नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अगस्त 2026 (Nainital-Lakhan Negi and 2 Accused)। नैनीताल की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (Additional Chief Judicial Magistrate) अदालत ने भवाली कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सिमायल रैकवाल में राजस्व टीम के सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में चल रहे मामले में तीनों आरोपितों-कॉंग्रेस नेता लाखन सिंह नेगी, गोपाल बिष्ट और गजेन्द्र सिंह बिष्ट को दोषमुक्त कर दिया है।
अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 132, 221, 285, 191(2) और 192 के आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अदालत ने विशेष रूप से शिकायत की वैधानिक प्रक्रिया, अभियुक्तों की पहचान, विधि-विरुद्ध जमाव के लिए आवश्यक सदस्यों की संख्या और प्रस्तुत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की वैधानिकता पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।
6 अगस्त 2025 की घटना से शुरू हुआ था मामला
अदालत के 14 अगस्त 2026 के निर्णय के अनुसार, घटना 6 अगस्त 2025 को ग्राम सिमायल रैकवाल, तहसील नैनीताल में उस समय हुई, जब राजस्व विभाग की टीम शिकायत में उल्लिखित निर्माण स्थल/भवन की जांच के लिए पहुंची थी। अभियोजन के अनुसार टीम में क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक रामगढ़ गोपाल चन्द्र जोशी, राजस्व उपनिरीक्षक मल्लीताल कुटौली सुषमा गुसाईं और राजस्व उपनिरीक्षक नथुवाखान हीना मेवाड़ी सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी थे। टीम सरकारी वाहन से मौके पर पहुंची थी।
अभियोजन का आरोप था कि मौके पर लाखन सिंह नेगी तथा अन्य ग्रामीण मौजूद थे और उन्होंने राजस्व टीम को जांच करने से रोका। आरोप-पत्र में यह भी कहा गया कि सरकारी वाहन को घेर लिया गया तथा लाखन सिंह नेगी और एक अन्य व्यक्ति वाहन की छत पर चढ़ गए और जिला प्रशासन के विरुद्ध नारे लगाए। घटना के आधार पर भवाली कोतवाली में अपराध संख्या 49/2025 दर्ज किया गया था।
मामले में लाखन सिंह नेगी, गोपाल बिष्ट और गजेन्द्र सिंह बिष्ट के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 132, 221, 285, 191(2) और 192 के तहत आरोप लगाए गए। तीनों ने आरोपों से इनकार किया और परीक्षण की मांग की।
अदालत में क्या-क्या साक्ष्य रखे गए
अभियोजन पक्ष ने वादी मुकदमा युगल किशोर पाण्डेय सहित हीना मेवाड़ी, गोपाल चन्द्र जोशी, सुषमा गुसाईं, बलवन्त सिंह बिष्ट, उमेश चन्द्र कुड़ाई, मुख्य आरक्षी ओम प्रकाश और विवेचक उपनिरीक्षक गुलाब सिंह कम्बोज के बयान कराए। दस्तावेजी साक्ष्य में शिकायत, प्रमाण पत्र, जीडी, चिक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR), नक्शा नजरी, नमूना मोहर, सीडी, फर्द और अभियुक्तों को जारी नोटिस सहित 12 प्रदर्श प्रस्तुत किए गए। सीडी तथा घटना से संबंधित फोटो भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए।
अभियोजन के अनुसार घटना की वीडियो राजस्व उपनिरीक्षक हीना मेवाड़ी ने व्हाट्सऐप के माध्यम से वादी पक्ष को उपलब्ध कराई थी। वीडियो और फोटो को सीडी में सुरक्षित कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। हालांकि न्यायालय ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की वैधानिकता पर गंभीर प्रश्न उठाए। अदालत ने पाया कि प्रस्तुत प्रमाण पत्र में हैश वैल्यू (Hash Value) का उल्लेख नहीं था और जिस डिजिटल उपकरण से वीडियो उपलब्ध कराई गई थी, उसके स्वामित्व से संबंधित आवश्यक विवरण भी प्रमाणित रूप में सामने नहीं आया। इस कारण अदालत ने उक्त इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को स्वीकार करने योग्य नहीं माना।
अभियुक्तों की पहचान और आरोपों पर भी उठे सवाल
अदालत ने साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए पाया कि गवाहों ने लाखन सिंह नेगी का नाम तो लिया, लेकिन गोपाल बिष्ट और गजेन्द्र सिंह बिष्ट की मौके पर मौजूदगी अथवा पहचान को किसी प्रत्यक्षदर्शी ने स्पष्ट रूप से प्रमाणित नहीं किया। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि विवेचक ने इन दोनों अभियुक्तों की पहचान किसी प्रत्यक्षदर्शी गवाह अथवा वादी मुकदमा से नहीं कराई।
मामले में विधि-विरुद्ध जमाव का आरोप भी महत्वपूर्ण था। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 189(1) के संदर्भ में कहा कि ऐसे जमाव के लिए कम से कम पांच व्यक्तियों का होना आवश्यक है, जबकि विवेचना में केवल तीन व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया। इस आधार पर भी अभियोजन का आरोप कमजोर पाया गया।
सरकारी कर्मचारी को बाधा पहुंचाने का आरोप भी साबित नहीं हुआ
अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 221 के संबंध में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 215 के प्रावधानों पर विचार किया। निर्णय में कहा गया कि धारा 221 के अपराध के संबंध में न्यायालय द्वारा संज्ञान लेने के लिए संबंधित लोक सेवक अथवा अधिकृत लोक सेवक की ओर से विधिवत परिवाद आवश्यक है। प्रस्तुत मामले में ऐसा लिखित परिवाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया था।
अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय Durgacharan Naik v. State of Orissa, 1966 SCC Online SC 58 का भी उल्लेख करते हुए भारतीय दंड संहिता की धाराओं 186 और 353 के बीच अंतर पर विचार किया। इसके बाद अदालत ने पाया कि वर्तमान मामले में लोक सेवक के साथ मारपीट, धक्का-मुक्की अथवा गाली-गलौज किए जाने का आरोप भी उपलब्ध साक्ष्यों से साबित नहीं हुआ। प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों में भी अभियुक्तों द्वारा राजस्व कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार किए जाने की पुष्टि नहीं हुई।
अदालत ने अभियोजन की पूरी कहानी पर क्या निष्कर्ष दिया
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि 6 अगस्त 2025 को दोपहर करीब 12 बजे सिमायल रैकवाल में तीनों अभियुक्तों ने सामान्य उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए बल या हिंसा का प्रयोग किया, विधि-विरुद्ध जमाव बनाया और राजस्व टीम को उसके लोक कर्तव्यों के निर्वहन से बाधित किया। अदालत ने यह भी माना कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीनों अभियुक्तों के विरुद्ध लगाए गए आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं होते।
निर्णय में अदालत ने तीनों अभियुक्तों लाखन सिंह नेगी, गोपाल बिष्ट और गजेन्द्र सिंह बिष्ट को भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 132, 221, 285, 191(2) और 192 के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने उनके व्यक्तिगत बन्धपत्र तथा जमानतियों के जमानतनामे रद्द कर उन्हें उनके दायित्वों से उन्मोचित करने का आदेश दिया। हालांकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 481 के अनुपालन में प्रस्तुत व्यक्तिगत बन्धपत्र और जमानतनामे छह माह तक प्रभावी रहने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्णय 14 अगस्त 2026 को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नैनीताल रवि रंजन (Ravi Ranjan) ने सुनाया। दस्तावेज में बचाव पक्ष की ओर से कोई साक्षी या दस्तावेजी/वस्तु साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने का भी उल्लेख है।
इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत ने केवल घटना के संबंध में गवाहों के बयानों को ही नहीं, बल्कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की वैधानिकता, अभियुक्तों की पहचान, विधि-विरुद्ध जमाव के लिए आवश्यक संख्या और लोक सेवक से संबंधित अपराध में आवश्यक परिवाद की प्रक्रिया को भी अलग-अलग परखा। इन्हीं कमियों के कारण अभियोजन पक्ष आरोपों को न्यायालय के समक्ष प्रमाणित नहीं कर सका।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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