नवीन समाचार, टिहरी/चमोली, 22 मई 2026 (Forest Fires Turn Deadly in UK-2 Died)। उत्तराखंड (UTTARAKHAND) में लगातार फैल रही जंगल की आग अब जानलेवा साबित होने लगी है। टिहरी गढ़वाल (TEHRI GARHWAL) के कीर्तिनगर क्षेत्र में घर की ओर बढ़ रही आग को रोकने गई एक महिला की झुलसकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि चमोली (CHAMOLI) जनपद में बदरीनाथ हाईवे के समीप जंगल की आग बुझाने गये एक फायर वाचर की खाई में गिरने से मृत्यु हो गई। दोनों घटनाओं ने पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते वनाग्नि संकट, सीमित संसाधनों और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों को फिर सामने ला दिया है। आप यह संबंधित वीडिओ भी जरूर देखना चाहेंगे :
घर बचाने गई महिला आग की चपेट में आई
टिहरी गढ़वाल के कीर्तिनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पैंडुला में 50 वर्षीय अंजू देवी जंगल की आग बुझाने के दौरान गंभीर रूप से झुलस गईं। जानकारी के अनुसार जंगल की आग धीरे-धीरे उनके घर की ओर बढ़ रही थी। इसी को रोकने के लिए वह घर से करीब 150 मीटर दूर जंगल की ओर गई थीं। क्या है उत्तराखंड में वनाग्नि की घटनाओं का ट्रेंड, जानें पिछले वर्षों में हुई वनाग्नि की घटनाओं और प्रभावित वन क्षेत्र और हुए नुकसान के पूरे आंकड़े
पूर्व प्रधान सुनय कुकसाल के अनुसार आग बुझाने के प्रयास के दौरान महिला बुरी तरह झुलस गई और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। देर रात तक घर वापस नहीं लौटने पर परिजनों और ग्रामीणों को घटना की जानकारी हुई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। आप यह संबंधित वीडिओ भी जरूर देखना चाहेंगे :
बदरीनाथ हाईवे के पास आग बुझाने गया फायर वाचर खाई में गिरा
दूसरी घटना चमोली जिले के बेड़ूबगढ़ बिरही क्षेत्र की है, जहां बदरीनाथ हाईवे के समीप चीड़ के जंगल में लगी आग को बुझाने गये फायर वाचर राजेंद्र सिंह नेगी की मौत हो गई। 42 वर्षीय राजेंद्र सिंह नेगी पाखी जलगवाड़ गांव के निवासी थे।
बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ सर्वेश दुबे ने बताया कि बुधवार दोपहर लगभग दो बजे चट्टानी क्षेत्र में चीड़ के जंगल में आग भड़क गई थी। इसके बाद चमोली रेंज के फायर वाचरों को आग बुझाने के लिए भेजा गया। 15 सदस्यीय टीम में राजेंद्र सिंह भी शामिल थे।
रातभर चला तलाश अभियान, सुबह खाई में मिला शव
शाम लगभग सात बजे तक अधिकांश आग पर काबू पा लिया गया और अन्य फायर वाचर वापस हाईवे तक पहुंच गये, लेकिन राजेंद्र सिंह नहीं लौटे। साथियों ने अधिकारियों को उनके लापता होने की सूचना दी।
एसपी सुरजीत सिंह पंवार के निर्देश पर एसडीआरएफ और वन विभाग की टीमों ने रातभर तलाश अभियान चलाया। देर रात जंगल में उनका मोबाइल फोन बरामद हुआ, लेकिन अंधेरा बढ़ने के कारण अभियान रोकना पड़ा।
गुरुवार सुबह दोबारा शुरू हुए रेस्क्यू अभियान में राजेंद्र सिंह का शव लगभग 70 मीटर गहरी खाई में मिला। शव आग से झुलसा हुआ था। अधिकारियों का अनुमान है कि आग बुझाने के दौरान वह चट्टानी क्षेत्र से फिसलकर खाई में गिर गये होंगे।
मुआवजे और नौकरी की मांग उठी
घटना की सूचना के बाद मृतक के परिजन और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। क्षेत्रीय लोगों ने प्रभावित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई है।
वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मामले की जांच में जुटे हैं। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल की आग बुझाने वाले कर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, आधुनिक संसाधन और बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
जंगल की आग से बढ़ता खतरा, लगातार चुनौती बन रहा वनाग्नि संकट
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में हर वर्ष गर्मियों के दौरान जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं। विशेष रूप से चीड़ के जंगलों में सूखी पत्तियां और तेज हवाएं आग को तेजी से फैलाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है that सीमित संसाधनों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों को अत्यधिक जोखिम उठाना पड़ता है।
हाल के वर्षों में वनाग्नि से पर्यावरणीय नुकसान के साथ मानव जीवन पर भी खतरा बढ़ा है। विशेषज्ञ लगातार जंगलों में निगरानी बढ़ाने, स्थानीय समुदायों को प्रशिक्षित करने और आधुनिक अग्निशमन तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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