नवीन समाचार, नैनीताल, 3 सितंबर 2026 (Nainital-Weather-Traffic-Debris in Lake)। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में लगातार तीसरे दिन हुई बारिश के बीच नैनीताल-हल्द्वानी राष्ट्रीय मार्ग पर दो गांव-डोलमार के बीच भेड़िया पखांड़ के पास दो दिनों से आ रहा मलबा हटाकर यातायात बहाल कर दिया गया है। हालांकि बारिश के कारण जिले में अभी भी 23 ग्रामीण मार्ग बंद हैं और धारी तहसील में नौ लोगों के घरों व आंगनों को आंशिक क्षति पहुंची है। दूसरी ओर, मूसलाधार बारिश के साथ नैनी झील में भारी मात्रा में गाद, मिट्टी और मलबा पहुंचने के बाद प्रशासन ने इसके स्रोत और कारणों की जांच शुरू कर दी है।
जिले में गुरुवार को लगातार तीसरे दिन बारिश हुई, हालांकि बीच-बीच में धूप निकलने से लोगों को कुछ राहत मिली। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की 3 सितंबर की शाम जारी रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटों में नैनीताल में 70 मिमी, हल्द्वानी में 30 मिमी, श्री कैंची धाम में 40 मिमी, बेतालघाट में 25 मिमी और मुक्तेश्वर में 38.6 मिमी बारिश दर्ज की गई।
नैनीताल-हल्द्वानी मार्ग खुला, 23 ग्रामीण सड़कों पर अभी भी असर
नैनीताल-हल्द्वानी मार्ग पर दो गांव-डोलमार के बीच भेड़िया पखांड़ के पास लगातार मलबा आने से पिछले दो दिनों से यातायात प्रभावित हो रहा था। हाईवे पेट्रोल-3 ज्योलीकोट में तैनात आरक्षी अनूप सिंह और प्रदीप सिंह ने जेसीबी की सहायता से मलबा हटवाकर मार्ग पर यातायात सुचारू कराया।
हालांकि जिले में बारिश के कारण 23 ग्रामीण मार्ग अभी भी बाधित बताए गए हैं। इनमें बजून-अधौड़ा, तल्ली रामगढ़-रातीघाट, ढौकाने-कुलगढ़ बिचखाली, शीतला-छतौला, अलचौना-ताड़ा, देवपुरा-सौड़, सलियाकोट-अनर्पा, बिनकोट-चंद्रकोट, हरतपा-हली, रातीघाट-बुधलाकोट, मोरनौला-भीड़ापानी, देवली-महतोली, पदमपुर-सुवाकोट, स्यूड़ा-कोन्ता-ककोड़, बरेली-अल्मोड़ा-सिरसा, पटलोट-पश्यागांव और पतलिया-ज्योस्यूड़ सहित अन्य मार्ग शामिल हैं। संबंधित विभागीय खंडों की ओर से बंद मार्गों को खोलने की कार्रवाई जारी है।
धारी तहसील में नौ लोगों के घरों और आंगनों को पहुंची आंशिक क्षति
लगातार बारिश से धारी तहसील क्षेत्र में भी नुकसान की सूचना मिली है। जिला आपदा प्रबंधन की रिपोर्ट के अनुसार किशनी देवी, केशर सिंह, चनुली देवी, आन सिंह, प्रकाश चंद्र, खीमानंद, प्रेम बल्लभ, शेखर बड़ौला और नवीन चंद्र के घरों और आंगनों को आंशिक क्षति पहुंची है।
प्रशासन की ओर से बारिश और उससे होने वाले नुकसान की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
नैनी झील में पहुंची भारी मात्रा में गाद और मलबे की होगी जांच
मूसलाधार बारिश के बाद नैनी झील में भारी मात्रा में गाद, मिट्टी और मलबा पहुंचने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। झील में इतनी बड़ी मात्रा में मलबा पहुंचने के कारणों की जांच के लिए एसडीएम नवाजिश खलीक, भूविज्ञानी कामिनी बिष्ट और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया।
बीते दो दिनों की लगातार बारिश के दौरान मल्लीताल बोट हाउस के समीप नाले के माध्यम से कई टन गाद, मिट्टी और मलबा नैनी झील तक पहुंच गया। बोट हाउस क्लब के समीप नाले के मुहाने पर बड़ी मात्रा में मलबा जमा होने से डेल्टा जैसा क्षेत्र उभर आया है।
मलबा जमा होने से नाले का मुहाना प्रभावित हुआ और झील में गंदगी फैल गई। मामले की जानकारी मिलने पर प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों ने नाले तथा झील के प्रभावित हिस्से का स्थलीय निरीक्षण किया।
आल्मा कॉटेज क्षेत्र के पुराने भूस्खलन का मलबा बहकर पहुंचने की प्रारंभिक आशंका
अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पूर्व में आल्मा कॉटेज क्षेत्र में हुए भूस्खलन का मलबा नालों में जमा था। तेज बारिश के दौरान पानी के तेज बहाव के साथ यह मलबा बहकर नैनी झील तक पहुंच गया।
एसडीएम नवाजिश खलीक ने सिंचाई विभाग को झील में जमा मलबा हटाने के साथ ही इसके स्रोत और झील तक इतनी मात्रा में मिट्टी पहुंचने के अन्य संभावित कारणों की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन ने क्षेत्र के नालों में निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने की संभावना पर भी विचार किया है, ताकि नालों में गंदगी, मलबा या मिट्टी डालने वालों की पहचान की जा सके।
नया सर्वे कर पुरानी रिपोर्ट से होगा मिलान
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता डीके सिंह ने बताया कि झील में मलबा पहुंचने के कारणों को लेकर भूवैज्ञानिकों के साथ विस्तृत चर्चा की गई है। वर्ष 2018 में जिला प्रशासन की ओर से नैनी झील का सर्वे कराया गया था।
अब झील का नया सर्वे कराकर उसकी रिपोर्ट का वर्ष 2018 के सर्वे से मिलान किया जाएगा। इससे झील की मौजूदा गहराई, तल में जमा गाद और मलबे की स्थिति का आकलन किया जा सकेगा।
विभाग का कहना है कि भूवैज्ञानिकों के साथ विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर वैज्ञानिक विधि से झील में जमा मलबे को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। यह जांच नैनी झील के संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि लगातार बढ़ती गाद और मिट्टी झील की गहराई तथा प्राकृतिक स्वरूप को प्रभावित कर सकती है।
नासा ने लगातार दूसरे दिन नैनी झील से निकाला प्लास्टिक और तैरता कचरा
लगातार बारिश के बाद विभिन्न नालों और अन्य माध्यमों से नैनी झील में पहुंच रहे प्लास्टिक और अन्य तैरते कचरे की सफाई के लिए नैनीताल एक्वाटिक एंड एडवेंचर स्पोर्ट्स एसोसिएशन, नासा ने लगातार दूसरे दिन विशेष सफाई अभियान चलाया।
एसोसिएशन के सदस्य नौकाओं के माध्यम से झील के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचे और पानी की सतह पर जमा प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथिन तथा अन्य ठोस कचरे को एकत्र कर झील से बाहर निकाला।
बारिश के बाद झील में अचानक बढ़े ठोस कचरे को देखते हुए अभियान जारी रखा गया। अभियान में यशपाल सिंह रावत, धीरज, भूपाल बिष्ट, मोहम्मद फैजान, रोहित गर्ग, प्रो. रीतेश साह, विक्रम, मनीष, पिंकी, मोहम्मद सुभान और सिद्धि सहित नासा के अन्य सदस्य एवं स्वयंसेवक शामिल रहे।
अतिक्रमण पर निगरानी के लिए पालिका ने कर्मचारियों को दो पालियों में लगाया
इधर नगर में अतिक्रमण की निगरानी को लेकर नगर पालिका परिषद नैनीताल ने अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा के निर्देशन में कर्मचारियों की दो पालियों में तैनाती की है।
नगर पालिका के कर निरीक्षक भारत प्रकाश के अनुसार पहली पाली में कर्मचारियों की ड्यूटी सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक और दूसरी पाली में दोपहर दो बजे से रात दस बजे तक निर्धारित की गई है।
प्रथम पाली में विक्की सिलेलान, रवि बहुगुणा, ललित कुमार, महेश गेड़ा और कृष्णा कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं दूसरी पाली में विकास टांक, दिवाकर चौधरी, विनोद कुमार, सनी सैलवान और कपिल तोमर की तैनाती की गई है।
सभी कर्मचारियों को निर्धारित समय पर अपने दायित्वों का निर्वहन करने के निर्देश दिए गए हैं।
लगातार बारिश के बाद एक ओर सड़कें, ग्रामीण संपर्क मार्ग और आवासीय क्षेत्र प्रभावित हुए हैं, वहीं नैनी झील में बड़ी मात्रा में गाद और मलबे का पहुंचना पर्यावरणीय दृष्टि से नई चिंता के रूप में सामने आया है। प्रशासन के सामने बंद सड़कों को खोलने, प्रभावित परिवारों की स्थिति पर नजर रखने और नैनी झील में पहुंच रहे मलबे के वास्तविक कारणों की वैज्ञानिक जांच कर उसके स्थायी समाधान की चुनौती बनी हुई है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
