नवीन समाचार, देहरादून, 1 नवंबर 2026 (Haraks Alleged Wife Accused for Fraud)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून (Dehradun) में दोनों हाथ गंवा चुके दिव्यांग हरिओम सहगल ने कांग्रेस नेत्री जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद रावत पर भवन खरीदने के बाद शेष 43.20 लाख रुपये का भुगतान नहीं करने, चेक बाउंस होने और उन्हें अपने ही भवन से बेदखल करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। सहगल के अनुसार, वर्ष 2021 में भवन का सौदा 56 लाख रुपये में हुआ था, जबकि उस समय उसकी बाजार कीमत दो करोड़ रुपये से अधिक थी।
शिकायत मिलने के बाद देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने मामले की विस्तृत जांच एसपी सिटी शेखर चंद्र सुयाल को सौंपी है। दूसरी ओर सोनिया आनंद ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि वह भवन की पूरी रकम चुका चुकी हैं और अब सहगल उन्हें ब्लैकमेल कर रहे हैं।
2021 में हुआ था भवन का सौदा, भुगतान को लेकर विवाद
आरोपों के अनुसार, प्रेमनगर थाना क्षेत्र के कंडोली निवासी हरिओम सहगल का कहना है कि उन्होंने 21 जून 2021 को खुद को पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत की पत्नी बताने वाली जसबीर कौर आनंद को दो विक्रय पत्रों के माध्यम से अपना भवन बेचा था। शिकायतकर्ता का दावा है कि भवन की उस समय बाजार कीमत दो करोड़ रुपये से अधिक थी, जबकि सरकारी मूल्यांकन में भी इसकी कीमत 1.25 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई थी। इसके बावजूद सौदा 56 लाख रुपये में तय हुआ।
सहगल ने पुलिस में मीडिया के सामने बयान दिया कि वर्ष 2021 में हुए संपत्ति के सौदे के दौरान और उसके बाद जसवीर कौर आनंद (सोनिया आनंद रावत) ने खुद को पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की पत्नी बताया था। सहगल के अनुसार, उन्हें दो किस्तों में केवल 12.80 लाख रुपये मिले। इनमें 2.80 लाख और 10 लाख रुपये का भुगतान शामिल है। उनका आरोप है कि शेष 43.20 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया और शेष धनराशि के लिए दिए गए चेक भी बैंक में लगाने पर बाउंस हो गए।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि भवन की रजिस्ट्री में जिन चेकों का उल्लेख किया गया था, उनमें से कुछ चेक उनसे वापस ले लिए गए। बाद में भुगतान के लिए दिए गए एक चेक के खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण अगस्त 2021 में उसके बाउंस होने का दावा भी किया गया है।
नासिक की अदालत से उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा विवाद
हरिओम सहगल के अनुसार, भुगतान नहीं मिलने पर उन्होंने महाराष्ट्र के नासिक में चेक बाउंस से संबंधित कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। इस प्रकरण में आगे की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर उन्हें परेशानी हुई। वर्ष 2024 में उन्होंने उच्चतम न्यायालय का रुख किया और मामले को देहरादून स्थानांतरित कराने के लिए याचिका दाखिल की।
सहगल ने भवन के विक्रय पत्र निरस्त कराने के लिए भी न्यायालय में दो वाद लंबित होने की बात कही है। इन न्यायिक प्रक्रियाओं की वर्तमान स्थिति और संबंधित आदेशों का स्वतंत्र सत्यापन होना अभी आवश्यक है।
शिकायतकर्ता ने यह आरोप भी लगाया है कि भवन को मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने वर्ष 2018 में सील किया था। इसके बावजूद सील हटाकर भवन का उपयोग किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाए हैं। इस संबंध में सील हटाने की अनुमति और भवन की वर्तमान कानूनी स्थिति की जांच भी मामले का महत्वपूर्ण पहलू हो सकती है।
2022 में बेदखल करने और धमकाने का आरोप
हरिओम सहगल का आरोप है कि वर्ष 2022 में उन्हें उनके भवन से जबरन बाहर कर दिया गया और दूसरे पक्ष ने संपत्ति पर कब्जा कर लिया। उन्होंने मारपीट और जान से मारने की धमकी दिए जाने के आरोप भी लगाए हैं।
सहगल का कहना है कि दोनों हाथ नहीं होने के कारण उनके लिए सामान्य जीवन और कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पहले से कठिन है। भवन से बेदखल होने के बाद उन्होंने अपने सामने गंभीर आर्थिक और आवास संबंधी समस्याएं आने की बात कही है।
इन आरोपों की पुष्टि अभी पुलिस जांच और संबंधित दस्तावेजों से होनी है। किसी पक्ष पर लगाए गए आरोप अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं हैं।
सोनिया आनंद ने आरोपों को नकारा, भुगतान के दस्तावेज होने का दावा
दूसरी ओर, जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद ने मीडिया से बातचीत में सहगल के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि भवन के सौदे की पूरी रकम संबंधित व्यक्ति और उसकी पत्नी को दी जा चुकी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सहगल पर कुछ अन्य लोगों का लगभग सात लाख रुपये का बकाया था, जिसे उन्होंने चुकाया था।
सोनिया आनंद ने सहगल पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया और कहा कि उनके पास भुगतान से संबंधित दस्तावेज हैं। उन्होंने पुलिस जांच में सहयोग करने तथा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात भी कही है।
सोनिया आनंद ने इस मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित विवाद बताया है। उनके अनुसार, यदि जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं की गई तो वह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर भूख हड़ताल करेंगी। उनके इन दावों की भी जांच में पुष्टि होनी बाकी है।
एसएसपी ने एसपी सिटी को सौंपी विस्तृत जांच
शिकायत के बाद देहरादून के एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने पूरे प्रकरण की जांच एसपी सिटी को सौंपी है। पुलिस के अनुसार, भवन की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों, भुगतान के विवरण और चेक बाउंस होने के आरोपों की जांच की जाएगी। साथ ही, भवन से बेदखल किए जाने और धमकी दिए जाने संबंधी शिकायतों की भी जांच के दायरे में आने की संभावना है।
एसएसपी ने कहा है कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति की राजनीतिक पहचान कानून के तहत होने वाली कार्रवाई में बाधा नहीं बनेगी।
अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि भवन के सौदे के समय भुगतान की क्या शर्तें तय हुई थीं, कितनी रकम वास्तव में चुकाई गई, कथित बकाया राशि और चेक बाउंस होने के दावों में कितनी सच्चाई है तथा भवन के कब्जे और सील से संबंधित विवाद की वास्तविक स्थिति क्या है। दोनों पक्षों के दस्तावेजों और न्यायालयों में लंबित मामलों के आधार पर ही आगे की कानूनी दिशा तय होगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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