गढ़वाली-कुमाउनी के साथ संस्कृत में क्रिकेट कमेंट्री: एक नया और अनूठा प्रयास, जानें किन शब्दों का होगा प्रयोग…

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नवीन समाचार, देवप्रयाग, 14 मार्च 2025 (Cricket Commentary in Sanskrit-Garhwali-Kumauni)। क्रिकेट की कमेंट्री यानी ‘आँखों देखाहाल’ सामान्यतया हिंदी और अंग्रेजी में सुनी जाती है, लेकिन अब संस्कृत में भी इसकी रोमांचक शुरुआत हो गई है। श्री रघुनाथ कीर्ति संस्कृत विश्वविद्यालय देवप्रयाग में आयोजित विश्वविद्यालय क्रिकेट प्रतियोगिता में इन दिनों संस्कृत भाषा में कमेंट्री की जा … Read more

Nanda Devi Mahotsav : पुष्पवर्षा के बीच मायके से विदा हुईं माता नंदा-सुनंदा…

Nanda Devi Mahotsav

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उत्तराखण्ड की पत्रकारिता का इतिहास

Vishesh Aalekh Special Article Navin Samachar

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल (History of Journalism in Uttarakhand)। आदि-अनादि काल से वैदिक ऋचाओं की जन्मदात्री उर्वरा धरा रही देवभूमि उत्तराखण्ड में पत्रकारिता का गौरवपूर्ण अतीत रहा है। कहते हैं कि यहीं ऋषि-मुनियों के अंतर्मन में सर्वप्रथम ज्ञानोदय हुआ था। बाद के वर्षों में आर्थिक रूप से पिछड़ने के बावजूद उत्तराखंड बौद्धिक सम्पदा के मामले में हमेशा समृद्ध रहा। शायद यही कारण हो कि आधुनिक दौर के ‘जल्दी में लिखे जाने वाले साहित्य की विधा-पत्रकारिता’ का बीज देश में अंकुरित होने के साथ ही यहां के सुदूर गिरि-गह्वरों तक भी विरोध के स्वरों के रूप में पहुंच गया।

Gumani Pant or Lokratn or Loknath | Biography | Real Name | Poems | गुमानी  पंत व लोकरत्न व लोकनाथ | जीवनी | परिचय | रचनाएँकुमाउनी के आदि कवि गुमानी पंत (जन्म 1790-मृत्यु 1846, रचनाकाल 1810 ईसवी से) ने अंग्रेजों के यहां आने से पूर्व ही 1790 से 1815 तक सत्तासीन रहे महा दमनकारी गोरखों के खिलाफ कुमाउनी के साथ ही हिंदी की खड़ी बोली में कलम चलाकर एक तरह से पत्रकारिता का धर्म निभाना प्रारंभ कर दिया था। इस आधार पर उन्हें अनेक भाषाविदों के द्वारा उनके स्वर्गवास के चार वर्ष बाद उदित हुए ‘आधुनिक हिन्दी के पहले रचनाकार’ भारतेंदु हरिश्चंद्र (जन्म 1850-मृत्यु 1885) से आधी सदी पहले का पहला व आदि हिंदी कवि भी कहा जाता है।

हालांकि समाचार पत्रों का प्रकाशन यहां काफी देर में 1842 में अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित ‘द हिल्स’ नामक उत्तरी भारत के पहले समाचार पत्र के साथ शुरू हुआ, लेकिन 1868 में जब भारतेंदु हिंदी में लिखना प्रारंभ कर रहे थे, नैनीताल से ‘समय विनोद’ नामक पहले देशी (हिंदी-उर्दू) पाक्षिक पत्र ने प्रकाशित होकर एक तरह से हिंदी पत्रकारिता का छोर शुरू में ही पकड़ लिया। यह संयोग ही है कि आगे 1953 में उत्तराखंड का पहला हिंदी दैनिक अखबार ‘पर्वतीय’ भी नैनीताल से ही प्रकाशित हुआ।

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Narendra Negi Dinesh Shashtriनवीन समाचार, देहरादून, 10 जनवरी 2022। विनसर प्रकाशन के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर मातृभाषा गढ़वाली के लेखकों की आज राजधानी में एक गोष्ठी आयोजित की गयी। गोष्ठी में गढवाली में प्रकाशित प्राथमिक कक्षाओं के पाठ्यक्रम की पुस्तकों धगुलि, हंसुली, छुबकी, पैजनी और झुमकी के लेखकों तथा इन पुस्तकों में चित्रांकन करने वाले चित्रकारों ने प्रतिभाग किया। गोष्ठी में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी द्वारा हिंदी एवं अंग्रेजी में प्रकाशित उत्तराखंड ईयर बुक 2022 जारी की गई।

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