Uttarakhand Bhasha Sansthan-नैनीताल जनपद निवासी वरिष्ठ साहित्यकार दामोदर जोशी ‘देवांशु’ को ‘कुमगढ़’ के लिए मिला ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’

Uttarakhand Bhasha Sansthan

Uttarakhand Bhasha Sansthan : Exciting news! The highly esteemed ‘Uttarakhand Sahitya Gaurav Samman’ of the Uttarakhand Bhasha Sansthan will be awarded to renowned Kumaoni litterateur, Devanshu, for his remarkable work ‘Kumgarh’. The director of Uttarakhand Bhasha Sansthan, IAS officer Swati S. Bhadauria, announced the selection of Devanshu, a resident of Paschim Kheda Gaulapar Haldwani in Nainital district, for his magazine ‘Kumgarh’ based on the recommendation of the ‘Uttarakhand Literature’ selection committee. The prestigious ‘Gaurav Samman’ will be presented to Bhairav Dutt Dhulia, the recipient of the award, on June 30 in the presence of the Chief Minister and Language Minister of Uttarakhand, along with prominent literary figures. Notably, Devanshu was previously honored with the Pitambar Dutt Badthwal Bhasha Samman in 2011 by the Uttarakhand Government. Devanshu’s magazine ‘Kumgarh’ has been instrumental in uniting various folk languages of the state since 2014, making it a unique platform. Additionally, Devanshu has authored numerous books and translations in the Kumaoni language.

सुबह का सुखद समाचार: अब अंग्रेजी स्कूलों के बच्चे भी धगुलि, हंसुलि, छुबकि, पैजनि व झुमकि नाम की कुमाउनी पाठ्यक्रम की पुस्तकें पढ़ेंगे…

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 फरवरी 2023। नैनीताल जनपद के सरकारी स्कूलों के साथ अंग्रेजी स्कूलों के बच्चे भी अब एक विषय के रूप में कुमाउनी भाषा पढ़ेंगे। जनपद के रामनगर, कोटाबाग व हल्द्वानी विकासखंडों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कुमाउनी भाषा को प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में समावेशित किया जा रहा है। पूर्व में … Read more

उत्तराखण्ड की पत्रकारिता का इतिहास

Vishesh Aalekh Special Article Navin Samachar

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल (History of Journalism in Uttarakhand)। आदि-अनादि काल से वैदिक ऋचाओं की जन्मदात्री उर्वरा धरा रही देवभूमि उत्तराखण्ड में पत्रकारिता का गौरवपूर्ण अतीत रहा है। कहते हैं कि यहीं ऋषि-मुनियों के अंतर्मन में सर्वप्रथम ज्ञानोदय हुआ था। बाद के वर्षों में आर्थिक रूप से पिछड़ने के बावजूद उत्तराखंड बौद्धिक सम्पदा के मामले में हमेशा समृद्ध रहा। शायद यही कारण हो कि आधुनिक दौर के ‘जल्दी में लिखे जाने वाले साहित्य की विधा-पत्रकारिता’ का बीज देश में अंकुरित होने के साथ ही यहां के सुदूर गिरि-गह्वरों तक भी विरोध के स्वरों के रूप में पहुंच गया।

Gumani Pant or Lokratn or Loknath | Biography | Real Name | Poems | गुमानी  पंत व लोकरत्न व लोकनाथ | जीवनी | परिचय | रचनाएँकुमाउनी के आदि कवि गुमानी पंत (जन्म 1790-मृत्यु 1846, रचनाकाल 1810 ईसवी से) ने अंग्रेजों के यहां आने से पूर्व ही 1790 से 1815 तक सत्तासीन रहे महा दमनकारी गोरखों के खिलाफ कुमाउनी के साथ ही हिंदी की खड़ी बोली में कलम चलाकर एक तरह से पत्रकारिता का धर्म निभाना प्रारंभ कर दिया था। इस आधार पर उन्हें अनेक भाषाविदों के द्वारा उनके स्वर्गवास के चार वर्ष बाद उदित हुए ‘आधुनिक हिन्दी के पहले रचनाकार’ भारतेंदु हरिश्चंद्र (जन्म 1850-मृत्यु 1885) से आधी सदी पहले का पहला व आदि हिंदी कवि भी कहा जाता है।

हालांकि समाचार पत्रों का प्रकाशन यहां काफी देर में 1842 में अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित ‘द हिल्स’ नामक उत्तरी भारत के पहले समाचार पत्र के साथ शुरू हुआ, लेकिन 1868 में जब भारतेंदु हिंदी में लिखना प्रारंभ कर रहे थे, नैनीताल से ‘समय विनोद’ नामक पहले देशी (हिंदी-उर्दू) पाक्षिक पत्र ने प्रकाशित होकर एक तरह से हिंदी पत्रकारिता का छोर शुरू में ही पकड़ लिया। यह संयोग ही है कि आगे 1953 में उत्तराखंड का पहला हिंदी दैनिक अखबार ‘पर्वतीय’ भी नैनीताल से ही प्रकाशित हुआ।

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‘कुमगढ़’ के तत्वावधान में उत्तराखंडी भाषाओं की अखिलभारतीय काव्य गोष्ठी हुई आयोजित

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 2 अक्तूबर 2022। उत्तराखंड की सभी लोकभाषाओं को एकमंच पर लाने के लिए प्रयासरत राज्य की एकमात्र पत्रिका ‘कुमगढ़’ के तत्वावधान में रविवार को उत्तराखंडी भाषाओं की अखिलभारतीय ऑनलाइन काव्य गोष्ठी आयोजित हुई। इस मौके पर उत्तराखंड भाषा संस्थान के सम्मान से पुरस्कृत गढ़वाली साहित्यकार बीना बेंजवाल व … Read more

कुमाउनी भाषा का इतिहास

तारा चंद्र त्रिपाठी की पुस्तक ‘मध्य पहाड़ी भाषाओं का ऐतिहासिक स्वरूप’ पुस्तक में इतिहासकार मदन चंद्र भट्ट की पुस्तक ‘कुमाऊं की जागर कथायें’ के आधार पर कुमाउनी के शाके 911 यानी यान 989 और गढवाली के शाके 1377 यानी सन् 1455 तक के दान पत्र मिलने की बात कही गई है। सन् 989 के राजा … Read more

कुमाउनी समग्र

पढ़ें कुमाऊनी कवितायेँ, हिंदी भावानुवाद के साथ : दशहराक दिनाक तें खास कविता: भैम पनर अगस्ता्क दिन गाड़ ऐ रै… नईं जमा्न में… चुनावों पारि कुमाउनी कविता: फरक पडूं कां है रै दौड़ आम आदिम होलि पारि रंङोंकि कविता: पर्या रंङ खबरदार ! उमींद उदंकार लड़ैं चिनांड़ पछ्यांण ‘लौ’ कि ल्येखूं सिणुंक ढुड. राजक च्यल … Read more