हाईकोर्ट ने खारिज की राहत याचिका, सीएम-पीएम तक गुहार, फिर भी नहीं बढ़ी 19 करोड़ की जमीन सौदेबाजी की पुलिस जांच

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नवीन समाचार, देहरादून, 24 जून 2026 (Police Investigation in19 Crore Deal)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून (Dehradun) में लगभग 20 करोड़ रुपये के कथित भूमि धोखाधड़ी प्रकरण को लेकर एक बार फिर पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। नैनीताल उच्च न्यायालय (Nainital High Court) द्वारा आरोपित पक्ष की याचिका खारिज किए जाने और प्राथमिकी को वैध ठहराए जाने के बावजूद मामले में अपेक्षित प्रगति नहीं होने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता युवा उद्यमी बिक्रम राणा (Bikram Rana) ने उत्तरांचल प्रेस क्लब (Uttarakhand Press Club) में आयोजित पत्रकार वार्ता में दावा किया कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के कई दिन बाद भी पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

Police Investigation in19 Crore Dealप्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला देहरादून के पुरकुल (Purkul) क्षेत्र में मसूरी रोड (Mussoorie Road) पर स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि मसूरी रोपवे परियोजना (Mussoorie Ropeway Project) के आगे बढ़ने के बाद क्षेत्र में भूमि मूल्यों में तेजी से वृद्धि हुई है। इसी पृष्ठभूमि में भूमि विक्रय से जुड़ा विवाद सामने आया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भूमि विक्रय के लिए बड़ी धनराशि प्राप्त करने के बाद भी संबंधित पक्षों ने उनके पक्ष में भूमि का पंजीकरण नहीं कराया।

रोपवे परियोजना के बाद बढ़े भूमि मूल्य, यहीं से शुरू हुआ विवाद

पत्रकार वार्ता में बिक्रम राणा ने बताया कि पुरकुल क्षेत्र में स्थित भूमि के संबंध में उनके और विक्रेताओं के बीच विक्रय समझौता हुआ था। उनका आरोप है कि संबंधित पक्षों ने साईं इंफ्रा प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (Sai Infra Products Pvt. Ltd.) की भूमि के सौदे के तहत उनसे 19 करोड़ 81 लाख रुपये अपने खातों में स्थानांतरित करवा लिए, लेकिन बाद में भूमि का बैनामा कराने से पीछे हट गए।

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उन्होंने दावा किया कि रोपवे परियोजना के कारण क्षेत्र में जमीन की कीमतों में भारी वृद्धि हुई, जिसके बाद पूर्व में हुए समझौतों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आर्थिक लाभ की संभावना बढ़ने पर विक्रेताओं की नीयत बदल गई और उन्होंने भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं की।

2025 में दर्ज हुई थी प्राथमिकी

बिक्रम राणा के अनुसार इस मामले में 14 सितंबर 2025 को राजपुर थाना (Rajpur Police Station) में प्राथमिकी संख्या 181/2025 दर्ज कराई गई थी। प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code-IPC) की धारा 120-बी, 420, 467, 468 और 471 के तहत अभियोग दर्ज किया गया था।

मामले में राजकुमार यादव (Rajkumar Yadav), हरीश यादव (Harish Yadav), राजीव वाड्रा (Rajeev Wadhwa), संजय सिंह (Sanjay Singh), मेघा भारद्वाज (Megha Bhardwaj), बिज्जू (Bijju), विनोद कुमार (Vinod Kumar) और नीरजा सिंह (Neerja Singh) सहित कई व्यक्तियों को प्रतिवादी बनाया गया है। समाचार लिखे जाने तक आरोपों पर संबंधित पक्षों का पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हो पाया था।

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, अर्थदंड भी लगाया

शिकायतकर्ता के अनुसार प्राथमिकी दर्ज होने के बाद प्रतिवादियों ने अग्रिम जमानत प्राप्त की और बाद में प्राथमिकी निरस्त कराने के लिए नैनीताल उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उनका दावा है कि उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी तथा वादियों पर दो लाख पचास हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।

बिक्रम राणा का कहना है कि न्यायालय के निर्णय के बाद पुलिस को मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन अभी तक अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच की गति अत्यंत धीमी है और इससे उन्हें आर्थिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पोर्टल पर भी लगाई गुहार

पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि न्याय की मांग को लेकर मुख्यमंत्री (Chief Minister) और प्रधानमंत्री (Prime Minister) शिकायत पोर्टलों पर भी प्रार्थना पत्र भेजे गए हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से मामला लंबित रहने के कारण वह आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं।

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उल्लेखनीय है कि बिक्रम राणा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व सांसद तीरथ सिंह रावत (Tirath Singh Rawat) के रिश्तेदार भी बताए जाते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आग्रह केवल निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई का है।

पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल, लेकिन जांच जारी

शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपितों को अनावश्यक समय और अवसर मिल रहा है, जबकि मामले में दर्ज प्राथमिकी पर शीघ्र कार्रवाई अपेक्षित है। उन्होंने यह भी कहा कि भूमि धोखाधड़ी के मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं होने से राज्य में निवेश और स्थानीय उद्यमियों का विश्वास प्रभावित हो सकता है।

हालांकि पुलिस का आधिकारिक पक्ष इस संबंध में सामने आना शेष है। जांच एजेंसियों द्वारा मामले की विवेचना जारी है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया तथा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

यह प्रकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उत्तराखंड में भूमि मूल्यों में तेजी, बाहरी निवेश, बड़ी परियोजनाओं और भूमि खरीद-बिक्री से जुड़े विवाद लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और समयबद्ध कार्रवाई ही लोगों का भरोसा मजबूत कर सकती है।

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