आज का दिन बहुत खास, माता लक्ष्मी का अवतरण दिवस, अक्षय तृतीया व परशुराम जयंती

Akshyay Tritiya Parashuram jayanti

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 10 मई 2023। (Akshyay Tritiya-Parashuram Jayanti ko kya karen) आज शुक्रवार का दिन बहुत खास है। आज माता लक्ष्मी के अवतरण दिवस के रूप में मनाई जाने वाली अक्षय तृतीया है। साथ ही भगवान विष्णु के अवतार भगवान परशुराम की जयंती है। आइए जानते हैं, आज के दिन … Read more

नैनीताल जनपद के ग्राम कुमाटी स्थित कुमाऊँ मंडल की सबसे लंबी बाखली 50 लाख रुपए से होगी पुर्नजीवित

नवीन समाचार, नैनीताल, 2 फरवरी 2023। नैनीताल जनपद के रामगढ़ विकासखंड के ग्राम कुमाटी में कुमाऊँ मंडल की सबसे लंबी बाखली यानी घरों की सबसे लंबी श्रृंखला है। प्रदेश भर में हो रहे पलायन की मार इस बाखली और यहां रहने वाले लोगों पर भी पड़ी है। इसी समस्या के दृष्टिगत अब इस बाखली को … Read more

कुमाऊं का लोक पर्व ही नहीं ऐतिहासिक व सांस्कृतिक ऋतु पर्व भी है घुघुतिया-उत्तरायणी, रक्तहीन क्रांति का गवाह भी रहा है यह दिन

Vishesh Aalekh Special Article Navin Samachar

1921 में इसी त्योहार के दौरान बागेश्वर में हुई प्रदेश की अनूठी रक्तहीन क्रांति, कुली बेगार प्रथा से मिली थी निजात घुघुतिया के नाम से है पहचान, काले कौआ कह कर न्यौते जाते हैं कौए और परोसे जाते हैं पकवान डॉ. नवीन जोशी, नैनीताल (Ghughutiya-Uttarayani)। दुनिया को रोशनी के साथ ऊष्मा और ऊर्जा के रूप … Read more

Aastha-Vigyan : आधुनिक विज्ञान से कहीं अधिक समृद्ध और प्रामाणिक था प्राचीन भारतीय ज्ञान

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल (Aastha-Vigyan)। विज्ञान के वर्तमान दौर में आस्था व विश्वास को अंधविश्वास कहे जाने का चलन चल पड़ा है। आस्था और विज्ञान को एक दूसरे का बिल्कुल उलट-विरोधाभाषी कहा जा रहा है। यानी जो विज्ञान नहीं है, वैज्ञानिक नियमों और आज के वैज्ञानिक दौर के उपकरणों से संचालित नहीं … Read more

नैनीताल के हरदा बाबा-अमेरिका के बाबा हरिदास

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 21 अप्रैल 2023। (Harda Baba of Nainital – Baba Haridas of America) सरोवरनगरी नैनीताल का साधु-संतों से सदियों से, वस्तुतः अपनी स्थापना से ही अटूट रिस्ता रहा है। इस नगर का पौराणिक नाम ‘त्रिऋषि सरोवर’ ही इसलिये है, क्योंकि इसकी स्थापना सप्तऋषियों में गिने जाने वाले तीन ऋषियों … Read more

🚩पहाड़ी पञ्चाङ्ग और राशिफल 30 जून 2019 (आषाढ़ 16 पैट-गते)…आज है वाहन से सावधानी बरतने, शारीरिक कष्ट व जोखिम से बचने का दिन..

दगड़ियो नमस्कार 🙏🙏आज’क दिन उत्तरायण, कृष्ण पक्ष बिक्रम संवत 2076, शक संवत 1941, द्वादशी तिथि अर आषाढ़ 16 पैट (गते) छू। आप सब लोगनक दिन मंगलमय हवौ.. “खुशि, स्वस्थ-सुकयारि रईया, खुटन में कान झन बुड़ौ.. धिनाइ-पाणी, ज्यो-जैजात बढ़ते रओ…और दुसारन कै ले खुश रखना लिजी प्रयास करिया! यो दिन-यो बार भेटनै रईया…” जय गोलज्यू !!💐💐 … Read more

🙏🕉️🌸जानें, क्या है सोलह श्राद्धों का महत्व

Shraddh

दामोदर जोशी ‘देवांशु’, हल्द्वानी, 29 सितम्बर 2018। श्राद्ध (Shraddh), श्रद्धा का वार्षिक अनुष्ठान है। अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का एक पर्व है। वैसे तो प्रतिमाह पड़ने वाला कृष्ण पक्ष (पूर्णिमा के बाद की प्रथमा से लेकर अमावास्या तक) श्राद्ध पक्ष माना जाता है। वहीं कर्मकांडी और भीरु जन नित्य ही ब्रहम् मुहूर्त … Read more

प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ सदृश रामायण-महाभारतकालीन द्रोणगिरि वैष्णवी शक्तिपीठ दूनागिरि

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 9 अक्टूबर 2021। हिमालय की गोद में बसे आध्यात्मिक महिमा से मंडित और नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दूनागिरि शक्तिपीठ का अपार महात्म्य है। आइए आज हम आपको इस शक्तिपीठ के दर्शनों को लिए चलते हैं। दूनागिरि पहुंचने के लिए अल्मोड़ा से 65 किमी, रानीखेत से 38 किमी … Read more

सच्चा न्याय दिलाने वाली माता कोटगाड़ी : जहां कालिया नाग को भी मिला था अभयदान

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Kotgadi

भद्रकालीः जहां वैष्णो देवी की तरह त्रि-पिंडी स्वरूप में साथ विराजती हैं माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।

कहते हैं आदि-अनादि काल में सृष्टि की रचना के समय आदि शक्ति ने त्रिदेवों-ब्रह्मा, विष्णु व महेश के साथ उनकी शक्तियों-सृष्टि का पालन व ज्ञान प्रदान करने वाली ब्रह्माणी यानी माता सरस्वती, पालन करने वाली वैष्णवी यानी माता लक्ष्मी और बुरी शक्तियों का संहार करने वाली शिवा यानी माता महाकाली का भी सृजन किया। सामान्यतया अलग-अलग स्थानों पर प्रतिष्ठित रहने वाली यह तीनों देवियां कम ही स्थानों पर एक स्थान पर तीनों के एकत्व स्वरूप् में विराजती हैं। ऐसा एक स्थान है माता का सर्वोच्च स्थान बताया जाने वाला वैष्णो देवी धाम।

माता भद्रकाली के मंदिर का गर्भगृह
माता भद्रकाली के मंदिर का गर्भगृह

लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं अंचल में भी एक ऐसा ही दिव्य एवं अलौकिक विरला धाम मौजूद है, जहां माता सरस्वती, लक्ष्मी और महाकाली एक साथ एक स्थान पर वैष्णो देवी की तरह ही स्वयंभू लिंग या पिंडी स्वरूप में आदि-अनादि काल से एक साथ माता भद्रकाली के रूप में विराजती हैं, और सच्चे मन से आने वाले अपने भक्तों को साक्षात दर्शन देकर उनके कष्टों का हरती तथा जीवन पथ पर संबल प्रदान करती हैं। इस स्थान को माता के 51 शक्तिपीठों में से भी एक माना जाता है। शिव पुराण में आये माता भद्रकाली के उल्लेख के आधार पर श्रद्धालुओं का मानना है कि महादेव शिव द्वारा आकाश मार्ग से कैलाश की ओर ले जाये जाने के दौरान यहां दक्षकुमारी माता सती की मृत देह का दांया गुल्फ यानी घुटने से नीचे का हिस्सा गिरा था।

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