नैनीताल की ब्रिटिशकालीन ग्लेनमोर कोठी आग में राख, परिवार सुरक्षित

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 1 मार्च 2026 (British-era Glenmore Kothi in Fire)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) नगर में ब्रिटिशकालीन धरोहरों के आग से नष्ट होने की श्रृंखला में एक और घटना जुड़ गई। रविवार अपराह्न आल्मा लॉज (Alma Lodge) और निशांत विद्यालय (Nishant School) के पास स्थित ग्लेनमोर कोठी (Glenmore Cottage) भीषण अग्निकांड में जलकर नष्ट हो गई। राहत की बात यह रही कि भवन में रह रहे परिवार सुरक्षित हैं, लेकिन लकड़ी से निर्मित ऐतिहासिक इमारत और उसमें रखा अधिकांश सामान पूरी तरह नष्ट हो गया। यह घटना शहर में अग्नि सुरक्षा और विरासत संरक्षण पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही है।

कैसे लगी आग

(British-Era Glenmore Kothi In Fireप्राप्त जानकारी के अनुसार कोठी के एक हिस्से में 1969 से जिला कलक्ट्रेट से सेवानिवृत्त ललित मोहन तिवारी (Lalit Mohan Tiwari)-अनिल तिवारी (Anil Tiwari) परिवार सहित रहते हैं, जबकि दूसरे हिस्से में 1982 से एरीज (Aryabhatta Research Institute of Observational Sciences) से सेवानिवृत्त अनिल जोशी (Anil Joshi)-चंद्रशेखर जोशी (Chandrshekhar Joshi) निवास करते हैं, जो घटना के समय घर पर नहीं थे।

अनिल तिवारी ने बताया कि हाल ही में वह अपने बेटे के पास गुरुग्राम गए हुए थे। रविवार को जैसे ही वह नैनीताल पहुंचे तो घर से धुआं निकलता दिखा। लगभग पौने दो बजे जब तक वह भवन के पास पहुंचे, तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। उन्होंने 1.50 बजे अग्निशमन विभाग को सूचना दी। उन्होंने बताया कि भवन के मुख्य मालिक देवी दत्त जोशी और उनका परिवार हैं, जो वर्तमान में बाहर रहते हैं। 

दमकल पहुंचने में आई कठिनाई

Nainital British Era Building Burnसूचना मिलने पर अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र सिंह नेगी (Devendra Singh Negi) के नेतृत्व में तीन दमकल वाहन संकरी सड़क से जोखिम उठाते हुए मौके पर पहुंचे। तब तक लकड़ी से बने पुराने भवन में आग पूरी तरह फैल चुकी थी।
अग्निशमन कर्मी प्रकाश मेर (Prakash Mer), प्रकाश कांडपाल (Prakash Kandpal), भूपेंद्र नेगी (Bhupendra Negi), नीरज (Neeraj), नानक राणा (Nanak Rana), रमेश चंद्र (Ramesh Chandra), किशोर (Kishore), बीना परिहार (Beena Parihar), कविता सकलानी (Kavita Saklani), रूपा राणा (Rupa Rana) और अमरदीप राणा (Amardeep Rana) सहित टीम करीब साढ़े तीन घंटे से अधिक समय तक आग बुझाने में जुटी रही। समाचार लिखे जाने तक भी लकड़ियां सुलग रही थीं और टिन की चादरें गिरने का खतरा बना हुआ था।

हाइड्रेंट और पानी की कमी बनी चुनौती

अग्निशमन कर्मियों ने बताया कि क्षेत्र में अग्नि हाइड्रेंट न होने और पानी की सीमित उपलब्धता के कारण आग पर शीघ्र नियंत्रण पाना कठिन रहा। संकरी सड़क के कारण दमकल वाहनों की आवाजाही भी बाधित हुई। पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा और स्थानीय लोग भी आग बुझाने में सहयोग करते रहे। 

आग लगने के संभावित कारण-नशेड़ी या शॉर्ट सर्किट !

प्रशासन की मानें तो प्रारंभिक तौर पर आग लगने का कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट या किसी तकनीकी खराबी को माना जा रहा है। घटना के बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों और महिलाओं ने बताया कि भवन काफी समय से आंशिक रूप से बंद पड़ा था। इसका फायदा उठाकर कुछ नशेड़ी घर के पिछले हिस्से में बैठकर नशा किया करते थे।स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि आग किसी असामाजिक तत्व ने लगाई हो। हालांकि, पुलिस और प्रशासन के अनुसार जांच के बाद ही आग लगने के असली कारणों का पता चल पाएगा। यह भी बताया गया है कि अग्निशमन विभाग ने पहले ही भवन स्वामियों को घर के पुराना व लकड़ी से बना होने के कारण नोटिस दिया था। 

क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना

नैनीताल में हाल के समय में ब्रिटिशकालीन लकड़ी निर्मित भवनों में आग की घटनाएं बढ़ने से विरासत संरक्षण, शहरी अग्नि सुरक्षा और आपदा तैयारी पर पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। क्या पुराने भवनों के लिए विशेष अग्नि सुरक्षा मानक तय होंगे? यह अब प्रशासन और नगर नियोजन एजेंसियों के सामने अहम प्रश्न है।

आगे क्या कदम संभव

प्रशासन की ओर से आग के कारणों की जांच की जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि विरासत भवनों के लिए अग्नि चेतावनी प्रणाली, हाइड्रेंट नेटवर्क और आपात पहुंच मार्गों को मजबूत करना भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम कर सकता है।

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