बड़ा समाचार : उत्तराखंड के कुमाऊं (Kumaon) में निकलेगा खरबों रुपए का सोना, निकालने को हुआ करार, हो जायेंगे मालामाल…

Uttarakhand Rajniti

Kumaon

Bacchi se dushkarm : घर के बाहर खेल रही 5 वर्ष की मासूम बच्ची को बहला-फुसलाकर उठा ले गया दरिंदा और….

Bacchi se dushkarm

कुमाउनी रामलीला का इतिहास: 1830 में कुमाऊं नहीं मुरादाबाद से हुई कुमाउनी रामलीला की शुरुआत

Ramlila

-नृत्य सम्राट उदयशंकर, महामना मदन मोहन मालवीय व भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत जैसे लोगों का भी रहा है कुमाउनी रामलीला से जुड़ाव डॉ. नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में होने वाली कुमाउनी रामलीला की अपनी मौलिकता, कलात्मकता, संगीत एवं राग-रागिनियों में निबद्ध होने के कारण देश भर में अलग पहचान है। … Read more

सर्दियों के इस मौसम में जरूर जायें इन 11 स्थानों की सैर पर…

Nainital Panorama

Sardiyon men Uttarakhand

Bhooskhlan : पार्किंग में खड़ी कारों पर गिरा पहाड़ी से मलबा, 2 महिलाओं व बच्चे सहित चार लोग जिंदा दफन

Nainital District-Rainfall Affected-Roads Bloked Aapda

Bhooskhlan, Landslide, Aapda, malba,

होम स्टे में रात्रि साढ़े तीन बजे युवती के कमरे में घुसे तीन कर्मी, की दुष्कर्म की कोशिश, कोर्ट ने दिखाया कड़ा रुख…

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 मई 2023। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजाता सिंह की अदालत ने बलात्कार के प्रयास के तीन आरोपितों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है। यह भी पढ़ें : होम स्टे में रात्रि साढ़े तीन बजे युवती के कमरे में घुसे तीन कर्मी, की दुष्कर्म की कोशिश, कोर्ट ने दिखाया कड़ा … Read more

सुबह का सुखद समाचार: उत्तराखंड में ऐसी संभावाएं भी, कपकोट में पैराग्लाइडर ने भरी 53 किमी की उड़ान, कल से राष्ट्रीय स्तर की पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता

Paragliding

नवीन समाचार, बागेश्वर, 11 अप्रैल 2023। (Good morning news: Such possibilities in Uttarakhand, paraglider flew 53 km in Kapkot, national level paragliding competition from tomorrow) अब तक शायद ही किसी ने उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद के दूरस्थ कपकोट क्षेत्र का नाम पैराग्लाइडिंग के लिए सुना हो, या किसी ने सोचा भी हो। लेकिन पहल की जाए … Read more

पिछले कुछ घंटों में 2 बार डोली उत्तराखंड की धरती, आपने महसूस की ?

Bhookamp

नवीन समाचार, उत्तरकाशी, 6 अप्रैल 2023। (Earth of Uttarakhand shook 2 times in the last few hours, did you feel it?) उत्तराखंड की धरती पिछले कुछ घंटों में दो बार डोली है। दो बार आए दोनों भूकंपों का केंद्र उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिलों में रहा है। अलबत्ता, दोनों भूकंपों की तीव्रता कम थी, इसलिए इनसे … Read more

गौरा-महेश को बेटी-जवांई के रूप में विवाह-बंधन में बांधने का पर्व: सातूं-आठूं (गंवरा या गमरा)

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अगस्त 2021 (Satun-Aathun)। प्रकृति में रची-बसी देवभूमि के अधिकांश लोकपर्व-त्योहार प्रकृति के साथ देवी-देवताओं के साथ आध्यात्मिक तौर पर अत्यधिक गहरे जुड़े हुए हैं। सातूं-आठूं, गंवरा या गमरा लोक पर्व को देखिये। इस पर्व पर यहां की पर्वत पुत्रियां महादेवी गौरा से बेटी का और देवों के … Read more

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नैनीताल: भारी बारिश के बीच कार पर गिरा मलबा, कार कबाड़ में तब्दील…April 1, 2023 हजारों श्रद्धालुओं ने कैंची धाम में दर्शनों से की नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत, बिना पर्व उमड़े 15 हजार श्रद्धालु..April 1, 2023 उत्तराखंड : बहुचर्चित प्रश्न पत्र लीक मामले में 50 हजार रुपए का ईनामी पूर्व भाजपा नेता गिरफ्तारApril 1, … Read more

भद्रकालीः जहां वैष्णो देवी की तरह त्रि-पिंडी स्वरूप में साथ विराजती हैं माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।

कहते हैं आदि-अनादि काल में सृष्टि की रचना के समय आदि शक्ति ने त्रिदेवों-ब्रह्मा, विष्णु व महेश के साथ उनकी शक्तियों-सृष्टि का पालन व ज्ञान प्रदान करने वाली ब्रह्माणी यानी माता सरस्वती, पालन करने वाली वैष्णवी यानी माता लक्ष्मी और बुरी शक्तियों का संहार करने वाली शिवा यानी माता महाकाली का भी सृजन किया। सामान्यतया अलग-अलग स्थानों पर प्रतिष्ठित रहने वाली यह तीनों देवियां कम ही स्थानों पर एक स्थान पर तीनों के एकत्व स्वरूप् में विराजती हैं। ऐसा एक स्थान है माता का सर्वोच्च स्थान बताया जाने वाला वैष्णो देवी धाम।

माता भद्रकाली के मंदिर का गर्भगृह
माता भद्रकाली के मंदिर का गर्भगृह

लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं अंचल में भी एक ऐसा ही दिव्य एवं अलौकिक विरला धाम मौजूद है, जहां माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली एक साथ एक स्थान पर वैष्णो देवी की तरह ही स्वयंभू लिंग या पिंडी स्वरूप में आदि-अनादि काल से एक साथ माता भद्रकाली के रूप में विराजती हैं, और सच्चे मन से आने वाले अपने भक्तों को साक्षात दर्शन देकर उनके कष्टों का हरती तथा जीवन पथ पर संबल प्रदान करती हैं। इस स्थान को माता के 51 शक्तिपीठों में से भी एक माना जाता है। शिव पुराण में आये माता भद्रकाली के उल्लेख के आधार पर श्रद्धालुओं का मानना है कि महादेव शिव द्वारा आकाश मार्ग से कैलाश की ओर ले जाये जाने के दौरान यहां दक्षकुमारी माता सती की मृत देह का दांया गुल्फ यानी घुटने से नीचे का हिस्सा गिरा था।

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