नवीन समाचार, नैनीताल, 28 जून 2026 (Private Schools to Refund Excess Fees)। नैनीताल (Nainital) जनपद में निजी विद्यालयों (Private Schools) की शुल्क व्यवस्था पर जिला प्रशासन ने बड़ा और प्रभावी हस्तक्षेप किया है। अभिभावकों से विभिन्न नामों पर अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद नैनीताल के जिलाधिकारी (District Magistrate) ललित मोहन रयाल (Lalit Mohan Rayal) ने कड़ा रुख अपनाया है। अब निजी विद्यालयों को अनाधिकृत रूप से वसूली गयी अतिरिक्त धनराशि अभिभावकों को लौटानी अथवा आगामी शुल्क में समायोजित करनी होगी। आदेशों के उल्लंघन पर लाखों रुपये के आर्थिक दंड सहित मान्यता और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) निरस्त होने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी (Chief Education Officer) गोविन्द राम जायसवाल (Govind Ram Jaiswal) ने जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद जनपद के सभी निजी विद्यालयों के लिए शुल्क निर्धारण एवं वसूली संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब अभिभावक लंबे समय से प्रवेश शुल्क, विकास शुल्क, परीक्षा शुल्क तथा अन्य मदों में कथित मनमानी वसूली की शिकायतें कर रहे थे।
किन शुल्कों पर लगी रोक और क्या बदलेंगे नियम ?
शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार अब प्रवेश शुल्क केवल वास्तविक और औचित्यपूर्ण व्यय के आधार पर ही लिया जा सकेगा। शिक्षण शुल्क और परीक्षा शुल्क के अतिरिक्त अन्य सभी शुल्कों को समायोजित कर केवल विकास शुल्क के रूप में निर्धारित किया जाएगा। विकास शुल्क को न्यूनतम रखना होगा और इसके लिए अभिभावक-शिक्षक संघ (Parent Teacher Association-PTA) की स्वीकृति अनिवार्य होगी।
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि विकास शुल्क के अतिरिक्त किसी अन्य नाम से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा बोर्ड संबद्धता के लिए जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र की शर्तों के अनुसार तीन वर्षों में अधिकतम 10 प्रतिशत शुल्क वृद्धि ही की जा सकेगी और इसके लिए भी पीटीए की सहमति आवश्यक होगी।
परीक्षा शुल्क पर भी सीमा तय, टीसी अब केवल एक रुपये में
आदेश में परीक्षा शुल्क को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गये हैं। विद्यालय पूरे शैक्षणिक सत्र में केवल चार मासिक परीक्षाएं, एक अर्द्धवार्षिक और एक वार्षिक परीक्षा ही आयोजित कर सकेंगे। बोर्ड कक्षाओं में अधिकतम एक अथवा दो प्री-बोर्ड परीक्षाएं कराने की अनुमति होगी।
परीक्षा शुल्क प्रश्नपत्र, उत्तर पुस्तिका और अन्य आवश्यक सामग्री की वास्तविक लागत के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। किसी भी स्थिति में उच्चतम कक्षा के लिए परीक्षा शुल्क 600 रुपये से अधिक नहीं लिया जा सकेगा। वहीं स्थानांतरण प्रमाणपत्र (Transfer Certificate-TC) शुल्क केवल एक रुपया निर्धारित किया गया है।
अभिभावकों को मिली बड़ी राहत, एकमुश्त शुल्क जमा कराने की बाध्यता समाप्त
नए निर्देशों के अनुसार विद्यालयों को शुल्क भुगतान के लिए मासिक, त्रैमासिक, छमाही और वार्षिक विकल्प उपलब्ध कराने होंगे। किसी भी अभिभावक को एकमुश्त शुल्क जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। प्रत्येक भुगतान की रसीद देना भी अनिवार्य होगा।
सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में अतिरिक्त रूप से वसूली गयी धनराशि का समायोजन आगामी एक जुलाई के शिक्षण शुल्क में किया जाएगा। यदि अतिरिक्त वसूली गयी राशि जुलाई शुल्क से अधिक होगी तो शेष धनराशि आगामी महीनों के शुल्क में समायोजित करनी होगी। सभी विद्यालयों को सात दिन के भीतर समायोजन का प्रमाणित विवरण शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराना होगा।
नियम तोड़ने वाले विद्यालयों पर होगी कड़ी कार्रवाई
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा है कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right to Education Act-RTE) के अंतर्गत एक लाख रुपये तक तथा सीबीएसई (CBSE) उपविधियों के अनुसार पांच लाख रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त विद्यालय की मान्यता समाप्त करने, अनापत्ति प्रमाण पत्र निरस्त करने तथा अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकती है। प्रशासन की इस पहल को जनपद में निजी विद्यालयों की शुल्क व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और अभिभावकों के हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
