मोबाइल की लत बनी जानलेवा? डांट पड़ते ही कमरे में चली गई 8वीं कक्षा की छात्रा, फिर नहीं लौटी वापस

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नवीन समाचार, चमोली, 24 जून 2026 (8th-grade Student Suicide for Mobile)। उत्तराखंड के चमोली (Chamoli) जनपद के किमोली (Kimoli) गांव में एक बेहद दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। गर्मियों की छुट्टियों के दौरान अधिकांश समय मोबाइल फोन पर बिताने वाली आठवीं कक्षा की एक छात्रा संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटकी मिली। परिजनों के अनुसार बच्ची को दिनभर मोबाइल फोन देखने और पढ़ाई पर ध्यान न देने को लेकर समझाया गया था।

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इसके बाद वह नाराज होकर कमरे में चली गई। कुछ समय बाद जब परिजनों ने उसे तलाशा तो वह फंदे से लटकी हुई मिली। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है, जबकि गांव और आसपास के क्षेत्रों में भी शोक और हैरानी का माहौल है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विकासखंड क्षेत्र के किमोली गांव निवासी रमेश की 14 वर्षीय पुत्री मीनाक्षी (Meenakshi) आठवीं कक्षा की छात्रा थी। इन दिनों विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश होने के कारण वह घर पर ही रह रही थी। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से वह अपना अधिकांश समय मोबाइल फोन पर वीडियो देखने में बिता रही थी। परिजनों ने कई बार उसे समझाया था कि वह पढ़ाई और अन्य गतिविधियों पर भी ध्यान दे, लेकिन मोबाइल के प्रति उसका आकर्षण लगातार बढ़ता जा रहा था।

छुट्टियों में बढ़ गया था मोबाइल का उपयोग

8th-grade Student Suicide for Mobile मोबाइल का बच्चों पर प्रभाव: जानिए क्या हो सकता है दुष्प्रभाव?- हैलो  स्वास्थ्यपरिजनों के अनुसार सोमवार शाम को भी मीनाक्षी मोबाइल फोन पर वीडियो देख रही थी। इसी दौरान घर के लोगों ने उसे मोबाइल का अत्यधिक उपयोग करने पर टोका और पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी। बताया जा रहा है कि इस बात से वह नाराज हो गई और गुस्से में घर के दूसरे कमरे में चली गई।

परिजनों का कहना है कि उसने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया था। शुरुआत में परिवार के लोगों ने इसे सामान्य नाराजगी समझा, लेकिन जब काफी समय बीत जाने के बाद भी वह बाहर नहीं आई तो उन्हें चिंता हुई। इसके बाद दरवाजा खोलकर देखा गया तो छात्रा फंदे से लटकी हुई मिली।

चिकित्सालय पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी मृत्यु

घटना का पता चलते ही परिजन उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Community Health Centre-CHC) लेकर पहुंचे। हालांकि चिकित्सकों के अनुसार बच्ची को चिकित्सालय पहुंचाने से पहले ही उसकी मृत्यु हो चुकी थी। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन डिमरी (Dr. Naveen Dimri) ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

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घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भी सक्रिय हुई और रात में ही आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी। मंगलवार को उपनिरीक्षक संदीप देवरानी (Sandeep Devrani) ने पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए उप जिला चिकित्सालय कर्णप्रयाग (Sub District Hospital Karnaprayag) भेज दिया।

परिवार और समाज के लिए गंभीर चेतावनी

परिजनों के अनुसार मीनाक्षी हाल के दिनों में मोबाइल पर कुछ ऐसे वीडियो भी देख रही थी, जिनके बाद उसके स्वभाव में चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ता दिखाई दे रहा था। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

यह घटना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि बच्चों और किशोरों में बढ़ती मोबाइल निर्भरता, डिजिटल सामग्री के प्रभाव तथा अभिभावकों और बच्चों के बीच संवाद की आवश्यकता को भी सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि छुट्टियों के दौरान बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों, मानसिक स्थिति और दैनिक दिनचर्या पर परिवारों को विशेष ध्यान देना चाहिए।

पुलिस कर रही है जांच

पुलिस का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में शोक का माहौल है और लोग इस घटना को लेकर स्तब्ध हैं। यह घटना अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के लिए भी एक गंभीर संदेश छोड़ गई है कि डिजिटल युग में बच्चों के साथ नियमित संवाद, भावनात्मक सहयोग और संतुलित तकनीकी उपयोग कितना आवश्यक हो गया है। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

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