EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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की खबर सामने आई है। प्रदेश में जंगली जानवरों के हमले में घायल व्यक्तियों के उपचार पर अब राज्य सरकार ₹15 लाख तक का खर्च उठाएगी। इसमें ₹5 लाख तक का उपचार अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना (Atal Ayushman Uttarakhand Yojana) के माध्यम से होगा, जबकि शेष ₹10 लाख तक की अतिरिक्त सहायता राज्य सरकार देगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) की घोषणा के क्रम में इस प्रस्ताव पर वित्त विभाग (Finance Department) से राय ली गई है और शीघ्र ही संबंधित शासनादेश (Government Order) जारी होने की बात कही गई है। यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पर्वतीय और वन सीमांत क्षेत्रों में जंगली जानवरों के हमले बढ़ने से ग्रामीण परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा था।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleसरकार का नया निर्णय, इलाज के खर्च की स्पष्ट व्यवस्था और जिलाधिकारियों को निर्देशअब तक व्यवस्था क्या थी, मुआवजा था लेकिन इलाज का अलग प्रावधान नहींमृत्यु पर मुआवजा पहले ही बढ़ा, अब घायलों पर फोकसप्रमुख सचिव वन का बयान, जल्द शासनादेश की तैयारीआमजन पर क्या असर पड़ेगा, इलाज की चिंता कम होगी तो भरोसा बढ़ेगाLike this:Relatedसरकार का नया निर्णय, इलाज के खर्च की स्पष्ट व्यवस्था और जिलाधिकारियों को निर्देशउत्तराखंड में गुलदार (Leopard), बाघ (Tiger), भालू (Bear) और हाथी (Elephant) जैसे वन्यजीवों के हमलों की घटनाएं कई क्षेत्रों में चिंता का कारण बनी हुई हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम घायल व्यक्तियों के लिए बड़ी सहायता के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद वन विभाग (Forest Department) ने शासन (State Government) को प्रस्ताव भेजा और अब उस पर वित्त विभाग की राय ली जा चुकी है।यह भी पढ़ें : पति प्रताड़ित करता था तो कैसे साथ गुजार दिए 11 साल ? न्यायालय ने आरोपित फौजी पति को किया दहेज उत्पीड़न के आरोपों से दोषमुक्त....शासनादेश जारी होने की प्रक्रिया के बीच शासन ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों (District Magistrate – DM) को निर्देश दिए हैं कि किसी भी जिले में ऐसी स्थिति आने पर घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए। यह संदेश साफ है कि उपचार में देर न हो और जिला स्तर पर जिम्मेदारी तय रहे। क्या इससे दूरस्थ गांवों में उपचार का भरोसा बढ़ेगा। यह प्रश्न इसलिए भी अहम है क्योंकि कई बार घायल व्यक्ति को सड़क, परिवहन और संसाधन की कमी के कारण समय पर उपचार नहीं मिल पाता।अब तक व्यवस्था क्या थी, मुआवजा था लेकिन इलाज का अलग प्रावधान नहींवर्तमान में वन्यजीवों के हमले में घायल व्यक्तियों को मानव–वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि (Human-Wildlife Conflict Relief Fund) के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों में ₹15 हजार से ₹3 लाख तक मुआवजा दिया जाता है। लेकिन नियमावली में उपचार खर्च का अलग से स्पष्ट प्रावधान नहीं था। आम तौर पर घायलों को सरकारी चिकित्सालयों (Government Hospitals) में उपचार उपलब्ध कराया जाता रहा, लेकिन जटिल स्थिति, लंबा उपचार, शल्य चिकित्सा (Surgery) या निजी चिकित्सालयों की आवश्यकता पड़ने पर परिवारों को बड़ी धनराशि स्वयं जुटानी पड़ती थी।इसी पृष्ठभूमि में सरकार का यह निर्णय राहत देने वाला है। इससे यह उम्मीद भी बनेगी कि गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के उपचार में धन के कारण कोई बाधा न आये।‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद। मृत्यु पर मुआवजा पहले ही बढ़ा, अब घायलों पर फोकससरकार कुछ समय पहले वन्यजीव हमले में मृत्यु पर मुआवजा राशि को ₹6 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख कर चुकी है। अब नीति का अगला कदम घायलों की चिकित्सा पर केंद्रित है। यह बदलाव केवल सहायता राशि बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बताता है कि सरकार मानव–वन्यजीव संघर्ष को “सुरक्षा और स्वास्थ्य” से जोड़कर देख रही है।यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में नई समस्या बने नीले ड्रम, ‘देशी गीजर’ बनाकर हो रही बिजली चोरी, रुड़की ऊर्जा निगम की कार्रवाई में 148 नीले ड्रम बरामद...प्रमुख सचिव वन का बयान, जल्द शासनादेश की तैयारीप्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु (RK Sudhanshu) के अनुसार वन्यजीवों से घायल व्यक्तियों के उपचार में अटल आयुष्मान के अतिरिक्त ₹10 लाख तक का खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन करने संबंधी प्रस्ताव राय के लिए वित्त विभाग को भेजा गया है और जल्द ही शासनादेश जारी होगा। साथ ही सभी जिलाधिकारियों को घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए गए हैं।यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि योजना केवल घोषणा स्तर पर नहीं है, बल्कि शासनादेश के माध्यम से इसे लागू करने की प्रक्रिया तेज हो चुकी है।आमजन पर क्या असर पड़ेगा, इलाज की चिंता कम होगी तो भरोसा बढ़ेगाग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों के हमले की घटना केवल शारीरिक चोट नहीं होती, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति को भी झकझोर देती है। खेत, जंगल, पानी और घास-लकड़ी जैसे कामों के लिए घर से बाहर निकलना पहाड़ में दैनिक जीवन का हिस्सा है। यदि ऐसे में किसी पर हमला हो जाए तो उपचार के साथ-साथ कामकाज रुक जाता है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और परिवार कर्ज के दबाव में आ सकता है।इस योजना से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गंभीर घायल व्यक्ति को उपचार के लिए धन जुटाने की चिंता कम होगी। साथ ही यह प्रशासन पर भी दबाव बनाएगा कि उपचार की व्यवस्था समय पर हो। अब यह देखना होगा कि शासनादेश में प्रक्रिया क्या तय की जाती है, भुगतान का तरीका क्या होगा और उपचार का सत्यापन किस स्तर पर होगा, ताकि जरूरतमंद को समय पर मदद मिल सके और व्यवस्था में अनावश्यक अड़चन न आये।यह भी पढ़ें : खुशखबरी ! अब घर बैठे मिलेगी सत्यापित खतौनी, छह राजस्व पोर्टल शुरूपाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट यहाँ क्लिक करके पढ़ी जा सकती है। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचारों के लिए यहाँ, अल्मोड़ा के समाचारों के लिए यहाँ, बागेश्वर के समाचारों के लिए यहाँ, चंपावत के समाचारों के लिए यहाँ, ऊधमसिंह नगर के समाचारों के लिए यहाँ, देहरादून के समाचारों के लिए यहाँ, उत्तरकाशी के समाचारों के लिए यहाँ, पौड़ी के समाचारों के लिए यहाँ, टिहरी जनपद के समाचारों के लिए यहाँ, चमोली के समाचारों के लिए यहाँ, रुद्रप्रयाग के समाचारों के लिए यहाँ, हरिद्वार के समाचारों के लिए यहाँ और उत्तराखंड से संबंधित अन्य समाचार पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें।आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यहां क्लिक कर हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से यहाँ, एक्स से, थ्रेड्स चैनल से, टेलीग्राम से, कुटुंब एप से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ 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Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationखुशखबरी ! अब घर बैठे मिलेगी सत्यापित खतौनी, छह राजस्व पोर्टल शुरू किसान सुखवंत सिंह प्रकरण में उधम सिंह नगर पुलिस पर बड़ी कार्रवाई, आईटीआई कोतवाली प्रभारी सहित 2 उप निरीक्षक निलंबित और 10 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर