‘हमारा सभासद-हमारा साथी’, आज वार्ड-15 की सभासद पर ‘आज़ाद के तीर’

‘नवीन समाचार’ में हम ‘आजाद के तीर’ स्तंभ में ‘हमारा सभासद-हमारा साथी’ नाम से एक नई श्रृंखला शुरू कर रहे हैं। क्योंकि सभासद ही नगर की जनता का सबसे करीबी जनप्रतिनिधि होता है। इस श्रृंखला में नगर पालिका परिषद, नैनीताल के समस्त सभासदों की जुबानी, उनके द्वारा अपने क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में किए … Read more

नैनीताल : प्रधानाचार्य अमनदीप संधू को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी राहत

-अब सात जनवरी को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सभी पक्षों को सुनते हुए याचिका पर फिर से सुनवाई होने की उम्मीद बनी नवीन समाचार, नैनीताल, 05 जनवरी 2020। सर्वोच्च न्यायालय ने नगर के प्रतिष्ठित विद्यालय के विवाद में प्रधानाचार्य अमनदीप संधू को बड़ी राहत दे दी है। श्री संधू ने सर्वोच्च न्यायालय में विशेष याचिका … Read more

Breaking : ABVP की नगर व कॉलेज कार्यकारिणी की हुई घोषणा..

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 जनवरी 2021। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की नैनीताल इकाई की रविवार को नैनीताल क्लब में हुई बैठक में नगर एवं डीएसबी परिसर इकाई के दायित्वों की घोषणा की गई। डॉ. दीपक कुमार को नगर अध्यक्ष, करन बिष्ट को नगर मंत्री, प्रदीप कुमार व शिवेंद्र कांडपाल को नगर उपाध्यक्ष, रंजना अधिकारी धीरज … Read more

नैनीताल विंटर कार्निवाल पर बड़ा समाचार

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 दिसम्बर 2020। जनपद नैनीताल में आगामी 26 दिसम्बर से 30 दिसम्बर तक आयोजित होने वाला विंटर कार्निवाल स्थगित कर दिया गया है। जानकारी देते हुये नैनीताल महोत्सव समिति के सचिव जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद कुमार गौड़ ने बताया है कि विंटर कार्निवाल 2020 के आयोजन हेतु आयोजन समिति के तकनीकी … Read more

मल्लीताल व्यापार मंडल के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने निकाला विजय जुलूस, पहले ही तय हो गया किस दिन हो जाएंगे कार्यमुक्त..

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 दिसम्बर 2020। मल्लीताल व्यापार मंडल के लिए रविवार को हुए चुनाव के परिणाम देर रात्रि करीब सवा 11 बजे घोषित किए गए। घोषित परिणामों के अनुसार अध्यक्ष पद पर निवर्तमान एवं पिछले दो दशक से इस पद पर बरकरार किसन नेगी, महामंत्री पद पर चौंकाते हुए त्रिभुवन फर्त्याल, महिला उपाध्यक्ष के … Read more

बिना खर्च किये-किए गए नये प्रयोगों के लिए केंद्रीय मंत्री ने ठोंकी डा. सती की पीठ

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 दिसम्बर 2020। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डा. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कुमाऊं मंडल के अपर शिक्षा निदेशक डा. मुकुल सती को पत्र लिखकर उनके द्वारा श्री अरविंद सोसायटी व एचडीएफसी बैंक के देशव्यापी कार्यक्रम ‘शिक्षा में शून्य निवेश नवाचार’ यानी बिना कोई धनराशि खर्च किये, किए गए नये प्रयोगों के लिए प्रशंसा … Read more

प्रतिष्ठित विद्यालय के विवाद में लखनऊ डायेसिस भी कूदी, दूसरे प्रतिष्ठित विद्यालय पर भी उठाए सवाल

नवीन समाचार, नैनीताल, 16 दिसम्बर 2020। नगर के प्रतिष्ठित विद्यालय के विवाद में अब लखनऊ डायेसिस भी कूद गई है। लखनऊ डायेसिस ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में इंटरवेंशन यायिका दाखिल कर उनका पक्ष भी सुने जाने का अनुरोध किया है। साथ ही पत्रकार वार्ता में इस प्रतिष्ठित विद्यालय के साथ ही आगरा डायेसिस एवं उसके … Read more

नैनीताल-हल्द्वानी के युवाओं ने हल्द्वानी में खोला विज्ञापन-मार्केटिंग का संपूर्ण समाधान

नवीन समाचार, नैनीताल, 16 दिसम्बर 2020। हल्द्वानी में गैस गोदाम चौराहा पर आधुनिकतम फ्लेक्स प्रिंटिंग मशीन, लेजर कटिंग मशीन व डिजिटल प्रिंटिंग मशीन युक्त हर तरह के फ्लेक्सी विज्ञापन एवं मार्केटिंग की सुविधाओं युक्त संस्थान अनुपम सलूशन-एलएलपी खुल गया है। बुधवार को प्रदेश के काबीना मंत्री यशपाल आर्य, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने नैनीताल … Read more

देश के लिए जान लुटाने वाले सेनानियों के आश्रितों को मात्र 4 हजार की कुटुंब पेंशन हास्यास्पद

-अपनी समस्याओं को लेकर मंडलायुक्त से मिले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित

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मंडलायुक्त को ज्ञापन सोंपते अखिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी समिति संगठन के सदस्य।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 9 दिसंबर 2021। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों का एक शिष्टमंडल बृहस्पतिवार को अखिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी समिति संगठन के बैनर तले कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत से मिला। सदस्यों ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों को वर्ष 2018 से उत्तराखंड सरकार के द्वारा चार हजार रुपए की कुटुंब पेंशन दिए जाने का प्राविधान किया गया है।

हास्यास्पद है कि यह पेंशन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सभी आश्रितों में बंटनी है। यानी यदि किसी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के 4 आश्रित हों तो सबको 1-1 हजार रुपए या 8 आश्रित होने पर 500-500 रुपए पेंशन मिलेगी। इसके बावजूद कई शर्ताें के कारण यह पेंशन भी पात्रों को नहीं मिल पा रही है।

इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के प्रथम पीढ़ी के आश्रितों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की भांति सुविधाएं एवं द्वितीय पीढ़ी के आश्रितों को भी प्रथम पीढ़ी के आश्रितों की भांति सुविधाएं देने, पूर्व में हो चुकी घोषणा के अनुरूप कुटुंब पेंशन की धनराशि 4 हजार को बढ़ाकर 10 हजार करने का शासनादेश जारी करने, बस के साथ रेलयात्रा की सुविधा भी देने, शिक्षा व नौकरी में 3 की जगह 5 फीसद आरक्षण दने, उत्तराधिकारी की बेटी की बेटियों को भी भी विवाह हेतु 50 हजार रुपए की धनराशि अनुदान स्वरूप देने तथा भूमिहीन उत्तराधिकारियों को शासनादेश के अनुरूप 100 वर्ग मीटर भूमि निःशुल्क आवंटित करने की मागें भी उठाई गई।

शिष्टमंडल में संगठन की संयोजक अनुपम उपाध्याय, जिलाध्यक्ष उमेश जोशी, महिला अध्यक्ष डॉ. सरिता कैड़ा, महिला उपाध्यक्ष बीना उप्रेती, पवन बिष्ट, आनंद जोशी व आकांक्षा उप्रेती आदि शामिल रहे।

2017-18 की इंटर उत्तीर्ण बालिकाओं को सिर्फ 5000 कन्याधन, अन्य को 51 हजार
नैनीताल। वार्ता के दौरान समस्या रखे जाने पर मंडलायुक्त दीपक रावत ने जिला कार्यक्रम अधिकारी वे वार्ता कर स्पष्ट किया कि 2017 व 2018 में इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने वाली बालिकाओं को केवल 5000 रुपए ही नंदा गौरा कन्याधन योजना के तहत मिलेगा, जबकि इससे पूर्व व बाद के वर्षों की बालिकाओं को 51 हजार रुपए कन्याधन दिया जा रहा है। माना गया कि यह इन बालिकाओं के साथ अन्याय जैसा है।

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-सोते हुए घर से गिरफ्तार किये गये, यातनाएं झेलीं, फिर भी अपनी सरकार ने भी नहीं दिया सम्मान-मान्यता
नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 25 जून 2020। 25 जून 1975 की मध्य रात्रि से 21 मार्च 1977 के बीच लगे आपातकाल के भारतीय लोकतंत्र के सर्वाधिक काले इतिहास दौर की भेंट चढ़ने वालों के जख्म हर वर्ष 25 जून को हरे हो जाते हैं। सरोवरनगरी के भी दो ऐसे वयोवृद्ध लोग हैं, जिन्होंने लोकतंत्र की हत्या होते न केवल अपनी आंखों से देखा, वरन इसके भुक्तभोगी भी बने। पुलिस द्वारा रात्रि में सोते हुए पकड़े गए। दो रात हवालात में रखकर पीटे गए। जेल जाने पर जमानत के लिए आवेदन किया तो न्यायालयों में भी व्याप्त हो चला भ्रष्टाचार झेला। किसी तरह जमानत मिली तो जमानती भी इसलिए नहीं मिले कि संबंध होने के आरोप में कहीं पुलिस उन्हें भी गिरफ्तार न कर ले। इसी कारण ना ही गिरफ्तार होने पर घर वालों की और ना ही जेल से छूटने के बाद उनकी कुशल क्षेम पूछने ही कोई परिचित-पड़ोसी आया। इसी कारण लंबे समय तक लोग उनकी दुकान पर भी नहीं आते थे। इतनी परेशानियां झेलीं तो स्वप्न देखते थे कि कभी अपनी सरकार भी आएगी। अपनी सरकार आई और है भी, लेकिन उसने भी ठुकरा दिया। कभी ताम्रपत्र देने की बात हुई। कभी लोकतंत्र सेनानी घोषित करने का ख्वाब दिखाया। लेकिन नतीजा सिफर। फलस्वरूप लोकतंत्र के ये सेनानी आज भी उन स्थितियों से उबर नहीं पा रहे हैं। अपनी ही सरकार में भी हताश-निराश हैं।

यह कहानी मुख्यालय निवासी भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष रहे भुवन चंद्र हरबोला एवं आरएसएस के कामेश्वर प्रसाद काला की है। हरबोला को 16 नवंबर 1975 को किराये के घर में सोते हुए हल्की पूछताछ के नाम पर मल्लीताल कोतवाली के गब्बर सिंह कहे जाने वाले तत्कालीन थाना प्रभारी ने की थी। उन्हें एक रात मल्लीताल और एक रात तल्लीताल थाने में रखा गया और 18 नवंबर को हल्द्वानी जेल भेजा गया, जबकि काला 1 दिसंबर को हल्द्वानी में सरकार विरोधी एक रैली के दौरान गिरफ्तार हुए। दोनों संघ के स्वयं सेवक थे। इसलिए सरकार उनके पीछे लगी थी। संघ के बड़े अधिकारियों ने उन्हें जल्दी जमानत ले लेने की सलाह दी, ताकि वे संघ की शाखाएं लगाने जैसी अपनी गतिविधियों को जारी रख सकें। इसलिए दोनों करीब एक सप्ताह जेल में रहकर जमानत पर बाहर आ गये। लेकिन न्यायालय में मुकदमा 21 मार्च 1977 को जनता पार्टी की सरकार आने तक चलता रहा। 1977 के चुनाव में देश के साथ नैनीताल लोक सभा में भी इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी को भारतीय लोकदल के  एक गुमनाम से चेहरे भारत भूषण ने पटखनी दे दी थी। श्री काला बताते हैं, जेल से आने पर भी कोई उनके घर की सीढ़ियां चढ़ने को तैयार नहीं था, क्योंकि लोग डरते थे कि उन्हें भी पकड़ लिया जाएगा। वहीं हरबोला बताते हैं जेल से छूटने के बाद भी पुलिस-प्रशासन उन्हें फिर से किसी तरह अंदर करने की जुगत में था। इसलिए वे एक दिन अपने भाई के साथ नैनीताल की बिड़ला चुंगी से होते हुए पैदल जंगल के रास्ते रातीघाट होते हुए जनपद से बाहर निकल गये थे। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान जेल में गये गिने-चुने लोग ही बचे हैं, फिर भी सरकार की मंशा उन्हें किसी तरह की मान्यता-सम्मान देने की नहीं है। इससे वे निराश और हताश हैं।

उत्तराखंड सरकार की योजना का लाभ नहीं मिला

नैनीताल। विगत वर्षों में उत्तराखंड सरकार ने आपातकाल के दौरान डीआईआर यानी ‘डिफेंस इंडिया रूल्स’ से इतर मीसायानी ‘मेन्टीनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट’ में जेल गये ‘लोकतंत्र सेनानियों’ को प्रतिमाह 16 हजार रुपये की पेंशन देने की घोषणा की थी। इस पर नैनीताल जनपद में ऐसे लोगों की पड़ताल की गयी, तो तत्कालीन संयुक्त नैनीताल जिले के कुल 10 लोगों की पहचान हुई, जिनमें से पांच लोग वर्तमान में भी नैनीताल जिले और शेष पांच अब ऊधमसिंह नगर के हिस्से के निवासी मिले। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार नैनीताल जिले के मौजूदा निवासी बताये गये पांच में से तीन लोगों की मृत्यु हो चुकी थी, जबकि शेष दो अपने पतों पर मिल नहीं पाये। अलबत्ता जिला प्रशासन के प्रयासों से अन्य जिलों से भी नैनीताल जनपद व खासकर हल्द्वानी में आ बसे कुल 9 लोगों ने आवेदन किये। इनमें हरबोला और काला भी शामिल रहे, लेकिन निर्धारित से कम अवधि जेल में रहने के कारण उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला।

कोश्यारी, त्रिपाठी, शर्मा सहित उत्तराखंड के 325 सेनानी गये आपातकाल में जेल

नैनीताल। आपातकाल में उत्तराखंड के 325 लोगों को डीआईआर यानी ‘डिफेंस इंडिया रूल्स’ एवं मीसा यानी ‘मेन्टीनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट’ के जेलों में ठूंसा गया। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री व मौजूदा महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व विधायक अधिवक्ता गोविंद सिंह, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पूरन चंद्र शर्मा, उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापक सदस्य व विधायक विपिन चंद्र त्रिपाठी जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल रहे।

सर्वाधिक 116 सेनानी ठूंसे गये हल्द्वानी जेल में

नैनीताल। आपातकाल के दौरान उत्तराखंड के जिन 325 लोगों को जेलों में ठूंसा गया, उनमें से सर्वाधिक 116 को नैनीताल जिले के हल्द्वानी उप कारागार में, 81 को नैनीताल जिला कारागार में, 52 को देहरादून की जेल में, 39 को अल्मोड़ा जिला जेल में, 29 को रुड़की जेल में और चार को टिहरी जेल में डाला गया था।

यह भी पढ़ें : आपातकाल के लोकतंत्र सेनानीः उम्र के आखिरी दौर में 7 को मिला लाभ, 4 के मामले लंबित

-नैनीताल जनपद से पहले 9 लोगों ने किया था आवेदन, इनमें से 7 को 1 वर्ष की पेंशन जारी, 2 के मामले में फिर से मांगी गयी है जांच रिपोर्ट, 2 नये आवेदन भी आये
नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड सरकार ने 1975-77 के दौर में लगे आपातकाल के दौर में जेलों में ठूंस दिये गये ‘लोकतंत्र सेनानियों’ की सुध लेने में देर से ही सही लेकिन पहल कर दी है। कमोबेश बिना कारण झेली गयी उन भयावह यातनाओं को चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद ‘लोकतंत्र सेनानियों’ को प्रतिमाह 16 हजार रुपये की पेंशन देने की घोषणा हुई है, जिसके बाद जनपद में जीवित बचे 10 में से 9 लोकतंत्र सेनानियों ने यह दर्जा व पेंशन हासिल करने के लिए आवेदन किया था। अलबत्ता, नैनीताल के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष भुवन चंद्र हरबोला एवं वयोवृद्ध आरएसएस नेता कामेश्वर प्रसाद काला को छोड़कर शेष 7 लोगों को बीते माह पेंशन स्वीकृत होने के साथ ही 1 वर्ष की एकमुश्त जारी हो गयी है। वहीं इधर 2 नए लोगों ने भी बीते माह आवेदन कर दिये हैं। नैनीताल मुख्यालय निवासी इन दो लोकतंत्र सेनानियों के बारे में शासन ने फिर से जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन से मांगी है।

उल्लेखनीय है कि 25 जून 1975 की मध्य रात्रि से 21 मार्च 1977 के बीच देश में लगे आपातकाल के दौर में देश भर के साथ उत्तराखंड राज्य के लोगों को भी तत्कालीन इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के आंखों में वैचारिक तौर पर खटकने भर से जेलों में ठूंस दिया गया था। इधर इस वर्ष राज्य सरकार ने आपातकाल के दौरान डीआईआर यानी ‘डिफेंस इंडिया रूल्स’ से इतर मीसायानी ‘मेन्टीनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट’ में जेल गये ‘लोकतंत्र सेनानियों’ को प्रतिमाह 16 हजार रुपये की पेंशन देने की घोषणा की थी। इस पर नैनीताल जनपद में ऐसे लोगों की पड़ताल की गयी, तो तत्कालीन संयुक्त नैनीताल जिले के कुल 10 लोगों की पहचान हुई, जिनमें से पांच लोग वर्तमान में भी नैनीताल जिले और शेष पांच अब ऊधम सिंह नगर के हिस्से के निवासी हैं। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार नैनीताल जिले के मौजूदा निवासी बताये गये पांच में से तीन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि शेष दो अपने पतों पर मिल नहीं पाये। अलबत्ता जिला प्रशासन के प्रयासों से अन्य जिलों से भी नैनीताल जनपद व खासकर हल्द्वानी में आ बसे कुल 9 लोगों ने आवेदन किये हैं।

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चिंताजनक: हिमालय की छटा इस वर्ष मनमोहक नहीं

नवीन समाचार, नैनीताल, 08 दिसम्बर 2020। नगर के हिमालय दर्शन प्वाइंट सहित किलबरी रोड एवं नैना पीक चोटी, स्नो व्यू व टिफिन टॉप आदि से गढ़वाल मंडल की पोरबंदी, केदारनाथ, कर्छकुंड से लेकर चौखंभा, नीलकंठ, कामेत, गौरी पर्वत, हाथी पर्वत, नंदाघुंटी, त्रिशूल, मैकतोली (त्रिशूल ईस्ट), प्रख्यात पिंडारी व सुंदरढूंगा ग्लेशियर, नंदा देवी, नंदाकोट, राजरम्भा, लास्पाधूरा, … Read more

पढ़ें 1 अक्टूबर 2021 के ‘राष्ट्रीय सहारा’ का कुमाऊं संस्करण

आज के ‘राष्ट्रीय सहारा’ के ‘कुमाऊं संस्करण’ में पूरे उत्तराखंड एवं देश-दुनिया के चुनिंदा बड़े समाचार बिल्कुल छपे हुए अखबार की तरह पीडीएफ फॉरमेट में, बड़ा करके पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें👉RS DDN KUM-01.10.2021 देखें पिछले अंक : 30 सितंबर का राष्ट्रीय सहारा⇒RS DDN KUM-30.09.2021 29 सितंबर का राष्ट्रीय सहारा⇒RS DDN KUM 29.09.2021 28 सितंबर … Read more

आ गये उत्तराखंड सरकार के सामाजिक, धार्मिक, खेल, मनोरंजन, शैक्षिक, सांस्कृतिक, मनोरंजन गतिविधियों व स्विमिंग पूल के लिए नए दिशा-निर्देश

नवीन समाचार, देहरादून, 29 नवंबर 2020। उत्तराखंड सरकार ने रविवार को कोरोना से बचाव के लिए वह नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जिनका इंतजार किया जा रहा था। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार सबसे बड़ी बात, सामाजिक, धार्मिक, खेल, मनोरंजन, शैक्षिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम जिस कमरे या हॉल में होंगे, उसकी क्षमता के 50 फीसद या … Read more

उत्तराखंड में फिर ‘बलूनी है तो मुमकिन है!’: राज्य को मिल सकता है टाटा से बड़ा तोहफा..

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 28 नवम्बर 2020। उत्तराखंड को जल्द ही कैंसर इंस्टीट्यूट के रूप में एक बड़ी सौगात मिल सकती है।  भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने इसके लिए पहल की है।

उल्लेखनीय है कि बलूनी पिछले दिनों कैंसर से ग्रस्त हो गए थे। इस दौरान मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट मैं उनका उपचार हुआ था। बताया जा रहा है कि इस दौरान ही उनके मन में विचार आया था कि उत्तराखंड के आम लोगों के लिए भी इस तरह की सुविधा होनी चाहिए तभी उन्होंने टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा से इस इंस्टीट्यूट की शाखा उत्तराखंड में खोलने की बात कही, जिस पर ही उन्हें रतनजी टाटा की ओर से खत लिख कर भरोसा दिलाया गया है। अनिल बलूनी ने इसकी जानकारी अपने फेसबुक पेज पर भी दी है।

जानकारी के मुताबिक टाटा ग्रुप ने इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है और सब कुछ ठीक रहा तो जल्द कैंसर इंस्टीट्यूट का तोहफा राज्य को मिल सकता है।

यह भी पढ़ें : अब नैनीताल-मसूरी वालों का दिल जीतने की राह पर बलूनी

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नवीन समाचार, नैनीताल, 8 मार्च 2019। राज्य सभा सांसद बनने के बाद छोटी सी अवधि में ही पूरे राज्यवासियों के दिलों पर छा गये और वास्तव में ‘सांसद’ पद की उपयोगिता साबित करने वाले अनिल बलूनी अब प्रदेश की दो पर्वतीय पर्यटन नगरों-नैनीताल व मसूरी वासियों का दिल जीतने की राह पर नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को बलूनी ने अपने फेसबुक खाते के जरिये सूचना दी है ‘मसूरी की पेयजल योजना स्वीकृत और नैनीताल की 333 करोड़ की योजना पर कार्य जारी, माननीय प्रधानमंत्री जी का शत-शत अभिनंदन!!’ साथ ही एक अन्य पोस्ट में लिखा है कि उन्होंने 25 दिसंबर को बताया था कि मसूरी व नैनीताल की पेयजल समस्या के लिए प्रयासरत हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए अवगत करा रहे हैं कि प्रधानमंत्री की विशेष निधि से मसूरी के पेयजल संकट के समाधान के लिए 187 करोड़ की योजना स्वीकृत करते हुए इस वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ रुपये जारी भी कर दिये गये हैं। मोदी हैं तो मुमकिन है।

यह भी पढ़ें : अब उत्तराखंड को दुनिया के सामने पेश करने को प्रसून जोशी से मिले बलूनी, ले लिया एक वादा..

Anil Baluni Prasoon Joshiनवीन समाचार, नैनीताल, 3 मार्च 2019 । राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी लगातार उत्तराखंड के उत्थान  के लिए नई पहल  करते  जा रहे हैं  इसी कड़ी में  बलूनी ने प्रसिद्ध गीतकार, लेखक और भारतीय सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी से भेंट की है। अनिल बलूनी ने प्रसून जोशी से अनुरोध किया कि वे उत्तराखंड में पर्यटन के विकास हेतु एक ऐसा प्रेरक गीत लिखें कि पर्यटन और तीर्थाटन हेतु देश-विदेश के सैलानी और श्रद्धालु उत्तराखंड आयें। इससे जनता उत्तराखंड को देखेगी और उत्तराखंड से पलायन रुकेगा। अनिल बलूनी ने कहा, हमें गर्व है कि देवभूमि के बेटे प्रसून जोशी ने अपनी कलम से उत्तराखण्ड का नाम रोशन किया है।  माना जा रहा है कि प्रसून जोशी ने बलूनी केेेे अनुरोध पर उत्तराखंड के लिए एक सुंदर गीत लिखने का मन बना लिया है।

 यह भी पढ़ें : बलूनी ने फिर की ऐसी पहल कि तारीफ करने को मजबूर हो जाएंगे विरोधी भी

-बलूनी ने कहा-उद्घाटन का इंतजार न करें, जनता के लिए शुरू करें नई योजनाएंं, इसे कहां जा रहा है बदलती राजनीति का संकेत

-बलूनी की सांसद निधि से लगभग पूर्ण हो चुके कोटद्वार व उत्तरकाशी आईसीयू एवं वेंटिलेटर सेंटर

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 फरवरी 2019 ।राज्यसभा सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने अपनी सांसद निधि से लगभग पूर्ण हो चुके कोटद्वार और उत्तरकाशी आईसीयू एवं वेंटीलेटर सेंटरों के उद्घाटन का इंतजार किए बगैर शुरू कर देने को कहा है।अनिल बलूनी ने कोटद्वार और उत्तरकाशी आईसीयू एवं वेंटीलेटर सेंटरों के बाबत में प्रदेश के स्वास्य सचिव को पत्र भेजकर कहा है कि आईसीयू सेंटर का निर्माण कार्य पूर्ण होते ही उद्घाटन की औपचारिकता की प्रतीक्षा करने के बजाय तत्काल उसे जनता की सेवा में समर्पित कर दिया जाए।सांसद बलूनी ने कहा की जनता के धन से जनता के लिए तैयार की गई सुविधा तत्काल जनता की सेवा में समर्पित हो जानी चाहिए। हमें शिलान्यास, उद्घाटन आदि की औपचारिकताओं से ऊपर उठ कर व्यावहारिक होने की आवश्यकता है। समय के साथ हमें अपनी कार्यसंस्तुतियों में बदलाव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आईसीयू का निर्माण पूर्ण होते ही उसे तत्काल जनता की सेवा में प्रारंभ कर देना चाहिए। ऐसा न हो कि उद्घाटन की औपचारिकताओं के कारण तैयार आईसीयू होते हुए भी कोई महत्वपूर्ण जीवन संकट में पड़ जाए क्योंकि तैयार होते ही यह जनता की स्वत: संपत्ति है। सांसद बलूनी ने कहा कि संतोषजनक समय में आईसीयू सेंटर का निर्माण पूर्ण हुआ है। इनका कुशल संचालन हो और अपेक्षित मेडिकल स्टाफ की तैनाती कर जनता को सुविधा देना हमारी प्राथमिकता है़ दुर्गम क्षेत्रों में आईसीयू सेंटर गंभीर रोगियों के लिए वरदान साबित होंगे।

यह भी पढ़ें : अब हल्द्वानी ऋषिकेश में इस पहल के लिए अनिल बलूनी को तारीफें मिलनी तय

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 फरवरी 2019 । राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी एम्स ऋषिकेश और सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी के नजदीक सांसद निधि व अन्य संस्थाओं के सहयोग से आरोग्य सदनों का निर्माण कराएंगे। गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में बनने वाले इन आरोग्य सदनों से पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले गरीब रोगियों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी।

बलूनी ने मंगलवार को इस संबंध में देहरादून और नैनीताल के जिलाधिकारियों व ऋषिकेश और हल्द्वानी के मेयरों से चर्चा कर आरोग्य सदनों के लिए शीघ्र भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। बलूनी ने कहा कि सुदूर क्षेत्रों से आने वाले रोगियों एवं उनके परिजनों को उपचार के अलावा भोजन, परिवहन और प्रवास में काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। अस्पताल के निकट बनने वाले आरोग्य सदन उनका परिवहन एवं प्रवास खर्चा बचाएंगे। साथ ही उन्हें कम लागत पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए कैंटीन का भी निर्माण कराया जाएगा। बलूनी ने कहा कि प्रथम चरण में इन सदनों में 100 से अधिक व्यक्तियों के रुकने के लिए कक्षों के साथ-साथ दो डोरमेट्री हॉल (पुरुष-महिला) और कैंटीन का निर्माण कराया जाएगा।

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बलूनी ने मांगा उत्तराखण्ड के लिये सम्पूर्ण स्वास्थ्य कवच
नैनीताल, 24 नवंबर 2018। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और राज्यसभा सांसद  अनिल बलूनी ने उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं के संपूर्ण समाधान के लिए एक विस्तृत फार्मूला प्रस्तुत किया है। हाल ही में अपनी हल्द्वानी में हुई पत्रकार वार्ता में बलूनी ने कहा था कि वह उत्तराखंड की स्वास्थ्य समस्याओं के बड़े समाधान के विषय में होमवर्क कर रहे हैं ताकि राज्य की जनता को प्रदेश में ही उपचार सुलभ हो सके और नागरिकों को उपचार के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े। इस सम्बन्ध में उन्होने आज एक पत्र प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को लिखा है व शीघ्र ही  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी से भेंट करेंगे और  स्वास्थ्य मंत्री  जे पी नड्डा जी से इस विषय में चर्चा करेंगे।
उन्होंने इस विषय पर विस्तृत अध्ययन करके एक ब्लूप्रिंट पत्र के माध्यम से  प्रधानमंत्री जी के समक्ष प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा उन्हें उम्मीद है कि आगामी दिनों में उनके प्रस्ताव पर प्रदेशवासियों को सुखद समाचार प्राप्त होगा। बलूनी ने कहा कि प्रधानमंत्री  का उत्तराखंड से भावात्मक संबंध है, वे देश के ऐसे पहले यशस्वी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने सर्वाधिक बार उत्तराखंड की यात्राएं की हैं और उत्तराखंड की सम्पूर्ण समस्याओं से अवगत हैं। “अटल जी ने बनाया है, मोदी जी संवारेंगे” के मन्त्र के साथ भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड के विकास के लिए अनवरत सेवारत है।
श्री बलूनी ने कहा अटल जी द्वारा प्रदान ऋषिकेश एम्स अब प्रभावी रूप से सेवाएं देने लगा है, किंतु उत्तराखंड राज्य की जनता को संपूर्ण उपचार देने हेतु पर्याप्त नहीं है। श्री बलूनी ने प्रधानमंत्री जी को संबोधित पत्र में कहा है कि ऋषिकेश एम्स का एक अतिरिक्त परिसर कुमाऊं मंडल के हल्द्वानी में स्थापित किया जाए। इसके साथ ही श्रीनगर गढ़वाल और अल्मोड़ा में एक-एक मेडिकल पीजीआई की स्थापना की जाए। इन चार संस्थानों की स्थापना के बाद उत्तराखंड की जनता को उच्च कोटि का उपचार प्राप्त होगा और राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि में एक ऐतिहासिक कदम होगा और राज्य के लिए वरदान साबित होगा।
सांसद बलूनी ने उम्मीद जताई कि माननीय प्रधानमंत्री जी जिनका उत्तराखंड के प्रति विशेष स्नेह है, वह राज्य की जनता को निःसन्देह यह सौगात देंगे। उत्तराखंड अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगा हुआ सामरिक प्रांत है। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने हेतु सरकार कृत संकल्प है, किंतु इसके संपूर्ण समाधान के लिए बड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।

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नवीन जोशी, नैनीताल, 22 सितंबर 2018। भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी ने फिर एक अभूतपूर्व फैसला लेते हुए उत्तराखंड राज्य के एक गैर-आबाद निर्जन ‘घोस्ट विलेज’ यानी भुतहा गांव कहे जा रहे पौड़ी जिले के दुगड्डा ब्लॉक के दूरस्थ गांव बौर को गोद लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस गांव को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लिया गया है, इसके बाद अन्य ऐसे गैर-आबाद गांवों को भी इसी मॉडल पर आबाद करने के प्रयास किये जायेंगे। इस गाँव को पुनर्जीवित करने के लिए मूलभूत सुविधाओं बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार से जोड़ा जाएगा ताकि यह गांव पुनर्जीवित होकर अपने पूर्व के स्वरूप में आबाद हो सके। इस संबंध में शीघ्र ही इस गांव के प्रवासियों के साथ बैठक की जायेगी।

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तीन करोड़ प्रवासी उत्तराखंडियों की ‘घर वापसी’ कराएगा आरएसएस !

उनकी इस ‘रिवर्स माइग्रेशन’ की पहल पर विपक्ष की ओर से पूर्व सीएम हरीश रावत की ओर से प्रतिक्रिया काफी कुछ कहने वाली है। हरीश रावत ने भाजपा नेताओं को सलाह दी है कि वह बलूनी की पहलों से घबरायंे नहीं वरन प्रतिस्पर्धा करें। इससे साफ होता है कि अपनी पहलों से बलूनी विपक्ष के बड़े नेताओं का भी ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करने में सफल रहे हैं। वहीं यह भी दिखाई दे रहा है उनकी पार्टी-भाजपा के लोग अभी भी उन्हें अधिक महत्व देने से बच रहे हैं। पिछले दिनों उनकी पहल पर नैनी-दून जन शताब्दी एक्सप्रेस रेलगाड़ी चलाने पर राज्य के उनकी पार्टी के नेताओं में रही श्रेय लेने की होड़ पर स्वयं केंद्रीय रेलमंत्री पीयूष गोयल को सफाई देनी पड़ी थी।
बलूनी की गैर-आबाद ग्रामों के पुनर्जीवन की कार्ययोजना के तहत वे उत्तराखण्ड के प्रवासी परिवारों-संगठनों के बीच जाकर संवाद करेंगे। उत्तराखंड के लाखों प्रवासी जो कि दिल्ली, लखनऊ, बरेली, मेरठ, गाजियाबाद, चंडीगढ़, भोपाल, इंदौर, जयपुर, मुंबई आदि शहरों में जाकर बस गए हैं, उन सबसे चर्चा कर गांव के पुनर्जीवन हेतु अनुरोध किया जाएगा और उनकी मांगों के निराकरण हेतु प्रयास किया जाएगा। साथ ही प्रवासियों से संवाद अभियान के माध्यम से उत्तराखंड के कौथीग (मेले), ऋतुपर्व और पारंपरिक आयोजनों को पुनः पुनर्जीवित करने के लिए संपर्क किये जायेंगे। उल्लेखनीय है कि इस तरह की मुहिम की घोषणा पूर्व में आरएसएस के द्वारा भी की गयी थी, जिसमें प्रवासी उत्तराखंडियों से वर्ष में एक बार अपने गांव आने का आह्वान करने की बात कही गयी थी। लेकिन योजना कहीं धरातल पर उतरी हो, इसकी जानकारी नहीं है।
उल्लेखनीय है कि बलूनी इससे पूर्व पौड़ी जिले के धूमाकोट-नैनीडांडा में बीती 4 जुलाई 2018 को हुई 48 यात्रियों की जान लेने वाली भीषण बस दुर्घटना के बाद अपने छह वर्ष के कार्यकाल में हर वर्ष 2-3 कर उत्तराखंड के हर जिले में 18 आईसीयू बनाने की घोषणा करके भी सुर्खियों में रहे थे। इसके अलावा वे राज्य में सेना के अस्पतालों में स्थानीय लोगों को भी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और राज्य में केंद्रीय संस्थान स्थापित करने की पहलों के साथ भी लगातार अपना सियासी कद बढ़ाते नजर आ रहे हैं। यह भी विदित हो कि 2017 में उत्तराखंड के विस चुनावों के बाद उनका नाम भी राज्य के मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमुखता से सियासी हलकों में चला था, लेकिन तब तक जनता से सीधे तौर पर न जुड़े होने की कमी उनकी राह में आढ़े आ गयी थी। लेकिन राज्य सभा सदस्य के तौर पर निर्वाचित होने के बाद से वे लगातार जनता के दिलों पर छाते जा रहे हैं। यह कहना भी गलत न होगा कि पूर्व रास सांसद तरुण विजय के बाद वे एक रास सांसद की क्षमताओं का जनता को अहसास कराने में सफल रहे हैं। ऐसे में वे भविष्य में राज्य के मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में गिने जाएं और मुख्यमंत्री बन जाएं तो आश्चर्य न होगा।

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    • खुशखबरी : सेना के डॉक्टर सूबे में आम लोगों का इलाज भी करेंगे 
    • केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी सैद्धांतिक सहमति 
  • सांसद अनिल बलूनी के अनुरोध पर मिली प्रदेश को Anil Baluniसौगात 

देहरादून, 15 सितंबर 2018 । डॉक्टरों की कमी की समस्या झेल रहे उत्तराखंड के लिए खुशखबरी है। प्रदेश के छावनी क्षेत्रों में तैनात सेना के डॉक्टर अब आम लोगों का इलाज भी करेंगे। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने उत्तराखंड की जनता के लिए स्वास्य के क्षेत्र में बड़ी सौगात दी है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 25 अगस्त 2018 को नैनी-दून जनशताब्दी एक्सप्रेस का तोहफा भी दिलाया था। इसके अलावा वे हाल में संसद में उत्तराखंड के लिए विशेष राहत पैकेज और एनडीआरएफ की स्थाई यूनिट स्थापित करने की मांग भी उठा चुके हैं।

शनिवार को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक में उन्होंने उत्तराखंड के सामान्य नागरिकों को भी सेना के चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार देने के लिए अनुरोध किया, जिस पर रक्षा मंत्री ने सैद्धांतिक सहमति दी है। यह फैसला पर्वतीय जनता की स्वास्य सेवा के क्षेत्र में मील का पत्थर होगा। सांसद बलूनी की रक्षा मंत्री के साथ उनके साउथ ब्लॉक स्थित कार्यालय में भेंट हुई। बैठक में उत्तराखंड के उन सैन्य क्षेत्रों (छावनियों) में, जहां सेना के चिकित्सक उपलब्ध हैं, उनके द्वारा राज्य के सामान्य नागरिकों को भी चिकित्सकीय सहायता मिले, इस विषय पर रक्षा मंत्री से भेंट की तथा दुर्गम क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्य की सुविा प्रदान करने पर र्चचा हुई। सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि रक्षा मंत्री ने राज्य के पलायन की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वह स्वयं उत्तराखंड की परिस्थितियों से अवगत हैं और स्वास्य, शिक्षा तथा रोजगार के लिए निरंतर राज्य से पलायन के कारण चिंतित हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमांतवासियों के लिए स्वास्य की सुविधा प्राथमिक रूप से मिलनी चाहिए। इसके कार्यान्वयन के लिए सेना के संबंधित कमान से र्चचा करेंगी। सांसद बलूनी ने कहा कि सेना के देहरादून, रुड़की, लैंसडाउन, हर्षिल, रुद्रप्रयाग, जोशीमठ, रानीखेत, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ व धारचूला में सैन्य क्षमता के आधार पर मिलिट्री हॉस्पिटल, फील्ड हॉस्पिटल, सेक्शन हस्पिटल और जनरल हॉस्पिटल कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त जिला स्तर पर आईसीएचएस क्लीनिक कार्य कर रही हैं। रक्षा मंत्री जी से अनुरोध किया गया कि केवल प्राथमिक उपचार, औषाि और मरहम पट्टी स्तर की क्लीनिक जो आम नागरिकों के लिए कुछ घंटे दैनिक रूप से सेवा दें ताकि नागरिकों को स्वास्य के क्षेत्र में बड़ी राहत मिल सके।

अर्धसैनिक बलों के डॉक्टरों को लेकर आज केंद्रीय गृहमंत्री से मिलेंगे बलूनी

देहरादून। अर्धसैनिक बलों के चिकित्सकों से भी प्रदेश की आम जनता का इलाज मिल सके इस बाबत राज्य सभा अनिल बलूनी का रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भेंट का समय तय हुआ है। सांसद बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड प्रदेश में सेना के साथ-साथ आईटीबीपी, एसएसबी और सीआरपीएफ की बटालियनें भी हैं, इस संबंध में वह रविवाव को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलेंगे और गृहमंत्री से अपील करेंगे कि वह अर्धसैन्य बलों के चिकित्सकों के माध्यम से भी स्थानीय नागरिकों को मेडिकल सुविधा देने की कृपा करें।

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