उत्तराखंड में फिर ‘बलूनी है तो मुमकिन है!’: राज्य को मिल सकता है टाटा से बड़ा तोहफा..

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 28 नवम्बर 2020। उत्तराखंड को जल्द ही कैंसर इंस्टीट्यूट के रूप में एक बड़ी सौगात मिल सकती है।  भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने इसके लिए पहल की है।

उल्लेखनीय है कि बलूनी पिछले दिनों कैंसर से ग्रस्त हो गए थे। इस दौरान मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट मैं उनका उपचार हुआ था। बताया जा रहा है कि इस दौरान ही उनके मन में विचार आया था कि उत्तराखंड के आम लोगों के लिए भी इस तरह की सुविधा होनी चाहिए तभी उन्होंने टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा से इस इंस्टीट्यूट की शाखा उत्तराखंड में खोलने की बात कही, जिस पर ही उन्हें रतनजी टाटा की ओर से खत लिख कर भरोसा दिलाया गया है। अनिल बलूनी ने इसकी जानकारी अपने फेसबुक पेज पर भी दी है।

जानकारी के मुताबिक टाटा ग्रुप ने इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है और सब कुछ ठीक रहा तो जल्द कैंसर इंस्टीट्यूट का तोहफा राज्य को मिल सकता है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 8 मार्च 2019। राज्य सभा सांसद बनने के बाद छोटी सी अवधि में ही पूरे राज्यवासियों के दिलों पर छा गये और वास्तव में ‘सांसद’ पद की उपयोगिता साबित करने वाले अनिल बलूनी अब प्रदेश की दो पर्वतीय पर्यटन नगरों-नैनीताल व मसूरी वासियों का दिल जीतने की राह पर नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को बलूनी ने अपने फेसबुक खाते के जरिये सूचना दी है ‘मसूरी की पेयजल योजना स्वीकृत और नैनीताल की 333 करोड़ की योजना पर कार्य जारी, माननीय प्रधानमंत्री जी का शत-शत अभिनंदन!!’ साथ ही एक अन्य पोस्ट में लिखा है कि उन्होंने 25 दिसंबर को बताया था कि मसूरी व नैनीताल की पेयजल समस्या के लिए प्रयासरत हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए अवगत करा रहे हैं कि प्रधानमंत्री की विशेष निधि से मसूरी के पेयजल संकट के समाधान के लिए 187 करोड़ की योजना स्वीकृत करते हुए इस वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ रुपये जारी भी कर दिये गये हैं। मोदी हैं तो मुमकिन है।

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Anil Baluni Prasoon Joshiनवीन समाचार, नैनीताल, 3 मार्च 2019 । राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी लगातार उत्तराखंड के उत्थान  के लिए नई पहल  करते  जा रहे हैं  इसी कड़ी में  बलूनी ने प्रसिद्ध गीतकार, लेखक और भारतीय सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी से भेंट की है। अनिल बलूनी ने प्रसून जोशी से अनुरोध किया कि वे उत्तराखंड में पर्यटन के विकास हेतु एक ऐसा प्रेरक गीत लिखें कि पर्यटन और तीर्थाटन हेतु देश-विदेश के सैलानी और श्रद्धालु उत्तराखंड आयें। इससे जनता उत्तराखंड को देखेगी और उत्तराखंड से पलायन रुकेगा। अनिल बलूनी ने कहा, हमें गर्व है कि देवभूमि के बेटे प्रसून जोशी ने अपनी कलम से उत्तराखण्ड का नाम रोशन किया है।  माना जा रहा है कि प्रसून जोशी ने बलूनी केेेे अनुरोध पर उत्तराखंड के लिए एक सुंदर गीत लिखने का मन बना लिया है।

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-बलूनी ने कहा-उद्घाटन का इंतजार न करें, जनता के लिए शुरू करें नई योजनाएंं, इसे कहां जा रहा है बदलती राजनीति का संकेत

-बलूनी की सांसद निधि से लगभग पूर्ण हो चुके कोटद्वार व उत्तरकाशी आईसीयू एवं वेंटिलेटर सेंटर

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 फरवरी 2019 ।राज्यसभा सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने अपनी सांसद निधि से लगभग पूर्ण हो चुके कोटद्वार और उत्तरकाशी आईसीयू एवं वेंटीलेटर सेंटरों के उद्घाटन का इंतजार किए बगैर शुरू कर देने को कहा है।अनिल बलूनी ने कोटद्वार और उत्तरकाशी आईसीयू एवं वेंटीलेटर सेंटरों के बाबत में प्रदेश के स्वास्य सचिव को पत्र भेजकर कहा है कि आईसीयू सेंटर का निर्माण कार्य पूर्ण होते ही उद्घाटन की औपचारिकता की प्रतीक्षा करने के बजाय तत्काल उसे जनता की सेवा में समर्पित कर दिया जाए।सांसद बलूनी ने कहा की जनता के धन से जनता के लिए तैयार की गई सुविधा तत्काल जनता की सेवा में समर्पित हो जानी चाहिए। हमें शिलान्यास, उद्घाटन आदि की औपचारिकताओं से ऊपर उठ कर व्यावहारिक होने की आवश्यकता है। समय के साथ हमें अपनी कार्यसंस्तुतियों में बदलाव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आईसीयू का निर्माण पूर्ण होते ही उसे तत्काल जनता की सेवा में प्रारंभ कर देना चाहिए। ऐसा न हो कि उद्घाटन की औपचारिकताओं के कारण तैयार आईसीयू होते हुए भी कोई महत्वपूर्ण जीवन संकट में पड़ जाए क्योंकि तैयार होते ही यह जनता की स्वत: संपत्ति है। सांसद बलूनी ने कहा कि संतोषजनक समय में आईसीयू सेंटर का निर्माण पूर्ण हुआ है। इनका कुशल संचालन हो और अपेक्षित मेडिकल स्टाफ की तैनाती कर जनता को सुविधा देना हमारी प्राथमिकता है़ दुर्गम क्षेत्रों में आईसीयू सेंटर गंभीर रोगियों के लिए वरदान साबित होंगे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 5 फरवरी 2019 । राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी एम्स ऋषिकेश और सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी के नजदीक सांसद निधि व अन्य संस्थाओं के सहयोग से आरोग्य सदनों का निर्माण कराएंगे। गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में बनने वाले इन आरोग्य सदनों से पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले गरीब रोगियों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी।

बलूनी ने मंगलवार को इस संबंध में देहरादून और नैनीताल के जिलाधिकारियों व ऋषिकेश और हल्द्वानी के मेयरों से चर्चा कर आरोग्य सदनों के लिए शीघ्र भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। बलूनी ने कहा कि सुदूर क्षेत्रों से आने वाले रोगियों एवं उनके परिजनों को उपचार के अलावा भोजन, परिवहन और प्रवास में काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। अस्पताल के निकट बनने वाले आरोग्य सदन उनका परिवहन एवं प्रवास खर्चा बचाएंगे। साथ ही उन्हें कम लागत पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए कैंटीन का भी निर्माण कराया जाएगा। बलूनी ने कहा कि प्रथम चरण में इन सदनों में 100 से अधिक व्यक्तियों के रुकने के लिए कक्षों के साथ-साथ दो डोरमेट्री हॉल (पुरुष-महिला) और कैंटीन का निर्माण कराया जाएगा।

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बलूनी ने मांगा उत्तराखण्ड के लिये सम्पूर्ण स्वास्थ्य कवच
नैनीताल, 24 नवंबर 2018। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और राज्यसभा सांसद  अनिल बलूनी ने उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं के संपूर्ण समाधान के लिए एक विस्तृत फार्मूला प्रस्तुत किया है। हाल ही में अपनी हल्द्वानी में हुई पत्रकार वार्ता में बलूनी ने कहा था कि वह उत्तराखंड की स्वास्थ्य समस्याओं के बड़े समाधान के विषय में होमवर्क कर रहे हैं ताकि राज्य की जनता को प्रदेश में ही उपचार सुलभ हो सके और नागरिकों को उपचार के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े। इस सम्बन्ध में उन्होने आज एक पत्र प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को लिखा है व शीघ्र ही  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी से भेंट करेंगे और  स्वास्थ्य मंत्री  जे पी नड्डा जी से इस विषय में चर्चा करेंगे।
उन्होंने इस विषय पर विस्तृत अध्ययन करके एक ब्लूप्रिंट पत्र के माध्यम से  प्रधानमंत्री जी के समक्ष प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा उन्हें उम्मीद है कि आगामी दिनों में उनके प्रस्ताव पर प्रदेशवासियों को सुखद समाचार प्राप्त होगा। बलूनी ने कहा कि प्रधानमंत्री  का उत्तराखंड से भावात्मक संबंध है, वे देश के ऐसे पहले यशस्वी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने सर्वाधिक बार उत्तराखंड की यात्राएं की हैं और उत्तराखंड की सम्पूर्ण समस्याओं से अवगत हैं। “अटल जी ने बनाया है, मोदी जी संवारेंगे” के मन्त्र के साथ भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड के विकास के लिए अनवरत सेवारत है।
श्री बलूनी ने कहा अटल जी द्वारा प्रदान ऋषिकेश एम्स अब प्रभावी रूप से सेवाएं देने लगा है, किंतु उत्तराखंड राज्य की जनता को संपूर्ण उपचार देने हेतु पर्याप्त नहीं है। श्री बलूनी ने प्रधानमंत्री जी को संबोधित पत्र में कहा है कि ऋषिकेश एम्स का एक अतिरिक्त परिसर कुमाऊं मंडल के हल्द्वानी में स्थापित किया जाए। इसके साथ ही श्रीनगर गढ़वाल और अल्मोड़ा में एक-एक मेडिकल पीजीआई की स्थापना की जाए। इन चार संस्थानों की स्थापना के बाद उत्तराखंड की जनता को उच्च कोटि का उपचार प्राप्त होगा और राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि में एक ऐतिहासिक कदम होगा और राज्य के लिए वरदान साबित होगा।
सांसद बलूनी ने उम्मीद जताई कि माननीय प्रधानमंत्री जी जिनका उत्तराखंड के प्रति विशेष स्नेह है, वह राज्य की जनता को निःसन्देह यह सौगात देंगे। उत्तराखंड अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगा हुआ सामरिक प्रांत है। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने हेतु सरकार कृत संकल्प है, किंतु इसके संपूर्ण समाधान के लिए बड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।

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नवीन जोशी, नैनीताल, 22 सितंबर 2018। भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी ने फिर एक अभूतपूर्व फैसला लेते हुए उत्तराखंड राज्य के एक गैर-आबाद निर्जन ‘घोस्ट विलेज’ यानी भुतहा गांव कहे जा रहे पौड़ी जिले के दुगड्डा ब्लॉक के दूरस्थ गांव बौर को गोद लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस गांव को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लिया गया है, इसके बाद अन्य ऐसे गैर-आबाद गांवों को भी इसी मॉडल पर आबाद करने के प्रयास किये जायेंगे। इस गाँव को पुनर्जीवित करने के लिए मूलभूत सुविधाओं बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार से जोड़ा जाएगा ताकि यह गांव पुनर्जीवित होकर अपने पूर्व के स्वरूप में आबाद हो सके। इस संबंध में शीघ्र ही इस गांव के प्रवासियों के साथ बैठक की जायेगी।

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तीन करोड़ प्रवासी उत्तराखंडियों की ‘घर वापसी’ कराएगा आरएसएस !

उनकी इस ‘रिवर्स माइग्रेशन’ की पहल पर विपक्ष की ओर से पूर्व सीएम हरीश रावत की ओर से प्रतिक्रिया काफी कुछ कहने वाली है। हरीश रावत ने भाजपा नेताओं को सलाह दी है कि वह बलूनी की पहलों से घबरायंे नहीं वरन प्रतिस्पर्धा करें। इससे साफ होता है कि अपनी पहलों से बलूनी विपक्ष के बड़े नेताओं का भी ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करने में सफल रहे हैं। वहीं यह भी दिखाई दे रहा है उनकी पार्टी-भाजपा के लोग अभी भी उन्हें अधिक महत्व देने से बच रहे हैं। पिछले दिनों उनकी पहल पर नैनी-दून जन शताब्दी एक्सप्रेस रेलगाड़ी चलाने पर राज्य के उनकी पार्टी के नेताओं में रही श्रेय लेने की होड़ पर स्वयं केंद्रीय रेलमंत्री पीयूष गोयल को सफाई देनी पड़ी थी।
बलूनी की गैर-आबाद ग्रामों के पुनर्जीवन की कार्ययोजना के तहत वे उत्तराखण्ड के प्रवासी परिवारों-संगठनों के बीच जाकर संवाद करेंगे। उत्तराखंड के लाखों प्रवासी जो कि दिल्ली, लखनऊ, बरेली, मेरठ, गाजियाबाद, चंडीगढ़, भोपाल, इंदौर, जयपुर, मुंबई आदि शहरों में जाकर बस गए हैं, उन सबसे चर्चा कर गांव के पुनर्जीवन हेतु अनुरोध किया जाएगा और उनकी मांगों के निराकरण हेतु प्रयास किया जाएगा। साथ ही प्रवासियों से संवाद अभियान के माध्यम से उत्तराखंड के कौथीग (मेले), ऋतुपर्व और पारंपरिक आयोजनों को पुनः पुनर्जीवित करने के लिए संपर्क किये जायेंगे। उल्लेखनीय है कि इस तरह की मुहिम की घोषणा पूर्व में आरएसएस के द्वारा भी की गयी थी, जिसमें प्रवासी उत्तराखंडियों से वर्ष में एक बार अपने गांव आने का आह्वान करने की बात कही गयी थी। लेकिन योजना कहीं धरातल पर उतरी हो, इसकी जानकारी नहीं है।
उल्लेखनीय है कि बलूनी इससे पूर्व पौड़ी जिले के धूमाकोट-नैनीडांडा में बीती 4 जुलाई 2018 को हुई 48 यात्रियों की जान लेने वाली भीषण बस दुर्घटना के बाद अपने छह वर्ष के कार्यकाल में हर वर्ष 2-3 कर उत्तराखंड के हर जिले में 18 आईसीयू बनाने की घोषणा करके भी सुर्खियों में रहे थे। इसके अलावा वे राज्य में सेना के अस्पतालों में स्थानीय लोगों को भी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और राज्य में केंद्रीय संस्थान स्थापित करने की पहलों के साथ भी लगातार अपना सियासी कद बढ़ाते नजर आ रहे हैं। यह भी विदित हो कि 2017 में उत्तराखंड के विस चुनावों के बाद उनका नाम भी राज्य के मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमुखता से सियासी हलकों में चला था, लेकिन तब तक जनता से सीधे तौर पर न जुड़े होने की कमी उनकी राह में आढ़े आ गयी थी। लेकिन राज्य सभा सदस्य के तौर पर निर्वाचित होने के बाद से वे लगातार जनता के दिलों पर छाते जा रहे हैं। यह कहना भी गलत न होगा कि पूर्व रास सांसद तरुण विजय के बाद वे एक रास सांसद की क्षमताओं का जनता को अहसास कराने में सफल रहे हैं। ऐसे में वे भविष्य में राज्य के मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में गिने जाएं और मुख्यमंत्री बन जाएं तो आश्चर्य न होगा।

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    • खुशखबरी : सेना के डॉक्टर सूबे में आम लोगों का इलाज भी करेंगे 
    • केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी सैद्धांतिक सहमति 
  • सांसद अनिल बलूनी के अनुरोध पर मिली प्रदेश को Anil Baluniसौगात 

देहरादून, 15 सितंबर 2018 । डॉक्टरों की कमी की समस्या झेल रहे उत्तराखंड के लिए खुशखबरी है। प्रदेश के छावनी क्षेत्रों में तैनात सेना के डॉक्टर अब आम लोगों का इलाज भी करेंगे। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने उत्तराखंड की जनता के लिए स्वास्य के क्षेत्र में बड़ी सौगात दी है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 25 अगस्त 2018 को नैनी-दून जनशताब्दी एक्सप्रेस का तोहफा भी दिलाया था। इसके अलावा वे हाल में संसद में उत्तराखंड के लिए विशेष राहत पैकेज और एनडीआरएफ की स्थाई यूनिट स्थापित करने की मांग भी उठा चुके हैं।

शनिवार को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक में उन्होंने उत्तराखंड के सामान्य नागरिकों को भी सेना के चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार देने के लिए अनुरोध किया, जिस पर रक्षा मंत्री ने सैद्धांतिक सहमति दी है। यह फैसला पर्वतीय जनता की स्वास्य सेवा के क्षेत्र में मील का पत्थर होगा। सांसद बलूनी की रक्षा मंत्री के साथ उनके साउथ ब्लॉक स्थित कार्यालय में भेंट हुई। बैठक में उत्तराखंड के उन सैन्य क्षेत्रों (छावनियों) में, जहां सेना के चिकित्सक उपलब्ध हैं, उनके द्वारा राज्य के सामान्य नागरिकों को भी चिकित्सकीय सहायता मिले, इस विषय पर रक्षा मंत्री से भेंट की तथा दुर्गम क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्य की सुविा प्रदान करने पर र्चचा हुई। सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि रक्षा मंत्री ने राज्य के पलायन की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वह स्वयं उत्तराखंड की परिस्थितियों से अवगत हैं और स्वास्य, शिक्षा तथा रोजगार के लिए निरंतर राज्य से पलायन के कारण चिंतित हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमांतवासियों के लिए स्वास्य की सुविधा प्राथमिक रूप से मिलनी चाहिए। इसके कार्यान्वयन के लिए सेना के संबंधित कमान से र्चचा करेंगी। सांसद बलूनी ने कहा कि सेना के देहरादून, रुड़की, लैंसडाउन, हर्षिल, रुद्रप्रयाग, जोशीमठ, रानीखेत, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ व धारचूला में सैन्य क्षमता के आधार पर मिलिट्री हॉस्पिटल, फील्ड हॉस्पिटल, सेक्शन हस्पिटल और जनरल हॉस्पिटल कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त जिला स्तर पर आईसीएचएस क्लीनिक कार्य कर रही हैं। रक्षा मंत्री जी से अनुरोध किया गया कि केवल प्राथमिक उपचार, औषाि और मरहम पट्टी स्तर की क्लीनिक जो आम नागरिकों के लिए कुछ घंटे दैनिक रूप से सेवा दें ताकि नागरिकों को स्वास्य के क्षेत्र में बड़ी राहत मिल सके।

अर्धसैनिक बलों के डॉक्टरों को लेकर आज केंद्रीय गृहमंत्री से मिलेंगे बलूनी

देहरादून। अर्धसैनिक बलों के चिकित्सकों से भी प्रदेश की आम जनता का इलाज मिल सके इस बाबत राज्य सभा अनिल बलूनी का रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भेंट का समय तय हुआ है। सांसद बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड प्रदेश में सेना के साथ-साथ आईटीबीपी, एसएसबी और सीआरपीएफ की बटालियनें भी हैं, इस संबंध में वह रविवाव को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलेंगे और गृहमंत्री से अपील करेंगे कि वह अर्धसैन्य बलों के चिकित्सकों के माध्यम से भी स्थानीय नागरिकों को मेडिकल सुविधा देने की कृपा करें।

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बिग ब्रेकिंग: गैरसेंण उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनी, अधिसूचना जारी, पर देहरादून की राजधानी क्या ? अस्थायी या शीतकालीन ?

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नवीन समाचार, देहरादून, 08 जून 2020। उत्तराखंड आंदोलन के दौर से ही राजधानी के रूप में प्रचारित गैरसेंण आखिर राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी बन गई है। उत्तराखण्ड की त्रिवेन्द्र सरकार द्वारा चमोली जिले के चमोली भराड़ीसैंण (गैरसैंण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा को आज आखिरकार मुहर लगा दी। राज्यपाल बेबी रानी मौर्या ने त्रिवेन्द्र सरकार के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इसके बाद प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है। इस के साथ अब उत्तराखण्ड की दो राजधानी हो गई हैं। जिनमें ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण होगी, जबकि देहरादून में पहले से अस्थायी राजधानी के रूप में कार्य हो रहे हैं। आगे देखने वाली बात होगी कि क्या अब तक अस्थायी होने के बावजूद राजधानी के रूप में प्रयुक्त देहरादून के लिये क्या शब्द प्रयोग होगा। इसे शीतकालीन राजधानी के रूप में अधिसूचित किया जाता है अथवा स्थायी राजधानी के रूप में।

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नवीन समाचार, गैरसेंण, 4 मार्च 2020। उत्तराखंड बजट सत्र के दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक बड़ी घोषणा करते हुए गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया है। बताया गया है कि गैरसेंण व देहरादून 6-6 माह के लिए उत्तराखंड की राजधानी होंगे। इसके साथ ही भाजपा सरकार ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का अपना चुनावी संकल्प भी पूरा कर दिया है। इसे भाजपा सरकार का एतिहासिक फैसला माना जा रहा है। हालांकि गैरसेंण को उत्तराखंड की पूर्ण-स्थायी राजधानी की मांग करने वाले लोगों को सरकार का यह फैसला इस मुद्दे को हल्का करने वाला भी लग सकता है। उल्लेखनीय है कि आपके प्रिय एवं भरोसेमंद समाचार पोर्टल ‘नवीन समाचार’ ने गत 23 फरवरी को ही सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने की संभावना जता दी थी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधानसभा में बुधवार को बजट पेश करने के बाद गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का ऐलान किया। उस वक्त सदन में कुछ क्षणों के लिए सभी सदस्य हतप्रभ रह गए और सन्नाटा छा गया लेकिन सत्तापक्ष और विपक्षी दल खुशी से झूम उठे और अपनी मेज थप-थपाकर इस ऐलान का स्वागत किया। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चन्द अग्रवाल ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर ख़ुशी का इजहार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक तरह से उत्तराखंड के आंदोलन और गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने को लेकर आंदोलन करने वाले सभी तमाम शहीदों को तोहफा है। गैरसैंण राजधानी शहीदों को समर्पित है। गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा आंदोलनकारियों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि इस घोषणा से राज्य निर्माण की अवधारणा पूरी हो गई है।
बाद में त्रिवेंद्र रावत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इसके लिए क्या जरूरी इंस्फाट्रक्चर चाहिए, उसका सरकार अध्ययन कराएगी और उसी के अधीन काम होगा। साथ ही प्रशासनिक और शासन स्तर पर सभी तथ्यों पर सरकार विचार करेगी। उन्होंने कहा की यहां पर भराणी सैंण बहुत अधिक ऊंचाई पर है। इस वजह से यहां पानी की समस्या रहती है। इसके लिए एक झील बनाई जाएगी जिससे बारिश के पानी का संग्रह किया जा सके। ताकि पानी की दिक्कत का समाना न करना पड़े। इस बावत लोकनिर्माण विभाग के अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं। राजधानी बनाए जाने के बाद क्या गैरसैंण को अब जिला घोषित किया जाएगा? यह पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हम पहले सभी पक्षों का अध्ययन करेंगे और जो भी बेहतर होगा, सरकार उस पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि जब हमने इसे राजधानी घोषित कर दिया है तो जिला बनाये जाने का मुद्दा अपने आप ख़त्म हो गया है। 
उल्लेखनीय है कि कर्णप्रयाग के विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने हाल ही में मुख्यमंत्री से मिलनकर भराड़ीसैंण में होने वाले सत्र के दौरान गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने की मांग की थी। उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड राजधानी के तौर पर गैरसैंण का नाम सबसे पहले 60 के दशक में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने आगे किया था। उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के समय भी गैरसैंण को ही राज्य की प्रस्तावित राजधनी माना गया। वर्ष 1989 में उक्रांद के संस्थापक डीडी पंत और विपिन त्रिपाठी ने गैरसैंण को उत्तराखंड की प्रस्तावित राजधानी के रूप में माना था और उक्रांद ने 1992 में गैरसैंण को उत्तराखण्ड की औपचारिक राजधानी घोषित भी कर दिया था। राज्य आंदोलन के दौरान गैरसेंण उत्तराखंड की राजधानी के रूप में ही आंदोलन विषय के केंद्र में रहा।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 23 फरवरी 2020। जी हां, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत पर्वतीय जनभावनाओं की राजधानी गैरसैंण पर इतिहास रच सकते हैं। वे गैरसैंण में आगामी 3 मार्च से आयोजित होने जा रहे विधानसभा सत्र में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर सकते हैं। चमोली जिले, जहां गैरसैण स्थित है, के सत्ताधारी विधायक महेंद्र भट्ट के दावे ने इन चर्चाओं को ताकत मिली है। कहा जा रहा है उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के हवाले से यह बात कही है। ऐसी स्थिति में त्रिवेंद्र इतिहास रचने के करीब खडे़ हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री रावत राज्य आंदोलनकारियों को समान पेंशन व पेंशन को बढ़ाकर 5 हजार रुपये करने तथा उन्हें आरक्षण बहाल करने की भी घोषणा कर सकते हैं। राज्य आंदोलनकारियों से ऐसा वादा कर चुके हैं।gairsain
इस मसले को मौजूदा स्थितियोें में सै़द्धांतिक और व्यवहारिक नजरियेे से देखें तो दो बातें निकलकर आती हैं। सैद्धांतिक बात गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने के पक्ष में है, लेकिन देहरादून में जिस तरह से पिछले 20 साल से अस्थायी तौर पर ही सही राजधानी का संचालन हुआ है, उसमें अब गैरसैंण के स्थायी राजधानी बनने की कितनी संभावनाएं हैं, यह व्यवहारिक यक्ष प्रश्न है। राज्य आंदोलनकारियों के बीच में से ही एक वर्ग मानता है कि मौजूदा स्थिति में गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी बन जाए, तो यह उस क्षेत्र के विकास के लिहाज से बड़ी बात होगी। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने 2017 केे विधानसभा चुनाव में अपने घोषणापत्र में ग्रीष्मकालीन राजधानी का वादा किया था। कांग्रेस का कहना है कि अगर ग्रीष्मकालीन राजधानी का एलान होगा तो सरकार से पूछा जाएगा कि स्थायी राजधानी क्यों नहीं। हालांकि उन्हें यह पूछने का हक नहीं, क्योंकि यही सवाल उनसे भी पूछा जाएगा। वहीं भाजपा के पास कहने के लिए एक बड़ा जवाब है। वह कह सकती है कि उसके चुनाव घोषणापत्र पर भरोसा करके ही उसे प्रचंड बहुमत मिला है। वह कह सकती है कि यदि ग्रीष्मकालीन राजधानी के वादे पर जनता असहमत होती तो कर्णप्रयाग विधानसभा सीट, जिसके अंतर्गत गैरसैंण क्षेत्र आता है, वहां पर भाजपा के सुरेंद्र सिंह नेगी कभी जीतकर नहीं आते।Gairsain
अब बात त्रिवेंद्र सिंह रावत की। यदि उनकी सरकार ग्रीष्मकालीन राजधानी का एलान कर देती है, तो यह इतिहास रचने जैसा होगा। गैरसैंण में भव्य विधानभवन तैयार हो चुका है। वहां सत्र आयोजित होने लगे हैं। इससे पहले 2016 में हरीश रावत सरकार के पास यह मौका था। मगर वह गैरसैंण राजधानी के मसले पर चूक गई। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को अब इसका मलाल भी है। अब पूरे उत्तराखंड की निगाहें 3 मार्च से गैरसैंण में शुरू हो रहे विधानसभा सत्र पर टिकी हैं। क्या इसी दौरान एलान होगा या फिर अपनी सरकार के बचे हुए दो साल के कार्यकाल के दरमियान किसी और तारीख को मुख्यमंत्री इसके लिए चुनेंगे। इस पर शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक का सिर्फ इतना कहना है कि सरकार जनभावनाओं से वाकिफ है और गैरसैंण के विकास के लिए जो बेहतर होगा, वह निर्णय लिया जाएगा।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 8 जून 2018। केंद्र एवं राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने गैरसेंण-चंद्रनगर के बारे में उत्तराखंड की राजधानी के बाबत भाजपा सरकार की मंशा पर बड़ा खुलासा किया है। नैनीताल क्लब के राज्य अतिथि गृह में पत्रकारों से बात करते हुए भट्ट ने कहा कि भाजपा सरकार साफ तौर पर पहले गैरसेंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने जा रही है। इसके लिए भी अभी वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वहां विधानभवन तैयार हो गया है, परंतु यहां आयोजित होने वाले विधानसभा सत्र के लिए ही तैनात होने वाले कर्मचारियों के लिए आवास नहीं हैं। कर्मचारियों को ग्रामीणों के घरों में शरण लेनी पड़ती है। साथ ही पानी की भारी समस्या है। बीते सत्र में तैनात 1000 पुलिस के जवान पानी के लिए परेशान रहे, जबकि कई को गाड़ियों में सोना पड़ा। पानी व आवास जैसी इन मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने के बाद सरकार ‘जनभावनाओं के अनुरूप’, जिस स्वरूप में जनता चाहेगी, वैसे गैरसेंण को राजधानी बनाने पर निर्णय लेगी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस इस बारे में जो कुछ भी कहती है, सदन के बाहर कहती है। सदन के भीतर कांग्रेस ने अब तक गैरसेंण पर अपना रुख साफ नहीं किया है।

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उत्तराखंड के एक कैबिनेट मंत्री पर विभिन्न धाराओं में आरोप तय

नियमित रूप से नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड के समाचार अपने फोन पर प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे टेलीग्राम ग्रुप में इस लिंक https://t.me/joinchat/NgtSoxbnPOLCH8bVufyiGQ से एवं ह्वाट्सएप ग्रुप https://chat.whatsapp.com/BXdT59sVppXJRoqYQQLlAp से इस लिंक पर क्लिक करके जुड़ें। नवीन समाचार, रुद्रप्रयाग, 28 फरवरी 2020। वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में आचार संहिता उल्लंघन और सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के साथ … Read more

खुसुर-पुसुर…ऑफ द रिकॉर्ड : नैनीताल में तीन तलाक, हलाला, नेता जी और स्वयंभू पत्रकार चर्चा में

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 सितंबर 2019। नगर में इन दिनों एक नेता जी के अवैध संबंध खासे चर्चा में हैं। मामले को साढ़े आठ लाख रुपए से लेकर 20 लाख रुपए तक में रफा-दफा कराने और मामले में एक स्वयंभू, खुद को पत्रकार कहने वाले (पत्रकार नहीं, क्योंकि पत्रकार ऐसा नहीं कर सकते) के भी … Read more

पंचायत के वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश बिष्ट, पत्नी गीता व समर्थकों संग भाजपा में शामिल…, नैनीताल में भी कई की चर्चाएं तेज…

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कांग्रेस नेता हरीश बिष्ट, पत्नी, समर्थकों संग भाजपा में शामिलनवीन समाचार, नैनीताल, 18 सितंबर 2019। कांग्रेस नेता और निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य डा. हरीश बिष्ट बुधवार को पत्नी-भीमताल की निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख गीता बिष्ट और समर्थकों संग भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट और कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने विधायक संजीव आर्य, जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट की मौजूदगी में भाजपा कुमाऊं संभाग कार्यालय में उन्हें फूल मालाएं पहनाकर पार्टी की सदस्यता दिलाई। भाजपा की सदस्यता लेने वालों में कोटाबाग ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष हेम नैनवाल, कृष्णानन्द कांडपाल, दुर्गा दत्त पलड़िया, देवेन्द्र बोरा आदि रहे। इस अवसर पर अजय भट्ट ने कहा कि भाजपा में शामिल हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि वह पार्टी की रीति और नीति को समझें। वह संगठन की मजबूती के लिए प्राथमिकता से काम करें। मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि भाजपा का कुनबा बढ़ रहा है। ऐसे में जुड़ने वाले हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि वह संगठन की मजबूती के साथ जनसेवा को तत्पर रहें। इधर, नैनीताल मुख्यालय में भी एक प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी व कम से कम दो निर्वाचित पदेन जनप्रतिनिधि सहित कुछ अन्य कांग्रेसियों के भी भाजपा की सदस्यता लेने की चर्चाएं काफी दिनों से चल रही हैं, जबकि हरीश बिष्ट के भाजपा में जाने के बाद इन चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है ।

पूर्व समाचार : आज एक बजे कांग्रेस का एक बड़ा विकेट गिराएगी भाजपा, पंचायत चुनाव में पहली जीत के लिये बनी रणनीति..

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 सितंबर 2019। अब तक भाजपा के लिए कहा जाता है कि वह ‘मोदी मैजिक’ के भरोसे केवल केंद्र एवं राज्य के बड़े चुनावों में ही जीत प्राप्त कर पाती है।त्रिस्तरीय पंचायतों में भाजपा कमजोर है। इस धारणा को बदलने के उद्देश्य से भाजपा बुधवार को एक बड़ा दांव चलने जा रही है। आज दोपहर 1:00 बजे पिछले दो दशकों से जिला पंचायत नैनीताल मैं दबदबा रखने वाले कांग्रेस के कद्दावर नेता डॉ हरीश बिष्ट भाजपा का दामन थामने वाले हैं।

हरीश बिष्ट के भाजपा का दामन थामने के निहितार्थ इस रूप में निकाले जा रहे हैं कि कि कांग्रेस निचले स्तर तक कमजोर होती चली जा रही है, व अपने सिमट चुके कुनबे को भी नहीं सवाल पा रही है। बताया जा रहा है कि हरीश प्रदेश कार्यकारिणी में स्थान न मिल पाने, खासकर उनकी जगह उनके किसी प्रतिद्वंदी को स्थान दे दिए जाने से नाराज हैं। इसके बाद वे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के माध्यम से भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर रहे हैं। उनके साथ जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों के 2 दर्जन से अधिक ग्राम प्रधान एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य का भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। उल्लेखनीय है कि हरीश बिष्ट निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य व उनकी पत्नी गीता बिष्ट भीमताल से निवर्तमान ब्लाक प्रमुख हैं। दोनों पति-पत्नी पिछले 20 साल से पंचायत की राजनीति में सक्रिय हैं। अलबत्ता, अभी गीता बिष्ट का औपचारिक तौर पर भाजपा में जाना तय नहीं है। उल्लेखनीय है कि 2014 में भाजपा जिला पंचायत नैनीताल में अधिक सदस्य होने के बावजूद अपना जिला पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष नहीं बना पाई थी।

यह भी पढ़ें : गजबः नैनीताल जिला पंचायत में जीत कांग्रेस की पर जीते भाजपाई

Yashpal Arya Hugged Dr. Indira Hridyesh and Sumitra Prasad, just after winning Nainital Jila Panchayat President Election
हरीश बिष्ट बाईं ओर सबसे आगे (Yashpal Arya Hugged Dr. Indira Hridyesh and Sumitra Prasad, just after winning Nainital Jila Panchayat President Election)

 

तब  हेम को हराने के बाद यशपाल आर्य ने संभाला था इंदिरा और सुमित्रा को

-विजयी अध्यक्ष सुमित्रा प्रसाद व उपाध्यक्ष पुष्कर नयाल दोनों ने भाजपा के चुनाव चिह्न पर जीता था जिला पंचायत का चुनाव

नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, यकीनन नैनीताल जिला पंचायत में कांग्रेस की ओर से घोषित अध्यक्ष पद प्रत्याशी सुमित्रा प्रसाद और उपाध्यक्ष पद पर पुष्कर नयाल ने चुनाव जीता है, लेकिन दोनों विजयी सदस्य न केवल मूलतः भाजपाई रहे हैं, वरन उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए जिला पंचायत सदस्य बनने की अर्हता धुर विरोधी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव चिह्न कमल के फूल पर चुनाव लड़ कर अर्जित की है। वरन, उपाध्यक्ष बने पुष्कर नयाल ने तो स्वयं को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का सक्रिय कार्यकर्ता भी बताया है। कांग्रेस प्रत्याशियों की विजय में योगदान देने वाले कम से कम दो सदस्य प्रताप गोरखा और कृष्णानंद कांडपाल भी मूलतः भाजपाई रहे हैं।

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#MeToo के आरोपों में फंसे भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री को मिल सकती है बड़ी राहत

मीटू प्रकरण में फंसे भाजपा के पूर्व प्रदेश संगठन मंत्री संजय कुमार को बड़ी राहत मिल सकती है। पुलिस का दावा है कि विवेचना के दौरान ऐसे साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिससे दुष्कर्म के आरोप की पुष्टि हो सके। घटना को लेकर जो तारीख बताई है, उस दिन संजय कुमार की लोकेशन देहरादून के आसपास … Read more

प्रतियोगी परीक्षाओं की ऑनलाइन तैयारी हेतु उत्तराखंड की नवीनतम जानकारियां (Uttarakhand Online Taiyari (UOT)

दोस्तों हम उत्तराखंड के विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे नौजवानों के लिए ‘नवीन समाचार’ में ऑनलाइन तैयारी का एक नया स्तंभ शुरू कर रहे हैं आशा है आपको पसंद आएगा। हम समय-समय पर इसमें जानकारियां अपडेट करते रहेंगे । इसलिए आप भी समय-समय पर आकर इसमें लेटेस्ट जानकारियां प्राप्त करते रहें। भविष्य में … Read more

यह भी पढ़ें : मुख्यमंत्री को ‘चोर-उचक्के’ कहने वाली शिक्षिका ने अब बताया ‘पिता तुल्य’, मांगी मांफी

पिछले सप्ताह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को जनता दरबार में ‘चोर-उचक्के’ तक कह जाने वाली निलंबित शिक्षिका उत्तरा पंत बहुगुणा ने अब मुख्यमंत्री को ‘पिता तुल्य’ बताया है, और उनसे माफी मांग ली है। सोशल मीडिया पर आये एक वीडियो में उत्तरा कहती सुनी जा रही हैं कि वह ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गयी थीं। क्योंकि वह पिछले 25 वर्षों से अपने घर से बाहर हैं। इधर 2015 में उनके पति का निधन हुआ, जिसके बाद से उनके बच्चों का घर पर कोई सहारा नहीं है। इसलिए ही वह अपना स्थानांतरण चाह रही थीं। और मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गयी थीं। वहां इतने वर्षों से अंदर भरा हुआ गुस्सा बाहर निकल गया। उन्होंने पिता तुल्य अभिभावक के समक्ष अपनी शिकायत गुस्से के रूप में की। मुझसे जो गलती हुई है, उसे वह क्षमा करें। मेरे साथ शिक्षा विभाग के कारण काफी बुरा हुआ है।

शिक्षिका उत्तरा पंत के व्यवहार में अचानक आया यह परिवर्तन सोमवार को शिक्षा निदेशक आरके कुंवर एवं मंगलवार को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे से मिलने के बाद और इस मामले में बुरी तरह से घिरी राज्य सरकार के ‘डैमेज कंट्रोल’ का परिणाम माना जा रहा है। इससे सरकार व सत्तारूढ़ भाजपा को तो जरूर राहत मिलेगी, परंतु अपने राजनीतिक हितों के लिए उसे बिन मांगे समर्थन देने जुटे और सरकार को घेर रहे विपक्ष की किरकिरी होनी भी तय है।
इधर मुख्यमंत्री के लिए अपशब्दों का प्रयोग करने के बाद राष्ट्रीय मीडिया में भी छा चुकी और गत दिवस हाईकोर्ट की शरण में भी जाने की बात कहने वाली उत्तरा पंत को मंगलवार को टीवी के ‘बिग बॉश’ शो से भी फोन आने की खबर है।

यह भी पढ़ें: तब भी कुछ यही हुआ था: त्रिवेंद्र रावत-उत्तरा, हरीश रावत-उमा प्रकरण कुछ अलग हैं क्या ?

उत्तराखंड के चौथे विधानसभा चुनावों के बाद जब त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री बने थे, तो हमने ‘नवीन समाचार’ में सुर्खी लगाई थी, ‘फिर रावत सरकार’। हमारी सुर्खी के मायने शायद तब इतने ही समझ आये हों कि इससे पूर्व उत्तराखंड में हरीश चंद्र सिंह रावत की सरकार थी और अब त्रिवेंद्र रावत की सरकार बन रही है। ‘फिर रावत सरकार’ पिछले मुख्यमंत्री हरीश रावत का चुनावी नारा भी था। लेकिन हमारा इशारा केवल जाति नाम ‘रावत’ और चुनावी नारे तक ही सीमित नहीं था, बल्कि जो आगे दिखाई दे रहा था, उसकी ओर भी था। अब रावत सरकार के करीब सवा वर्ष के कार्यकाल के बाद, खासकर शिक्षिका उत्तरा पंत बहुगुणा के सीएम त्रिवेंद्र रावत के जनता दरबार में हुए हंगामे और उनके निलंबन आदेशों के साथ यह बात सही साबित होती दिख रही है।
थोड़ा सा याददाश्त पर जोर दें, तो एक और ऐसी ही घटना याद आ जाएगी। यह संयोग ही है कि ऐसी ही वह घटना पिछली हरीश रावत सरकार के कार्यकाल में नवंबर 2016 में हल्द्वानी के एफटीआई मैदान में उनके ही पुत्र आनंद रावत द्वारा आयोजित कुमाउनी क्विज प्रतियोगिता के दौरान भी घटी थी। उत्तरा की ही ‘नाम-जाति राशि की’ बिंदूखत्ता निवासी अशासकीय विद्यालय में 13 वर्षों से मात्र 5 हजार रुपए के वेतन पर कार्यरत शिक्षिका उमा पांडे अपने स्कूल को सरकारी ग्रांट न मिलने को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत के कदमों पर फूट-फूट कर रोई थी और मुख्यमंत्री हरीश रावत हंसते रहे थे। शिक्षिका को बमुश्किल पुलिस की मदद से कार्यक्रम स्थल से बाहर किया गया था। आज भी उत्तरा पंत बहुगुणा को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के जनता दरबार से पुलिस के द्वारा बाहर किया गया। कस्टडी में लेने के आदेश हुए, सो अलग।
इससे कुछ बातें साफ होती हैं। सरकार मुख्यमंत्री हरीश रावत की हो, अथवा त्रिवेंद्र रावत की, उसमें महिलाओं क्या किसी भी जरूरतमंद के लिए कोई संवेदनशीलता नहीं होती है। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति स्वयं को राजा मानता है। भले ही वह राजशाही की तरह पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रधानमंत्री बनने का अधिकार लेकर पैदा हुए राहुल गांधी द्वारा मुख्यमंत्री बनाये गये हरीश रावत हों, अथवा स्वयं को ‘प्रधान सेवक’ कहने वाले नरेंद्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्री बनाये गये त्रिवेंद्र रावत।
वहीं केवल ताजा घटना की ही बात करें तो महिला-विधवा शिक्षिका उत्तरा पंत द्वारा मुख्यमंत्री के लिए सार्वजनिक तौर पर ‘चोर-उचक्के’ जैसे शब्दों के प्रयोग को कत्तई सही नहीं ठहराया जा सकता। खासकर एक महिला शिक्षिका होते, जिसका दर्जा गुरु के रूप में देवताओं से भी ऊपर तथा एक महिला और मां के रूप में समन्वित तौर पर साक्षात ‘गुर्रुब्रह्मा’ की ब्रह्माणी यानी माता सरस्वती के समान होता है, और उनसे समाज को सही शब्दों के साथ सही दिशा देने की अपेक्षा रहती है। वहीं सरकारी नौकरी कर रहे उम्रदराज सैनिक और सैन्य अधिकारी अपना घर बार छोड़ सियाचिन व लद्दाख में भी नौकरी कर रहे हैं। सो परिवार भी देखने और नौकरी भी करने की महिला शिक्षिका की चाह भी सही नहीं ठहराई जा सकती।
अलबत्ता, मुख्यमंत्री रावत ने उन्हें उनके निवेदन पर प्राथमिक शिक्षा विभाग में ‘जिला कैडर’ होने की याद दिलायी, जिसके तहत जिलों से बाहर अंर्तजिला स्थानांतरण होने पर शिक्षकों को अपनी वरिष्ठता खोनी पड़ती है। पता नहीं शिक्षिका उत्तरा पंत अपनी नौकरी के आखिरी पड़ाव में अंर्तजिला स्थानांतरण किये जाने पर अपनी 25 वर्ष की वरिष्ठता खोने को तैयार हैं अथवा नहीं। मुख्यमंत्री रावत की धर्मपत्नी सुनीता रावत ने अपनी आठ वर्ष की सेवा के बाद ही पौड़ी से देहरादून जिले को अंर्तजिला स्थानांतरण करा लिया था। शायद वरिष्ठता भी खोई हो। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने उन्हें सरकारी नौकरी शुरू करने से पहले नियमों के पालन करने के लिए स्वीकार की जाने वाली सेवा नियमावली भी याद दिलाई, यहां तक सब ठीक मान भी लिया जाये तो भी यह मानना पड़ेगा कि मुख्यमंत्री रावत ने इस घटना के साथ एक राजनीतिज्ञ के लिए अपेक्षित धैर्य खोकर स्वयं की बुद्धिमत्ता और संवेदनशीलता (या कि मूर्खता और संवेदनहीनता) का सैकड़ों कैमरों के बीच स्वयं नग्न प्रदर्शन कर दिया है। उनकी स्थिति कालीदास की तरह नजर आ रही है, जिन्हें काफी समय से विद्वान बना कर रखा गया था, लेकिन आज वे ‘उट्र-उट्र’ कर बैठे हैं।
इस संबंध में एक और घटना याद हो आती है। नैनीताल क्लब के खचाखच भरे सभागार में मुख्यमंत्री बनने के बाद पहले बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में स्थानीय विधायक संजीव आर्य एक समस्या रखते हैं। वे कहते हैं, ‘हमारी कई सड़कें स्वीकृत हैं। धन भी उपलब्ध है। लेकिन उनकी विधानसभा के साथ ही पूरे प्रदेश में सड़कों के बदले किये जाने वाले प्रतिपूरक वृक्षारोपण के लिए वन भूमि उपलब्ध नहीं है। अलबत्ता प्रदेश में सिविल सोयम की काफी भूमि निरुपयोगी पड़ी है। मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि वे वन भूमि की जगह सिविल सोयम की भूमि पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण कराने की अनुमति प्रदान करने हेतु कुछ करें।’ उनके बाद मुख्यमंत्री का आधा भाषण 20 रुपए में बनने वाली एक ऐसी करिश्माई बोतल पर चलता है, जिसका रिस्पना नदी की सफाई में प्रयोग किया जा रहा है, और जिसे हर घर में तैयार किया जा सकता है और इससे हर कहीं गंदगी से पटे नालों को ‘खुशबूदार’ बनाया जा सकता है। यह अलग बात है कि वह करिश्माई बोतल आज तक कहीं नजर नहीं आई। अलबत्ता वे विधायक की बात पर कहते हैं, ‘मैं घोषणाएं नहीं करता हूं। लेकिन विधायक जी कह रहे हैं तो यहां-वहां से, सड़कों के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपए देने की घोषणा करता हूं।’ यानी विधायक आर्य की वन-सिविल सोयम भूमि की बात कहीं हवा में ही उड़ गयी, अथवा उनकी समझ में ही नहीं आयी।
यह ठीक है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की छवि आमतौर पर शालीन राजनीतिज्ञ की मानी जाती है। वे हरीश रावत की तरह, केवल कुछ चुनिंदा चाटुकारों से घिरे और उन्हें छोड़कर अन्य के खिलाफ मौका ढूंढ-ढ़ूंढकर जहर उगलने वाले अधिक वाचाल व तिकड़मी राजनीतिज्ञ नहीं हैं, जो घर के भीतर उगाये जाने वाले पवित्र हरेले को कुछ सौ रुपए के ईनाम के लिए गांव के चौराहे पर सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए लाने और वह मामूली इनाम भी सबको न पहुंचा पाने जैसी योजनाएं लाते हैं। कभी रिक्शे-नाव में सफर करने तथा बाजार में पकोड़े खाने, काफल पार्टी करने के साथ ही आंखों पर दूरबीन लगाकर केदारनाथ जाने व भजन-कीर्तन करने में भी शुद्ध नौटंकी करते हैं। वहीं करीब छः महीने के कार्यकाल के बाद भी त्रिवेन्द्र रावत सरकार के काम तो धरातल पर कुछ दिखाई नहीं दे रहे हैं, अलबत्ता मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत हरीश रावत की तरह ही हमेशा ‘प्लेन’ से नहीं कभी आम आदमी की तरह ‘ट्रेन’ से भी सफर कर लेते हैं। सुबह देहरादून से हल्द्वानी आते हैं, और दिन भर काम निपटाकर शाम तक लौट जाते हैं। लेकिन राज्य और राज्य की जनता के हितों के मोर्चे पर बरती जाने वाली संवेदनशीलता के मोर्चे पर वे कहीं से भी वे अपनी सरकार के कार्यों की तरह हरीश रावत से श्रेष्ठ नहीं दीखते। (नवीन जोशी, , 28 जून 2018)

पूर्व आलेख : उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 : फिर रावत की, पर ‘डबल इंजन’ सरकार

आखिर 17 की किशोर वय और चौथी विधानसभा में ही उत्तराखंड को 9वां (बदलते हुए 10वां) मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के रूप में मिलना तय हो गया है। पिछले सीएम हरीश रावत का ‘फिर रावत सरकार’ का नारा भी एक अर्थ में ‘त्रिवेन्द्र रावत’ की सरकार आने के साथ सही साबित हुआ है। लिहाजा, प्रदेश में लगातार दूसरी बार ‘रावत सरकार’ ही होगी, अलबत्ता दुआ करनी होगी कि यह वाली रावत सरकार पिछली (हरीश रावत वाली) रावत सरकार जैसी ‘राज्य को काट-पीट कर खा जाओ’ और ‘सब कुछ अपनी जेब में भरो’ वाली नहीं होगी, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वादे के अनुरूप ‘डबल इंजन’ वाली सरकार होगी। मालूम हो कि राज्य में भाजपा ने उत्तराखंड में करिश्माई प्रदर्शन करते हुए 70 में से 57 सीटें हासिल की हैं, जबकि पिछले बार 2012 में उससे एक सीट अधिक जीतने वाली कांग्रेस 11 सीट पर आकर सिमट गयी है।

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