नवीन समाचार, देहरादून, 25 जून 2026 (Harish Rawats Silence-Pradeep Tamta)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून (Dehradun) से वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच कांग्रेस (Congress) संगठन में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने चुनावी अभियान का खाका तैयार कर जिम्मेदारियां बांटना शुरू कर दिया है, लेकिन इन तैयारियों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) की लगातार गैरमौजूदगी और सार्वजनिक खामोशी राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गई है।
पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकों और हालिया कार्यक्रमों में उनकी अनुपस्थिति के साथ वरिष्ठ नेता प्रदीप टम्टा (Pradeep Tamta) की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भी संगठन के भीतर संभावित नाराजगी और बदलाव की अटकलों को हवा दे दी है। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 18 जून को देहरादून में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य (Yashpal Arya) के आवास पर कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति (Election Campaign Committee) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रदेश सह प्रभारी मनोज यादव (Manoj Yadav) और सुरेंद्र शर्मा (Surendra Sharma), प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल (Ganesh Godiyal), हरक सिंह रावत (Harak Singh Rawat), करन माहरा (Karan Mahara), नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य तथा विधायक आदेश चौहान (Adesh Chauhan) सहित वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
करीब डेढ़ घंटे चली बैठक में आगामी तीन महीनों की चुनावी रणनीति तय की गई। पार्टी ने 28 जून से 10 जुलाई तक उत्तराखंड की 30 पर्वतीय विधानसभा सीटों पर जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया। लेकिन इस महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
बैठकों और अभियानों से दूरी बनी चर्चा का विषय
पार्टी के हालिया कार्यक्रमों में भी हरीश रावत की सक्रिय उपस्थिति देखने को नहीं मिली। कांग्रेस की जन आक्रोश रैलियों और वरिष्ठ नेताओं की बैठकों में उनकी गैरमौजूदगी को लेकर संगठन के भीतर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
दिलचस्प तथ्य यह भी है कि हरीश रावत सामाजिक माध्यमों पर सक्रिय तो हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से उन्होंने लगभग कोई राजनीतिक टिप्पणी या संगठनात्मक गतिविधि से जुड़ी पोस्ट साझा नहीं की है। उनकी हालिया पोस्ट मुख्यतः श्रद्धांजलि, शुभकामनाओं और सामाजिक संदेशों तक सीमित रही हैं। इसे लेकर भी राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अलग-अलग आकलन किए जा रहे हैं।
दिल्ली प्रवास को लेकर भी लग रहे अलग-अलग कयास
पार्टी सूत्रों के अनुसार हरीश रावत पिछले लगभग एक सप्ताह से दिल्ली प्रवास पर हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि उनका यह दौरा स्वास्थ्य परीक्षण से संबंधित है, जबकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी चल रही है कि संगठन में लगातार हो रही अनदेखी से वे नाराज हो सकते हैं। हालांकि इन चर्चाओं की किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इसी दौरान प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल (K. C. Venugopal) से हुई मुलाकात के बाद यह अटकलें भी तेज हुई हैं कि लंबे समय से लंबित प्रदेश कार्यकारिणी के गठन और संगठनात्मक फेरबदल को जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है।
प्रदीप टम्टा की पोस्ट बनी चर्चा का केंद्र
राजनीतिक चर्चाओं को उस समय और बल मिला जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा ने सामाजिक माध्यम पर एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा— “क्या यह समावेशी नेतृत्व की ओर इंगित करता है?”
हालांकि उन्होंने अपने संदेश में किसी नेता या घटना का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे वर्तमान संगठनात्मक गतिविधियों से जोड़कर देखा जाने लगा। प्रदीप टम्टा को लंबे समय से हरीश रावत के निकट नेताओं में माना जाता है और वे कई अवसरों पर उनके समर्थन में सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखते रहे हैं।
कुमाऊं की राजनीति में अहम चेहरा हैं प्रदीप टम्टा
अल्मोड़ा (Almora) जनपद के सोमेश्वर (Someshwar) क्षेत्र से आने वाले प्रदीप टम्टा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वे वर्ष 2014 में अल्मोड़ा लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं तथा इससे पहले सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पार्टी संगठन में उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाए हैं तथा कुमाऊं क्षेत्र में कांग्रेस के प्रमुख दलित नेताओं में उनकी पहचान रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर आगे के घटनाक्रम पर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले संगठनात्मक बैठकों में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और सक्रियता महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में हरीश रावत की गैरमौजूदगी को लेकर स्वाभाविक रूप से चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि अब तक न तो हरीश रावत और न ही कांग्रेस संगठन की ओर से किसी प्रकार की नाराजगी या मतभेद की आधिकारिक पुष्टि की गई है।
आने वाले दिनों में प्रदेश कार्यकारिणी के गठन, चुनावी अभियान की शुरुआत और वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वर्तमान चर्चाओं का राजनीतिक आधार कितना मजबूत है और संगठन किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
