहने के आदेश जारी किये हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य जनपद में सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था बनाये रखना तथा आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना है।
जन सुरक्षा के मद्देनजर शिव राम का शस्त्र लाइसेंस निरस्त
नैनीताल जनपद के धारी तहसील क्षेत्र के बबियाड़ निवासी शिव राम पुत्र स्वर्गीय पूरन राम का शस्त्र लाइसेंस जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने यह कार्रवाई शस्त्र के कथित दुरुपयोग से संबंधित मामले और जन सुरक्षा पर उसके संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकरण में आरोप है कि शिवराम के पुत्र ने उनके लाइसेंसी बंदूक में अनधिकृत तरीके से बारूद भरकर शिकायतकर्ता पर गोली चलायी थी, जिससे शिकायतकर्ता को चोट पहुंची। पुलिस जांच में सामने आये निष्कर्षों के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने मामले का परीक्षण किया और शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने का निर्णय लिया।
प्रशासन के अनुसार शस्त्र लाइसेंस जारी रखने की उपयुक्तता का आकलन करते समय सार्वजनिक सुरक्षा को महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। इस मामले में भी शस्त्र के दुरुपयोग की आशंका और जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लाइसेंस निरस्त किया गया है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।













