नवीन समाचार, नई दिल्ली, 25 जून 2026 (RBI on Paper Notes-Plastic Notes)। नई दिल्ली (New Delhi) से पिछले कुछ दिनों से सामाजिक माध्यमों (Social Media) पर यह दावा तेजी से प्रसारित किया जा रहा है कि 30 जून 2026 से भारत में सभी कागजी मुद्रा नोट (Paper Currency Notes) बंद कर दिए जाएंगे और उनकी जगह प्लास्टिक अथवा पॉलिमर (Polymer) नोट जारी किए जाएंगे। इस दावे ने आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी।
अब भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) और प्रेस सूचना ब्यूरो (Press Information Bureau-PIB) की तथ्य जांच इकाई (PIB Fact Check) ने इस वायरल दावे को पूरी तरह भ्रामक और असत्य बताया है। दोनों संस्थानों ने स्पष्ट किया है कि 30 जून से मौजूदा कागजी नोट बंद करने या उन्हें वापस लेने की कोई घोषणा नहीं की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सामाजिक माध्यमों पर लगातार यह संदेश प्रसारित किया जा रहा था कि 30 जून 2026 के बाद देश में केवल प्लास्टिक नोट ही चलेंगे। इस दावे के कारण अनेक लोगों के मन में अपने पास मौजूद मुद्रा नोटों को लेकर भ्रम उत्पन्न हो गया। इसके बाद सरकार की आधिकारिक तथ्य जांच एजेंसी पीआईबी फैक्ट चेक ने सामाजिक माध्यम मंच एक्स (X) पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से ऐसा कोई निर्णय या अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
पीआईबी और आरबीआई ने बताया वायरल दावा पूरी तरह गलत
पीआईबी फैक्ट चेक ने लोगों से अपील की है कि वे बिना सत्यापन के इस प्रकार की किसी भी जानकारी पर विश्वास न करें और न ही उसे आगे साझा करें। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि 30 जून 2026 से कागजी नोट बंद होने संबंधी दावा पूरी तरह फर्जी है।
उधर भारतीय रिजर्व बैंक ने भी लोगों से कहा है कि मुद्रा, बैंकिंग और वित्तीय नीतियों से जुड़ी किसी भी सूचना के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। रिजर्व बैंक ने नागरिकों से आग्रह किया है कि किसी भी वायरल संदेश को आगे भेजने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें।
फिर प्लास्टिक नोटों की चर्चा क्यों हो रही है?
हालांकि वायरल दावा गलत है, लेकिन पॉलिमर करेंसी (Polymer Currency) को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक स्तर पर विचार जरूर चल रहा है। पांच जून 2026 को मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee-MPC) की बैठक के बाद रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने बताया था कि भारत में पॉलिमर नोट शुरू करने के प्रस्ताव पर प्रारंभिक स्तर पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा था कि इस प्रस्ताव के लाभ और संभावित चुनौतियों का अध्ययन किया जा रहा है। फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और न ही किसी तिथि की घोषणा की गई है।
क्या होते हैं पॉलिमर नोट?
पॉलिमर नोट विशेष प्रकार की प्लास्टिक आधारित सामग्री से तैयार किए जाते हैं। दुनिया के कई देशों में इनका सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इन नोटों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत और लंबे समय तक उपयोग योग्य होते हैं।
इन पर पानी का प्रभाव बहुत कम पड़ता है, ये जल्दी फटते नहीं हैं तथा इनमें आधुनिक सुरक्षा विशेषताएं जोड़ना अपेक्षाकृत आसान होता है। इसी कारण नकली नोटों पर नियंत्रण में भी पॉलिमर नोट उपयोगी माने जाते हैं।
भारत में कब आएंगे पॉलिमर नोट?
फिलहाल इसका कोई निश्चित उत्तर नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि पॉलिमर नोटों को लेकर केवल अध्ययन और विचार-विमर्श चल रहा है। जब तक औपचारिक निर्णय नहीं लिया जाता और आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक देश में प्रचलित सभी कागजी नोट पूरी तरह वैध रहेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में पॉलिमर नोट लागू भी किए जाते हैं तो सामान्यतः ऐसी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू होती है। पुराने नोटों को अचानक बंद करने के बजाय दोनों प्रकार की मुद्रा एक निश्चित अवधि तक साथ-साथ चलती है, जैसा कि कई अन्य देशों में देखा गया है।
अफवाहों से रहें सावधान
डिजिटल युग में वित्तीय मामलों से जुड़ी भ्रामक सूचनाएं तेजी से फैलती हैं। ऐसे में किसी भी वायरल संदेश पर भरोसा करने से पहले भारतीय रिजर्व बैंक, प्रेस सूचना ब्यूरो अथवा संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और सामाजिक माध्यम खातों से जानकारी की पुष्टि करना आवश्यक है।
फिलहाल 30 जून 2026 से कागजी नोट बंद होने संबंधी दावा पूरी तरह असत्य है और आम लोगों को अपने पास मौजूद किसी भी वैध भारतीय मुद्रा नोट को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
