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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 17 मई 2026 (Admission to Delhi University-Details)। 12वीं बोर्ड परीक्षा और सीयूईटी (CUET) के परिणाम आने के बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थी और परिजन चिंता में आ जाते हैं, विशेषकर तब जब अंक अपेक्षा से कम आते हैं। अनेक विद्यार्थियों को लगता है कि यदि 90 प्रतिशत अंक नहीं आये या सीयूईटी में कम स्कोर रहा तो दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University-DU) में प्रवेश का सपना समाप्त हो गया। जबकि वास्तविकता इससे अलग है। विशेषज्ञों के अनुसार सही रणनीति, उचित प्राथमिकता चयन और अधिक विकल्प भरने से कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी दिल्ली विश्वविद्यालय के अनेक कॉलेजों और पाठ्यक्रमों में प्रवेश के अवसर बने रहते हैं।
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Toggleअब केवल 12वीं के अंक नहीं, सीयूईटी स्कोर भी महत्वपूर्ण
पहले दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश मुख्य रूप से 12वीं की कटऑफ के आधार पर होता था, लेकिन अब अधिकांश पाठ्यक्रमों में सीयूईटी स्कोर के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में यदि किसी विद्यार्थी के बोर्ड परीक्षा में कम अंक आये हैं, तब भी अच्छा सीयूईटी स्कोर उसे अवसर दिला सकता है। वहीं कई स्थितियों में सामान्य सीयूईटी स्कोर के साथ भी विद्यार्थियों को सीट मिल जाती है, यदि वे सही कॉलेज और पाठ्यक्रम का चयन करें।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी केवल शीर्ष कॉलेजों जैसे एसआरसीसी (SRCC), हिंदू कॉलेज (Hindu College) और हंसराज कॉलेज (Hansraj College) को ही प्राथमिकता देते हैं और अन्य कॉलेजों को सूची में शामिल नहीं करते। इससे प्रवेश की संभावना कम हो जाती है। जबकि ऑफ-कैंपस और इवनिंग कॉलेजों सहित अनेक संस्थानों में अपेक्षाकृत कम स्कोर पर भी प्रवेश मिल जाता है।
कम स्कोर पर भी इन कॉलेजों में मिले हैं प्रवेश
पिछले वर्षों के प्रवेश आंकड़ों के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों में कम स्कोर पर भी विद्यार्थियों को सीटें मिली हैं। विशेषकर कुछ बीए कार्यक्रमों, इतिहास, राजनीति विज्ञान और समाज विज्ञान जैसे विषयों में कटऑफ अपेक्षाकृत कम रही।
89-90 प्रतिशत या समकक्ष स्कोर पर संभावनाएं
- आर्यभट्ट कॉलेज — बीए पाठ्यक्रम
- पीजीडीएवी कॉलेज — बीए इतिहास
- रामानुजन कॉलेज — राजनीति विज्ञान
- भारती कॉलेज — समाज विज्ञान
- विवेकानंद कॉलेज — राजनीति विज्ञान
87-88 प्रतिशत या समकक्ष स्कोर वाले विद्यार्थियों के लिए
- गार्गी कॉलेज — दर्शनशास्त्र
- सत्यवती कॉलेज — इतिहास
- श्री अरबिंदो कॉलेज — बीए कार्यक्रम
- जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज — इतिहास
85-86 प्रतिशत पर भी अवसर
- दयाल सिंह कॉलेज — संस्कृत
- विवेकानंद कॉलेज — इतिहास
- पीजीडीएवी कॉलेज — राजनीति विज्ञान
- जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज — बीए कार्यक्रम
80-85 प्रतिशत या सामान्य सीयूईटी स्कोर पर विकल्प
- शहीद भगत सिंह कॉलेज (इवनिंग)
- सत्यवती कॉलेज (इवनिंग)
- पीजीडीएवी इवनिंग कॉलेज
- जाकिर हुसैन इवनिंग कॉलेज
- राजधानी कॉलेज
आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों को भी मिलते हैं अवसर
पिछले प्रवेश चक्रों में अनुसूचित जाति और अन्य आरक्षित वर्गों के विद्यार्थियों को अपेक्षाकृत कम स्कोर पर भी सीटें मिलीं। उदाहरण के लिए भगिनी निवेदिता कॉलेज में बीए इतिहास और भारती कॉलेज में बीएससी बॉटनी जैसे पाठ्यक्रमों में कम स्कोर पर भी प्रवेश हुआ। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हर वर्ष कटऑफ और सीटों की स्थिति अलग होती है, इसलिए पुराने आंकड़ों को केवल संकेत के रूप में देखना चाहिए।
सीएसएएस पोर्टल में सही प्राथमिकता भरना सबसे महत्वपूर्ण
दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश सीएसएएस (CSAS) पोर्टल के माध्यम से होता है। यहां विद्यार्थियों को कॉलेज और पाठ्यक्रमों की प्राथमिकता भरनी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार यही वह चरण है, जहां अधिकांश विद्यार्थी गलती कर देते हैं।
विद्यार्थियों को इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए
- केवल शीर्ष कॉलेजों तक सीमित न रहें
- अधिक से अधिक कॉलेज और पाठ्यक्रम चुनें
- ऑफ-कैंपस और इवनिंग कॉलेजों को भी सूची में रखें
- कई चरणों तक प्रवेश प्रक्रिया पर नजर रखें
- पाठ्यक्रम की उपयोगिता और भविष्य के अवसर भी देखें
- सीट आवंटन के बाद अपग्रेड विकल्प का उपयोग करें
विशेषज्ञों का कहना है कि अनेक विद्यार्थियों को दूसरे या तीसरे चरण में बेहतर कॉलेज मिल जाते हैं, इसलिए पहले चरण में सीट न मिलने पर निराश नहीं होना चाहिए।
दिल्ली विश्वविद्यालय के अलावा भी हैं अच्छे विकल्प
यदि दिल्ली विश्वविद्यालय में सीट नहीं मिलती है, तब भी दिल्ली-एनसीआर में कई प्रतिष्ठित संस्थान हैं जहां विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
आईपी विश्वविद्यालय से संबद्ध प्रमुख कॉलेज
- वीआईपीएस (VIPS)
- एमएआईएमएस (MAIMS)
- सीपीजे कॉलेज
इन संस्थानों में बीबीए, बीकॉम, विधि और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे पाठ्यक्रमों की अच्छी मांग रहती है।
‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:
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निजी विश्वविद्यालय भी बन सकते हैं विकल्प
- एमिटी विश्वविद्यालय
- शारदा विश्वविद्यालय
- शिव नादर विश्वविद्यालय
- बेनेट विश्वविद्यालय
विद्यार्थियों को निराश नहीं होने की सलाह
करियर विशेषज्ञों का कहना है कि कम अंक जीवन का अंतिम परिणाम नहीं होते। दिल्ली विश्वविद्यालय सहित देश के अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए केवल अंक ही नहीं बल्कि रणनीति, धैर्य और सही जानकारी भी महत्वपूर्ण होती है। अनेक विद्यार्थी सामान्य स्कोर के बावजूद आगे चलकर प्रतियोगी परीक्षाओं, शोध, प्रशासनिक सेवाओं और निजी क्षेत्र में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार विद्यार्थियों को दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी रुचि, क्षमता और दीर्घकालिक लक्ष्य के अनुसार पाठ्यक्रम और संस्थान का चयन करना चाहिए। विद्यार्थियों और अभिभावकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार, तथा यदि इस विषय में कुछ और जानना चाहते हैं तो नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।














3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं।