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देश की 196 भाषाओं के साथ कुमाउनीं व गढ़वाली भी खतरे की जद में

      more हिमालयी राज्यों की भाषाओं को है अधिक खतरा यूनेस्को ने उत्तराखण्ड की ‘रांग्पो’ को भेद्य तथा ‘दारमा’ व ‘ब्योंग्सी’ को निश्चित व ‘वांगनी’ को अति गम्भीर खतरे में माना नवीन जोशी, नैनीताल। भाषाओं को न केवल संवाद का माध्यम वरन संस्कृतियों का संवाहक भी माना जाता है। किसी देश की शक्ति उसकी भाषा की प्राचीनता के […]

Journalism

उत्तराखण्ड की पत्रकारिता का इतिहास

      moreडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल। आदि-अनादि काल से वैदिक ऋचाओं की जन्मदात्री उर्वरा धरा रही देवभूमि उत्तराखण्ड में पत्रकारिता का गौरवपूर्ण अतीत रहा है। कहते हैं कि यहीं ऋषि-मुनियों के अंतर्मन में सर्वप्रथम ज्ञानोदय हुआ था। बाद के वर्षों में आर्थिक रूप से पिछड़ने के बावजूद उत्तराखंड बौद्धिक सम्पदा के मामले में हमेशा […]