नवीन समाचार, देहरादून, 4 अगस्त 2026 (Uttarakhand-Milk-Producing Male Goat)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) के सेलाकुई (Selaqui) क्षेत्र में एक दो वर्षीय बकरा इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सामान्यतः केवल मादा बकरी ही दूध देती है, लेकिन ‘बोरा’ (Bora) नाम का यह नर बकरा अपने विकसित थनों से दूध दे रहा है। इस अनोखी घटना को देखने के लिए आसपास ही नहीं, बल्कि दूर-दूर से भी लोग पहुंच रहे हैं। पशु चिकित्सा विशेषज्ञ इसे किसी चमत्कार के बजाय अत्यंत दुर्लभ हार्मोनल परिवर्तन बता रहे हैं।
स्थानीय लोगों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सेलाकुई निवासी सुखपाल (Sukhpal) के दो वर्षीय बकरे ‘बोरा’ के थन सामान्य नर बकरों की तुलना में विकसित दिखाई दे रहे थे। इस पर सुखपाल और स्थानीय निवासी राजेंद्र बिल्ला (Rajendra Billa) ने इसकी जांच के उद्देश्य से थनों को दबाकर देखा। इस दौरान उनमें से दूध निकलने लगा। यह बात क्षेत्र में तेजी से फैल गई और इसके बाद बड़ी संख्या में लोग इस बकरे को देखने के लिए पहुंचने लगे।
विशेषज्ञों ने बताया वैज्ञानिक कारण
सहसपुर (Sahaspur) के पशु चिकित्सा अधिकारी (Veterinary Officer) डॉ. डी.एस. मोल्फा (Dr. D.S. Molfa) के अनुसार यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि अत्यंत दुर्लभ जैविक स्थिति है। उन्होंने बताया कि हजारों नर पशुओं में से किसी एक में एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोलैक्टिन (Prolactin) जैसे हार्मोन का स्तर असामान्य रूप से बढ़ सकता है। इस हार्मोनल असंतुलन के कारण नर पशु में थनों का विकास होने लगता है और उनमें दूध का स्राव भी शुरू हो सकता है।
डॉ. मोल्फा के अनुसार चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को गाइनेकोमास्टिया (Gynecomastia) से संबंधित हार्मोनल परिवर्तन के रूप में देखा जाता है। यह अत्यंत दुर्लभ होता है और सामान्य परिस्थितियों में देखने को नहीं मिलता।
लोगों के लिए कौतूहल, विशेषज्ञों की सतर्क रहने की सलाह
यद्यपि वैज्ञानिक दृष्टि से इस घटना का कारण स्पष्ट है, फिर भी स्थानीय लोगों के लिए यह किसी अजूबे से कम नहीं है। क्षेत्र में लगातार लोग बकरे को देखने पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों को अंधविश्वास या चमत्कार से जोड़ने के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना चाहिए। यदि किसी पशु में इस प्रकार का असामान्य शारीरिक परिवर्तन दिखाई दे तो पशु चिकित्सक से जांच कराना उचित रहता है।
यह घटना एक बार फिर बताती है कि प्रकृति में कभी-कभी ऐसी दुर्लभ जैविक स्थितियां सामने आती हैं, जो सामान्य लोगों के लिए आश्चर्य का विषय बन जाती हैं, लेकिन विज्ञान उनके पीछे मौजूद कारणों की स्पष्ट व्याख्या करता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।

















