नवीन समाचार, बागेश्वर, 3 अगस्त 2026 (BLOs Body Fund Hanging From Tree)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के बागेश्वर (Bageshwar) जनपद में आंगनबाड़ी कार्यकत्री (Anganwadi Worker) एवं बूथ लेवल अधिकारी (Booth Level Officer-BLO) के रूप में कार्यरत एक महिला का शव संदिग्ध परिस्थितियों में घर के पास पेड़ से फंदे पर लटका मिलने से क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। परिजनों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) से जुड़े कार्यों के दबाव को घटना का कारण बताया है, जबकि निर्वाचन प्रशासन ने इस आरोप से असहमति जताते हुए कहा है कि संबंधित कार्य पूरा कराया जा चुका था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
परिजनों और पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार कांडा (Kanda) थाना क्षेत्र के बांसतोली (Banstoli) गांव निवासी 47 वर्षीय कमला देवी (Kamla Devi), पत्नी पूरन राम (Pooran Ram) आंगनबाड़ी कार्यकर्ता होने के साथ बूथ लेवल अधिकारी का अतिरिक्त दायित्व भी निभा रही थीं। रविवार सुबह वह प्रतिदिन की तरह उठीं, पति के साथ चाय पी और इसके बाद उनके पति गाय का दूध निकालने के लिए गोशाला चले गए। कुछ देर बाद लौटने पर कमला देवी घर में नहीं मिलीं। तलाश करने पर उनका शव घर के पास खेत में एक पेड़ से फंदे पर लटका मिला।
सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष बलवंत कंबोज (Balwant Kamboj) पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को नीचे उतारकर पंचायतनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भेज दिया। थानाध्यक्ष ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिलने का प्रतीत होता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पति ने एसआईआर कार्य के दबाव का लगाया आरोप, अधिकारियों ने किया खंडन
घटना के बाद मृतका के पति पूरन राम का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के कार्य के कारण उनकी पत्नी लगातार मानसिक दबाव में थीं। उनका कहना है कि अधिकारियों के लगातार फोन आने, निर्धारित समय में नोटिस वितरण और लोगों की नाराजगी के कारण वह तनावग्रस्त थीं। परिजनों के अनुसार 31 जुलाई तक उन्हें 88 नोटिस वितरित करने थे, जिनमें से 56 नोटिस ही वितरित हो सके थे। शेष 32 नोटिस को लेकर वह पिछले दो दिनों से चिंतित थीं।
पांच और छह अगस्त को इंटर कॉलेज विजयपुर (Inter College Vijaypur) में प्रस्तावित एसआईआर शिविर के लिए भी उन्हें अद्यतन अभिलेखों के साथ उपस्थित होना था। हालांकि कपकोट (Kapkot) के निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (Electoral Registration Officer-ERO) अनिल चन्याल (Anil Chanyal) ने परिजनों के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कमला देवी ने सभी 88 नोटिसों का वितरण कार्य पूरा कर लिया था। उनके अनुसार कार्य अधूरा रहने का प्रश्न नहीं उठता। ऐसे में पुलिस जांच और अन्य तथ्यों के आधार पर ही घटना के कारण स्पष्ट हो सकेंगे।
परिवार पर टूटा आर्थिक संकट
कमला देवी अपने परिवार की मुख्य आय का स्रोत थीं। उनके परिवार में पति, एक पुत्र और एक पुत्री हैं। पुत्री दीक्षा (Diksha) एमएससी (MSc) तथा पुत्र लोकेश (Lokesh) बीएससी (BSc) की पढ़ाई कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि सीमित आय के बावजूद कमला देवी ने बच्चों की शिक्षा में कभी कमी नहीं आने दी। अब उनके असामयिक निधन से परिवार गहरे आर्थिक और मानसिक संकट में आ गया है तथा बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होने की आशंका है।
कमला देवी मूल रूप से पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जनपद के कालसिल (Kalsil), बेरीनाग (Berinag) क्षेत्र की निवासी थीं। उनका विवाह मार्च 2003 में बांसतोली निवासी पूरन राम से हुआ था और उसी वर्ष नवंबर में उनकी नियुक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में हुई थी। इंटरमीडिएट तक शिक्षित कमला देवी वर्षों से सेवा कार्यों के साथ परिवार की जिम्मेदारियां भी निभा रही थीं।
जिले में 405 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता निभा रही हैं बीएलओ की जिम्मेदारी
बागेश्वर जनपद में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान 405 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बूथ लेवल अधिकारी के रूप में भी कार्य कर रही हैं। निर्वाचन प्रक्रिया में पुराने अभिलेखों की मैपिंग और मतदाता सूची में पाई जा रही विसंगतियों को दूर करने का कार्य जारी है। बीएलओ का कहना है कि नई डिजिटल व्यवस्था में छोटी-छोटी त्रुटियां भी प्रणाली स्वीकार नहीं करतीं, जिससे कार्य अपेक्षाकृत जटिल हो गया है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि शिक्षकों सहित अन्य कर्मियों की सहायता से यह कार्य नियमानुसार पूरा कराया जा रहा है।
पुलिस ने मामले की जांच प्रारंभ कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, परिजनों के बयान तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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