पहाड़ की कृषियोग्य जमीनों को अकृषि बनाकर बेचने पर उठे सवाल, इस तरह अनुसूचित जाति की भूमि बाहरी व्यक्ति को बेचने का आरोप

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नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जून 2026 (Sale of Land After Converting-143)। नैनीताल (Nainital) जनपद के नगारीगांव (Nagarigaon) में अनुसूचित जाति परिवार की पैतृक कृषि भूमि को पहले अकृषि घोषित कराने और बाद में बाहरी व्यक्ति को बेचे जाने के आरोपों ने भूमि प्रबंधन और राजस्व कानूनों के पालन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ऐसे एक मामले को लेकर जिलाधिकारी नैनीताल (District Magistrate Nainital) से शिकायत कर जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि धारा 143 के तहत प्राप्त आदेश का उद्देश्य बदलकर भूमि का हस्तांतरण किया जा रहा है, जिससे राजस्व नियमों और न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन की आशंका उत्पन्न हुई है।

Sale of Land After Converting-143 जमीन बेचने पर पाबंदियों से उत्तराखंड के किसान फायदे में रहेंगे या जाल में  फंस जाएंगे?शिकायतकर्ता दयासागर (Daya Sagar) पुत्र स्वर्गीय मोहन राम (Mohan Ram) निवासी ग्राम नगारीगांव, तहसील एवं जिला नैनीताल ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में कहा है कि वह गांव के भूमिधर काश्तकार हैं। उनके अनुसार गाँव की एक कृषि भूमि, जो अनुसूचित जाति (शिल्पकार) परिवार की पैतृक भूमि बताई गई है, को वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा 143 (Section 143) के अंतर्गत अकृषि घोषित कराया गया था।

कृषि, बागवानी और मत्स्य पालन के नाम पर मिली अनुमति, फिर हुई बिक्री का आरोप

शिकायत के अनुसार अकृषि घोषित कराने के लिए दिए गए आवेदन में भूमि का उपयोग कृषि, मत्स्य पालन, बागवानी और कुक्कुट पालन जैसे कार्यों के लिए दर्शाया गया था। परगनाधिकारी नैनीताल (Sub Divisional Magistrate Nainital) द्वारा 1 अप्रैल 2022 को भूमि को अकृषि घोषित किए जाने के बाद कथित रूप से उक्त भूमि को एक सवर्ण जाति की महिला के नाम विक्रय कर दिया गया।

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दयासागर का आरोप है कि भूमि अनुसूचित जाति परिवार की पैतृक संपत्ति थी और अकृषि घोषित कराने के आदेश का दुरुपयोग करते हुए इसे बाहरी व्यक्ति को बेच दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गांव के अन्य खाताधारकों द्वारा भी इसी प्रकार भूमि को अकृषि घोषित कराकर बाहरी लोगों को बेचा गया है।

न्यायालय के आदेश के उल्लंघन का भी आरोप

शिकायतकर्ता ने रिट संख्या 119/2013, अनुज कंसल बनाम सरकार (Anuj Kansal Vs Government) में 19 जून 2018 को पारित आदेश के पैरा-14 के उल्लंघन का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि संबंधित भूमि के उपयोग और हस्तांतरण में न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया।

शिकायती पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि भूमि संबंधी विवादों के कारण स्थानीय ग्रामीणों के अधिकार प्रभावित हुए हैं तथा कुछ मामलों में उनके अनुसार गलत तरीके से राजस्व कार्यवाही भी कराई गई है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

कानूनी स्थिति क्या कहती है

जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा (Sushil Kumar Sharma) के अनुसार यदि कोई भूमि कृषि श्रेणी में है और वह अनुसूचित जाति के भूमिधर की है तो उसके हस्तांतरण पर राजस्व कानूनों के विशेष प्रावधान लागू होते हैं। उन्होंने बताया कि धारा 143 के तहत भूमि को अकृषि घोषित किए जाने के बाद भी उसका उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए, जिसके लिए अनुमति प्राप्त की गई थी। उन्होंने कहा कि यह भी देखा जाना आवश्यक होगा कि भूमि के हस्तांतरण के समय सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, लागू राजस्व कानूनों तथा न्यायालय के आदेशों का पालन किया गया था या नहीं।

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जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

फिलहाल मामला शिकायत के स्तर पर है और प्रशासन से जांच की मांग की गई है। ऐसे मामलों में रिट संख्या 119/2013 के आदेश और उसके पैरा-14 की वास्तविक शर्तों का परीक्षण भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। कृषि, मत्स्य पालन, बागवानी अथवा कुक्कुट पालन के लिए अकृषि घोषित भूमि का किसी अन्य प्रयोजन अथवा हस्तांतरण के लिए उपयोग किया गया है या नहीं, यह भी जांच का विषय है।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल एक भूमि हस्तांतरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि भूमि के उपयोग, अनुसूचित जाति के भूमिधरों के अधिकारों और राजस्व कानूनों के अनुपालन से जुड़े व्यापक प्रश्न भी सामने आ सकते हैं। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ऐसी नियमविरुद्ध बेची गई जमीनें सरकार में भी निहित हो सकती हैं। 

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