NUJ-I : देश के पत्रकारों के सबसे बड़े महाकुंभ में फेक न्यूज, फर्जी पत्रकारों, पत्रकारों का राष्ट्रीय रजिस्टर बनाने, पत्रकार सुरक्षा कानून, मीडिया काउंसिल और मीडिया कमीशन बनाने पर बड़ी चर्चा…

NUJ-I

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बड़ा समाचार Gas Cylinders : गैस सिलेंडरों के दामों में 200 से 400 रुपए की बड़ी कमी, जानें आपको कितने में मिलेगा कल से सिलेंडर

Narendra Modi

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15 साल की नाबालिग ने 18 वर्षीय लड़के को शादी करने के लिए घर बुलाया, नहीं माना तो लगा दिया दुष्कर्म का आरोप, अब 20 माह जेल काटने के बाद मिली जमानत

Sarkari Karmi

In a surprising turn of events, a 15-year-old minor girl’s attempt to marry an 18-year-old boy took a dark twist, leading to his false accusation of rape. The incident, which unfolded in Nainital, highlights the misuse of protective laws. The boy endured a harrowing 20-month jail term before securing bail. The case sheds light on the complexity of cases involving minors and consent.

बागेश्वर उप चुनाव Dal-Badal : दो पूर्व विधायकों की घर वापसी से वार-पलटवार.. देखिए कैसी है प्रत्याशियों की स्थिति….

Dal-Badal

Dal-Badal : Bishan Singh Chufal, former cabinet minister and BJP MLA from Didihat assembly constituency, stated that several Congress MLAs in Uttarakhand are in contact with the BJP organization. Chufal, during his visit to Kashipur, emphasized that opposition parties unite solely to evade corruption charges, while the public remains aware of their intentions. He also cited the example of NCP MLAs joining the BJP government in Maharashtra, stating that the NCP had no future. Chufal hinted at a similar situation in Uttarakhand, claiming that many Congress MLAs are in touch with the BJP and may soon switch parties.

(Shadi) शादी की तैयारियों के बीच आ धमकी एक युवती और….

Minor Student Abducted-Forced Marriage (Attempt Of Child Marriage (Lady Missing 20 days Before Wedding-Married Else)। (Minor Girls Child Marriage after Love Affair, Shadi

Shadi, Shadi ke Niymon men Badlav, Nabalig ki Shadi, 

हल्द्वानी Teen Talaq : शादी के 3 माह बाद ही पत्नी को मारपीट कर दिया 3 तलाक़….

(Haldwani-Gaulapar-Teen Talak) (Ramnagar-Minor Girls Rape-Concerns Love Jihad (Triple Talaq to Wife for Marrying Sister-in-Law) Woman Raped-Beaten and (The cruelty of dowry seekers is at its peak-the (Bangladeshi Woman Arrested with Indian Documents) Apharan,

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 26 अगस्त 2023। शादी के तीन माह बाद ही बनभूलपुरा थानाक्षेत्र निवासी महिला ने अपने पति पर मारपीट करने और शादी के 3 माह बाद ही तीन तलाक (Teen Talaq) देने का आरोप लगाया है। महिला ने जब पुलिस में शिकायत की तो पुलिस ने उसे समझा-बुझाकर शांत करा दिया, लेकिन अब … Read more

Enemy Property : उत्तराखंड में अब अरबों की शत्रु संपत्तियों पर कब्जे की तैयारी में सरकार, केंद्र के बाद राज्य सरकार भी गंभीर

नवीन समाचार, देहरादून, 26 अगस्त 2023 (Enemy Property)। देहरादून में मौजूद शत्रु संपत्तियों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने डीएम सोनिका को जिले की सभी शत्रु संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराकर उन्हें सरकारी जमीन घोषित करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि इन शत्रु संपत्तियों की वर्तमान कीमत अरबों रुपये की हैं। उधर नैनीताल जिला मुख्यालय की कम से कम से तीन सहित जिले की कई शत्रु संपत्तियों को लेकर भी जिला प्रशासन सक्रिय बना हुआ है।

अलबत्ता जिला प्रशासन के सामने सबसे बड़ी मुश्किल काबुल के कुछ बड़े जमींदारों की जमीन को लेकर है। बताया गया है कि काबुल के ये जमींदार दून में दिलाराम, सर्वे चौक, कमिश्नरी कार्यालय, ईसी रोड, आईएसबीटी के पास, राजपुर रोड, मसूरी, माजरा, चकराता में आकर बस गए थे, लेकिन बंटवारे के बाद अपनी हजारों बीघा जमीन को छोड़कर पाकिस्तान चले गए। अब कुछ लोग खुद को जमींदारों का रिश्तेदार बताकर इन जमीनों पर अपना दावा ठोक रहे हैं। हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि यह सभी जमीनें शत्रु संपत्ति हैं। लेकिन, जिला प्रशासन इन पर कब्जा नहीं ले पा रहा है।

यह भी बताया गया है कि इन जमीनों पर लोगों ने अवैध कब्जे किए हुए हैं। फर्जी रजिस्ट्री और स्टांप घोटालों की जांच में जुटे प्रशासन को ऐसी जमीनों को हेराफेरी कर सरकारी दस्तावेजों में चढ़ाने की जानकारी मिली है। ऐसे में इसकी जांच की जा रही है। इससे पहले भी एक तहसीलदार की भूमिका संदिग्ध मिलने पर कमिश्नर के आदेश पर शत्रु संपत्तियों को नगर निगम के दस्तावेजों में चढ़ने से रोक लिया गया था।

इधर बताया गया है कि उत्तराखंड में शत्रु संपत्ति को लेकर केंद्र सरकार भी गंभीर है। गृह मंत्रालय ने भी शत्रु संपत्तियों पर कब्जा लेने के आदेश दे रखे हैं और मंत्रालय लगातार इसकी निगारानी भी कर रहा है। अब सीएम पुष्कर सिंह धामी ने शत्रु संपत्ति मामले में सख्त रुख अपनाकर डीएम सोनिका को इन संपत्तियों को अपने कब्जे में लेकर उनकी चारदीवारी कराने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने इन जगहों पर बोर्ड लगाकर इनका जनहित में प्रयोग करने के लिए कहा है।

मामले में डीएम सोनिका ने बताया कि शत्रु संपत्तियों को लेकर जिला प्रशासन लगातार काम कर रहा है, चिह्नित जमीनों पर कब्जे लिए जा रहे हैं, कई मामले एडीएम प्रशासन के कोर्ट में लंबित हैं, उन पर सुनवाई चल रही है, जल्द फैसला आते ही ऐसी जमीनों पर कब्जा लिया जाएगा, शेष जमीनों पर कब्जे की प्रक्रिया चल रही है।

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यह भी पढ़ें Enemy Property : शत्रु संपत्तियों पर बड़ा समाचार : केंद्र ने राज्यों को दिया करीब 1 लाख करोड़ की इन संपत्तियों के सार्वजनिक इस्तेमाल की इजाज़त

-शत्रु संपत्तियों का कुल मूल्य एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा, इन संपत्तियों और 3000 करोड़ रुपए मूल्य की शत्रु हिस्सेदारी को बेचने का प्रयास कर रही है केंद्र सरकार
नवीन समाचार,  नई दिल्ली , 12 मार्च 2019। केंद्र सरकार ने बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए या फिर 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद चीन चले गए लोगों द्वारा छोड़ी गई कुछ शत्रु संपत्तियों के सार्वजनिक इस्तेमाल की इजाजत राज्य सरकारों को दे दी है। यह कदम केंद्र सरकार के उन प्रयासों के बीच आया है जिसके तहत वह एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य की 9,400 शत्रु संपत्तियों और 3000 करोड़ रुपए मूल्य की शत्रु हिस्सेदारी को बेचने का प्रयास कर रही है।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई अधिसूचना के मुताबिक शत्रु संपत्ति आदेश, 2018 के निस्तारण के लिये दिशानिर्देशों में संशोधन किया गया है जिससे राज्य सरकार द्वारा शत्रु संपत्ति का इस्तेमाल खास तौर पर सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए किया जा सके। शत्रु संपत्तियां वो संपत्तियां हैं जो उन लोगों द्वारा पीछे छोड़ी गईं जिन्होंने पाकिस्तान और चीन की नागरिकता ले ली। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तानी नागरिकों की ऐसी 9,280 संपत्तियां हैं जबकि चीनी नागरिकों द्वारा 126 संपत्तियां यहां छोड़ी गई हैं।

पाकिस्तानी नागरिकता लेने वाले लोगों द्वारा छोड़ी गई संपत्तियों में से 4,991 उत्तर प्रदेश में स्थित हैं जो देश में सबसे ज्यादा हैं। पश्चिम बंगाल में ऐसी 2,735 संपत्तियां हैं जबकि दिल्ली में 487 संपत्तियां हैं। चीनी नागरिकों द्वारा छोड़ी गई सबसे ज्यादा संपत्तियां मेघालय में हैं जहां ऐसी 57 संपत्तियां हैं। पश्चिम बंगाल में ऐसी 29 और असम में सात संपत्तियां हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने पिछले साल राज्यसभा को बताया था कि शत्रु संपत्तियों का अनुमानित मूल्य लगभग एक लाख करोड़ रुपए है।

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Rashtriya Sahara 13 January 2016 Page-1
राष्ट्रीय सहारा, 13 जनवरी 2016, पेज-1
  • करीब 50 हजार करोड़ की सपंत्ति के मालिक थे राजा अमीर मोहम्मद खान
  • 14 मार्च 2017  को संसद में ध्वनिमत से पारित हुआ 49 वर्ष पुराने शत्रु संपत्ति कानून में संशोधन संबंधी विधेयक
  • नैनीताल में करोड़ों का होटल, यूपी व उत्तराखंड में हैं खरबों रुपये की संपत्तियां

डॉ. नवीन जोशी, नैनीताल। करीब 50 हजार करोड़ यानी करीब पांच खरब रुपये की शत्रु संपत्ति के मालिक ‘राजा महमूदाबाद’ यानी राजा अमीर मोहम्मद खान एक पल में ‘‘रंक’ जैसी स्थिति में पहुंच गये हैं। ऐसा संसद में पास हुए विधेयक के बाद हुआ है। केंद्र सरकार की ओर से 49 साल पुराने 1968 में बने सरकारी स्थान (अप्राधित अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम 1971 कानून में संशोधन संबंधी विधेयक को मंगलवार को ध्वनिमत से पारित किया गया।

इस संशोधन विधेयक के लागू हो जाने से बंटवारे के समय पाकिस्तान चले गए अथवा 1965 और 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान की नागरिकता ले चुके लोग भारत में अपनी संपत्तियों (जिन्हें शत्रु संपत्ति) कहा जाता है, का हस्तांतरण नहीं कर सकेंगे।नए विधेयक से राजा महमूदाबाद को सर्वाधिक मुश्किलें होनी तय हैं, जिनकी नैनीताल में करोड़ों के 1870 में निर्मित बताये जाने वाले मेट्रोपोल होटल व अन्य भूसंपत्ति सहित करीब 50 हजार करोड़ रुपये की सहित उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में 10 सितम्बर 1965 में शत्रु संपत्ति घोषित देश की कुल 1519 में से करीब 936 संपत्तियां हैं।

ताजा विधेयक के अनुसार उनकी संपत्तियां संबंधित जिले के डीएम के अधिकार में चली जाएंगी। विधेयक की एक धारा के अनुसार इन शत्रु संपत्तियों पर काबिज लोगों को मालिकाना हक मिलने की बात भी कही जा रही है। इसलिए काबिज लोगों के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। अलबत्ता केंद्र सरकार के इस विधेयक के बावजूद यह मामला आगे भी विवादों में रह सकता है, क्योंकि आगे राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर होने और विधेयक के कानून बनने के बावजूद संबंधित पक्षों को सर्वोच्च न्यायालय जाने का समय दिया जा रहा है, तथा सर्वोच्च न्यायालय में पहले से भी कई वाद लंबित हैं।

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(Shadi ka Jhansa dekar) स्पा सेंटर में काम करने वाली महिला से सेन्टर के मैनेजर ने शादी का झांसा देकर किया शारीरिक उत्पीड़न, आरोपित 2 बच्चों का पिता….

(Other Community Youth Lured Minor Girl-Poisoned) (Father of 3Accused of Eloping with Minor-Serious (Police arrested a father of three children for Dehradun gang-rape, Yuvti ka Apharan

Shadi ka Jhansa dekar , shadi ka jhansa dekar dushkarm, On the pretext of marriage, he had a physical relationship for a long time, got abortion done, then refused to marry, shaadee ka jhaansa dekar lambe samay se banaata raha shaareerik sambandh, garbhapaat bhee karaaya, phir mahanga pada shaadee se inkaar,

हल्द्वानी में आईएसबीटी (ISBT-Gaulapar) मामले में उच्च न्यायालय का दीर्घकालीन-नजीर पेश करने वाला 1 बड़ा आदेश

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Astronomy : भारत ने रच दिया है इतिहास, चंदा मामा अब दूर के नहीं-बस एक टूर के

Chandrayan

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अगस्त 2023 (Astronomy)। देश के लिए आज 23 अगस्त का दिन स्वर्णाक्षरों से इतिहास की अमिट पुस्तकों में लिखे जाने वाला है। भारत के चंद्रयान-3 ने दुनिया के किसी भी देश से पहले चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पदार्पण कर इतिहास रच दिया है। इसकी पूरे देश में दुवाएं की जा रही थीं, जो सफल साबित हुई है। आज के बाद देश के बच्चे-बच्चे के ‘चंदा मामा’ अब ‘दूर के’ नहीं, बकौल प्रधानमंत्री मोदी “बस एक टूर के” रह गए हैं। देश के हर खूबसूरत चेहरे से तुलना किया जाने वाला ‘चांद सा सुंदर चेहरा’ आंखों के सामने है, और बरसों से गाये जा रहे ‘चांद के पार चलो’ के गीतों की पंक्तियां भी बदल गई हैं, क्योंकि आने वाले भविष्य में शायद बहुत सारे लोग ‘चांद के पास चलो’ के गीत गायेंगे।

Astronomy, Chandrayaan 3 Moon Landing Update | ISRO Moon Mission Location Details In  Photos | अब उसकी चंद्रमा से सबसे कम दूरी केवल 150 Km, लैंडिंग 23 अगस्त को  होगी - Dainik Bhaskarइससे पहले उम्मीद की जा रही थी कि चंद्रयान-3 देश के ‘चंदा मामा’ पर पहुंचते ही उनके पैर छूकर उन्हें पूरे देश के बच्चों की ओर से प्रणाम कहेगा और अपनी कुशलता के समाचार के साथ पूरी दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाएगा। ऐसे गौरवशाली पलों में आपका प्रिय, पसंदीदा एवं भरोसेमंद समाचार माध्यम ‘नवीन समाचार’ ने चंद्रयान के चंद्रमा पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का सीधा प्रसारण पर उपलब्ध कराया।

इधर नवीनतम अपडेट यह है कि चंद्रयान का चंद्रमा की सतह पर अवतरण तय समय 6 बजकर 4 मिनट पर कर दिया है। आज शाम 5 बजकर 20 मिनट से ‘नवीन समाचार’ के देश-दुनिया में मौजूद 12.7 मिलियन यानी 1.27 करोड़ से अधिक पाठक ‘नवीन समाचार’ के शीर्ष पर चंद्रयान के चंद्रमा पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का सीधा प्रसारण ‘नवीन समाचार’ पर समाचार पढ़ने के साथ देख सके। यहां फिर से देख सकते हैं चंद्रयान के चंद्रमा पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का पूरा वीडिओ:

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यह भी पढ़ें Astronomy : नैनीताल की दूरबीन ने रिकॉर्ड किया 1 अरब प्रकाश वर्ष दूर किलोनोवा उत्सर्जन, विश्व की सर्वोच्च शोध पत्रिका ‘नेचर’ में मिला स्थान

-गामा किरणों के विष्फोट से हुए किलोनोवा उत्सर्जन की खोज में दिया महत्वपूर्ण योगदान, अपनी तरह की अनूठी घटना पहली बार हुई रिकॉर्ड
(Astronomy) नैनीताल की दूरबीन ने रिकॉर्ड किया 1 अरब प्रकाश वर्ष दूर किलोनोवा उत्सर्जननवीन समाचार, नैनीताल, 7 दिसंबर 2022। (Astronomy) स्थानीय एरीज यानी आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज की जनपद के ही देवस्थल नाम के स्थान पर स्थापित 3.6 मीटर ‘डॉट’ यानी देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप ने सुदूर अंतरिक्ष में लगभग 1 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित आकाशगंगा के बाहरी इलाके से उच्च ऊर्जा प्रकाश के विस्फोट ‘जीआरबी 211211ए’ का पता लगाया है।

डॉट के द्वारा रिकॉर्ड की यह विश्व भर के खगोल वैज्ञानिकों के लिए पहली खगोलीय घटना है जिसमें एक लंबे जीआरबी के साथ किलोनोवा उत्सर्जन यानी न्यूट्रॉन सितारों के टकराने से होने वाला विशाल विस्फोट की अप्रत्याशित खोज हुई है। बताया गया है कि इस घटना ने वैज्ञानिकों की समझ को झकझोर कर रख दिया है। यह भी पढ़ें : बूढ़े ससुर से दरिंदगी करती कैमरे में कैद हुई महिला, हो रही तत्काल गिरफ्तारी की मांग

उल्लेखनीय है कि इंसानों की तरह सितारों का भी एक जीवन चक्र होता है। सितारे पैदा होते हैं, जीते हैं, और अंत में मर जाते हैं। कुछ बड़े सितारों की मृत्यु जीआरबी यानी गामा किरण विस्फोट के रूप में जाने जाने वाले ब्रह्मांड की सबसे चमकीले और सबसे विस्फोटक खगोलीय स्रोतों के रूप में होती है। इधर पिछले वर्ष 11 दिसंबर, 2021 को नासा की नील गेहर्ल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी और फर्मी गामा-रे स्पेस टेलीस्कोप ने लगभग 1 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित आकाशगंगा के बाहरी इलाके से उच्च ऊर्जा प्रकाश के विस्फोट ‘जीआरबी 211211ए’ का पता लगाया था। यह भी पढ़ें : कुमाऊं विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के परिसरों व महाविद्यालयों में 24 दिसंबर को होंगे छात्र संघ चुनाव…!

इस जीआरबी के बाद की चमक का अध्ययन करने के लिए, खगोलविदों ने अंतरिक्ष और पृथ्वी पर कई दूरबीनों का उपयोग किया, जिसमें स्थानीय एरीज आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज की 3.6 मीटर ‘डॉट’ यानी देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप ने भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस बारे में विस्तृत अध्ययनों के बाद बुधवार को विश्व की सर्वोच्च मानी जाने वाली शोध पत्रिका ‘नेचर’ में शोध आलेख प्रकाशित हुआ है। इस आलेख मंे एरीज की डॉट का जिक्र होना यहां के वैज्ञानिक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। यह भी पढ़ें : महिला ने व्यवसायी पर लगाए थे शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप, अब व्यवसायी के एसएसपी को शिकायती पत्र देने के बाद आया मामले में सनसनीखेज नया मोड़

इस अध्ययन की टीम में शामिल एवं एरीज के शोध छात्र राहुल गुप्ता, अमर आर्यन, अमित कुमार और डॉ. कुंतल मिश्रा की टीम का नेतृत्व करने वाले एरीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे ने बताया कि 3.6 मीटर दूरबीन एवं इसमें लगे 4000 गुणा 4000 सीसीडी इमेजर द्वारा संगृहित डेटा में से आफ्टरग्लो योगदान को घटाने के बाद वैज्ञानिकों ने यह पाया कि बहुतरंग दैर्ध्य डेटा की अतिरिक्त वर्णक्रम द्वारा अच्छी तरह से व्याख्या किया जा सकता है और इस तापीय उत्सर्जन को किलोनोवा उत्सर्जन के संदर्भ में समझा जा सकता है। यह भी पढ़ें : उच्च न्यायालय ने दी 13 वर्षीय नाबालिग के 25 सप्ताह के गर्भ के गर्भपात की अनुमति…

उन्होंने बताया कि यह पहली खगोलीय घटना है जिसमे एक लंबे जीआरबी के साथ किलोनोवा उत्सर्जन यानी न्यूट्रॉन सितारों के टकराने से होने वाला विशाल विस्फोट की अप्रत्याशित खोज हुई है। इस घटना ने वैज्ञानिकों की समझ को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने बताया कि इस घटना में उच्च ऊर्जा विस्फोट लगभग एक मिनट तक चली, और 3.6 मीटर देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप के अनुवर्ती अवलोकनों में एक किलोनोवा की पहचान हुई। 3.6 मीटर देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप के प्रेक्षणों ने अभी तक के किलोनोवा के सबसे प्रारंभिक चरण की जानकारी प्रदान की है। यह भी पढ़ें : बिग ब्रेकिंग खुशखबरी: 1564 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना अभी-अभी जारी

नेचर पत्रिका में प्रकाशित इस वैज्ञानिक खोज में 3.6 मीटर दूरबीन द्वारा लिए गए प्रथम डाटा के अतिरिक्त हबल स्पेस टेलिस्कोप, मल्टीक इमेजिंग टेलेस्कोपस फॉर सर्वे एंड मोनस्ट्रोस एक्सप्लोसिओंस, कलर आल्टो ऑब्जर्वेटरी, देवस्थल ऑप्टिकल टेलिस्कोप एवं अन्य अंतरिक्ष और जमीन आधारित दूरबीनो का भी इस्तेमाल किया गया। इस खोज से ब्रह्मांड में भारी तत्वों के बनने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी। यह भी पढ़ें : महिला मित्रों के साथ घूमने वालों की वीडियो बनाकर उनसे ब्लेकमेल कर रुपए ऐंठने वाले गिरोह का पर्दाफाश, टीम को 5000 का ईनाम

डॉ. पांडेय ने बताया कि एक जीआरबी में में कुछ सेकेंडों के भीतर सूर्य के पूरे जीवन में उत्सर्जित की जाने वाली ऊर्जा से अधिक ऊर्जा उत्सर्जित होती है। उन्होंने कहा कि यह खोज जीआरबी की उत्पत्ति की बारे में हमारी वर्तमान समझ को चुनौती देती है और इस दिशा में नई संभावनाओं को जन्म देती है। एरीज के निदेशक प्रो. दीपांकर बनर्जी ने बताया की भविष्य में 3.6 मीटर देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप में इस तरह की बहुत सारी खोज करने की एक अद्वितीय क्षमता है। आगे ऐसी और बड़ी खोजें हो सकती हैं। (डॉ.नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Astronomy) : आज विजयादशमी की रात खगोल प्रेमियों के लिए खास, आसमान की ओर देखिए, वहां चांद पर खुली आंखों से दिख रहा है ‘मून्स गोल्डन हैंडल’

Moon || Golden Handle || Part5 - YouTubeडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अक्तूबर 2022। सूर्य और चंद्रमा हमेशा से पृथ्वीवासियों के लिए पृथ्वी से बाहर प्रत्यक्ष नजर आने वाले पिंडों के साथ ही देवताओं के रूप में भी विमर्श का केंद्र रहे हैं। खास कर चंद्रमा के बारे में बहुत सी जानकारियां मानव को हैं, चांद पर मौजूद कोटरों, गड्ढों, पर्वतों को लेकर भी काफी चर्चा होती है। आज हम आपको चंद्रमा पर नजर जाने वाले एक सुनहरे रंग के ‘मून्स गोल्डन हैंडल’ से परिचित कराने जा रहे हैं। चांद की इस विशेषता को दशमी की रातों में नग्न आंखों से भी देखा जा सकता है।

चंद्रमा का गोल्डन हैंडल मूल रूप से चंद्रमा की सतह पर मौजूदा जुरा नाम के पहाड हैं, जिसकी ऊंची चोटियां सूरज की रोशनी से जगमगा उठती हैं, और एक सुनहरे रंग के चमकदार चाप के रूप में दिखाई देते हैं। बताया जाता है कि चंद्रमा पर लावा के समतल और स्थिर-अंधेरे मैदान के सामने 422 किलोमीटर में फैली 2700 मीटर ऊंची यह पर्वत क्षृंखला अमावस्या और पूर्णिमा के बीच सूर्य की रोशनी के कारण पहले पखवाड़े के दसवें दिन सुनहरे रंग में चमकती हुई दिखाई देती है।

नैनीताल में स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे के अनुसार कुछ विशेष दिनों में शुक्ल पक्ष की दशमी की तिथि यानी अमावास्या के बाद दसवें दिन चंद्रमा के उत्तर पश्चिमी भाग पर जुरा पर्वत दिखाई देते हैं। सूरज की रोशनी इस पहाड़ को रोशन करती है और जब रोशनी कम होती है तो पहाड़ सुनहरे रंग में दिखता है।

इसलिए इस फीचर को गोल्डन हैंडल कहा जाता है। पांडे ने कहा कि गोल्डन हैंडल चंद्रमा की सुंदरता का एक अनूठा पहलू है। यह हर महीने केवल दो रातों को ही दिखाई देता है। इस बार यह विजयादशमी की रात को दिखाई दे रहा था। इसे चांद के उत्तरी सिरे पर देखा जा सकता है। हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बताइएगा कि क्या आप इसे देख पाए। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Astronomy) : ‘नवीन समाचार’ एक्सक्लूसिव: नैनीताल के आसमान में दिखी रहस्यमय वस्तु, वैज्ञानिक ने बताया ‘यूएफओ’

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 28 सितंबर 2022 (Astronomy)। अपनी अनेक खूबियों के साथ साफ आसमान के लिए भी वैश्विक पहचान रखे जाने और इसी कारण यहां एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान तथा बीते वर्षों में यहीं पास में एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन की स्थापना वाले नैनीताल नगर के आसमान में बुधवार को एक ‘यूएफओ’ यानी ‘अन आइडेंटीफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट’ यानी अज्ञात उड़ती हुई वस्तु देखी गई है।

एरीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.बृजेश कुमार ने इसे ‘यूएफओ’ बताया, एवं नैनीताल के खुले आसमान में इसके देखे जाने को विज्ञान के साथ ही सामरिक दृष्टिकोण से भी बड़ी एवं रहस्यमयी व रोमांचकारी घटना करार दिया है।

बुधवार को नगर के आसमान में खिली धूप के बीच अपराह्न करीब 4 बजकर 40 मिनट पर दक्षिण पश्चिमी आकाश में सूर्य के साथ करीब 45 डिग्री का एक त्रिकोण बनाती हुई जैसी स्थिति में यह अज्ञात रहस्यमयी वस्तु सर्वप्रथम दीपेश बिष्ट नाम के एक बालक ने देखी। उसकी सूचना पर अन्य लोग भी इसे देखने लगे। ‘नवीन समाचार’ के मोबाइल कैमरे में बमुश्किल इसकी फोटो भी कैमरे में कैद हुई। सफेद आकार का एक बिंदु से थोड़े बड़े आकार का नजर आ रहा यह यूएफओ पहले करीब एक मिनट तक सूर्य की यानी पश्चिम दिशा की ओर चलता हुआ दिखा, और फिर स्थिर हो गया। बाद में इसे उत्तर दिशा में देखे जाने का भी दावा किया गया।

जानकारी लेने पर एरीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बृजेश कुमार ने ‘नवीन समाचार’ द्वारा उपलब्ध कराए गए इसके चित्र को ‘गूगल लेंस’ के माध्यम से जांचा, साथ ही एरीज से किसी तरह की वैज्ञानिक खोज के लिए गुब्बारे आदि हवा में उड़ाए जाने जैसी संभावनाओं की भी भी जानकारी ली और अंततः इसके ‘यूएफओ’ होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि इस तरह के अज्ञात यूएफओ कई बार सूर्य के प्रकाश में दिख जाते हैं। उन्होंने कहा कि एरीज एवं नगर में रक्षा प्रतिष्ठानों के भी करीब होते इसका नैनीताल नगर में देखा जाना एक बड़ी घटना है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Astronomy) : नैनीताल की रीतिका सहित चार भारतीय खगोल वैज्ञानिकों को दक्षिण कोरिया में मिले पुरस्कार…

दक्षिण कोरिया में दुनिया की सबसे बड़ी खगोल विज्ञान की बैठक में भारतीय  छात्रों ने जीते 4 पुरस्कारडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अगस्त 2022। नैनीताल सहित देश के भौतिकविदों और खगोलविदों ने दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में 2 से 11 अगस्त के बीच आयोजित अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन-आईएयू) के कार्यक्रम में शानदार प्रदर्शन किया। दुनिया की सबसे बड़ी हर तीन साल में आयोजित होने वाली खगोल विज्ञान बैठक कही जाने वाली आईएयू की महासभा में भारतीय पीएचडी छात्रों ने आईएयू महासभा तीन भारतीयों ने ‘पीएचडी एट-लार्ज’ पुरस्कार जबकि चौथे को ‘डिवीजन-ई (सन एंड हेलिओस्फीयर)’ में पीएचडी पुरस्कार मिला।

कोविड महामारी के कारण 2018 के बादएक साल की देरी से आयोजित हुए इस कार्यक्रम में कुमाऊं विश्वविद्यालय और एरीज यानी आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज नैनीताल की रीतिका जोशी ने सूर्य के क्रोमोस्फीयर (दिखने वाली सतह के ऊपर मौजूद वायुमंडलीय परत) में प्लाज्मा जेट और अन्य प्रकार की ऊर्जा फ्लेयर्स के अवलोकन पर अपने कार्य के लिए साल 2021 के लिए यह पुरस्कार जीता।

उनके अलावा भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु के गोपाल हाजरा, भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान कोलकाता से जुड़ी प्रांतिका भौमिक, बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स से एमटेक और ओस्लो विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाले सौविक बोस को भी पुरस्कार मिले हैं। बताया गया है कि विशालकाय मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (पुणे), भारतीय खगोलीय वेधशाला (हनले), देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप (नैनीताल), और कोडाईकनाल और उदयपुर स्थित सौर वेधशालाओं को इस दौरान भारतीय पवेलियन में प्रदर्शित किया गया। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Astronomy) : एरीज के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज: प्लूटो की सतह पर वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी से 80 हजार गुना कम

(Astronomy) Atmospheric pressure on Pluto's surface 80,000 times lower than on Earth:  Study – Original News | Original Newsडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 17 फरवरी 2022(Astronomy)। भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोगियों सहित वैज्ञानिकों की एक टीम ने सौरमंडल की बिरादरी से हटाए गए क्षुद्र ग्रह-प्लूटो की सतह पर प्लूटो के वायुमंडलीय दबाव का सटीक मान निकाला है और बताया है कि यह पृथ्वी पर औसत समुद्र तल पर वायुमंडलीय दबाव से 80,000 गुना कम है।

बताया गया है कि नैनीताल स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वैज्ञानिकों सहित वैज्ञानिकों की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने प्लूटो की सतह पर वायुमंडलीय दबाव का सटीक मूल्यांकन प्राप्त करने के लिए उत्तराखंड के देवस्थल, नैनीताल में स्थित देश की सबसे बड़ी 3.6 मीटर देवस्थल स्थित ऑप्टिकल टेलीस्कोप-डॉट और 1.3 मीटर व्यास की देवस्थल फास्ट ऑप्टिकल टेलीस्कोप-डीएफओटी का उपयोग कर 6 जून 2020 को प्लूटो पर वायुमंडलीय दबाव की गणना की।

इस दौरान 1988 और 2016 के बीच प्लूटो द्वारा किए गए ऐसे बारह स्टेलर ऑकल्टेशन्स यानी तारकीय प्रच्छादनों के संकलन ने इस अवधि के दौरान वायुमंडलीय दबाव में तीन गुना मोनोटोनिक वृद्धि दिखाई दी। यह पृथ्वी पर औसत समुद्र तल पर वायुमंडलीय दबाव से 80,000 गुना कम अर्थात 12.23 माइक्रोबार पाया गया। ‘एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स’ में प्रकाशित शोध से पता चला है कि 2015 के मध्य से ही प्लूटो का वातावरण अपने सर्वाधिक स्तर के करीब एक पठारी चरण में है एवं 2019 में प्लूटो वाष्पशील परिवहन मॉडल द्वारा पहले गणना किए गए मॉडल मूल्यों के अनुरूप उत्कृष्ट स्थिति में है।

अध्ययन पहले के उन निष्कर्षों की भी पुष्टि करता है कि प्लूटो पर बड़े डिप्रेशन के कारण यह ग्रह ऐसे तीव्र मौसमी सोपानों से ग्रस्त है जिन्हें स्पूतनिक प्लैनिटिया के रूप में जाना जाता है। प्लूटो के ध्रुव दशकों तक स्थायी सूर्य के प्रकाश या अंधेरे में 248 साल की लंबी कक्षीय अवधि में बने रहते हैं जिससे इसके नाइट्रोजन वातावरण पर तीव्र प्रभाव पड़ता है जो मुख्य रूप से सतह पर नाइट्रोजन बर्फ के साथ वाष्प दबाव संतुलन द्वारा नियंत्रित होता है।

इस शोध में ब्रूनो सिकार्डी, नागरहल्ली एम अशोक, आनंदमयी तेज, गणेश पवार, शिशिर देशमुख, अमेया देशपांडे, सौरभ शर्मा, जोसेलिन डेसमार्स, मार्सेलो असाफिन, जोस लुइस ऑर्टिज, गुस्तावो बेनेडेटी-रॉसी, फेलिप ब्रागा-रिबास, रॉबर्टो विएरा-मार्टिंस पाब्लो सैंटोस-सांज, कृष्ण चंद, और भुवन भट्ट शामिल रहे हैं। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Astronomy): वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड की एक सेकेंड के दसवें हिस्से में निकली सूर्य से एक लाख वर्षों में निकलने जितनी ऊर्जा

-पहली बार स्पेन के साथ एरीज नैनीताल के वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड की यह अनूठी घटना, नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुआ शोध
Why Magnetars Should Freak You Out | Spaceडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 22 दिसंबर 2021 (Astronomy)। बीते वर्ष 15 अप्रैल 2020 को ब्रह्मांड में, पृथ्वी से एक करोड़ तीस लाख प्रकाश वर्ष दूर स्थित स्कल्पटर आकाशगंगाओं के समूह में एक ऐसी घटना हुई, जिसमें हमारे सूर्य द्वारा एक लाख वर्षों में विकीरित की जाने वाली ऊर्जा के बराबार ऊर्जा एक सेकेंड के दसवें हिस्से में उत्सर्जित की गई।

बड़ी बात यह कि इस दुर्लभ पल को स्पेन के अंडालूसिया शोध संस्थान के वैज्ञानिक प्रो. अल्बर्टो जे कास्त्रो-तिराडो के नेतृत्व में जिस वैज्ञानिक समूह ने देखा उसमें भारत के नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे भी शामिल रहे। इस वैज्ञानिक समूह की इस खोज को आज विश्व की सबसे बड़ी विज्ञान शोध पत्रिका नेचर ने प्रकाशित कर मान्यता दे दी है। माना जा रहा है कि वैज्ञानिकों की इस ताजा खोज के बाद इन खगोलीय पिंडों के बारे में अभी भी अल्पज्ञात विशाल चुंबकीय ज्वालाओं को समझना संभव हो जाएगा।

प्रो. अल्बर्टो के हवाले से डॉ. पांडे ने बताया कि जिन तारों का चुम्बकीय क्षेत्र बहुत अधिक होता है, उन्हें मैग्नेटार कहा जाता है। इन मैग्नेटार तारों के 20 किलोमीटर व्यास का द्रव्यमान पृथ्वी के कुल द्रव्यमान का लगभग पांच गुना अधिक हो सकता है। इससे इन मेग्नास्टार की विशालता का अनुमान लगाया जा सकता है। अभी ब्रह्मांड में ऐसे 20 मैग्नेटार ही ज्ञात हैं। यह मैग्नेटार अपने अप्रत्याशित स्वरूप और करीब 3.5 मिली सेकेंड यानी एक सेकेंड के करीब दसवें हिस्से में ही नजर आने के कारण बहुत ही दुर्लभ होते हैं।

यह माना जाता है कि मैग्नेटार में विस्फोट उनके चुंबकीय क्षेत्र में अस्थिरता के कारण या उनकी लगभग एक किलोमीटर मोटी कठोर और लोचदार परत में उत्पन्न एक प्रकार के भूकंप के कारण हो सकता है। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर स्थित असीम नामक उपकरण द्वारा इस विस्फोट का पता लगाया गया था। इस खोज का अध्ययन बेहद कठिन था। इसमें मात्र एक सेकंड के डेटा के विश्लषण में एक वर्ष से भी अधिक समय लगा।

उन्होंने बताया कि आज तक हमारी आकाशगंगा में ज्ञात लगभग तीस मैग्नेटार तारौं में से केवल दो में ही इस प्रकार की चुंबकीय ज्वालाओं का पता अब तक लग सका है। यह खोज करने वाले वैज्ञानिक समूह में आईएए स्पेन के जेवियर पास्कुअल, बार्गेन विश्वविद्यालय नॉर्वे के डॉ. ओस्टगार्ड भी शामिल रहे है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-धूमकेतु लियोनार्ड और जेमिनीड उल्कापात आकाश को रोशन कर रहे

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 दिसंबर 2021 (Astronomy)। नए वर्ष के स्वागत की तैयारी न केवल पूरी दुनिया में शुरू हो गई है, वरन आसमान में भी इस मौके पर खूबसूरत आतिषबाजी जैसे नजारे देखे जा सकते हैं। आने वाले दिनों का आकाश उल्कापात की दो प्रमुख घटनाओं से जगमगाने वाला है। हालांकि उल्काओं को बोलचाल की भाषा में शूटिंग स्टार या टूटता तारा कहा जाता है, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार वास्तव में यह नाम सही नहीं है क्योंकि इसका तारों से कोई लेना-देना नहीं है।

इनमें पहला उल्कापात है सी-2021ए1 नाम का लियोनार्ड धूमकेतु। इसी वर्ष 3 जनवरी 2021 को खोजा गया यह धूमकेतु इस पूरे वर्ष का सबसे चमकीला धूमकेतु बताया जा रहा है। लगभग 80 हजार वर्ष में सूर्य की परिक्रमा करने वाला यह धूमकेतु आंतरिक सौर मंडल और हमारे पास लगभग 80 हजार वर्षों के बाद आएगा। इस धूमकेतु का नाम इसके खोजकर्ता ‘द माउंट लेमोन ऑब्जर्वेटरी’ यूएसए के जीजे लियोनार्ड के नाम पर रखा गया है। यह धूमकेतु 12 दिसंबर को पृथ्वी के सबसे करीब से गुजरा और अब 3 जनवरी 2022 को सूर्य के सबसे करीब से गुजरेगा।

स्थानीय एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार हालांकि लियोनार्ड धूमकेतु पिछले साल दिखाई दिए नियोवाइज धूमकेतु जितना चमकीला नहीं है, लेकिन यह दूरबीन और छोटी टेलिस्कोपों का उपयोग करके अब तक सुबह तड़के आकाश में दिखाई दे रहा था, और अब यह शाम के समय दिखाई दे रहा है। हालांकि शाम के धुंधलके में इसकी दृश्यता प्रभावित हो रही है। एरीज के पूर्व पोस्ट डॉक्टरेट फेलो और हिरोशिमा विश्वविद्यालय जापान के सहायक प्रोफेसर डॉ अविनाश सिंह ने धूमकेतु के हरे रंग के केन्द्रक और लम्बी पूंछ दिखाती हुई खूबसूरत छवि को एरीज के मनोरा पीक परिसर से कैमरे में कैद किया है।

दूसरी खगोलीय घटना है जेमिनीड उल्कापात। लगभग दो सप्ताह तक चलने वाला यह उल्कापात 13-14 दिसंबर को चरम पर होगा। इसका नाम जेमिनी यानी मिथुन राशि के तारामंडल में होने के कारण इसके नाम पर रखा गया है। इस उल्कापात के चरम पर प्रति घंटे 80 से 100 उल्का दिखाई देंगे। यह भारत से दिखाई देने वाले उल्कापातों में सबसे अच्छा उल्कापात है। उल्काओं को नग्न आंखों से देखा जा सकता है और इसके लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है। तड़के सुबह 2 बजे के बाद अँधेरे में कुछ समय के लिए खुले आसमान को धैर्य के साथ लेटकर देखने का अलग ही अनुभव हो सकता है।

इसलिए होता है उल्कापात
डॉ. यादव ने बताया कि जब धूमकेतु और क्षुद्रग्रह आंतरिक सौर मंडल से गुजरते हैं तो वे बादलों के रूप में बहुत सारी धूल छोड़ जाते हैं। जब पृथ्वी की कक्षा ऐसे किसी बादल के पास से गुजरती है, तो उस धूल के कई कण हमारे वायुमंडल में प्रवेश कर जाते हैं और 80 से 120 किमी की ऊंचाई पर घर्षण के कारण जल जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप प्रकाश की एक लकीर दिखाई देती है जो आमतौर पर कुछ क्षणमात्र के लिए ही होती है। इसे उल्का कहा जाता है।

अंधेरे और साफ आकाश वाली किसी आम रात में आकाश के विभिन्न हिस्सों में प्रति घंटे 8-10 उल्काएं दिखाई देती हैं। एक उल्कापात में यह संख्या अधिक होती है और अधिकांश उल्काएं आकाश के एक ही क्षेत्र से आते हुए प्रतीत होती हैं। इस क्षेत्र को रेडिएंट कहा जाता है। उल्कापात का नाम आमतौर पर उस तारामंडल या नक्षत्र के नाम पर रखा जाता है जिसमें रेडिएंट स्थित होता है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Astronomy) : देश एवं दुनिया की बड़ी दूरबीनों पर हुई चर्चा…

नवीन समाचार, नैनीताल, 08 अप्रैल 2021 (Astronomy) मुख्यालय स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान में देश के अन्य शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से ‘एस्ट्रो फिजिकल जेटस् एवं प्रेक्षण सुविधाएं: राष्ट्रीय प्ररिप्रेक्ष्य‘ विषय पर सोमवार से शुरू हुई राष्ट्रीय कार्यशाला बृहस्पतिवार को चौथे दिन भी जारी रही। इस दौरान एनसीआरए के प्रो जयराम चेंगलुर ने भारत की सबसे बड़ी दूरबीन जीएमआरटी पर बोलते हुए कहा कि इस अंतराष्ट्रीय सुविधा की भविष्य में एस्ट्रोफिजिकल जेटस के अध्ययन में उपयोगिता और अधिका बढ़ने वाली है।

एरीज के संस्थापक निदेशक प्रो रामसागर ने देश की सबसे बड़ी दृश्य प्रकाश में कार्य करने वाली एरीज की 36 मी देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप-डॉट के निकट भविष्य में अवरक्त तंरगदैर्घ्य पर कार्यकरने की वैज्ञानिक क्षमता पर बात की। आईआईए के डा डी के साहू ने लेह स्थित विश्व की सबसे ऊंचाई में स्थित 2 मीटर व्यास की हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप-एचसीटी के बारे में, एरीज के गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष एवं एस्ट्रोसेट के प्रमुख अन्वेषक प्रो पीसी अग्रवाल ने भारत के अंतरिक्ष स्थित बहुतरंगदैर्घ्यी प्रेक्षण सुविधा एस्ट्रोसेट के एक्स-रे पर कार्य क्षमताओं, वरिष्ठ अभियंत्रण विशेषज्ञ डा एसएन टंडन ने एस्ट्रोसेट के परावैगनी तरंगदैर्घ्य पर प्रेक्षण क्षमताओं और इससे प्राप्त महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोध परिणामों की चर्चा की। 

वहीं इसरो के डा. वी गिरीश के संचालन में आयोजन दूसरे सत्र में भाभा परमाणु केंद्र के के डा केके सिंह ने गामा-किरणों के विकिरण के अनुपूरक चेरेनकोव टेलीस्कोप पर, टीआईएफआर की डा वर्षा चिटनिस ने हेगर टेलीस्कोप एवं अन्य गामा किरणों पर काम करने वाली सुविधाओं, एनसीआरए के प्रो भाल चंद्र जोशी ने भारत और अंतराष्ट्रीय पल्सार टाईमिंग अरेय से गुरुत्व तरंगों के अनुसंधान में जीएमआरटी के योगदान, अयुका के आरसी आनंद ने 8 से 10 मीटर वर्ग की दूरबीनों द्वारा विज्ञान के संदर्भ में और डा देवेंद्र ओझा ने भी संबंधित विषय पर चर्चा की। आयोजक समिति के डा शशिभूषण पांडेय ने बताया कि 9 अप्रैल को ‘भविष्य की खगोलीय प्रेक्षण सुविधाओं और रणनीति‘ पर चर्चा होगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-‘एस्ट्रो फिजिकल जेटस् एवं प्रेक्षण सुविधाएं: राष्ट्रीय प्ररिप्रेक्ष्य‘ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का तीसरा दिन
नवीन समाचार, नैनीताल, 07 अप्रैल 2021 (Astronomy) मुख्यालय स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान में देश के अन्य शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से ‘एस्ट्रो फिजिकल जेटस् एवं प्रेक्षण सुविधाएं: राष्ट्रीय प्ररिप्रेक्ष्य‘ विषय पर सोमवार से शुरू हुई राष्ट्रीय कार्यशाला बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रही। इस दौरान टीआईएफआर के प्रो. सुदीप भट्टाचार्या की अध्यक्षता में आयोजित तीसरे दिन के पहले सत्र की शुरुआत करते हुए अयुका पुणे के प्रो. रंजीव मिश्रा ने अपने एक्स-रे बाइनरी-माइक्रो क्वाजार विषय पर व्याख्यान के माध्यम से बताया कि वर्तमान में भारत में इस विषय पर शोध और प्रेक्षण सुविधायें अत्यंत उन्नत अवस्था में है।

आगे कोलकाता से आए वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. संदीप चक्रवर्ती ने पिछले 3 दशकों में इस विषय पर हुए शोधों और ज्ञात चुनौतियों, आईआईटी हैदराबाद के मयूख पहाड़ी ने एक्स-रे और रेडियो तरंग दैर्घ्य पर हो रहे शोध कार्यों, आईसर मोहाली के डा. अरुण बेरी ने भारतीय अंतरिक्ष वेधशाला एस्ट्रोसेट द्वारा एक्स-रे तरंगदैर्घ्य में प्राप्त परिणामों, एरीज के डा. इंद्रनील ने एक्स-रे बाइनरी के आसपास जेट्स की उपस्थिति, एरीज की शोध छात्रा शिल्पा सरकार तथा डा. दीपक देबनाथ और कौशिक चटर्जी कोलकाता ने एक्स-रे बाइनरी के द्वारा उत्पादित कृष्ण छिद्रों यानी ब्लेक होल्स पर चर्चा की।

वहीं पीआरएल अहमदाबाद के डा. सचिन नायक की अध्यक्षता में आयेाजित द्वितीय सत्र में आईआईटी गुवाहाटी के डा. संतब्रतादास ने एक्स-रे बाइनरी से उत्पादित कृष्ण छिद्रों के विभिन्न आयामों, आईआईटी कानपुर के प्रो. जेएस यादव ने भारतीय अंतरिक्ष वेधशाला एस्ट्रोसेट द्वार ालिए गए माइक्रो क्वाजार के प्रेक्षणों और परिणामों के साथ ही तेजपुर विश्वविद्यालय की कविता डेका, क्राइस्ट विश्वविद्यालय बैंगलुरु की डा. स्नेहा मुदाम्बी, उस्मानिया विश्वविद्यालय की डा.मालुएवंडा श्रीराम और आईआईटी इंदौर की डा. इन्दु ने भी संबंधित विषय पर अपने शोध कार्यों को प्रस्तुत किया। आयोजक समिति के सदस्य डा. शशिभूषण पांडेय ने बताया की अब बृहस्पतिवार को भारत में वर्तमान में उपलब्ध खगोलीय प्रेक्षण सुविधायों के बारे में विस्तार से चर्चा की जाएगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Astronomy) : गामा किरणों के महाविष्फोटों व सुपरनोवा के अंतरसंबंधों पर हुई वैज्ञानिक चर्चा

-‘एस्ट्रो फिजिकल जेटस् एवं प्रेक्षण सुविधाएं: राष्ट्रीय प्ररिप्रेक्ष्य‘ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का दूसरा
नवीन समाचार, नैनीताल, 06 अप्रैल 2021 (Astronomy) मुख्यालय स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान में देश के अन्य शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से ‘एस्ट्रो फिजिकल जेटस् एवं प्रेक्षण सुविधाएं: राष्ट्रीय प्ररिप्रेक्ष्य‘ विषय पर सोमवार से शुरू हुई राष्ट्रीय कार्यशाला मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही। इस दौरान दूसरे दिन के पहले सत्र का औपचारिक शुभारंभ करते हुए अयुका पुणे के वैज्ञानिक प्रो. दीपांकर भट्टाचार्या ने गामा किरणों के महाविस्फोटों (जीआरबी), सुपरनोवा और उनके आपसी सम्भावित संबंधों पर जानकारी दी।

उन्होंने संभावना जताई कि कुछ जीआरबी हाल में खोजे गए गुरुत्व तरंगो को उत्सर्जित करने वाले खगोलीय पिण्डांे से संबंधित भी हो सकते हैं। वहीं टीआईएफआर के हर्ष तेंदुलकर ने तेज रेडियो महाविस्फोट (एफआरबी) का जिक्र करते हुये उनके जीआरबी से संबंधो पर प्रकाश डाला। डा. पूनम चंद्रा द्वारा संचालित इस सत्र में अयुका की डा. शबनम ने जीआरबी के बहुत शुरुआती चरणों पर चर्चा की। एरीज की डा. कुंतल मिश्रा ने जीआरबी के आफ्टर ग्लो यानी उत्तर दीप्ति के चरणों की व्याख्या की।

चेन्नई के डॉ. केजी अरुण ने एक विशेष प्रकार के जीआरबी का गुरुत्व तरंग स्रोतांे के साथ सम्बंधों पर चर्चा की। एरीज के शोध छात्र राहुल गुप्ता, अमित कुमार और अंकुर घोष ने भी अपने शोध कार्यो को इस सत्र में प्रस्तुत किया।

वहीं रमन शोध संस्थान की डा. नयन तारा गुप्ता के संचालन में आयोजित द्वितीय सत्र में आईआईटी मुम्बई के डा. वरुण भालेराव ने जीआरबी और सुपरनोवा से गुरुत्व तरंगो के सम्भावित उत्सर्जन पर, एनसीआरए टीआईएफआर के शोध छात्र डा. ए जेनयना और सुरजीत मंडल तथा एरीज के डिम्पल, अमर आर्यन एवं डा. अंजशा आदि छात्र-छात्राओं ने अपने शोध कार्यो को प्रस्तुत किया। अंत में डा. शशिभूषण पांडेय ने बताया कि सात अप्रैलको एक्स बाइनरी-माइक्रो क्वासार विषय पर चर्चा होगी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : एरीज नैनीताल में स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने पर देश की वैज्ञानिक सुविधाओं पर हुई चर्चा

-‘एस्ट्रो फिजिकल जेटस् एवं प्रेक्षण सुविधाएं: राष्ट्रीय प्ररिप्रेक्ष्य‘ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला हुई प्रारंभ
नवीन समाचार, नैनीताल, 05 अप्रैल 2021। मुख्यालय स्थित एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान में सोमवार से देश के अन्य शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से ‘एस्ट्रो फिजिकल जेटस् एवं प्रेक्षण सुविधाएं: राष्ट्रीय प्ररिप्रेक्ष्य‘ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला प्रारंभ हुई। कार्यशाला में देश के लगभग 100 से अधिक वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभागिता की। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र का औपचारिक उद्घाटन करते हुए एरीज के निदेशक प्रो. दीपांकर बनर्जी ने बताया कि यह कार्यशाला खगोल शास्त्र के वैज्ञानिकों द्वारा ‘स्वतंत्रता के 75 वर्ष: आजादी का अमृत महोत्सव‘‘ की श्रृंखला में आयोजित किया जा रहा है।

आयोजक समिति के सदस्य डा. शशिभूषण पांडेय ने प्रतिभागियों को कार्यशाला के स्वरुप व पृष्ठभूमि के बारे में बताया। आगे एरीज के गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष प्रो. पीसी अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में इस बात पर बल दिया कि भारत अपनी विभिन्न सुविधाओं के माध्यम से वर्तमान में बहुत अच्छी स्थिति में है और आने वाले समय में युवा पीढ़ी को इस दिशा में और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रुप से एस्ट्रोसेट, जीएमआटी और 3.6 मी डॉट यानी नैनीताल जनपद स्थित देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप जैसी बहुतरंगदैर्घ्यीय परियोजनाओं के और अधिक दोहन पर बल दिया।

वहीं वरिष्ठ खगोलशास्त्री प्रो. अजित केम्भावी ने आने वाले समय में डीप लर्निंग, मशीन लर्निंग एवं आर्टीफिसीयल इंटेलीजेंस के महत्व को बताते हुए कहा कि आने वाले समय में इस प्रकार की उन्नत तकनीकों से खगोल शास्त्र में कई नये प्रकार के खोजें संभव है।

वहीं प्रथम औपचारिक सत्र में प्रो. केपी सिंह ने एम82 और एम87 नामक मंदाकिनियांे का उदाहरण देते हुए बहुतरंगदैर्घ्यीय भारतीय सुविधाओं जैसे कि एस्ट्रोसेट द्वारा लिए गए प्रेक्षण और उसके परिणामों का भी वर्णन किया। आगे आईआईटी इंदौर के प्रो. अमित शुक्ला ने ब्लेजार जेट्स और उनके परिणामों पर चर्चा की। एरीज के वैज्ञानिक डा. सुवेंदु रक्षित ने प्रथम सत्र का संचालन किया।

आगे आईएफआर के प्रो. गोपा कुमार टी द्वारा संचालित द्वितीय सत्र में डा. पंकज कुशवाहा, एरीज की वैदेही एस पलिया, विनीत ओझा, जामिया मिलिया इस्लामिया के मैनपाल, तेजपुर विवि के प्राणजुप्रिया, सुवेंदु रक्षित व एनसीआरए की सुमोना नंदी ने भी व्याख्यान दिए। समापन सत्र में विभिन्न प्रतिभागियों ने एजीएन व ब्लेजार के विषयों पर व्याख्यान दिए और शोध छात्रों द्वारा किये गये शोध कार्यो पर चर्चा की गई। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Astronomy): अब आप का नाम भी जा सकता नासा के जरिये मंगल ग्रह पर, आवेदन करने का तरीका जारी..

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 फरवरी 2021। गत 19 फरवरी, 2021 को नासा का अंतरिक्ष यान मंगल की सतह पर उतरा है। नासा द्वारा भेजा गया रोवर लाल ग्रह पर मानव अभियान से पहले वहां प्राचीन समय में मौजूद सूक्ष्मजीवों के संसार और ग्रह के मौसम व भूगर्भ का पता लगाने के लिए भेजा गया है। खास बात यह भी है कि नासा का अंतरिक्ष यान दुनियाभर के अंतरिक्ष प्रेमियों के नाम भी अपने साथ मंगल ग्रह पर ले गया है। ऐसे खुशकिस्मत लोगों में नैनीताल जनपद के हल्द्वानी की रहने वाली दो ‘साइंस सिस्टर्स’ शिवानी व हिमानी मिश्रा भी शामिल हैं, जिनके नाम भी मंगल ग्रह पर पहुंचे हैं।

यह जानकर यदि आप भी खुद न सही, अपना नाम मंगलग्रह पर भेजने की सोच रहे हैं तो नासा आपको यह मौका दे रहा है। आप https://mars.nasa.gov/participate/send-your-name/future वेबसाइट से अपना नाम भी नासा के जुलाई 2026 में केप कार्निवाल एयर फोर्स स्टेशन फ्लोरिडा से मंगल ग्रह के ‘जेजरो क्रेटर’ पर जाने वाले अंतरिक्ष यान के साथ भेज सकते हैं। आप को बता दें कि इन शब्दों के लेखक ने भी नासा के अगले मार्स मिशन के लिए ‘बोर्डिंग पास’ प्राप्त कर लिया है। (https://mars.nasa.gov/participate/send-your-name/future/certificate/684015807396)
(Astronomy)

इस बारे में ‘साइंस सिस्टर्स’ शिवानी हिमानी ने लोगों को मंगल ग्रह पर अपने नाम भेजने की प्रक्रिया का बेहतरीन वीडियो तैयार कर यूट्यूब पर अपलोड किया है, जिसमें बहुत ही आसान तरीके से पूरी प्रक्रिया को समझाया गया है।

हिंदी माध्यम का लिंक है : https://youtu.be/yLK9e_YEQsE

अंग्रेजी माध्यम लिंक है : https://youtu.be/apAbAlDZCXU

उल्लेखनीय है कि शिवानी मिश्र हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज से भौतिक विज्ञान में शोध कर रही हैं तथा हिमानी मिश्र महिला महाविद्यालय से भौतिक विज्ञान में एमएससी कर रही हैं। साइंस सिस्टर्स शिवानी, हिमानी को विश्वास है कि भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो जल्द ही मानवयुक्त यान मंगल पर भेजने में कामयाब होगी। दुनिया हमें ज्ञान गुरु के रूप में तो जानती ही है, परन्तु अब हम भारतीयों को विज्ञान गुरु बनने की जरूरत है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : दर्शनीय रहा बृहस्पति और शनि का मिलना..

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 दिसम्बर 2020। मैदानी इलाकों में छाये घने कोहरे से इतर पहाड़ों पर खिले नीले आकाश में शाम ढलने के बाद दक्षिण-पश्चिम आकाश में क्षितिज के पास बृहस्पति और शनि ग्रह बेहद करीब नजर आए। दोनों को इस तरह साथ देखना जहां आम लोगों के लिए आकर्षक व दर्शनीय रहा, वहीं स्थानीय एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान में इस दौरान वैज्ञानिकों एवं शोध विद्यार्थियों ने 1.04 व 3.6 मीटर की दूरबीनों से कई सीसीडी कैमरों का उपयोग करते हुए इन पर नजर बनाए रखी तथा दोनों के बीच दूरी, चमक, सापेक्ष वेग आदि के अंतर का मापन किया।

एरीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. शशिभूषण पांडे ने बताया कि बृहस्पति ओर शनि की युति प्रत्येक 20 वर्षों में होती है। इससे पूर्व ऐसी लोकप्रिय खगोलीय घटना वर्ष 2000 में हुई थी। उन्होंने बताया कि बृहस्पति और शनि दोनों ही 20 दिसंबर की शाम को चंद्रमा के व्यास से अधिक करीब थे, और 21 दिसंबर की शाम सात बजे मैक्सिमा के समय उनके बीच की कोणीय दूरी इससे भी कम, लगभग 6 मिनट की रह गई। उन्होंने बताया कि दूरबीनों व कैमरों की मदद से इस दौरान के प्राप्त आंकड़ों का और विश्लेषण जारी है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 19 दिसम्बर 2020। आगामी 21 दिसंबर 2020 का दिन अनंत ब्रह्मांड एवं अंतरिक्ष का रहस्य जानने के इच्छुक लोगों के लिए बेहद खास होने जा रहा है। इस दिन 397 साल बाद बृहस्पति और शनि ग्रह एक दूसरे के बेहद नजदीक नजर आने वाले हैं। इस दिन इन दोनों ग्रहों को धरती से खुली आंखों से भी देखा जा सकेगा। बताया जा रहा है कि सितंबर माह से ही दोनों ग्रह एक दूसरे के नजदीक बढ़ रहे हैं। ग्रहों का यह अद्भुत मिलन इन दिनों गत 16 दिसंबर से ही एक संयुक्त तारे की तरह चमकता दिखाई दे रहा है और आगामी 21 दिसंबर को दोनों ग्रहों की बीच की दूरी 75 करोड़ किलोमीटर होगी।

उल्लेखनीय है कि साल 2020 में इंसान बहुत सी खगोलीय घटनाओं का प्रत्यक्ष गवाह रहा है। इस पूरे साल दर्जन भर ऐस्टेरायड यानी क्षुद्र ग्रह धरती के पास से गुजर चुके हैं। वहीं पिछले दिनों उल्का पिंडों की बेहद सुंदर बरसात के भी लोगों को दीदार हुए। अब 397 साल बाद यानी मुगल काल के बाद दूसरी बार बृहस्पति और शनि ग्रह इतना नजदीक देखेंगे, कि एक चमकीले संयुक्त तारे की तरह नजर आयेंगे। नैनीताल स्थित आर्यभट्ट उपग्रह केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि पिछले दो-तीन माह से आकाश में क्षितिज के कुछ अंश ऊपर दो चमकीले पिंड दिखाई दे रहे हैं।

आगे-आगे बृहस्पति और उसके पीछे शनि चल रहा है। 21 दिसंबर की रात इन दोनों का अनूठा मिलन दिखाई देगा। वैज्ञानिकों ने बताया कि दोनों बड़े ग्रहों का एक दूसरे के इतना नजदीक आना ग्रेट कंजंक्शन कहलाता है। इस तरह की घटनाएं हर 20 साल बाद होती हैं। लेकिन 21 दिसंबर को दिखने वाला नजारा ग्रेट कंजंक्शन है। इसमें ग्रह आभासीय रूप से एक दूसरे के बेहद करीब आ जाते हैं। बृहस्पति, शनि और धरती के एक सीध में रहने से भी हमें ये नजदीक दिखाई देंगे। इसे खुली आंखों से या साधारण दूरबीन से भी देखा जा सकता है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की डबरालस्यूं पट्टी में पड़ने वाले तिमली स्थित श्री तिमली विद्यापीठ में निकटवर्ती पांच स्कूलों-राजकीय इन्टर कॉलेज देवीखेत, राजकीय इन्टर कॉलेज चेलुसैंण, सरस्वती शिशु मंदिर, विद्या मन्दिर, आदर्श बाल भारती चेलुसैंण तथा श्री तिमली विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं  को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (ISS) में मौजूद रिकी अर्नाल्ड से करीब 10 मिनट तक लाइव बातचीत करने का अभूतपूर्व मौक़ा मिला। 

ख़ास बात यह भी रही कि अंतरिक्षयात्री से सीधे बात करने का सौभाग्य हासिल करने वाले उत्तराखंड के सुदूर गांवों के इनमें से कई बच्चे 11 किलोमीटर पैदल चलकर भी विद्यालय पहुंचे थे। उनमें अंतरिक्ष को लेकर अपने हर सवाल का जवाब पाने की बेचैनी व खासा कौतूहल था। बच्चों ने अंतरिक्ष केंद्र में मौजूद आर्नाल्ड से करीब 10 मिनट तक लाइव बातचीत की, और हर वह सवाल पूछा, जिसका उन्हें जवाब चाहिए था। मसलन बच्चों ने पहले से अंग्रेजी में तैयार प्रश्नों के जरिये अंतरिक्ष के अनुभव, स्पेसवॉक, ब्लैकहोल, एलियन को देखने जैसे सवाल पूछे।

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