एशियाई वोविनाम चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में चुने गये नैनीताल के सागर अधिकारी, आर्थिक सहायता मांगी
नवीन समाचार, नैनीताल, 31 अक्टूबर 2026 (Nainital Latest News 31 October 2026)। नैनीताल (Nainital) के वोविनाम खिलाड़ी सागर सिंह अधिकारी (Sagar Singh Adhikari) का कंबोडिया (Cambodia) में 24 से 30 नवंबर तक आयोजित होने वाली छठी एवीएफ एशियाई वोविनाम चैंपियनशिप-2026 (6th AVF Asian Vovinam Championship) के लिए भारतीय टीम में चयन हुआ है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे सागर और उनके परिजनों ने वोविनाम एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के पदाधिकारियों तथा प्रशिक्षक के साथ खेल मंत्री रेखा आर्य से मुलाकात कर आर्थिक सहायता मांगी है। खेल मंत्री ने हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वोविनाम एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष ऋषि पाल भारती, उपाध्यक्ष एवं तकनीकी निदेशक देवेंद्र सिंह रावत और प्रशिक्षक विनोद वैद्य ने सागर के चयन को प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। सागर का चयन सीनियर वर्ग के 50 किलोग्राम से कम भार वर्ग में हुआ है। प्रतियोगिता कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह (Phnom Penh) में आयोजित होगी।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण जीतकर बनाया भारतीय टीम में स्थान
सागर ने हाल ही में जम्मू में आयोजित 15वीं राष्ट्रीय वोविनाम चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक प्राप्त किया था। इसी प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन एशियाई प्रतियोगिता के लिए भारतीय टीम में हुआ है।
वोविनाम वियतनाम की पारंपरिक युद्धकला (Martial Art) है, जिसमें शारीरिक दक्षता, तकनीक, अनुशासन और आत्मरक्षा के कौशल का प्रदर्शन किया जाता है।
सागर ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक जीतना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और खेल मंत्री का सहयोग मिला तो वह एशियाई प्रतियोगिता में भी स्वर्ण पदक जीतने का पूरा प्रयास करेंगे।
आर्थिक कठिनाई के कारण अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागिता को लेकर चिंता
सागर के परिजनों और संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जाने के लिए यात्रा, आवास, भोजन और अन्य आवश्यक खर्चों की व्यवस्था करना उनके लिए कठिन हो रहा है। इसी कारण उन्होंने खेल मंत्री के समक्ष आर्थिक सहायता का अनुरोध रखा।
खेल मंत्री रेखा आर्य ने खिलाड़ी की उपलब्धि और चयन की सराहना करते हुए हरसंभव आर्थिक सहयोग का आश्वासन दिया। मंत्री के आश्वासन से सागर और उनके परिवार का मनोबल बढ़ा है। अब उनका ध्यान कंबोडिया में होने वाली प्रतियोगिता की तैयारी पर केंद्रित है।
राष्ट्रीय एकता दिवस की परेड में अग्रिम पंक्ति में रहीं कुमाऊं विश्वविद्यालय की कैडेट पायल जलाल
कुमाऊं विश्वविद्यालय (Kumaun University) के डीएसबी परिसर की राष्ट्रीय कैडेट कोर (National Cadet Corps—NCC) कैडेट पायल जलाल ने राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय और उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया है। गुजरात के एकता नगर (Ekta Nagar), केवड़िया में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह के लिए चयनित राष्ट्रीय एनसीसी दल में शामिल पायल ने शनिवार, 31 अक्टूबर को आयोजित अंतिम परेड में अग्रिम पंक्ति में रहकर मार्च पास्ट किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह राष्ट्रीय समारोह भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) परिसर में आयोजित किया गया। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से चयनित एनसीसी कैडेटों ने भाग लिया। कैडेटों की अनुशासित कदमताल, आपसी समन्वय और राष्ट्र के प्रति समर्पण ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की।
अग्रिम पंक्ति में स्थान मिलना बनी उपलब्धि
राष्ट्रीय दल की अंतिम परेड में अग्रिम पंक्ति में स्थान प्राप्त करना पायल जलाल के लिए विशेष उपलब्धि है। यह उनके कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन, आत्मविश्वास और समर्पण को दर्शाता है। राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित आयोजन में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने से विश्वविद्यालय परिवार में भी प्रसन्नता है।
कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (कर्नल) सतपाल सिंह बिष्ट और कुलसचिव प्रो. (लेफ्टिनेंट) रितेश साह ने पायल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित आयोजनों में सहभागिता करना गौरव का विषय है। एनसीसी युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, राष्ट्रप्रेम और सेवा भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस अवसर पर एनसीसी के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन मृदुल शाह, कार्यकारी अधिकारी राकेश रावत, परिसर निदेशक प्रो. संजय पंत, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. चंद्रकला रावत और शिक्षा संकाय के अधिष्ठाता प्रो. ललित तिवारी ने भी पायल को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि उनकी उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों को भी एनसीसी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी।
18 देशों में 14 हजार किलोमीटर पैदल यात्रा कर नैनीताल पहुंचे स्विट्जरलैंड के बेन बाबा
स्विट्जरलैंड (Switzerland) के बेंजामिन वियात्ते (Benjamin Viatte), जिन्हें बेन बाबा और वॉकिंग बाबा (Walking Baba) के नाम से जाना जाता है, इन दिनों नैनीताल पहुंचे हैं। विभिन्न देशों की संस्कृति, परंपराओं, प्राकृतिक सुंदरता और जीवनशैली को करीब से समझने के उद्देश्य से उन्होंने लगभग 14 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा की है। उनकी इस यात्रा में 18 देश शामिल रहे हैं। नैनीताल के शांत वातावरण ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बेन बाबा ने लगभग दस वर्ष पहले स्विट्जरलैंड से अपनी लंबी तीर्थयात्रा शुरू की थी। उनके लिए यह यात्रा केवल अलग-अलग देशों और पर्यटन स्थलों को देखना नहीं, बल्कि स्वयं को समझने, मन में चल रहे विचारों को शांत करने और आंतरिक शांति की तलाश का माध्यम रही है।
उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, तुर्की, ईरान, पाकिस्तान, चीन, नेपाल और भारत सहित 18 देशों की यात्राओं के दौरान उन्हें अलग-अलग समाजों की संस्कृति, परंपराओं, रहन-सहन और जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर मिला। इस यात्रा का बड़ा हिस्सा उन्होंने पैदल तय किया।
बाहरी दुनिया के साथ भीतर की शांति भी जरूरी
बेन बाबा ने बताया कि भारत में उन्होंने बनारस, लेह-लद्दाख और उत्तर भारत के कई धार्मिक तथा पर्यटन स्थलों की यात्रा की है। इन यात्राओं से उन्हें भारतीय परंपराओं और आध्यात्मिक वातावरण को समझने का अवसर मिला।
नैनीताल पहुंचने पर उन्होंने कहा कि यहां का वातावरण बेहद शांत और सुकून देने वाला है। सरोवर नगरी में आकर उन्हें मन की शांति का अनुभव हुआ है। उनके अनुसार बाहरी दुनिया में कितना भी कुछ देखने और अनुभव करने को मिले, लेकिन व्यक्ति के भीतर शांति होना सबसे अधिक जरूरी है। इसके लिए स्वयं को समझना और सकारात्मक प्रेरणा प्राप्त करना आवश्यक है।
दुनिया में प्रेम और सद्भाव से रहने का संदेश
विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे युद्ध और संघर्षों पर बेन बाबा ने कहा कि लड़ाई करने से किसी को कोई लाभ नहीं होता। सभी लोगों को आपसी प्रेम और सद्भाव के साथ रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति हिंदू, मुस्लिम, ईसाई या किसी भी धर्म का हो, सभी को एक-दूसरे के प्रति प्रेम रखना और दुनिया में शांति बनाये रखने का प्रयास करना चाहिए।
बेन बाबा की यात्रा और उनके अनुभव इस वर्ष नैनीताल में आयोजित हिमालयन इकोज (Himalayan Echoes) के 11वें संस्करण के संदर्भ में भी विशेष आकर्षण रहे हैं। 30 और 31 अक्टूबर को आयोजित इस महोत्सव में विभिन्न देशों के प्रतिभागी हिमालय की संस्कृति, साहित्य, पर्यावरण और पर्वतीय जीवन पर संवाद कर रहे हैं।
पीपल के संरक्षण के लिए 50 वर्षों से जुटे हैं पीपल बाबा, देशभर में 400 पौधशालाओं से चला रहे अभियान
पर्यावरण संरक्षण और पीपल के पौधों के संरक्षण के लिए पिछले लगभग 50 वर्षों से कार्य कर रहे स्वामी प्रेम परिवर्तन (Swami Prem Parivartan) को देश और दुनिया में पीपल बाबा (Peepal Baba) के नाम से जाना जाता है। पीपल के पेड़ को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और इतिहास से जोड़कर देखने वाले पीपल बाबा का कहना है कि यह केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि प्रकृति और असंख्य जीव-जंतुओं के लिए एक संपूर्ण संसार है। वह देशभर में 400 पौधशालाओं के माध्यम से पीपल के पौधों का संरक्षण और पौधरोपण अभियान चला रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पीपल बाबा ने बताया कि अब तक देश के 226 जनपदों में उनके अभियान के माध्यम से काम किया जा चुका है। उनके अनुसार इस अभियान से देशभर में लगभग चार लाख लोग जुड़े हैं और अब तक दो करोड़ से अधिक पीपल के पौधे लगाये जा चुके हैं। इनमें से सत्यापन के बाद लगभग एक करोड़ 27 लाख पेड़ों के जीवित रहने की पुष्टि हुई है।
पीपल को लेकर प्रचलित भ्रांतियां दूर करने का प्रयास
पीपल बाबा के अनुसार समाज में पीपल के पेड़ को लेकर कई तरह की भ्रांतियां प्रचलित हैं। अक्सर लोग मानते हैं कि पीपल के पेड़ में भूत-प्रेत का वास होता है, जबकि इसका कोई आधार नहीं है। पीपल भारतीय परंपरा, धार्मिक मान्यताओं और इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
उन्होंने कहा कि लोगों को पीपल से जुड़ी कहानियों और परंपराओं के माध्यम से इसके महत्व के बारे में समझाना आसान होता है। इसी उद्देश्य से लोगों को पीपल के पौधे लगाने, उनकी देखभाल करने और संरक्षण के लिए जागरूक किया जा रहा है।
अंग्रेजी के अध्यापक से पर्यावरण संरक्षण के बड़े अभियान तक का सफर
पीपल बाबा ने बताया कि वह पेशे से अंग्रेजी के अध्यापक हैं, लेकिन पेड़-पौधे लगाना बचपन से ही उनका शौक रहा है। यही शौक धीरे-धीरे पर्यावरण संरक्षण के बड़े अभियान में बदल गया। उनकी संस्था ‘गिव मी ट्रीज ट्रस्ट’ (Give Me Trees Trust) भी पौधरोपण और वृक्ष संरक्षण के कार्यों से जुड़ी है।
उनका कहना है कि पौधे लगाना केवल एक दिन का काम नहीं है। पौधों की देखभाल और उनका संरक्षण निरंतर चलने वाली जिम्मेदारी है। केवल पौधे लगा देना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके बड़े होने और जीवित रहने तक उनकी देखभाल भी आवश्यक है।
युवाओं से प्रकृति के लिए समय निकालने की अपील
पीपल बाबा ने युवाओं से कहा कि वे पढ़-लिखकर अपना भविष्य बनाएं और उच्च पदों तक पहुंचें, लेकिन इसके साथ प्रकृति के लिए भी कुछ समय अवश्य निकालें। उन्होंने कहा कि हवा, पानी, मिट्टी और पेड़-पौधे ही वास्तविक सनातन हैं। प्रकृति का संरक्षण हमारी परंपरा और जीवन का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कुछ समय पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित करे तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर और स्वच्छ वातावरण तैयार किया जा सकता है।
पीपल बाबा की यह पहल हिमालयन इकोज जैसे आयोजनों में पर्यावरण संरक्षण और पर्वतीय पारिस्थितिकी पर होने वाले विमर्श को भी एक व्यावहारिक दिशा देती है। उनका प्रयास बताता है कि प्रकृति के संरक्षण के लिए व्यक्तिगत रुचि को सामुदायिक अभियान में बदला जा सकता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
