नवीन समाचार, देहरादून, 29 अगस्त 2026 (Biogas Plants in all Urban Local Body)। उत्तराखंड (UTTARAKHAND) में शहरी कचरे के निस्तारण के लिए नई व्यवस्था की दिशा में काम शुरू किया जा रहा है। राज्य के प्रत्येक नगर निकाय क्षेत्र में गीले और जैविक कचरे से बायोगैस तथा कंप्रेस्ड बायोगैस (Compressed Bio Gas-CBG) तैयार करने के लिए संयंत्र स्थापित करने की योजना है। राज्य के शहरी क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 1,984 टन ठोस कचरा निकलता है, जिसमें लगभग 702 टन गीला और 650 टन सूखा कचरा शामिल है। योजना लागू होने पर गीले कचरे से गैस और खाद तैयार करने के साथ कचरे के ढेरों तथा लैंडफिल (Landfill) पर दबाव कम करने में सहायता मिलने की संभावना है।
शहरी विकास निदेशक (Director Urban Development) विनोद गिरी गोस्वामी (Vinod Giri Goswami) के अनुसार घरों, होटलों, बाजारों, सब्जी मंडियों और अन्य स्थानों से निकलने वाले गीले एवं जैविक कचरे का उपयोग सीबीजी संयंत्रों में किया जाएगा। कचरे से तैयार गैस को साफ कर कंप्रेस्ड बायोगैस बनाई जाएगी, जबकि प्रक्रिया के बाद बचे जैविक पदार्थ से खाद भी तैयार की जा सकेगी।
गीले कचरे से गैस और खाद बनाने की तैयारी
उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों से प्रतिदिन निकलने वाले ठोस कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए नगर निकायों में स्थानीय स्तर पर सीबीजी संयंत्र स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य गीले कचरे को सीधे उपयोगी संसाधन में बदलना है।
घर, होटल, बाजार और सब्जी मंडियों से निकलने वाले जैविक कचरे को एकत्र कर सीबीजी संयंत्र तक पहुंचाया जाएगा। वहां निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से गैस तैयार होगी और उसे शुद्ध करने के बाद कंप्रेस्ड बायोगैस के रूप में उपयोग किया जा सकेगा।
लैंडफिल पर कम होगा दबाव
योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य लैंडफिल स्थलों पर पहुंचने वाले कचरे की मात्रा कम करना भी है। वर्तमान में बड़ी मात्रा में गीला कचरा अन्य ठोस कचरे के साथ निस्तारण स्थलों तक पहुंचता है।
यदि गीले कचरे का स्थानीय स्तर पर उपयोग कर गैस और खाद तैयार की जाती है, तो नगर निकायों को कचरे के निस्तारण में सुविधा मिल सकती है। इससे जैविक कचरे को उपयोगी उत्पाद में बदलने की व्यवस्था विकसित होगी।
प्रक्रिया के बाद बचने वाले जैविक पदार्थ से खाद तैयार करने की भी योजना है। इससे कचरे के निस्तारण के साथ उपयोगी जैविक उत्पाद तैयार किया जा सकेगा।
राज्य में रोज निकलता है 650 टन सूखा कचरा
उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 650 टन सूखा कचरा भी निकलता है। इसमें कागज, प्लास्टिक, धातु, कांच और अन्य सामग्री शामिल होती है।
राज्य सरकार ने पहले सूखे कचरे से बिजली उत्पादन की योजना पर भी विचार किया था। हालांकि पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली संयंत्र की आवश्यकता के अनुरूप एक स्थान पर लगातार पर्याप्त मात्रा में सूखा कचरा उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है।
सूखे कचरे को राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से एक स्थान तक पहुंचाने में परिवहन पर भी अधिक खर्च होने की संभावना है। इसी कारण पर्याप्त मात्रा में सूखा कचरा निकलने के बावजूद कचरे से बिजली उत्पादन की योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।
देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में उपलब्ध होगा पर्याप्त गीला कचरा
राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में गीले कचरे की मात्रा सीबीजी संयंत्रों के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देहरादून (DEHRADUN) में प्रतिदिन लगभग 258 टन गीला कचरा निकलता है।
हरिद्वार (HARIDWAR) में प्रतिदिन लगभग 155 टन और ऊधम सिंह नगर (UDHAM SINGH NAGAR) में लगभग 121 टन गीला कचरा निकलता है। इन क्षेत्रों में गीले और जैविक कचरे की उपलब्धता सीबीजी संयंत्रों के संचालन के लिए पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध करा सकती है।
स्थानीय स्तर पर कचरे के उपयोग पर रहेगा जोर
सूखे कचरे से बिजली उत्पादन के लिए बड़ी मात्रा में कचरे को एक स्थान पर पहुंचाने की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत गीले कचरे से सीबीजी तैयार करने वाले संयंत्र स्थानीय स्तर पर स्थापित किये जा सकते हैं।
इससे नगर निकाय अपने क्षेत्र में निकलने वाले गीले कचरे का वहीं उपयोग कर सकेंगे और उसे लंबी दूरी तक पहुंचाने की आवश्यकता कम होगी। योजना से परिवहन और निस्तारण की व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाने की संभावना है।
शहरी विकास निदेशक विनोद गिरी गोस्वामी ने कहा कि नगर निकायों में सीबीजी संयंत्र लगाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। घरों, बाजारों, होटलों और मंडियों से निकलने वाले गीले तथा जैविक कचरे का उपयोग कर सीबीजी तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे कचरे का निस्तारण होगा, लैंडफिल पर दबाव कम होगा और प्रक्रिया के बाद बचने वाले जैविक पदार्थ से खाद भी तैयार की जा सकेगी।
उत्तराखंड में प्रत्येक नगर निकाय क्षेत्र में गीले कचरे से बायोगैस और सीबीजी तैयार करने की योजना शहरी स्वच्छता तथा कचरा प्रबंधन की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। राज्य में प्रतिदिन निकलने वाले 702 टन गीले कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की यह पहल सफल रही तो नगर निकायों में कचरे के निस्तारण, जैविक खाद के उत्पादन और लैंडफिल पर दबाव कम करने की दिशा में नई व्यवस्था विकसित हो सकेगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
