ग्रैंड मुफ्ती ने कहा-‘महिलाएं घर के अंदर रहें, बाहर निकलने पर होगी तबाही’,सीएम धामी ने मनुस्मृति पर प्रश्न उठाने वाले राहुल गांधी को ललकारा…

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नवीन समाचार, देहरादून, 3 सितंबर 2026 (CM Dhami Ask Rahaul Gandhi on Mufti)। उत्तराखंड (UTTARAKHAND) की राजधानी देहरादून (DEHRADUN) से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर अहमद (Grand Mufti Sheikh Abubakr Ahmad) के महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित रखने संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने इस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक बताते हुए मनुस्मृति पर प्रश्न उठाने वाले कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं। मामला महिलाओं की स्वतंत्रता (Women Freedom), सम्मान और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी से जुड़ा होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की बात करने वाले लोगों को इस तरह के बयान पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल में कांग्रेस के शासन के दौरान महिलाओं को घर तक सीमित रखने संबंधी बयान सामने आने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। धामी ने इसे महिलाओं के सम्मान, स्वतंत्रता और अधिकारों के प्रति कांग्रेस की सोच से जोड़ते हुए राहुल गांधी से जवाब मांगा है। उन्होंने x पर लिखा है :

“पितृसत्ता की वकालत और महिला अधिकारों का ढोंग करने वाले राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस के शासन में केरलम में महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित रखने संबंधी ग्रैंड मुफ्ती का बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है। इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि ऐसे बयान के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यह साफ दिखाता है कि कांग्रेस की महिलाओं के सम्मान, स्वतंत्रता और अधिकारों को लेकर वास्तविक सोच किस स्तर तक गिर चुकी है।

वहीं, आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में हमारी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर देने के लिए लगातार काम कर रही है। आज देश की बेटियां शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, सेना, खेल और राजनीति सहित हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।”

कोच्चि के सम्मेलन में महिलाओं को लेकर दिया गया बयान

CM Dhami Ask Rahaul Gandhi on Mufti केरल में ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर अहमद के महिलाओं को लेकर दिए गए बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। कोच्चि में आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने ...प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बकर अहमद, जिन्हें कंतापुरम एपी अबू बकर मुसलियार (Kanthapuram AP Abubakr Musliyar) के नाम से भी जाना जाता है, ने केरल के कोच्चि (Kochi, Kerala) में आयोजित हुब्बुल रसूल सम्मेलन (Hubbul Rasool Conference) के दौरान महिलाओं की भूमिका और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी को लेकर टिप्पणी की थी।

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उनके बयान के अनुसार महिलाओं को घर के अंदर रहना चाहिए और उन्हें सार्वजनिक जीवन में बाहर नहीं आना चाहिए। उन्होंने महिलाओं की तुलना सोने के हार से करते हुए कहा कि जिस प्रकार सोने के गहने को सुरक्षित रखने के लिए डिब्बे या अलमारी में रखा जाता है, उसी प्रकार महिलाओं को घर के अंदर रखने की बात उनकी सुरक्षा और सम्मान के संदर्भ में कही गई है।

ग्रैंड मुफ्ती ने यह भी कहा कि महिलाओं को घर तक सीमित रखने की बात उन्हें छोटा दिखाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और गरिमा से जोड़कर कही गई है। हालांकि, इस टिप्पणी के सामने आने के बाद महिला स्वतंत्रता और समान अधिकारों को लेकर व्यापक विवाद शुरू हो गया।

मुख्यमंत्री धामी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ग्रैंड मुफ्ती के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की चुप्पी पर सवाल उठाए। धामी ने कहा कि पितृसत्ता की वकालत और महिला अधिकारों की बात करने वालों को इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित रखने संबंधी बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है। उनके अनुसार इस तरह के बयान के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होना भी चिंता का विषय है।

धामी ने अपने बयान में कांग्रेस नेताओं द्वारा सनातन धर्म (Sanatan Dharma), मनुस्मृति और अन्य धार्मिक विषयों पर की गई पूर्व टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस को महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर भी स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

महिलाओं की तुलना सोने के गहने से करने पर बढ़ा विवाद

ग्रैंड मुफ्ती के बयान में महिलाओं की तुलना सोने के हार से किए जाने को लेकर भी आलोचना हो रही है। उनके कथन के अनुसार यदि कोई कीमती सोने का हार खुले स्थान पर रखा जाए तो लोग उसे छू सकते हैं, जबकि उसे सुरक्षित डिब्बे या अलमारी में रखा जाता है।

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इसी तुलना को महिलाओं के संदर्भ में इस्तेमाल किए जाने के बाद सामाजिक संगठनों और महिला अधिकारों के पक्षधर लोगों के बीच बहस तेज हो गई। आलोचकों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान का आधार उन्हें सार्वजनिक जीवन से दूर रखना नहीं, बल्कि सुरक्षित और समान अवसर वाला सामाजिक वातावरण होना चाहिए।

मुस्लिम संगठनों और धर्मगुरुओं के बीच भी अलग-अलग राय

ग्रैंड मुफ्ती के बयान को लेकर मुस्लिम समुदाय और विभिन्न धर्मगुरुओं के बीच भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Personal Law Board-AIMPLB) से जुड़े पक्षों की ओर से इस तरह की व्याख्या पर असहमति जताई गई है।

बोर्ड से जुड़े प्रवक्ताओं का कहना है कि इस्लाम महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने या आवश्यक कार्यों के लिए घर से बाहर निकलने से नहीं रोकता। महिलाओं की सार्वजनिक जीवन में भागीदारी और धार्मिक शिक्षाओं की व्याख्या को लेकर भी अलग-अलग मत सामने आए हैं।

राजनीतिक बयान से राष्ट्रीय बहस तक पहुंचा मामला

ग्रैंड मुफ्ती का बयान अब केवल धार्मिक टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि राजनीतिक बहस का भी विषय बन गया है। मुख्यमंत्री धामी की प्रतिक्रिया के बाद कांग्रेस और राहुल गांधी की चुप्पी को लेकर भाजपा की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।

महिलाओं की स्वतंत्रता, शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में समान भागीदारी के मुद्दे से जुड़े इस विवाद पर आने वाले दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण रहेंगी। यह मामला एक बार फिर इस प्रश्न को केंद्र में लेकर आया है कि आधुनिक लोकतांत्रिक समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए उन्हें सीमित करने के बजाय समान अवसर और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना कितना आवश्यक है।

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