नवीन समाचार, नैनीताल, 31 अगस्त 2026 (Nainital High Court News 31 Aug 2026)। उत्तराखंड (Uttarakhand) उच्च न्यायालय (High Court) ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (Patanjali Ayurved Limited) और दिव्य फार्मेसी (Divya Pharmacy) से जुड़े बहुचर्चित ठगी मामले में हरिद्वार (Haridwar) की निचली अदालत के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायिक अनुशासन का पालन न करने पर टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने धोखाधड़ी से जुड़े मामले में 31.21 करोड़ रुपये की फ्रीज (Freeze) की गई राशि के निस्तारण से संबंधित आवेदन पर दो सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय सुनाने के निर्देश दिए हैं।
उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल (Justice Rakesh Thapliyal) की एकलपीठ (Single Bench) ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के स्पष्ट आदेश के बावजूद मामले का निस्तारण टालना न्यायिक अनुशासन के अनुरूप नहीं है। न्यायालय ने हरिद्वार की निचली अदालत को दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure-CRPC) की धारा 451 के तहत दाखिल आवेदनों पर निर्धारित अवधि में निर्णय देने के निर्देश दिए हैं।
जून 2022 में दर्ज हुआ था मामला
मामला जून 2022 का है, जब पतंजलि के प्रतिनिधि रमण पंवार (Raman Panwar) की शिकायत पर कनखल थाना (Kankhal Police Station) में मुख्य आरोपी राकेश मेहरा (Rakesh Mehra) और अन्य के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (First Information Report-FIR) दर्ज की गई थी।
जांच एजेंसी (Investigating Agency) ने मामले की जांच के दौरान राकेश मेहरा और उनकी बेटियों के बैंक खातों में जमा 31.21 करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज कर दिया था।
पीड़ित पक्ष ने फ्रीज की गई राशि को मुक्त कराने के लिए निचली अदालत में आवेदन दाखिल किया था। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने छह मई 2025 को निचली अदालत को कानून के अनुसार आवेदन का निस्तारण करने का स्पष्ट आदेश दिया था।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद टलता रहा निर्णय
इसके बावजूद 22 जुलाई 2026 को हरिद्वार की निचली अदालत ने यह कहते हुए निर्णय टाल दिया कि उच्च न्यायालय द्वारा प्रशासनिक स्तर पर उससे कुछ टिप्पणियां मांगी गई हैं।
इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने 24 अगस्त 2026 को सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि सर्वोच्च न्यायालय देश की सर्वोच्च अदालत है और प्रशासनिक पत्राचार का आधार लेकर उसके आदेश का पालन न करना न्यायिक अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है।
उच्च न्यायालय ने आरोपी पक्ष की उन दलीलों को भी खारिज कर दिया, जिनमें निचली अदालत के न्यायाधीश पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए मामले को दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।
याचिकाओं का निस्तारण करते हुए उच्च न्यायालय ने हरिद्वार के न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय (Judicial Magistrate Second) को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर, 15 जुलाई 2026 को पूरी हो चुकी सुनवाई के आधार पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 451 के अंतर्गत दाखिल आवेदनों पर अंतिम निर्णय सुनाया जाए।
वर्ष 2003 के हल्द्वानी हत्या और लूट मामले में हाईकोर्ट ने चारों आरोपितों को बरी किया, ठोस साक्ष्य नहीं मिलने पर फैसला
उत्तराखंड (Uttarakhand) उच्च न्यायालय (High Court) ने वर्ष 2003 में हल्द्वानी (Haldwani) में मुरादाबाद (Moradabad) के एक कैसेट व्यापारी के कर्मचारी की हत्या और लूट के मामले में चार आरोपियों को बरी कर दिया है। न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर विस्तृत सुनवाई के बाद आरोपियों के विरुद्ध ठोस साक्ष्य नहीं होने के आधार पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी (Justice Ravindra Maithani) और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह (Justice Siddharth Sah) की खंडपीठ (Division Bench) ने की।
मामले के अनुसार वर्ष 2003 में हल्द्वानी में मुरादाबाद के एक कैसेट व्यापारी के कर्मचारी राज (Raj) की हत्या कर दी गई थी। उसका शव कैनाल (Canal) में पड़ा मिला था, जबकि उसके एक साथी को घायल कर 47 हजार 500 रुपये की नकदी और कैसेट लूट लिए गए थे।
मामले में कोतवाली (Kotwali) में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के बाद अनिल (Anil), इमरान (Imran), वासिब (Wasib) और पप्पू (Pappu) को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
जिला अदालत ने सुनाई थी अलग-अलग सजा
मामला जिला अदालत (District Court) पहुंचने पर अनिल और इमरान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जबकि वासिब और पप्पू को एक वर्ष की सजा दी गई थी।
आरोपियों ने जिला अदालत के इस फैसले को उच्च न्यायालय में अपील (Appeal) दाखिल कर चुनौती दी थी। उनका कहना था कि वे निर्दोष हैं और उनके विरुद्ध कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
मामला आगे सर्वोच्च न्यायालय तक भी पहुंचा, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय को भेज दिया था। उच्च न्यायालय ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद चारों आरोपियों के विरुद्ध दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य नहीं पाए। इसके आधार पर न्यायालय ने सभी चारों आरोपियों को बरी कर दिया।
पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
नैनीताल में क्लिक करके नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य सभी महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट पढ़ी जा सकती हैं। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचार, अल्मोड़ा के समाचार, बागेश्वर के समाचार, चंपावत के समाचार, ऊधमसिंह नगर के समाचार, देहरादून के समाचार, उत्तरकाशी के समाचार, पौड़ी के समाचार, टिहरी जनपद के समाचार, चमोली के समाचार, रुद्रप्रयाग के समाचार, हरिद्वार के समाचार और उत्तराखंड से संबंधित अन्य समाचार भी पढ़ सकते हैं।
आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पर पढ़ें। हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से, एक्स से, थ्रेड्स चैनल से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें यहाँ क्लिक करके सहयोग करें..।
Tags (Nainital High Court News 31 Aug 2026) :
Nainital High Court News 31 Aug 2026, Uttarakhand High Court News, Nainital High Court News, Patanjali Ayurved Fraud Case, Divya Pharmacy Fraud Case, Haridwar Court Order, 31.21 Crore Frozen Amount Case, Judicial Discipline High Court, Haldwani Murder Case 2003, Haldwani Robbery Murder Verdict, Four Accused Acquitted High Court, Uttarakhand Crime News, Supreme Court Order Compliance, Judicial Magistrate Haridwar News, High Court Acquittal Case, Navin Samachar, #UttarakhandNews #NainitalHighCourt #PatanjaliCase #DivyaPharmacy #HaridwarCourt #JudicialDiscipline #HighCourtOrder #HaldwaniNews #MurderCase #CourtVerdict #CrimeNews #LegalNews #UttarakhandHighCourt #NavinSamachar

डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
