SIR सत्यापन में राहत: अब आधार, राशन और आयुष्मान कार्ड भी होंगे मान्य, मतदाता न हों भ्रमित

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नवीन समाचार, देहरादून, 6 अगस्त 2026 (SIR Notice-Deepak Rawat-Sarita-Yashpal)। देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान दस्तावेजों को लेकर फैली असमंजस की स्थिति के बीच निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं को बड़ी राहत दी है। अब SIR के तहत नोटिस प्राप्त करने वाले ऐसे मतदाता, जिनके पास निर्धारित 11 दस्तावेजों में से कोई उपलब्ध नहीं है, वे आधार कार्ड, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड को भी सहायक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत कर सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे उन लाखों मतदाताओं को राहत मिलेगी, जो पुराने अभिलेख जुटाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे थे।

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सत्यापन का उद्देश्य नाम काटना नहीं, रिकॉर्ड दुरुस्त करना

प्रदेशभर में बूथ स्तर पर लगाए गए SIR शिविरों और निर्वाचन कार्यालयों में इन दिनों बड़ी संख्या में मतदाता दस्तावेजों के साथ पहुंच रहे हैं। कई लोगों में यह भ्रम बना हुआ है कि निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध न होने पर उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य किसी पात्र मतदाता का नाम हटाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के पास निर्धारित 11 दस्तावेजों में से कोई उपलब्ध नहीं है, वे आधार कार्ड, राशन कार्ड अथवा आयुष्मान कार्ड के आधार पर भी अपनी पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करा सकते हैं।

निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं से अपील की है कि नोटिस मिलने पर घबराने के बजाय निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने बूथ लेवल अधिकारी (BLO) अथवा संबंधित निर्वाचन कार्यालय में पहुंचकर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करें।

‘मैप्ड’ और ‘अनमैप्ड’ को लेकर भी दूर किया भ्रम

SIR अभियान के दौरान पहली बार बड़ी संख्या में लोगों के सामने ‘मैप्ड’ और ‘अनमैप्ड’ शब्द आए हैं, जिससे कई मतदाता भ्रमित हैं।

निर्वाचन विभाग के अनुसार ‘मैप्ड’ मतदाता वह है, जिसका रिकॉर्ड सत्यापित होकर संबंधित पते, परिवार अथवा मतदान केंद्र से जोड़ा जा चुका है। वहीं ‘अनमैप्ड’ मतदाता वह है, जिसका रिकॉर्ड अभी पूरी तरह सत्यापित नहीं हो पाया है या तकनीकी अथवा दस्तावेजी कारणों से उसकी मैपिंग शेष है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ‘अनमैप्ड’ होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित मतदाता का नाम स्वतः मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। ऐसे मतदाताओं को केवल आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर अपना सत्यापन पूरा कराना होगा।

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मतदाताओं के लिए निर्वाचन विभाग की सलाह

  • SIR का नोटिस मिलने पर उसे नजरअंदाज न करें।

  • उपलब्ध दस्तावेजों के साथ अपने BLO अथवा SIR शिविर में समय पर पहुंचें।
  • यदि निर्धारित 11 दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं तो आधार कार्ड, राशन कार्ड अथवा आयुष्मान कार्ड भी साथ लेकर जाएं।
  • ‘मैप्ड’ या ‘अनमैप्ड’ स्थिति को लेकर भ्रमित न हों, समय पर सत्यापन कराना ही सबसे महत्वपूर्ण है।

निर्वाचन विभाग का कहना है कि समय पर सत्यापन कराने से मतदाता सूची अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनेगी तथा किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होना पड़ेगा।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अगस्त 2026 (SIR Notice-Deepak Rawat-Sarita-Yashpal)। नैनीताल, उत्तराखंड (Uttarakhand) में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान के दौरान रिकॉर्ड में पाई गई विसंगतियों के आधार पर कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, नैनीताल की भाजपा विधायक सरिता आर्या और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या सहित कई प्रमुख व्यक्तियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल रिकॉर्ड में नाम, पता अथवा अन्य विवरणों में पाई गई तकनीकी त्रुटियों के सत्यापन के लिए की जा रही है। नोटिस जारी होने का अर्थ किसी मतदाता का नाम सूची से हटाया जाना नहीं है। राज्यभर में अब तक लगभग 24 लाख नोटिस जारी किए जा चुके हैं और सुधार प्रक्रिया के लिए सुनवाई भी प्रारंभ हो गई है।

SIR Notice-Deepak Rawat-Sarita-Yashpal नैनीताल:अधिकारी हो या नेता SIR की ज़द में हर कोई! कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत  और विधायक सरिता आर्या के घर भी पहुंचा नोटिस!लिंक में पढ़ें पूरा ...मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम की अध्यक्षता में राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में अभियान की प्रगति का आकलन किया गया। अधिकारियों ने बताया कि अब तक जारी लगभग 24 लाख नोटिसों में से करीब 19 लाख, अर्थात लगभग 77 प्रतिशत नोटिस बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के माध्यम से संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाए जा चुके हैं। निर्वाचन विभाग का उद्देश्य त्रुटिरहित और अद्यतन मतदाता सूची तैयार करना है, ताकि कोई पात्र मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।

प्रमुख व्यक्तियों को भी रिकॉर्ड की त्रुटियों पर मिले नोटिस

भाजपा विधायक सरिता आर्या ने बताया कि वर्ष 2003 में नगर पालिका अध्यक्ष रहते समय मतदाता सूची में उनका पता केवल नैनीताल दर्ज था। बाद में उसमें भूमियाधार जोड़ा गया, लेकिन पुराने रिकॉर्ड के कारण उन्हें और उनके छोटे पुत्र को नोटिस जारी हुआ। उन्होंने आवश्यक दस्तावेज निर्वाचन विभाग को उपलब्ध करा दिए हैं और आम नागरिकों से भी समय रहते रिकॉर्ड में सुधार कराने की अपील की है। उनका कहना है कि यह अभियान सभी मतदाताओं के लिए समान रूप से लागू है।

इसी प्रकार कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत को उनके उपनाम (Surname) से संबंधित रिकॉर्ड में विसंगति के कारण नोटिस जारी हुआ है, जबकि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या को उनके पिता के नाम में उपनाम संबंधी त्रुटि के कारण नोटिस मिला है।

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नाम और पते की त्रुटियों वाले मामलों की शुरू हुई सुनवाई

उपजिलाधिकारी (SDM) नैनीताल नवाजिश खालिक ने बताया कि नोटिस जारी होने के बाद सुनवाई प्रारंभ हो चुकी है। अधिकांश मामलों में नाम, पता अथवा अन्य सामान्य विवरणों की त्रुटियां सामने आई हैं। संबंधित व्यक्तियों से आवश्यक अभिलेख मांगे गए हैं और अनेक मामलों का निस्तारण भी किया जा चुका है। जिन मामलों में तकनीकी विसंगतियां हैं, उन्हें दस्तावेजों के आधार पर ठीक किया जा रहा है।

जिला निर्वाचन अधिकारी ललित मोहन रयाल तथा उप जिला निर्वाचन अधिकारी विवेक राय ने भी नागरिकों से अपील की है कि नोटिस मिलने पर घबराएं नहीं, बल्कि निर्धारित समय में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर प्रक्रिया में सहयोग करें।

नैनीताल जिले में दो लाख से अधिक नोटिस जारी

जिले में आयोजित राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक में बताया गया कि नैनीताल जनपद में कुल 6,93,325 पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें 2,35,085 नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें से 1,51,084 नोटिस संबंधित मतदाताओं तक पहुंच चुके हैं।

निर्वाचन आयोग के तकनीकी विश्लेषण में 1,88,054 संभावित विसंगतियां (Anomaly) तथा 47,031 ‘नो मैपिंग’ (No Mapping) के मामले चिन्हित हुए हैं। इन सभी की नियमानुसार जांच और सुनवाई की जा रही है।

ढाई लाख से अधिक आवेदन प्राप्त

विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान अब तक फॉर्म-6 के माध्यम से 93 हजार से अधिक नए नाम जोड़ने के आवेदन प्राप्त हुए हैं। फॉर्म-7 के जरिए 1.39 लाख से अधिक नाम हटाने अथवा आपत्तियों के आवेदन मिले हैं, जबकि फॉर्म-8 के माध्यम से 40 हजार से अधिक संशोधन संबंधी आवेदन प्राप्त हुए हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि नाम, पता, आयु जैसी सामान्य त्रुटियों वाले मामलों का निस्तारण बूथ लेवल अधिकारी दस्तावेजों के आधार पर स्थानीय स्तर पर ही करें, ताकि नागरिकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। जिन मामलों में मैपिंग नहीं हो पाई है, उनका निर्णय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) स्तर पर सुनवाई के बाद किया जाएगा।

किस कार्य के लिए कौन-सा प्रपत्र

निर्वाचन विभाग के अनुसार—

  • फॉर्म-6 : मतदाता सूची में नया नाम जोड़ने के लिए।
  • फॉर्म-7 : नाम हटाने अथवा किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए।
  • फॉर्म-8 : नाम, पता, आयु अथवा अन्य विवरण में संशोधन या स्थानांतरण के लिए।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि एक मतदाता अधिकतम पांच मामलों में ही दावा या आपत्ति दर्ज कर सकता है। इससे अधिक मामलों की जांच निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी स्वयं करेंगे। वहीं, राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट प्रतिदिन अधिकतम दस प्रपत्र ही जमा कर सकेंगे। यदि किसी क्षेत्र से 30 से अधिक प्रपत्र जमा किए जाते हैं तो उनकी अलग से जांच की जाएगी।

सत्यापन के लिए मान्य दस्तावेज

निर्वाचन आयोग ने सत्यापन के लिए 11 प्रकार के दस्तावेज मान्य किए हैं। इनमें सरकारी अथवा सार्वजनिक उपक्रम कर्मचारी पहचान पत्र या पेंशन आदेश, एक जुलाई 1987 से पूर्व जारी सरकारी प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, हाईस्कूल अथवा अन्य शैक्षिक प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां लागू), परिवार रजिस्टर तथा सरकार द्वारा जारी भूमि अथवा मकान आवंटन पत्र शामिल हैं।

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महत्वपूर्ण तिथियां

विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक निर्धारित है। सुनवाई और निस्तारण 11 सितंबर 2026 तक होगा, जबकि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 15 सितंबर 2026 को किया जाएगा।

निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल नोटिस जारी होने से किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति को अपना पक्ष रखने तथा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाएगा। सुनवाई के बाद ही नियमानुसार अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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