नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अगस्त 2026 (New Claim in Purification Controversy)। उत्तराखंड (UTTARAKHAND) के नैनीताल (NAINITAL) जनपद स्थित हल्द्वानी (HALDWANI) के रामलीला मैदान (Ramlila Maidan) में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) की रैली के बाद हुए शुद्धीकरण हवन को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद में अब आयोजक संस्था ने नया पक्ष सामने रखा है।आप यह संबंधित वीडियो भी जरूर देखना चाहेंगे :
श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास (Shri Ram Sena Dharmarth Seva Nyas) से जुड़े अंकित पाल (Ankit Pal) और विनोद आर्या (Vinod Arya) ने दावा किया कि वे दलित समाज से हैं और स्वयं शुद्धीकरण हवन में शामिल थे। संस्था ने कांग्रेस के इस आरोप को खारिज किया कि खड़गे के दलित समाज से होने के कारण हवन कराया गया था और कांग्रेस पर इस मुद्दे के जरिए हिंदुओं को बांटने का आरोप लगाया।
हल्द्वानी में आठ अगस्त को कांग्रेस की शंखनाद रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए हवन और शुद्धीकरण को लेकर कांग्रेस और आयोजक पक्ष आमने-सामने हैं। कांग्रेस इसे जातिगत भेदभाव और छुआछूत से जोड़ते हुए SC/ST Act के तहत कार्रवाई की मांग कर रही है, जबकि आयोजकों का कहना है कि हवन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या समुदाय को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि मैदान की सफाई के बाद धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजन करना था।
दलित समाज के सदस्यों ने कहा- जाति के कारण हवन का आरोप गलत
रामपुर रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेसवार्ता में श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के सदस्यों अंकित पाल और विनोद आर्या ने कहा कि वे दोनों दलित समुदाय से आते हैं और शुद्धीकरण हवन में शामिल रहे।
अंकित पाल ने कहा कि यदि कांग्रेस यह आरोप लगा रही है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के दलित समाज से होने के कारण शुद्धीकरण हवन कराया गया, तो यह आरोप गलत है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं दलित समाज से हैं और कार्यक्रम में उनकी भागीदारी रही।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की रैली के बाद रामलीला मैदान में फैली गंदगी की सफाई की गई और इसके बाद हवन कराया गया। उनके अनुसार कार्यक्रम के दौरान किसी व्यक्ति अथवा किसी जाति का नाम लेकर कोई टिप्पणी नहीं की गई।
विनोद आर्या ने कहा कि शुद्धीकरण हवन में सभी वर्गों के लोग मौजूद थे। पूजन के बाद प्रसाद का वितरण भी किया गया। दोनों सदस्यों ने कांग्रेस पर इस मामले को लेकर गलत जानकारी फैलाने और हिंदू समाज को बांटने का आरोप लगाया।
आयोजकों का दावा- मैदान में मिली गंदगी के बाद कराया गया हवन
न्यास के अध्यक्ष गिरीश चंद्र पांडे (Girish Chandra Pandey) ने कहा कि रामलीला मैदान धार्मिक आस्था और बड़े धार्मिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र है। उनके अनुसार आठ अगस्त को कांग्रेस की शंखनाद रैली के दौरान नारा-ए-तकबीर और अल्लाह-उ-अकबर जैसे नारे लगाए जाने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ था।
उन्होंने दावा किया कि इसके बाद संस्था के सदस्य मैदान में पहुंचे तो वहां काफी गंदगी मिली। गिरीश पांडे के अनुसार लगातार दो दिन तक ऐसी स्थिति रहने के बाद 11 अगस्त को परिसर की सफाई कर वहां हवन-पूजन किया गया।
उनका कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या जाति का अपमान करना नहीं था। संस्था ने केवल मैदान की सफाई कर उसे धार्मिक आयोजन के लिए पूजा योग्य बनाने के उद्देश्य से हवन कराया।
शराब की बोतलें, रैपर और अन्य गंदगी मिलने का भी दावा
गिरीश चंद्र पांडे ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में दावा किया कि रैली के बाद मंच और मैदान के आसपास शराब की बोतलें, पान की पीक, रैपर और अन्य प्रकार की गंदगी मिली थी।
उन्होंने कहा कि पहले पूरे परिसर की सफाई कराई गई और इसके बाद धार्मिक विधि के अनुसार यज्ञ किया गया। उनके अनुसार इसे राजनीतिक या जातिगत उद्देश्य से जोड़ना गलत है।
आयोजकों का कहना है कि रामलीला मैदान की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए सफाई के बाद हवन-पूजन कराया गया था।
राहुल गांधी को बताया अपरिपक्व नेता
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) द्वारा इस मामले में SC/ST Act के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग किए जाने पर न्यास अध्यक्ष गिरीश पांडे ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने राहुल गांधी को अपरिपक्व नेता बताते हुए कहा कि उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं है और कांग्रेस के क्षेत्रीय नेताओं द्वारा उन्हें गलत जानकारी दी जा रही है।
पांडे ने दावा किया कि कार्यक्रम में अलग-अलग सामाजिक वर्गों के लोगों ने भाग लिया था। उनके अनुसार कुछ लोगों ने मंच और परिसर की सफाई में योगदान दिया, जबकि दलित समाज के सदस्यों ने हवन में आहुति देने और प्रसाद वितरण में भी भागीदारी की।
उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी को कार्यक्रम की पूरी जानकारी होती तो वह इसे जातिगत भेदभाव से नहीं जोड़ते।
कांग्रेस का आरोप- खड़गे के जाने के बाद हुआ शुद्धीकरण
दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि आठ अगस्त को रामलीला मैदान में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली हुई थी और इसके बाद मैदान में शुद्धीकरण हवन कराया गया। कांग्रेस ने इसे खड़गे की दलित पहचान से जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं।
मल्लिकार्जुन खड़गे इस मुद्दे को संसद में भी उठा चुके हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि शुद्धीकरण की कार्रवाई दलित विरोधी मानसिकता और छुआछूत को दर्शाती है।
राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेसवार्ता के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए शुद्धीकरण को छुआछूत जैसी मानसिकता बताया था। उन्होंने कहा था कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध SC/ST Act के तहत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से भी मामले में हस्तक्षेप करने और केंद्र तथा राज्य सरकार की ओर से उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की थी।
सफाई या जातिगत भेदभाव, दो दावों के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद
हल्द्वानी के रामलीला मैदान का शुद्धीकरण विवाद अब उत्तराखंड की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन गया है। कांग्रेस जहां इसे मल्लिकार्जुन खड़गे की दलित पहचान और छुआछूत से जोड़ते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं हवन कराने वाली संस्था इसे मैदान की सफाई और धार्मिक परंपरा के तहत किया गया कार्यक्रम बता रही है।
आयोजक संस्था का नया दावा है कि हवन में दलित समाज के सदस्य भी शामिल थे और कार्यक्रम में किसी व्यक्ति या जाति का नाम नहीं लिया गया। कांग्रेस ने हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को दलित समाज के सम्मान से जोड़ते हुए अपना विरोध जारी रखा है।
दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों के बीच यह मामला लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है। अब इस विवाद में प्रशासनिक अथवा कानूनी स्तर पर आगे क्या कार्रवाई होती है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।