-प्रदेश के मुख्यमंत्री धामी ने सम्मान के रूप में एक लाख रुपए के नगद पुरस्कार सहित प्रतीक चिन्ह व प्रमाण पत्र आदि भी प्रदान किये
नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जून 2023 (Uttarakhand Bhasha Sansthan)। उत्तराखंड भाषा संस्थान की ओर से इस वर्ष साहित्य के क्षेत्र में सर्वोच्च ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ (Uttarakhand Bhasha Sansthan) देने की शुरुवात की गई है। इस वर्ष यह सम्मान प्रदेश के नैनीताल जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार दामोदर जोशी ‘देवांशु’ को दिया गया है। शुक्रवार को राजधानी देहरादून में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। सम्मान के रूप में प्रतीक चिन्ह, प्रमाण पत्र व शॉल आदि के साथ एक लाख रुपए का पुरस्कार भी प्रदान किया गया है।

उत्तराखंड भाषा संस्थान की निदेशक आईएएस अधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि नैनीताल जनपद के पश्चिमी खेड़ा गौलापार हल्द्वानी निवासी श्री देवांशु को उनके द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘कुमगढ़’ के लिए चयन समिति की अनुशंसा पर ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ योजना के अंतर्गत भैरव दत्त धूलिया पुरस्कार से अलंकृत किया गया है। उल्लेखनीय है कि श्री देवांशु को इससे पूर्व भी उत्तराखंड सरकार के द्वारा वर्ष 2011 में पीतांबर दत्त बड़थ्वाल भाषा सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है।
गौरतलब है कि श्री जोशी वर्ष 2014 से ‘कुमगढ़’ पत्रिका के माध्यम से प्रदेश की सभी लोकभाषाओं को एक मंच पर लाने का कार्य कर रहे हैं। ‘कुमगढ़’ प्रदेश की सभी लोकभाषाओं को एक मंच पर लाने वाली एकमात्र पत्रिका के रूप में भी प्रतिष्ठित है। इसके अतिरिक्त देवांशु की एक दर्जन से अधिक कुमाउनी भाषा में पुस्तकें व अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं। इस अवसर पर प्रदेश के भाषा मंत्री सुबोध उनियाल सहित राज्य के अनेक मूर्धन्य साहित्यकार मौजूद रहे।
उत्तराखंड की सभी लोकभाषाओं की एकमात्र पत्रिका ‘कुमगढ़’ और इसके संस्थापक-संपादक दामोदर जोशी ‘देवांशु’ का कृतित्व
श्री दामोदर जोशी ‘देवांशु’ कुमाउनी भाषा के प्रतिष्ठित साहित्यकार, संपादक, अनुवादक एवं शिक्षाविद् हैं। उनका जन्म 8 दिसंबर 1949 को उत्तराखंड के सीमांत जनपद बागेश्वर के सड़क से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम तोली में 8 भाई-बहनों के एक अत्यंत साधारण आर्थिक परिवार में हुआ। उनके पिता ने दूध-घी बेचकर उनकी शिक्षा का प्रबंध किया। बाल्यावस्था में उन्होंने स्वयं जंगलों में गायें चराईं तथा गाँव में विद्यालय न होने के कारण ननिहाल में रहकर शिक्षा प्राप्त की।
वर्ष 1969-70 में पशु चराने के दौरान ही नशा, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध उनकी लेखनी प्रारम्भ हुई, जिसके परिणामस्वरूप उनकी प्रथम कुमाउनी काव्य-कृति ‘कुदरत’ अस्तित्व में आई। इसके बाद शिक्षक, प्रवक्ता एवं प्रधानाचार्य के रूप में सुदूर, सड़कविहीन क्षेत्रों में 12 से 15 किलोमीटर तक प्रतिदिन पैदल आवागमन करते हुए भी उन्होंने हिंदी तथा अपनी मातृभाषा कुमाउनी के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य निरंतर जारी रखा।
कुमाउनी, जो चंद शासकों के काल में कुमाऊँ क्षेत्र के प्रशासन, राजकाज एवं जनजीवन की प्रमुख भाषाओं में रही और जिसके अनेक ताम्रपत्र एवं अभिलेख आज भी उपलब्ध हैं, उसे पुनः सम्मानजनक स्थान दिलाने तथा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के उद्देश्य से वे निरंतर साहित्य सृजन, संपादन, अनुवाद और शोधपरक कार्यों में, विशेषकर कुमाउनी को विविध गद्य विधाओं में समृद्ध करने के लिये सक्रिय हैं।
इसी उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2000 में कुमाउनी भाषा के प्रथम सामूहिक गद्य संग्रह ‘गद्यांजलि’ का संपादन-प्रकाशन किया। इसके बाद वर्ष 2004 में प्रथम सामूहिक कहानी संग्रह ‘अन्वार’, वर्ष 2006 में प्रथम सामूहिक नाटक संग्रह ‘आपणि पन्यार’, वर्ष 2011 में प्रथम सामूहिक संस्मरण संग्रह ‘फाम’ तथा वर्ष 2012 में प्रथम सामूहिक निबंध संग्रह ‘बोलिक् सज समाव’ का संपादन-प्रकाशन कर कुमाउनी साहित्य की विभिन्न गद्य विधाओं को संगठित आधार प्रदान किया।
इसके अतिरिक्त उन्होंने हिंदी एवं कुमाउनी में पखॉण (कुमाउनी काव्य संग्रह, वर्ष 1994), हेमरश्मि (हिन्दी काव्य संकलन, वर्ष 1999), शिखर (कुमाउनी काव्य संग्रह, वर्ष 2002), भाबरक् बॉज (कुमाउनी गदय् संकलन, वर्ष 2013), यथार्थ (हिन्दी लेखों का संकलन, जनवरी 2018), पहाड़ पढ़ो (हिंदी बाल कविता संग्रह, वर्ष 2018) भाव-बिन्दु (हिंदी काव्य संकलन, वर्ष 2022) व गद्य गागर (कुमाउनी आलेख संग्रह, वर्ष 2024) पुस्तकों की रचना भी की है। साथ ही राजकीय इंटर कॉलेज दौलतपुर की पहली विद्यालयी पत्रिका ‘कल्पना’ तथा राजकीय इंटर कॉलेज मालधनचौड़ की पहली विद्यालयी पत्रिका ‘मालधन दर्शन’ का संपादन-प्रकाशन भी प्रारम्भ कराया है।
वर्ष 2014 में उन्होंने ‘कुमगढ़’ मासिक पत्रिका की स्थापना की, जो उत्तराखंड की सभी लोकभाषाओं को समर्पित एकमात्र मासिक पत्रिका है। यह पत्रिका पिछले एक दशक से अधिक समय से निरंतर प्रकाशित होकर अपने नाम के अनुरूप प्रदेश के कुमाऊँ और गढ़वाल मंडलों को जोड़ते हुए देश-विदेश में रह रहे उत्तराखंडी रचनाकारों एवं पाठकों को एक साझा साहित्यिक मंच प्रदान कर रही है।
अनुवाद के क्षेत्र में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘रूम टु रीड’ की 16 कहानियों, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की पुस्तक ‘मेरी प्रारंभिक कहानियाँ’ तथा शांतिकुंज, हरिद्वार के संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की दो पुस्तकों का कुमाउनी में अनुवाद किया।
उनकी संपादित कृतियाँ ‘गद्यांजलि’ एवं ‘आपणि पन्यार’ कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में सम्मिलित हैं तथा उनकी कुमाउनी कविताएँ विश्वविद्यालय की बी.ए. पाठ्यपुस्तक ‘काव्य संचयन’ में भी प्रकाशित हैं। उनकी रचनाएँ 20 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय हिंदी संकलनों में प्रकाशित हो चुकी हैं तथा आकाशवाणी लखनऊ, नजीबाबाद और अल्मोड़ा केंद्रों से समय-समय पर प्रसारित होती रही हैं। दो स्नातकोत्तर छात्राओं ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर लघु शोध कार्य भी किया है।
सामाजिक एवं पर्यावरणीय क्षेत्र में उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जैक्सन के निर्देशन में मिरतोला आश्रम (पनुवानौला, अल्मोड़ा) में एक वर्ष तक पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य किया। वर्ष 1981-82 में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नैनी में उनके द्वारा लगाए गए 100 से अधिक पौधे आज एक विकसित वन-वाटिका का स्वरूप ले चुके हैं। उन्होंने जिला एवं मंडल स्तर पर शिक्षक प्रतिनिधि के रूप में भी शिक्षकों के हितों के लिए सक्रिय योगदान दिया।
उनके बहुआयामी योगदान के लिए उन्हें उत्तराखंड भाषा संस्थान, देहरादून द्वारा डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल सम्मान, उत्तराखंड सरकार द्वारा ‘कुमगढ़’ के लिए उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान, शेर सिंह बिष्ट ‘अनपढ़’ पुरस्कार सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा 16 से अधिक सम्मान प्राप्त हुए हैं। ‘उत्तराखण्ड की प्रतिभाएँ’ में उनका जीवनवृत्त प्रकाशित किया गया है। साहित्य सृजन, संपादन, अनुवाद, लोकभाषा संरक्षण और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से वे आज भी कुमाउनी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने के उद्देश्य से सतत सक्रिय हैं।
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नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जून 2023। उत्तराखंड भाषा संस्थान (Uttarakhand Bhasha Sansthan) का इस वर्ष का प्रतिष्ठित ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार दामोदर जोशी ‘देवांशु’ को दिया जाएगा।
उत्तराखंड भाषा संस्थान की निदेशक आईएएस अधिकारी स्वाति एस भदौरिया की ओर इस आशय की जानकारी देते हुए बताया गया है कि नैनीताल जनपद के पश्चिमी खेड़ा गौलापार हल्द्वानी निवासी श्री देवांशु को उनके द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘कुमगढ़’ के लिए चयन समिति की अनुशंसा पर ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ योजना के अंतर्गत भैरव दत्त धूलिया पुरस्कार से अलंकृत किया जाएगा।
उन्हें यह पुरस्कार आगामी 30 जून को प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं भाषा मंत्री के द्वारा प्रदेश के मूर्धन्य साहित्यकारों की उपस्थिति में देकर सम्मानित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि श्री देवांशु को इससे पूर्व भी उत्तराखंड सरकार के द्वारा वर्ष 2011 में पीतांबर दत्त बड़थ्वाल भाषा सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है।
गौरतलब है कि श्री जोशी वर्ष 2014 से ‘कुमगढ़’ पत्रिका के माध्यम से प्रदेश की सभी लोकभाषाओं को एक मंच पर लाने का कार्य कर रहे हैं। ‘कुमगढ़’ प्रदेश की सभी लोकभाषाओं को एक मंच पर लाने वाली एकमात्र पत्रिका के रूप में भी प्रतिष्ठित है। इसके अतिरिक्त देवांशु की एक दर्जन से अधिक कुमाउनी भाषा में पुस्तकें व अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें सहयोग करें..
‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार’ एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
