नवीन समाचार, नैनीताल, 4 अगस्त 2026 (Contempt-Urban Development Secretary)। उत्तराखंड (Uttarakhand) उच्च न्यायालय (High Court) ने राज्य के शहरी विकास विभाग के सचिव (Secretary, Urban Development) को न्यायालय की अवमानना के मामले में नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया यह माना कि पूर्व में दिए गए आदेश के अनुपालन में निर्धारित अवधि के भीतर निर्णय नहीं लिया गया। न्यायालय ने सचिव को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए स्पष्ट किया है कि इस बीच वह या तो अपना प्रत्युत्तर प्रस्तुत करें अथवा मूल आदेश का अनुपालन करें।
प्राप्त न्यायालय के आदेशों के अनुसार यह मामला हरिद्वार (Haridwar) में प्रधानमंत्री आवास योजना (Pradhan Mantri Awas Yojana-Urban) से जुड़े सिटी लेवल टेक्निकल सेल (City Level Technical Cell) में शहरी आधारभूत संरचना विशेषज्ञ (Urban Infrastructure Expert) के रूप में कार्यरत रहे विस्तार गुप्ता (Vistar Gupta) से संबंधित है। याचिकाकर्ता को 17 मार्च 2026 को सेवा से पृथक किए जाने के बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
उच्च न्यायालय ने प्रतिनिधित्व पर 10 सप्ताह में निर्णय का दिया था निर्देश
28 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी (Justice Manoj Kumar Tiwari) की एकलपीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को सचिव शहरी विकास के समक्ष दो सप्ताह के भीतर प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करने की अनुमति दी थी। साथ ही न्यायालय ने निर्देश दिया था कि यदि प्रतिनिधित्व समय पर प्राप्त हो जाए तो सचिव शहरी विकास 10 सप्ताह के भीतर विधि के अनुसार उस पर निर्णय लें।
याचिकाकर्ता के अनुसार उन्होंने 5 मई 2026 को न्यायालय के आदेश की प्रति के साथ अपना प्रतिनिधित्व सचिव शहरी विकास को प्रस्तुत कर दिया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसी आधार पर न्यायालय की अवमानना याचिका दाखिल की गई।
अवमानना याचिका पर सचिव को चार सप्ताह में जवाब देने के निर्देश
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित (Justice Pankaj Purohit) की पीठ ने गत 3 अगस्त 2026 को पारित आदेश में सचिव शहरी विकास को अवमानना नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 निर्धारित की है। साथ ही यह भी कहा है कि इस अवधि में संबंधित अधिकारी चाहे तो प्रत्युत्तर शपथपत्र दाखिल करें अथवा रिट याचिका में पारित आदेश का अनुपालन कर दें।
मूल याचिका में क्या था विवाद
मूल याचिका में याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के कार्यों में अनियमितताओं की शिकायत की थी, जिसके बाद उन्हें सेवा से हटाया गया। दूसरी ओर राज्य सरकार और नगर निगम (Nagar Nigam) की ओर से न्यायालय में कहा गया था कि उनका कार्य निष्पादन संतोषजनक नहीं था तथा वे वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन और कार्यों का समय पर निष्पादन नहीं कर रहे थे। उस समय न्यायालय ने इन तथ्यों के गुण-दोष पर विचार किए बिना केवल सक्षम प्राधिकारी से प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
अब अवमानना याचिका में न्यायालय यह देखेगा कि उसके पूर्व आदेश का पालन हुआ या नहीं तथा यदि नहीं हुआ तो इसके लिए संबंधित अधिकारी का क्या स्पष्टीकरण है। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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