नैनीताल का प्रमुख आस्था का केंद्र —हनुमानगढ़ : बाबा नीब करौरी महाराज ने जहां स्थापित किया था पहला हनुमान मंदिर, बाबा के चरणों से पावन हुई दिव्य साधना–भूमि

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डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 29 नवंबर 2025 (Hanumangarh-Baba Neeb Karoris1st Hanuman Temple)। उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल में जहाँ सबसे पहले विश्वविख्यात आध्यात्मिक संत बाबा नीब करौरी महाराज (जन्म 30 नवंबर 1900-मृत्यु 11 सितंबर 1973) के चरण पड़े, और बाबा जी ने पहले श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर की स्थापना की, वही पवित्र स्थान आज हनुमानगढ़ के नाम से विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए दिव्यता का केंद्र है। समुद्रतल से ऊँचाई पर बसे इस धाम की स्थापना 16 जून 1953 को बाबा जी ने स्वयं की थी, और उस समय की निर्जन पहाड़ी को उन्होंने प्रेम, भक्ति, सेवा और साधना की सदाबहार धरा में बदल दिया।

(Hanumangarh-Baba Neeb Karoris1st Hanuman Templeहनुमानगढ़ी न केवल नैनीताल का आध्यात्मिक हृदय है, बल्कि यह पर्वत–नगरी की सांस्कृतिक पहचान का भी दृढ़ प्रतीक है। नैनीताल के बाद ही बाबा नीब करौरी ने पहले भूमियाधार, फिर कैंची धाम, काकड़ी घाट और लखनऊ सहित देश भर में 108 से अधिक हनुमान मंदिरों की स्थापना कर विश्वभर में फैली हनुमत–भक्ति को जन्म दिया। 

हनुमानगढ़ी का इतिहास : जहाँ बाबा नीब करौरी ने रचा आध्यात्मिक युग

शैलेश साह सहित बाबा के अनेक दीर्घकालिक भक्त बताते हैं कि बाबा महाराज 1950 के आस–पास घूमते हुए नैनीताल पहुँचे थे। वह तल्लीताल बाज़ार के आसपास और सड़क किनारे पेरापिटों पर कंबल ओढ़कर बैठ जाते थे। उनके भीतर की दिव्यता और मौन–चेतना के माध्यम से नगर के लोग उनसे प्रभावित होते रहे और इसी दौरान उन्होंने नगर से लगभग 2 किमी दूर मनोरा की पहाड़ी को आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र के रूप में चुना।

मंदिर निर्माण : हरदा बाबा की देखरेख में हुआ दिव्य निर्माण

(Hanumangarh-Baba Neeb Karoris1st Hanuman Temple Nainital Uttarakhand India May-10-2023 Shri Sankatmochan Stock Photo  2309241361 | Shutterstockहनुमानगढ़ मंदिर का निर्माण स्वयं बाबा जी ने गहन निरीक्षण में पूरा कराया। बाबा जी के प्रिय शिष्य हरदा बाबा, जो उस समय वन विभाग में कार्यरत थे और बाद में बाबा जी द्वारा अमेरिका भेजे गये तथा वहीं बाबा हरिदास के रूप में विख्यात हुए, हनुमानगढ़ में निर्माण कार्य और समस्त गतिविधियों की देखरेख करते थे।

वह प्रायः वर्तमान ‘श्री माँ मंदिर’ के पास बनी करीब पाँच फ़ीट गहरी गुफा में धूनी जलाकर बैठते थे और साधना में लीन रहते थे। जबकि बाबा नीब करौरी महाराज वर्तमान भरत जी मंदिर के निकट बनी कुटिया में निवास किया करते थे, जहां से हनुमानगढ़ के निर्माण और आध्यात्मिक गतिविधियाँ संचालित होती थीं।

प्रथम मूर्ति-स्थापना : छोटी गदा सहित हनुमानजी

मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद बाबा जी ने सर्वप्रथम गदा युक्त छोटे हनुमान जी की मूर्ति स्वयं स्थापित की, जो आज भी बड़े हनुमानजी के मंदिर के समीप स्थित है। इसी मूर्ति के निकट हैड़ाखान बाबा द्वारा स्थापित एक और प्राचीन मंदिर भी आज तक सुरक्षित रूप से विद्यमान है।

कब्रिस्तान से मंदिर तक : दिव्य परिवर्तन की कथा

स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि मंदिर निर्माण से पूर्व यह स्थान बच्चों का कब्रिस्तान हुआ करता था। मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद पहले भंडारे में यह चर्चा होने लगी कि नगर से इतनी दूर लोग—विशेषकर बच्चे—कैसे पहुँचेंगे।  लेकिन आश्चर्यजनक रूप से भंडारे में 30–40 बच्चे अचानक पहुँचे और प्रसाद ग्रहण किया।

तत्पश्चात बाबा जी ने कहा, “बच्चों की आत्माएँ तृप्त हो गईं।

एक वर्ष तक निरंतर रामायण-पाठ

मंदिर की स्थापना के उपरांत पूरे एक वर्ष तक प्रतिदिन संपूर्ण रामायण का पाठ तथा निरंतर ‘श्री राम जय राम जय जय राम’ एक नाम–कीर्तन चलता रहा, जिससे यह स्थान दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा का एक अतुलनीय केंद्र बन गया।

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वर्तमान हनुमानगढ़ : जहाँ हर शिला में है भक्ति की ध्वनि

आज हनुमानगढ़ केवल एक मंदिर नहीं बल्कि अनेक दिव्य स्थापत्य और आध्यात्मिक केंद्रों का संगम है—

प्रमुख धाम

  • सीना फाड़े हनुमानजी की विशाल मूर्ति, जिनके हृदय में विराजमान राम–सीता की झलक भक्तों को अद्भुत आनंद देती है।

  • छोटे हनुमानजी का मंदिर

  • बाबा हैड़ाखान मंदिर

  • बाबा नीब करौरी महाराज का आश्रम

  • महामृत्युंजय मंदिर

  • अंजनी पुत्र बाल हनुमान जी का मंदिर

  • नव स्थापित श्री राधाकृष्ण मंदिर

  • श्री राम दरबार

  • शिवालय

  • तथा पूर्व में मंदिर परिसर के बाहर स्थित भरत जी का मंदिर भी अब मंदिर परिसर के भीतर ही भरत जी की सुंदर मूर्ति के साथ विद्यमान है। 

यह संपूर्ण परिसर हनुमत भक्ति, शिव साधना, वैष्णव उपासना और सर्वोच्च चेतना का केंद्र है।

नियमित अनुष्ठान : नित्य सेवा और अखंड भक्ति

यहाँ प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को—

  • हनुमान चालीसा

  • सुंदरकाण्ड पाठ

  • भजन–कीर्तन
    निरंतर होते रहते हैं और भक्तों के मन में अदम्य शक्ति और शांति का संचार करते हैं।

नैनीताल का आध्यात्मिक ध्रुवतारा

सन 1953 से लेकर आज तक हनुमानगढ़ लाखों भक्तों के लिए—

  • साहस का स्रोत

  • सेवा का केंद्र

  • ध्यान–योग का प्राणस्थान

  • और बाबा महाराज की अनुग्रह–भूमि
    बना हुआ है।

यह वही स्थान है जहाँ आध्यात्मिक दिव्यता के बीज बोए गये थे, जो आगे चलकर दुनिया के कोने–कोने में “Love Everyone, Serve Everyone” के संदेश के माध्यम से फैल गये।


पाठकों से निवेदन:
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