नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अगस्त 2026 (Questions for Digital Media Advertise)। उत्तराखंड (UTTARAKHAND) में न्यूज पोर्टलों और डिजिटल मीडिया संस्थानों की सरकारी विज्ञापन दरों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। अलग-अलग श्रेणियों के लिए प्रस्तावित ₹1,200 प्रतिमाह की समान विज्ञापन दर की एक जैसी भुगतान व्यवस्था और सूचीबद्धता प्रक्रिया में लंबे विलंब को लेकर पत्रकार संगठनों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) के सामने पुनर्विचार की मांग रखी है। संगठनों का कहना है कि डिजिटल पत्रकारिता की बढ़ती लागत, दूरदराज क्षेत्रों में समाचार संकलन की चुनौतियों और पोर्टलों की अलग-अलग पहुंच को देखते हुए श्रेणीवार एवं न्यायसंगत विज्ञापन नीति बनाई जानी चाहिए।
दिन-रात खबरों की तलाश में दौड़ते पत्रकार, दूरदराज के गांवों तक पहुंचते संवाददाता, लगातार बदलती तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच उत्तराखंड के छोटे और मध्यम डिजिटल मीडिया संस्थानों के सामने पत्रकारिता को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
इसी मुद्दे को लेकर विभिन्न पत्रकार और डिजिटल मीडिया संगठनों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी मांगें रखी हैं। मुख्यमंत्री से सूचीबद्धता प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने, सरकारी विज्ञापन व्यवस्था को प्रभावी बनाने और वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप विज्ञापन दरों की समीक्षा करने का आग्रह किया गया है।
श्रेणियां अलग-अलग तो विज्ञापन दर सभी के लिए समान क्यों?
नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया (उत्तराखंड) की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में न्यूज पोर्टलों और वेबसाइटों की सूचीबद्धता में विलंब तथा विज्ञापन दरों में कथित विसंगतियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है।
ज्ञापन के अनुसार मई 2025 में न्यूज पोर्टलों और वेबसाइटों की सूचीबद्धता एवं मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। लगभग एक वर्ष बाद 25 मई 2026 को मूल्यांकन के परिणाम जारी किए गए, जिनमें पोर्टलों को पात्र और अपात्र घोषित किया गया। इससे पहले सितंबर 2022 में शुरू हुई संबद्धीकरण प्रक्रिया जून 2023 में पूरी हुई थी और पुरानी व्यवस्था तीन वर्षों से अधिक समय तक चलती रही।
ज्ञापन में कहा गया कि सूचना एवं लोक संपर्क विभाग (Information and Public Relations Department) ने 24 अगस्त 2026 के कार्यालय आदेश के माध्यम से न्यूज पोर्टलों और वेबसाइटों को उनके द्वारा दी गई न्यूनतम दरों पर 15 दिनों के भीतर सहमति देने की स्थिति में सूचीबद्ध किए जाने का प्रस्ताव रखा है। संगठन ने सभी संबंधित संस्थानों को इस संबंध में ई-मेल या अन्य प्रमाणित माध्यम से समय पर सूचना उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई है।
‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ श्रेणी के लिए अलग पात्रता, भुगतान एक समान
ज्ञापन में सबसे महत्वपूर्ण सवाल न्यूज पोर्टलों के श्रेणीकरण और विज्ञापन भुगतान को लेकर उठाया गया है। सूचना विभाग न्यूज पोर्टलों और वेबसाइटों को उनकी पहुंच तथा यूनिक विजिटर्स (Unique Visitors) के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करता है।
उत्तराखंड सोशल मीडिया संशोधन नियम 2015 के तहत ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ श्रेणियों के लिए अलग-अलग पात्रता मानक निर्धारित किए गए हैं। संगठन का सवाल है कि जब पोर्टलों की पहुंच और पाठक संख्या के आधार पर उनकी श्रेणियां अलग-अलग हैं, तो विज्ञापन भुगतान के लिए सभी श्रेणियों को समान ₹1,200 प्रतिमाह की दर पर क्यों रखा जा रहा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि अधिक पहुंच और यूनिक विजिटर्स वाले ‘क’ श्रेणी के पोर्टल को उच्च श्रेणी में रखने के बाद यदि उसकी विज्ञापन दर भी ‘ख’ और ‘ग’ श्रेणी के बराबर रखी जाती है, तो श्रेणीकरण के व्यावहारिक औचित्य पर सवाल उठता है।
वर्ष 2023 की तुलना में करीब 90 प्रतिशत कमी का दावा
नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया (उत्तराखंड) ने विज्ञापन दरों में भारी कमी का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के सामने रखा है।
ज्ञापन के अनुसार वर्ष 2023 में ‘क’ श्रेणी के न्यूज पोर्टलों के लिए विज्ञापन दर ₹8,000 से ₹12,000 प्रतिमाह तक निर्धारित थी, जबकि वर्ष 2026 के लिए प्रस्तावित दर ₹1,200 प्रतिमाह बताई जा रही है। संगठन का कहना है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो तीन वर्षों के भीतर विज्ञापन दर में लगभग 90 प्रतिशत की कमी होगी।
संगठन ने यह भी कहा कि इस अवधि में डिजिटल पत्रकारिता के संचालन खर्च कम नहीं हुए हैं। सर्वर, डोमेन, इंटरनेट, तकनीकी सेवाओं, उपकरणों, समाचार संकलन और यात्रा सहित अन्य खर्च लगातार बने हुए हैं और कई क्षेत्रों में बढ़े हैं।
ज्ञापन में आवेदन प्रक्रिया से संबंधित अर्नेस्ट मनी और कार्यपूर्ति प्रतिभूति की व्यवस्था का भी उल्लेख करते हुए पूरी प्रक्रिया की आर्थिक व्यवहारिकता पर सवाल उठाया गया है।
वर्षवार विज्ञापन दरें सार्वजनिक करने की मांग
ज्ञापन में सूचना विभाग की वेबसाइट पर विभिन्न वर्षों की विज्ञापन दरें और स्वीकृत वेबसाइटों की सूची सार्वजनिक नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है।
संगठन ने वर्ष 2021 से 2026 तक न्यूज पोर्टलों और वेबसाइटों के लिए लागू विज्ञापन दरों की वर्षवार और श्रेणीवार जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। विशेष रूप से वर्ष 2023, 2024, 2025 और 2026 में ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ श्रेणी के लिए लागू दरों को सार्वजनिक करने का आग्रह किया गया है।
डिजिटल मीडिया की बढ़ी भूमिका के साथ बढ़ा संचालन खर्च
इसी गंभीर मुद्दे को लेकर हिमालय डिजिटल मीडिया एसोसिएशन (Himalaya Digital Media Association) ने हल्द्वानी दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन सौंपकर सूचना विभाग में सूचीबद्ध डिजिटल मीडिया संस्थानों, न्यूज पोर्टलों और वेबसाइटों की विज्ञापन दरों में वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप सम्मानजनक वृद्धि की मांग की।
एसोसिएशन ने कहा कि डिजिटल मीडिया आज समाचार और सरकारी सूचनाओं को जनता तक पहुंचाने का तेज माध्यम बन चुका है। उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में मैदानी शहरों के साथ दूरस्थ पर्वतीय गांव और सीमांत क्षेत्र भी हैं, जहां से समाचार जुटाकर उन्हें कम समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाने में डिजिटल मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
खबरों का खर्च लगातार बढ़ा
हिमालय डिजिटल मीडिया एसोसिएशन का कहना है कि डिजिटल मीडिया की जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ इसके संचालन का खर्च भी लगातार बढ़ा है।वेबसाइट के सर्वर और होस्टिंग, डोमेन, तकनीकी रखरखाव, कैमरे और अन्य उपकरण, वीडियो शूटिंग एवं एडिटिंग, ग्राफिक्स, सोशल मीडिया संचालन, परिवहन, कंटेंट निर्माण तथा पत्रकारों और संवाददाताओं के मानदेय सहित कई प्रकार के खर्च संस्थानों को वहन करने पड़ते हैं।
दूरदराज के क्षेत्रों में समाचार कवरेज के लिए पत्रकारों और संवाददाताओं को कई किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। बारिश, बर्फबारी, आपदा और सड़क बंद होने जैसी परिस्थितियों में भी पत्रकार मौके तक पहुंचकर सूचना जनता तक पहुंचाते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि बढ़ती लागत और सीमित आय के बीच छोटे एवं मध्यम डिजिटल मीडिया संस्थानों के लिए गुणवत्तापूर्ण पत्रकारिता को लंबे समय तक जारी रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
पत्रकारों और संवाददाताओं की आजीविका से भी जुड़ा मुद्दा
हिमालय डिजिटल मीडिया एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से डिजिटल मीडिया के वर्तमान स्वरूप, उसकी पहुंच और संचालन लागत को ध्यान में रखते हुए सूचना विभाग की विज्ञापन दरों का पुनरीक्षण करने का आग्रह किया। एसोसिएशन के अनुसार उचित विज्ञापन दर केवल मीडिया संस्थानों की आय का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध पत्रकारों, संवाददाताओं और जमीनी स्तर पर काम करने वाले मीडिया कर्मियों की आजीविका से भी जुड़ा है।
पर्याप्त आर्थिक आधार मिलने पर छोटे और मध्यम डिजिटल मीडिया संस्थान बेहतर तकनीकी संसाधन जुटाने तथा पत्रकारों एवं संवाददाताओं को अधिक नियमित और सम्मानजनक मानदेय देने में सक्षम हो सकेंगे।
सांसद अजय भट्ट ने भी मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
डिजिटल मीडिया की विज्ञापन दरों से जुड़े इस मुद्दे को लेकर नैनीताल-ऊधम सिंह नगर सांसद अजय भट्ट (Ajay Bhatt) ने भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर मामले का संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। सांसद की ओर से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता से जुड़े संस्थानों की मांगों पर सकारात्मक विचार किए जाने की आवश्यकता जताई गई है।
पर्वतीय पत्रकार संघ ने भी रखीं पत्रकार हितों की मांगें
इधर पर्वतीय पत्रकार संघ (Parvatiya Patrakar Sangh) की ओर से भी मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर पत्रकार हितों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और मांगों को उनके सामने रखा गया। पत्रकारों ने अपनी व्यावहारिक दिक्कतों और लंबे समय से लंबित विषयों के समाधान की मांग की। पत्रकार संगठनों का कहना है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहे पत्रकारों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने सकारात्मक समाधान का दिया भरोसा
पत्रकारों और डिजिटल मीडिया संस्थानों की मांगों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुना और उनसे जुड़े विषयों पर सकारात्मक समाधान निकालने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।
अब डिजिटल मीडिया संस्थानों, न्यूज पोर्टल संचालकों और पत्रकार संगठनों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है। उनकी प्रमुख मांग सूचीबद्धता प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने, पात्र पोर्टलों को सरकारी विज्ञापन जारी करने तथा पहुंच और श्रेणी के अनुरूप पारदर्शी एवं व्यवहारिक विज्ञापन दरें तय करने की है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
